पाकिस्तान के मुफ़्ती का क्रिप्टोकरेंसी के ख़िलाफ़ फ़तवा, इस एक वजह से बताया हराम

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- Author, तनवीर मलिक
- पदनाम, पत्रकार, बीबीसी उर्दू के लिए
- प्रकाशित
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पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों को क़ानूनी दायरे में लाने की कोशिशों के बीच इस क्षेत्र की शरई हैसियत को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
प्रमुख धार्मिक विद्वान मुफ़्ती तक़ी उस्मानी और अन्य उलेमा से जुड़े दारुल उलूम कराची के एक फ़तवे में क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए ख़रीदारी को हराम बताया गया है.
इसका आधार यह है कि क्रिप्टोकरेंसी शरियत में माल या दौलत की परिभाषा पर खरी नहीं उतरती.
ये फ़तवा ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान सरकार डिजिटल संपत्तियों के लिए नियम बनाने और इस क्षेत्र को रेगुलेट करने के लिए पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी बना चुकी है.
तक़ी उस्मानी के बयान के बाद पीवीएआरए (पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी) के चेयरमैन बिलाल बिन साक़िब ने उनसे मुलाक़ात की. उनके मुताबिक़ इस दौरान डिजिटल संपत्तियों की शरई (इस्लामी क़ानून) हैसियत पर चर्चा हुई.
अब सवाल यह है कि इस फ़तवे का पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल, कारोबार और निवेश पर क्या असर पड़ सकता है? बीबीसी ने इस बारे में वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों से बात की है.

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किस आधार पर हराम घोषित किया गया?
मुफ़्ती तक़ी उस्मानी की ओर से क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए ख़रीदारी को हराम बताए जाने के पीछे दारुल उलूम कराची का वही फ़तवा है, जिस पर उनके अलावा पांच अन्य उलेमा के भी हस्ताक्षर हैं.
दारुल उलूम कराची को भेजे गए एक सवाल में पूछा गया था कि क्या डिजिटल या क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए ऑनलाइन किताबों की ख़रीदारी जायज़ है?
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मुफ़्ती तक़ी उस्मानी और पांच अन्य उलेमा के हस्ताक्षरों से जारी फ़तवे में क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए ख़रीदारी को हराम बताते हुए कहा गया है कि इसकी वजह वह शोध है, जिसके मुताबिक़ क्रिप्टोकरेंसी वेल्थ यानी माल की परिभाषा पर खरी नहीं उतरती.
फ़तवे में कहा गया है कि शरियत के सिद्धांतों के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी माल (वेल्थ) नहीं है, बल्कि सिर्फ़ खातों में दर्ज काल्पनिक नंबरों का रिकॉर्ड है.
इस फ़तवे पर बात करते हुए अर्थशास्त्री और सिटीबैंक में इमर्जिंग मार्केट इनवेस्टमेंट्स के पूर्व प्रमुख यूसुफ़ नज़र का कहना है कि "मुफ़्ती तक़ी उस्मानी का क्रिप्टोकरेंसी को वेल्थ की परिभाषा में शामिल न करना एक ग़लतफ़हमी पर आधारित है."
उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को दुनिया की किसी भी बड़ी मुद्रा, जैसे डॉलर, पाउंड, यूरो आदि में आसानी से बदला जा सकता है.
यूसुफ़ नज़र का कहना है कि जिस तरह सोना एक एसेट है और उसे बेचकर कोई भी मुद्रा हासिल की जा सकती है, उसी तरह क्रिप्टोकरेंसी को भी बड़ी मुद्राओं में बदला जा सकता है.
उनका कहना है कि क्रिप्टो को "दौलत न मानने की मुख्य वजह इस क्षेत्र के बारे में जानकारी की कमी और सही समझ का अभाव है."

