पाकिस्तान में 125 साल पुराने गुरुद्वारे के एक हिस्से को ढहाने का मामला: भारत ने की कार्रवाई की मांग, बताई गई ये वजह

ऐतिहासिक गुरुद्वारा

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में 125 साल पुराने गुरुद्वारा सिंह सभा के एक हिस्से को गिराने पर सिख संगठनों ने विरोध जताया है
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक स्थानीय कारोबारी ने करीब 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे के एक हिस्से को गिरा दिया, जिसके बाद अल्पसंख्यक सिख समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया.

ये गुरुद्वारा लाहौर के पास फ़ारूकाबाद में स्थित है. भारत ने बुधवार को इस घटना की कड़ी निंदा की.

इस मामले पर भारत की आपत्ति के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में गुरुवार को इस मुद्दे से जुड़े सवाल का जवाब दिया.

उन्होंने कहा, "यह एक गुरुद्वारा था. लेकिन इसका इस्तेमाल अब नहीं होता क्योंकि इलाक़े में सिख समुदाय की कोई आबादी नहीं है, जो धार्मिक मक़सद से इसका इस्तेमाल करे. यह संपत्ति निजी किरायेदारों के हाथ में है. यह काफ़ी पुराना ढांचा था और जर्जर हो चुका था. इसके आसपास रहने वालों को डर था कि आने वाले बरसात के मौसम में यह इमारत गिर सकती है."

उन्होंने आगे कहा, "ऐसी एक घटना लाहौर में हो चुकी है. इसलिए सुरक्षा के मद्देनज़र यहां रहने वाले किरायेदारों ने गुरुद्वारे के सात में से दो हिस्सों में 24 जून को काम शुरू किया. मैं यह ज़रूर कहूंगा कि इसके लिए इवैकुई प्रॉपर्टी ट्रस्ट बोर्ड (ईपीटीबी) की अनुमति नहीं ली गई और यह ईपीटीबी के प्रावधानों का उल्लंघन है."

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

ताहिर अंद्राबी

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान ने गुरुद्वारे को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी, लेकिन भारत पर भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया

ताहिर अंद्राबी ने बताया, "बोर्ड ने इसके ख़िलाफ़ फ़ौरन कदम उठाया और इस तरह के अनधिकृत काम को उसी दिन यानी 24 जून को रोक दिया. इसमें इमारत के कुछ हिस्सों को नुक़सान हुआ है लेकिन मुख्य इमारत सुरक्षित है. इसके साथ ही किरायेदारों को इमारत खाली करने का निर्देश दिया गया है और उनके साथ लीज़ रद्द कर दी गई है."

उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जिस हिस्से को नुक़सान हुआ है उसकी मरम्मत की संभावना देखी जाएगी.

हालांकि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत की आपत्ति पर कहा कि 'जिस देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ व्यवस्थित तरीके से भेदभाव होता हो, उसकी आपत्ति एक विडंबना है.'

इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे 'एक सम्मानित सिख धार्मिक स्थल के ख़िलाफ़ बेहद निंदनीय और सुनियोजित तोड़फोड़ की घटना' बताया.

भारत ने इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग की है. विदेश मंत्रालय के अलावा सिख संस्थाओं ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है.

पाकिस्तान के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को इस घटना के बारे में बताया, "कारोबारी ने संबंधित विभाग से ज़रूरी एनओसी लिए बिना गुरुद्वारे को गिरा दिया. विभाग ने इस मामले पर तब ध्यान दिया, जब तक इलाक़े के सिख समुदाय ने विरोध नहीं किया."

पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि इलाक़े में सिख समुदाय के विरोध प्रदर्शन के बाद पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ ने इस मामले का संज्ञान लिया.

बुधवार को पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने फ़ारूकाबाद स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा का दौरा किया और इसके तत्काल पुनर्निर्माण की घोषणा की.

पाकिस्तान के मंत्री ने क्या बताया?

रमेश सिंह अरोड़ा, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री

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इमेज कैप्शन, रमेश सिंह अरोड़ा, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री
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पीटीआई के अनुसार पाकिस्तान के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने शेखूपुरा के डिप्टी कमिश्नर, सहायक आयुक्त इमरान अली हारल, नगर समिति के मुख्य अधिकारी, औकाफ़ विभाग (वक्फ़ और धार्मिक मामलों का विभाग) के अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ घटनास्थल का दौरा किया और स्थानीय सिख समुदाय की शिकायतें भी सुनीं.

मीडिया से बातचीत में अरोड़ा ने कहा कि औकाफ़ विभाग की शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय कारोबारी ने संबंधित विभाग से एनओसी लिए बिना गुरुद्वारे को गिरा दिया.

उन्होंने कहा, "पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ ने साफ़ कर दिया है कि सरकार हर हालत में अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है."

मंत्री ने कहा कि शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि यह संपत्ति औकाफ़ भूमि के रूप में पंजीकृत नहीं थी. उन्होंने कहा, "मैंने खुद मौके का निरीक्षण किया है और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट पेश करें."

