कश्मीर मुद्दा 50 साल में पहली बार संयुक्त राष्ट्र में उठा: इमरान ख़ान

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भारत प्रशासित कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को हुई अनौपचारिक बैठक को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बड़ा क़दम बताया है.

उन्होंने इस बैठक का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे अरसे बाद ऐसा हुआ है जब संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा हुई.

उन्होंने ट्वीट करके लिखा है, "मैं कब्ज़े वाले जम्मू और कश्मीर की गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक का स्वागत करता हूं. 50 सालों मे यह पहली बार हुआ है जब दुनिया के सर्वोच्च कूटनीतिक मंच ने यह मुद्दा उठाया है."

इसके साथ ही इमरान ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर पर 11 प्रस्ताव हैं और शुक्रवार को हुई बैठक इन्हीं को समर्थन देती है.

वह लिखते हैं, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 11 प्रस्ताव हैं जो कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को दोहराते हैं."

"संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग इन्हीं प्रस्तावों को दोहराती है. इसलिए कश्मीर के लोगों की पीड़ा को दूर करने और इस विवाद को हल करने की ज़िम्मेदारी इसी वैश्विक संस्था पर है."

क्या हुआ था बैठक में

पाकिस्तान के पत्र के बाद बुलाई गई यह बैठक बंद कमरे में हुई. भारत और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य नहीं हैं ऐसे में वे इसमें शामिल नहीं हुए.

जब बैठक ख़त्म हुई तो संयुक्त राष्ट्र में भारत, चीन और पाकिस्तान के राजदूतों ने पत्रकारों से बात की. उस दौरान पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने भी वही कहा था, जो अब इमरान ख़ान ने ट्वीट करके लिखा है.

मलीहा ने कहा था, "कई दशकों के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह मुद्दा उठा है और इस मंच पर उठने के बाद यह साबित हो गया है कि यह भारत का आंतरिक नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मामला है."

उधर संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने अनुच्छेद 370 को आंतरिक मुद्दा बताते हुए कहा था कि भारत सरकार का हालिया फ़ैसला वहां की आर्थिक, सामाजिक विकास के लिए है.

वहीं संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन ने बैठक को लेकर जानकारी देते हुए कहा था कि यूएनएससी की सदस्य देश भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर भी चिंतित हैं.

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