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BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए
उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और बदलते मौसम का आनंद उठा रहे होंगे.
हम जानते हैं कि रोज़मर्रा की आपा-धापी के बीच आपके लिए देश-दुनिया की हर ख़बर पर नज़र रखना मुश्किल होता होगा.
ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.
सऊदी अरब के बाद रूस ने भी लिया यह फ़ैसला, क्या होगा असर?
सऊदी अरब और रूस के फ़ैसले का असर भारत पर सीधा पड़ सकता है.
सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने जुलाई महीने में 10 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का उत्पादन घटाने का फ़ैसला किया है जो कि अगस्त तक जारी रहेगा.
सऊदी अरब की सरकारी न्यूज़ एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) ने बताया है कि अगस्त में उसका तेल उत्पादन प्रतिदिन 90 लाख बैरल प्रतिदिन होगा.
वहीं, सऊदी अरब को देखते हुए रूस ने भी अगस्त में प्रतिदिन पांच लाख बैरल तेल निर्यात कम करने का फ़ैसला किया है.
सऊदी अरब और रूस के फ़ैसले के बाद कच्चे तेल के दामों में 1.6 फ़ीसदी का उछाल आया है और एक बैरल कच्चे तेल की क़ीमत 76.60 डॉलर तक पहुंच गई है.
सऊदी अरब और रूस के फ़ैसले का तेल के दामों पर और भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर जानें, यहां.
मज़दूर की बेटी उमा छेत्री को महबूब आलम ने यूं निखारा
असम के गोलाघाट ज़िले का एक बेहद छोटा-सा गाँव कानदुलीमारी रविवार के बाद अचानक सुर्खियों में आ गया है.
यहाँ आने वाले लोगों में असम सरकार के वरिष्ठ मंत्री अतुल बोरा से लेकर कई वीआईपी लोग शामिल हैं. इससे पहले गाँव वालों ने इतनी भीड़ और वीआईपी लोगों को यहाँ आते कभी नहीं देखा था.
बीसीसीआई ने रविवार को बांग्लादेश के साथ आगामी तीन मैचों की टी-20 और एकदिवसीय श्रृंखला के लिए जिस भारतीय टीम की घोषणा की है, उसमें इस गांव की उमा छेत्री भी शामिल हैं.
भारत की सीनियर महिला टीम में जगह बनाने वाली उमा असम की पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं.
उमा के संघर्ष से भरे सफ़र की कहानी उनके गाँव को जाने वाली कच्ची सड़क ही बयां कर देती है.
बाढ़ के समय यह पूरी सड़क पानी में डूब जाती है और फिर यहाँ कोई आना-जाना नहीं कर सकता.
21 साल की उमा ने इन्हीं असुविधाओं का सामना कर राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में जगह बनाई है. उमा छेत्री की ये प्रेरणादायक दायक इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ें.
कारगिल विशेषः परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडे की दिलेरी की कहानी
गोरखा रेजिमेंटल सेंटर के ट्रेनीज़ को बताया जाता है कि आमने-सामने की लड़ाई में खुखरी सबसे कारगर हथियार है. उन्हें इससे इंसान की गर्दन काटने की भी ट्रेनिंग दी जाती है.
डेढ़ साल के अंदर अंदर मनोज के भीतर जान लेने की झिझक क़रीब क़रीब जाती रही थी. अब वो हमले की योजना बनाने, हमला करने और अचानक घात लगा कर दुश्मन की जान लेने की कला में पारंगत हो चुके थे.
उन्होंने कड़ाके की ठंड में भी बरफ़ से ढके पहाड़ों पर साढ़े चार किलो के 'बैक पैक' के साथ चढ़ने में महारत हासिल कर ली थी. उस 'बैक पैक' में उनका स्लीपिंग बैग, एक अतिरिक्त ऊनी मोज़ा, शेविंग किट और घर से आए ख़त रखे रहते थे.
जब भूख लगती थी तो वो कड़ी हो चुकी बासी पूड़ियों पर हाथ साफ़ करते थे. ठंड से बचने के लिए वो ऊनी मोज़ों को दस्ताने के रूप में इस्तेमाल करते थे.