उन्होंने कहा, "गुरुद्वारा सिंह सभा के पुनर्निर्माण का काम तुरंत शुरू किया जाएगा."

इस बीच, घटनास्थल के आसपास कारोबार करने वाले स्थानीय व्यापारियों ने पुनर्निर्माण योजना पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह परिसर करीब 80 साल से खाली पड़ा था. इस दौरान कई परिवार वहां बस गए और कई दुकानें भी खोली गईं.

पीटीआई के मुताबिक़ व्यापारियों ने कहा कि पुनर्निर्माण की वजह से दर्जनों परिवार प्रभावित हो सकते हैं.

उन्होंने सरकार से मांग की कि अगर लोगों को हटाना ज़रूरी हो जाए, तो प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक आवास और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएं.

विदेश मंत्रालय ने कहा, 'तोड़फोड़ सुनियोजित'

रणधीर जायसवाल

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिराए जाने और पाकिस्तान प्रशासन की 'निष्क्रियता' की ख़बरों पर गहरी चिंता ज़ाहिर की.

जायसवाल ने एक बयान में कहा, "हमने पाकिस्तान के फ़ारूकाबाद में स्थित 125 साल पुराने पवित्र और ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को गिराए जाने से जुड़ी बेहद दुखद खबरें देखी हैं. इसके ध्वस्त किए जाने के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन या इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने की खबरें भी गंभीर चिंता का विषय हैं."

भारत ने पाकिस्तान सरकार से इस घटना की तुरंत जांच कराने और ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की.

बयान में कहा गया, "हम पाकिस्तान सरकार से आग्रह करते हैं कि वह इस मामले की शीघ्र जांच करे और इस निंदनीय कृत्य के जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाए."

विदेश मंत्रालय ने ऐतिहासिक गुरुद्वारे के गिराए गए हिस्सों की तत्काल बहाली और पुनर्निर्माण की भी मांग की.

सिखों संगठनों ने जताया विरोध

जगदीप सिंह कहलों

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) ने बुधवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब की इमारत को गिराने की कोशिश के मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाक़ात की.

कमेटी ने इस घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की और पाकिस्तान में गुरुद्वारों और सिख समुदाय की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की.

डीएसजीएमसी के महासचिव जगदीप सिंह कहलों ने कहा, "पाकिस्तान में एक गुरुद्वारे की इमारत को गिराया जाना शुरू किया गया था, इमारत को काफ़ी नुकसान पहुँचाया गया. जब विरोध हुआ तो पाकिस्तान पुलिस ने गिराने का काम रुकवा दिया."

"हमें लगातार फ़ोन आ रहे थे. हमने विदेश मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी से मुलाक़ात की और उन्हें बताया कि गुरुद्वारे को नुकसान पहुँचाया गया है और उस पर कब्ज़ा करने की कोशिश की गई है. और इससे सिखों की भावनाएं आहत हुई हैं. उन्होंने कहा कि ये मुद्दा पाकिस्तान के साथ उठाया जाएगा."

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने भी इस घटना की निंदा की है.

गुरुवार को एक बयान जारी कर उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों की ज़िम्मेदारी है. जिस तरह हम भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कर रहे हैं, उसी तरह पाकिस्तान में सिख समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना पाकिस्तान सरकार की ज़िम्मेदारी है. हम इस तरह की घटनाओं की निंदा करते हैं."

क्या है फ़ारूकाबाद गुरुद्वारे का इतिहास

यह गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा से जुड़ा है

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इमेज कैप्शन, यह गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा से जुड़ा है, जिसे 125 साल पहले बनाया गया था

फ़ारूकाबाद का यह गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा से जुड़ा है. श्री गुरु सिंह सभा की शुरुआत 19वीं सदी के आख़िर में हुई थी. अनुमान है कि यह गुरुद्वारा करीब 125 साल पहले बनाया गया था.

सिंह सभा आंदोलन को सिख इतिहास के सबसे प्रभावशाली सुधार आंदोलनों में से एक माना जाता है.

1870 के दशक में शुरू हुए सिंह सभा आंदोलन का मक़सद तेजी से बदलते राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक माहौल के बीच सिख पहचान को फिर से मजबूत करना था.

पाकिस्तान के फ़ारूकाबाद को पहले चूहड़ खाना के नाम से जाना जाता था. ऐसा माना जाता है कि इसकी स्थापना महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में सरदार चूहड़ सिंह ने की थी.

पाकिस्तान बनने के बाद इसका नाम बदलकर फ़ारूकाबाद कर दिया गया.

बंटवारे के बाद लाखों लोग विस्थापित हुए थे और अधिकतर सिख परिवार मौजूदा पाकिस्तान से भारत आ गए.

इसके बाद पाकिस्तान के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे उपेक्षित हो गए और उनकी हालत ख़राब होती गई. इनमें से कई गुरुद्वारे पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के प्रबंधन में आए.

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