वियतनाम क्यों बनता जा रहा है भारतीय पर्यटकों की पसंद?

    • Author, अमरेंद्र यार्लागड्डा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

हाल के कुछ वर्षों में वियतनाम भारतीय पर्यटकों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हुआ है.

कम ख़र्च, आसान ई-वीज़ा, भारत से सीधी उड़ानें और समुद्र तटों से लेकर ऐतिहासिक शहरों तक फैले पर्यटन स्थलों ने बड़ी संख्या में भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित किया है.

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2019 की तुलना में 2024 तक वियतनाम जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या चार गुना से अधिक बढ़ गई, जिससे यह भारतीयों के पसंदीदा विदेशी पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया है.

वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया का एक देश है. एक ओर इसका लंबा समुद्री तट है, तो दूसरी ओर घने जंगल हैं. लगभग 10 करोड़ की आबादी वाला यह देश करीब 3.32 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. क्षेत्रफ़ल के हिसाब से यह राजस्थान (3.42 लाख वर्ग किलोमीटर) से भी छोटा है.

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वियतनाम के समुद्र तट इसकी सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल हैं. देश के कई हिस्सों में हरियाली नज़र आती है. यहां कई पर्यटन स्थल हैं, इनमें हनोई, हो ची मिन्ह सिटी और दा नांग प्रमुख पर्यटन केंद्र माने जाते हैं.

पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग कहते हैं कि इस देश में भारतीय पर्यटकों की संख्या बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं.

हैदराबाद स्थित इमाद ट्रैवल्स के निदेशक हामिद अली ने बीबीसी से कहा, "भारतीय नई जगहों पर जाना पसंद करते हैं, वियतनाम बहुत कम ख़र्च वाला पर्यटन स्थल बन गया है."

वियतनाम जाने वाले भारतीय चार गुना बढ़े

टूर ऑपरेटरों का कहना है कि पहले लोग सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया और दुबई जैसे देशों की यात्रा करते थे. अब पर्यटक नए पर्यटन स्थलों की ओर भी रुख़ कर रहे हैं.

इसी वजह से कम ख़र्च में घूमने के लिए वियतनाम एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है.

पिछले साल अगस्त में प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने बताया था कि 2019 की तुलना में 2024 तक वियतनाम जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी हुई.

ये आँकड़े केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में पेश किए थे.

रिपोर्ट के मुताबिक़, 2019 की तुलना में 2024 में वियतनाम जाने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या चार गुना बढ़ गई.

दूसरे देशों में जाने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या में या तो मामूली वृद्धि हुई है या फिर कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. लेकिन वियतनाम जाने वाले यात्रियों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

पीआईबी के अनुसार, 2019 में करीब 94 हज़ार भारतीय नागरिकों ने वियतनाम का दौरा किया था. 2024 तक यह संख्या बढ़कर 3.98 लाख से ज़्यादा हो गई.

इसी दौरान यूएई, सऊदी अरब, अमेरिका, थाईलैंड और सिंगापुर जाने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या में सीमित बढ़ोतरी देखने को मिली.

रिपोर्ट के अनुसार, मलेशिया, ब्रिटेन, ओमान, कुवैत और चीन जाने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या में गिरावट दर्ज़ की गई है.

कोविड के बाद सुविधाएं बढ़ाने से वियतनाम को लाभ मिला

इमाद ट्रैवल्स के निदेशक हामिद अली ने बताया कि कोविड-19 से पहले भारतीय पर्यटक ज़्यादातर दुबई, थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों की यात्रा करते थे. लेकिन महामारी के बाद पर्यटकों की सोच में बदलाव आया है.

उन्होंने कहा, "भारतीय पर्यटक 1990 के दशक से बड़ी संख्या में विदेश यात्राएँ कर रहे हैं. वे सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया के बाली जैसे स्थानों पर एक या कई बार जा चुके हैं."

"इसी वजह से अब लोगों का रुझान वियतनाम जैसे नए देशों की ओर बढ़ रहा है."

हामिद अली ने कहा, "मैंने कोविड से पहले वियतनाम का दौरा किया था. उस समय वहाँ पर्यटकों के लिए ज़्यादा सुविधाएँ नहीं थीं, लेकिन कोविड के बाद वहाँ की सरकार ने पर्यटन सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विकास किया है. अब वह पर्यटन क्षेत्र को काफ़ी महत्व दिया जा रहा है."

उन्होंने बताया, "वियतनाम में बाना हिल्स, हनोई और फू क्वोक जैसे कई लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं. भारतीय मुद्रा में 60 हज़ार से 80 हज़ार रुपये के भीतर यात्रा पैकेज उपलब्ध हैं. सही योजना बनाकर यात्रा की जाए, तो बाली और सिंगापुर की तुलना में कम ख़र्च में वियतनाम की यात्रा पूरी की जा सकती है."

दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों की तुलना में वियतनाम में पर्यटकों का रोज़ाना का ख़र्च 40 से 60 फ़ीसदी तक कम होता है.

कंपनी का कहना है कि 2026 में वियतनाम जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या और बढ़ी है. साल के पहले दो महीनों में ही 1.58 लाख भारतीय पर्यटकों ने वियतनाम का दौरा किया.

