कई रेलवे स्टेशनों के पानी से हो सकता है डायरिया और फ़ूड पॉइज़निंग, सीएजी रिपोर्ट से क्या आया सामने

कैग ने जिन रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया है, उनमें से 89 फ़ीसदी में एक या इससे ज़्यादा बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं

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नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने देश के जिन 512 रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया है, उनमें से 89 फ़ीसदी स्टेशन एक या ज़्यादा बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़, कई बड़े और करोड़ों रुपये कमाने वाले स्टेशन भी पीने के पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेल्टर और विकलांग लोगों की सुविधाओं जैसी बुनियादी चीज़ों में पीछे हैं.

रिपोर्ट में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है. कई स्टेशनों पर पानी की नियमित जांच नहीं हुई.

कुछ जगहों पर पानी में क्लोरीन का स्तर निर्धारित मानकों से कम या ज़्यादा पाया गया.

कई स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया भी पाए गए, जिससे लोगों की तबीयत ख़राब हो सकती है.

ई-कोलाई के कुछ संक्रमणों से डायरिया, फ़ूड पॉयजनिंग जैसी बीमारियां हो सकती हैं. कुछ मामलों में किडनी भी ख़राब हो सकती है

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने देशभर के 16 रेलवे ज़ोनों के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया है.

जांच में पाया गया कि इनमें से 458 स्टेशन यानी 89 फ़ीसदी से ज़्यादा स्टेशन एक या उससे अधिक न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं (एमईए) में कमी वाले निकले.

रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 54 स्टेशन ही ऐसे थे जहां इन सुविधाओं में कोई कमी नहीं पाई गई.

रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में निर्देश दिया था कि सभी स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं. लेकिन सात साल बाद भी यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका.

बड़े स्टेशनों का भी बुरा हाल

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन

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इमेज कैप्शन, रिपोर्ट के मुताबिक़ नई दिल्ली समेत देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि नई दिल्ली, हावड़ा, मुंबई सेंट्रल, सीएसएमटी, अहमदाबाद, चेन्नई सेंट्रल और सिकंदराबाद जैसे देश के प्रमुख रेलवे स्टेशन भी ज़रूरी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं.

जांच में पाया गया कि कई बड़े स्टेशनों पर पीने के पानी के नल कम हैं. साफ़-सफ़ाई की सुविधाओं (मूत्रालय और शौचालय) की कमी है. पर्याप्त पंखे और कूलर नहीं हैं और कई जगह साइन बोर्डों की कमी है.

रेलवे के लिए करोड़ों रुपये की कमाई करने वाले टॉप-10 स्टेशनों में भी बुनियादी सुविधाओं की कमी दर्ज की गई. यह स्थिति तब है जब इन स्टेशनों पर रोज़ाना लाखों यात्री आते-जाते हैं.

पीने का पानी ख़राब

सांकेतिक तस्वीर

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इमेज कैप्शन, सीएजी ने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए रेलवे को अपनी व्यवस्था और म़जबूत करनी होगी (सांकेतिक तस्वीर)
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रिपोर्ट में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है. कई स्टेशनों पर पानी की नियमित जांच नहीं हुई.

सीएजी ने कहा कि यात्रियों को सुरक्षित पेयजल मुहैया कराने के लिए रेलवे को अपनी व्यवस्था और मज़बूत करनी होगी.

रिपोर्ट के मुताबिक़, दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला और पूर्व रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों में ई. कोलाई पाया गया.

ई.कोलाई वही बैक्टीरिया है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2017 में 'सुपरबग' की श्रेणी में रखा था. ये खाने पीने की चीज़ों में पाया जाता है.

सुपरबग का मतलब ऐसे घातक बैक्टीरिया से है, जिन पर एंटी-बायोटिक दवाओं का भी ख़ास असर नहीं होता. इस सूची में सबसे ऊपर ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया ई.कोलाई का नाम था.

ऑडिट के दौरान 512 स्टेशनों में से 138 स्टेशनों पर पीने के पानी के नलों की कमी मिली.

111 स्टेशनों पर मूत्रालय और 59 स्टेशनों पर शौचालय निर्धारित मानकों से कम पाए गए.

21 स्टेशनों पर तो प्रतीक्षालय तक नहीं था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई जगहों पर यात्रियों को पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध नहीं है, जबकि रेलवे ने पहले दावा किया था कि सभी स्टेशनों पर पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी गई है.