मनोज ने हमेशा आगे बढ़ कर अपने सैनिकों का नेतृत्व किया और दो महीने तक चले ऑपरेशन में कुकरथाँग, जूबरटॉप जैसी कई चोटियों पर दोबारा कब्ज़ा कर लिया.
फिर उन्हें खालोबार चोटी पर कब्ज़ा करने का लक्ष्य दिया गया. इस पूरे मिशन का नेतृत्व सौंपा गया कर्नल ललित राय को. कैप्टन मनोज पांडे की दिलेरी की पूरी कहानी यहां.
शादी से जुड़े अधिकार और प्रताड़ना के सवाल पर क्या कहते हैं क़ानून
16 जून को कर्नाटक हाई कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि हिंदू मैरिज एक्ट के मुताबिक़, शादीशुदा जोड़े के बीच सेक्स नहीं होना, तलाक़ का आधार तो हो सकता है. मगर, इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) के तहत इसे क्रूरता नहीं माना जाएगा.
भारतीय क़ानून हो या फिर अदालतों के फ़ैसले, दोनों के हिसाब से कोई शादी जारी रहने में पति-पत्नी के बीच सेक्स का होना अहम माना जाता है.
बहुत से विशेषज्ञ ये मानते हैं कि इस क़ानूनी प्रावधान का इस्तेमाल मर्द अधिक करते हैं, क्योंकि, आम तौर पर ये माना जाता है कि शादीशुदा ज़िंदगी में पति को यौन सुख देना, पत्नी का धर्म होता है.
सेक्स संबंध के दूसरे पहलू, जैसे कि शादीशुदा रिश्ते में ज़बरदस्ती या मैरिटल रेप के अपवाद भी इस सोच को बढ़ावा देते हैं कि शादी के बाद महिलाओं को पति के साथ यौन संबंध बनाने की ज़िम्मेदारी पूरी करनी चाहिए.
इस मामले में अदालतों ने क्या क्या कहा है और क़ानून में क्या अधिकार हैं, पढ़ें यहां.
अजीत अगरकर: लॉर्ड्स में शतक, सबसे तेज़ अर्धशतक और अब चयन समिति की ज़िम्मेदारी
बात बीस साल पहले की है. भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप खेलने के बाद जोहानिसबर्ग से वापस देश लौट रही थी. एयर इंडिया के उस स्पेशल जंबो जेट में मैं भी था. वर्ल्ड कप कवर करने के बाद टीम के साथ ही वापसी थी.
तब अजीत अगरकर की ज़िंदगी में बहुत कुछ चल रहा होगा. दूसरे धर्म में शादी, बच्चा और करियर के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद के बीच उस समय उनके मन में एक मलाल भी रहा होगा मगर शिकन चेहरे पर नहीं आ रही थी. अगरकर के उस कश्मकश की चर्चा आगे करेंगे.
45 साल के अजीत अगरकर को उसी धीरज और अविवादित रहने का पुरस्कार मिला है. चेतन शर्मा के इस्तीफ़े के बाद से (पिछले पांच महीनों से) मुख्य चयनकर्ता का पद खाली था.
चेतन का कार्यकाल विवादों से भरा रहा. एक स्टिंग ऑपरेशन में चेतन ने दावा किया था कि खिलाड़ी कई बार अपनी चोट छुपाते हैं. उन्हें डर होता है कि एक बार टीम से बाहर हुए तो दूसरे खिलाड़ी उनकी जगह पर क़ब्ज़ा कर लेंगे.
अब अगरकर के अलावा शिव सुंदर दास, सलिल अंकोला, सुब्रतो बनर्जी और एस शरथ चयन समिति में शामिल हैं.
अजीत एंड कंपनी की पहली ज़िम्मेदारी वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ तीन अगस्त से शुरू होने वाले पांच टी20 मैचों के लिए टीम का चयन करना है. अजीत अगरकर से जुड़े किस्से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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