उन्होंने बताया, "वियतनाम ने अपनी ई-वीज़ा नीति को काफ़ी सरल बना दिया है. पहले मल्टीपल एंट्री वीज़ा मिलने में 7 से 10 दिन लग जाते थे. अब भारतीयों को 24 से 48 घंटे के भीतर वीज़ा मिल रहा है."

कंपनी ने कहा, "वियतनाम अमीर पर्यटकों और बार-बार आने वाले यात्रियों के लिए लंबी अवधि के वीज़ा की संभावना पर भी विचार कर रहा है."

वियतनाम जाने वाले भारतीय पर्यटक ई-वीज़ा, वीज़ा-ऑन-अराइवल या वियतनाम दूतावास से वीज़ा स्टिकर की सुविधा ले सकते हैं.

वियतनाम सरकार ने सिंगल एंट्री वीज़ा की फ़ीस 25 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,390 रुपये) तय की है. मल्टीपल एंट्री वीज़ा के लिए 50 अमेरिकी डॉलर (लगभग 4,784 रुपये) फ़ीस निर्धारित है.

इसके अलावा, वियतनाम सरकार 90 दिनों की वैधता वाला ई-वीज़ा भी जारी करती है.

बाली नहीं वियतनाम जा रहे भारतीय

हामिद अली ने कहा, "भारत में समुद्र तटों पर घूमने के लिए गोवा प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता था. विदेश यात्रा के लिए लोग थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों को चुनते थे. अब भारतीयों का रुझान वियतनाम की ओर बढ़ रहा है."

भारतीय रुपये की तुलना में वियतनामी डोंग की क़ीमत भी काफ़ी कम है.

पर्यटकों का कहना है कि हवाई यात्रा के ख़र्च को छोड़ दें, तो वियतनाम में रोज़मर्रा के ख़र्च काफ़ी कम हैं.

हैदराबाद के एम. रमेश ने बताया, "हम पिछले साल वियतनाम गए थे. भारतीय मुद्रा में 2,000 रुपये से कम में अच्छे होटल मिल जाते हैं. खाने-पीने और स्थानीय यात्रा का ख़र्च भी ज़्यादा नहीं है. अगर हवाई टिकट पहले से बुक कर लिए जाएँ, तो कम बजट में वियतनाम की यात्रा पूरी की जा सकती है."

भारत से वियतनाम की सीधी उड़ानें

वियतनाम पहुंचने के लिए भारत के प्रमुख शहरों से सीधी उड़ान सेवाएँ उपलब्ध हैं.

भारत के अलग-अलग शहरों से वियतनाम पहुंचने में लगभग 3 से 5 घंटे का समय लगता है. हालांकि यह अवधि उस शहर के साथ बदल सकती है जहां से आप यात्रा शुरू करना चाहते हैं.

हैदराबाद से वियतनाम करीब साढ़े चार घंटे में पहुंचा जा सकता है.

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, अहमदाबाद और बेंगलुरु समेत कई शहरों से हर सप्ताह लगभग 90 सीधी उड़ानें वियतनाम के हनोई और हो ची मिन्ह सिटी के लिए संचालित होती हैं.

वियतनाम भारतीय नागरिकों को ई-वीज़ा की सुविधा भी देता है. टूर ऑपरेटरों का कहना है कि इसका प्रोसेस भी काफ़ी तेज़ी से पूरा हो जाता है.

हामिद अली ने कहा, "सिंगापुर के वीज़ा को लेकर कुछ दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी ओर, दुबई जैसे देश वीज़ा के मामले में काफ़ी सुविधाजनक हैं, लेकिन जून से अगस्त और सितंबर तक वहाँ बहुत ज़्यादा गर्मी रहती है."

उन्होंने कहा, "जो लोग बैंकॉक के अलावा किसी नए समुद्र तटीय पर्यटन स्थल पर छुट्टियाँ बिताना चाहते हैं, उनके लिए वियतनाम एक पसंदीदा गंतव्य बन गया है."

बता दें कि भारत और वियतनाम के बीच 1972 से पूर्ण राजनयिक संबंध हैं. वियतनाम में स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंध और मज़बूत हुए हैं.

दूतावास के अनुसार, वियतनाम में क़रीब 8,000 भारतीय रहते हैं. वे आईटी, होटल, खनन, योग संस्थानों, नागरिक उड्डयन उपक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं.

भारत और वियतनाम के बीच व्यापार, संस्कृति, शिक्षा, रक्षा और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग जारी है.

वियतनाम पर्यटन के सामने सुरक्षा की चुनौती

हाल में वियतनाम में हुई एक नौका दुर्घटना में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत ने पर्यटन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

हादसे का शिकार हुए सभी लोग एक कॉरपोरेट बिज़नेस ट्रिप के तहत वियतनाम गए थे. भारतीय दूतावास के अनुसार, मृतकों में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के निवासी शामिल थे.

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब वियतनाम भारतीय पर्यटकों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि देश में पर्यटन गतिविधियों, विशेषकर बोटिंग और समुद्री पर्यटन, के दौरान सुरक्षा मानकों के सख़्ती से पालन की ज़रूरत है.

हादसे के बाद वियतनाम सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं. उप प्रधानमंत्री फाम जिया डुक के अनुसार, प्रभावित लोगों के लिए राहत उपाय शुरू किए गए हैं और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच कराई जा रही है.

तेज़ी से बढ़ते पर्यटन के बीच पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वियतनाम के पर्यटन क्षेत्र के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती बनकर उभरा है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.