बारिश और धूप में परेशान यात्री

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इमेज कैप्शन, सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक़ 379 स्टेशनों पर जहां जनरल डिब्बे रुकते हैं वहां यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त शेड नहीं थे

सीएजी की रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म शेल्टर की कमी भी गंभीर मुद्दे के रूप में सामने आई है.

65 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म शेल्टर निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं पाए गए.

वहीं 379 स्टेशनों पर जहां जनरल डिब्बे रुकते हैं वहां यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त शेड नहीं थे.

रिपोर्ट के मुताबिक़ 247 स्टेशनों पर फुट ओवर ब्रिज़ और प्लेटफॉर्म शेल्टर के बीच ढका हुआ रास्ता नहीं था, जिससे यात्रियों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है.

विकलांग यात्रियों के लिए हालात और ख़राब हैं.

रेलवे लगातार विकलांगों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की बात करता है, लेकिन सीएजी की रिपोर्ट कुछ और ही कहती है.

512 स्टेशनों में से 227 स्टेशनों पर रैंप की कमी मिली. 297 स्टेशनों पर विकलांग यात्रियों के लिए पानी का सही नल नहीं था. 134 स्टेशनों पर विकलांगों के मुताबिक़ शौचालय नहीं मिले.

इतना ही नहीं, 490 स्टेशनों पर विकलांग यात्रियों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था नहीं थी.

कई बड़े स्टेशनों पर ब्रेल साइनेज, मदद केंद्र और टेक्टाइल पाथ जैसी सुविधाओं का भी अभाव मिला.

रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं.

जांच में सामने आया कि 512 में से 441 स्टेशनों पर न तो इमरजेंसी मेडिकल रूम मौजूद था और न ही एम्स की सिफारिशों के अनुरूप मेडिकल बॉक्स उपलब्ध थे.

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में यह यात्रियों की जान के लिए ख़तरा बन सकता है.

सफ़ाई पर ख़र्च फिर भी गंदगी कायम

रेलवे स्टेशन

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इमेज कैप्शन, रिपोर्ट के मुताबिक़ जिन स्टेशनों का ऑडिट किया गया उनमें से 77 पर प्लेटफॉर्म गंदे मिले, 128 स्टेशनों पर पानी के बूथ गंदे हालत में पाए गए.

रेलवे हर साल सफ़ाई पर करोड़ों रुपये ख़र्च करता है, लेकिन रिपोर्ट में स्टेशनों की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई.

77 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म गंदे मिले, 128 स्टेशनों पर पानी के बूथ गंदे हालत में पाए गए और 165 स्टेशनों पर शौचालयों की हालत तो बेहद ख़राब थी.

301 स्टेशनों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी दर्ज की गई. 243 स्टेशनों पर पान और गुटखे के दाग मिले, जबकि 21 स्टेशनों पर खुले में शौच जैसी समस्याएं भी सामने आईं.

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि रेलवे के पास धन की कमी नहीं थी, लेकिन योजनाओं को लागू करने में गंभीर खामियां रहीं.

यात्री सुविधाओं के लिए 2019-20 से 2023-24 के दौरान आवंटित बजट का 36 से 44 फ़ीसदी तक हिस्सा खर्च ही नहीं किया जा सका.

पांच वर्षों में करीब 5956 करोड़ रुपये की राशि उपयोग नहीं हो पाई.

वहीं 395 यात्री सुविधा परियोजनाओं की समीक्षा में पाया गया कि 59 फ़ीसदी काम तय समय से देरी से पूरे हुए. कुछ परियोजनाएं तीन से चार साल तक लटकी रहीं.

सीएजी की सिफ़ारिशें

कैग रिपोर्ट

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इमेज कैप्शन, सीएजी रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों की हालत सुधारने के लिए कुछ सिफ़ारिशें भी की गई हैं

रिपोर्ट में रेलवे को सभी स्टेशनों पर तय समयसीमा में न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की सिफ़ारिश की गई है.

साथ ही विकलांगों के लिए सुविधाएं बेहतर करने को कहा गया है.

साफ़-सफ़ाई और कचरा प्रबंधन में सुधार लाने, पेयजल की नियमित जांच सुनिश्चित करने और निगरानी और जवाबदेही तंत्र को मज़बूत करने की सिफारिश की गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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