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मुजफ़्फ़रनगर दंगा: गैंगरेप और दंगे के अभियुक्त भी बरी- प्रेस रिव्यू
इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़ास रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ़्फ़रनगर दंगे की जांच में ख़ामियों के चलते न सिर्फ़ हत्या के मामलों में अभियुक्तों को रिहा कर दिया गया बल्कि रेप और दंगा भड़काने के मामलों में भी ऐसा ही हुआ है.
अख़बार लिखता है कि गैंगरेप के कुछ मामलों में समय से चिकित्सकीय जांच नहीं हुई. एक मामले में तीन महीने बाद जांच हुई, लेकिन पुलिस और डॉक्टर से इस संबंध में कोई सवाल नहीं किए गए. कई मामलों में गवाह अपने बयान से पलट गए जिनमें पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.
गैंगरेप के चार और दंगा भड़काने के 26 मामलों में ठीक से जांच न होने के चलते 168 लोग छूट गए.
इससे पहले अख़बार ने ख़बर दी थी कि मुजफ़्फ़रनगर दंगे में हत्या के 41 में से 40 मामलों में अभियुक्त बरी हो गए हैं. इन मामलों में भी जांच संबंधी ख़ामियां पाई गई थीं. साल 2013 में हुए दंगे में 65 लोग मारे गए थे.
पाकिस्तान ने बंद किए 20 चरमपंथी शिविर
इंडियन एक्सप्रेस में ही एक और ख़बर है कि इस साल अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) में ब्लैकलिस्ट किए जाने के डर से पाकिस्तान ने इस साल पीओके (पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर) में 20 चरमपंथी शिविरों को बंद किया है.
इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन गर्मियों में एलओसी पर घुसपैठ और सीमा पार कार्रवाई का कोई मामला नहीं देखा गया है. इससे पहले एफ़एटीएफ़ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था. ब्लैकलिस्ट होने के बाद पाकिस्तान पर कई आर्थिक प्रतिबंध लग सकते हैं.
'शरणार्थियों की राजधानी नहीं बन सकता देश'
हिंदुस्तान अख़बार के मुताबिक शुक्रवार को एनआरसी पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भारत दुनिया के शरणार्थियों की राजधानी नहीं बन सकता.
केंद्र ने कोर्ट से असम में बन रही एनआरसी लिस्ट को अंतिम रूप देने के लिए निर्धारित 31 जुलाई की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की है.
कोर्ट में केंद्र और असम सरकार ने एनआरसी में गलत तरीके से नाम शामिल और बाहर करने का आरोप लगाया है. साथ ही नमूने के तौर पर 20 प्रतिशत नामों का सत्यापन कराने की मांग की.
इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने संज्ञान लेते हुए 23 जुलाई को मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है.
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