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मुफ़्ती से अथॉरिटी का संपर्क
मुफ़्ती तक़ी उस्मानी की ओर से क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए ख़रीदारी को हराम बताए जाने के बाद पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के चेयरमैन बिलाल बिन साक़िब ने उनसे मुलाक़ात की और डिजिटल संपत्तियों की शरई हैसियत पर चर्चा की.
बिलाल बिन साक़िब ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि डिजिटल संपत्तियों और उनकी शरई हैसियत के बारे में मुफ़्ती तक़ी उस्मानी के साथ रचनात्मक बैठक हुई, जिसमें अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की गई.
उन्होंने कहा कि हमारे बीच इस बात पर सहमति है कि पाकिस्तानी नागरिकों को वित्तीय धोखाधड़ी, शोषण और संभावित आर्थिक नुक़सान से सुरक्षित रखा जाना चाहिए.
बिलाल बिन साक़िब ने कहा कि बातचीत में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि ब्लॉकचेन, डिजिटल संपत्तियां, स्टेबलकॉइन और वास्तविक दुनिया की संपत्तियों का टोकनाइज़ेशन अलग-अलग तरह की तकनीकों और उपयोगों वाला क्षेत्र है. इसलिए इन्हें एक ही नज़रिए से देखने के बजाय तकनीकी और शरई, दोनों पहलुओं से सावधानी और व्यापक तरीक़े से परखा जाना चाहिए.
बयान के मुताबिक़, चूंकि ये क्षेत्र तेज़ी से विकसित हो रहा है, इसलिए उम्मीद है कि भविष्य में उलेमा, रेगुलेटर्स और इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के बीच बातचीत जारी रहेगी, ताकि पाकिस्तान की नीति इस्लामी सिद्धांतों और आधुनिक तकनीक, दोनों को ध्यान में रखकर बनाई जा सके.

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फ़तवे से क्रिप्टोकरेंसी बिज़नेस पर पड़ेगा असर?
पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी का कारोबार कई वर्षों से अनौपचारिक रूप से हो रहा था. सरकार ने इसे क़ानूनी दायरे में लाने के लिए पहले पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल बनाई और उसके बाद पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना की.
पिछले साल बीबीसी उर्दू से बातचीत में बिलाल बिन साक़िब ने बताया था कि दो करोड़ से अधिक पाकिस्तानी क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार से जुड़े हुए हैं और कुछ साल पहले क्रिप्टोकरेंसी में 20 अरब डॉलर तक के लेनदेन हुए थे.
यूसुफ़ नज़र का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी से पाकिस्तान को विदेश से आने वाली धनराशि में काफ़ी मदद मिल सकती है. इसके ज़रिए न सिर्फ़ विदेश से पाकिस्तान पैसे भेजने की लागत कम होगी, बल्कि रक़म पहले से कहीं तेज़ी से भी पहुंचेगी.
उन्होंने बताया कि बैंक के ज़रिए पैसा भेजने में तीन से चार दिन लग जाते हैं, जबकि क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए इसका निपटान सिर्फ़ कुछ घंटों में हो जाता है. उनका मानना है कि इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए.
यूसुफ़ नज़र के मुताबिक़, "सरकार इस दिशा में काम कर रही है और फ़तवों के ज़रिए इस काम में रुकावट नहीं डालनी चाहिए."
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ राशिद मसूद आलम ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि पूरी दुनिया शेयर बाज़ार, मुद्रा और कमोडिटी में ट्रेडिंग कर रही है, जबकि क्रिप्टोकरेंसी अपेक्षाकृत नया क्षेत्र है.
उनका कहना है कि यह किसी देश की आधिकारिक मुद्रा नहीं है, लेकिन लोग इसमें कारोबार कर रहे हैं और इसमें बड़ी संख्या में पाकिस्तानी भी शामिल हैं.
उन्होंने कहा, "अब तक पाकिस्तानी अनौपचारिक क्षेत्र में काम कर रहे थे, लेकिन जब सरकार इसे रेगुलेट कर रही है, तो अब इसकी अनुमति भी देनी होगी, ताकि लोगों का काम चलता रहे."
करेंसी एक्सचेंज एसोसिएशन ऑफ़ पाकिस्तान के महासचिव ज़फ़र पराचा के अनुसार, इस समय लोग क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और ट्रेडिंग कर रहे हैं. उनके मुताबिक़ इसके साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी में फ्यूचर्स ट्रेडिंग भी होती है.
ज़फ़र पराचा कहते हैं, "इस फ़तवे के आने से कुछ हद तक लोगों के कारोबार पर असर पड़ सकता है, क्योंकि पाकिस्तान एक धार्मिक समाज है और यहां लोग धार्मिक उलेमा के फैसलों का पालन करते हैं."
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया क्रिप्टोकरेंसी में काम कर रही है और पाकिस्तान भी उससे जुड़ा हुआ है. "ऐसे फ़तवे से निश्चित रूप से कुछ हद तक कारोबार प्रभावित हो सकता है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.























