पाकिस्तान: स्वात घूमने गए पूर्व नेवी अफ़सर परिवार के साथ डूबे, चश्मदीदों ने सुनाई दर्दनाक कहानी

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- Author, मोहम्मद ज़ुबैर
- पदनाम, पत्रकार
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
"पानी का बहाव बहुत तेज़ था और नाव में सवार लोग डरे हुए थे, इसलिए वे रेस्क्यू बोट में नहीं कूदे. परिवार के मुखिया ने एक बार कूदने की कोशिश की, लेकिन फिर वे अपने बच्चों के पास लौट गए."
"इसके बाद जो कुछ हुआ, उसे वहां मौजूद कई अन्य लोगों ने भी देखा. परिवार के मुखिया ने पानी के तेज़ बहाव के बीच अपने सभी बच्चों को बचाने की कोशिश की और उन्हें अपनी बाहों में भर लिया."
सैफ़ुल्लाह झील के किनारे मौजूद एक रेस्तरां के मालिक साद क़रीम ने कुछ इन्हीं शब्दों में 1 जुलाई को हुई घटना के बारे में बताया.
साद ने पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में स्वात के पास झील में एक नाव को डूबते हुए देखा, जिसमें लाहौर के एक परिवार के छह सदस्यों की मौत हो गई.
पाकिस्तानी नौसेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कमांडर आमिर उंदल की सबसे बड़ी बेटी अमेरिका से छुट्टियां मनाने पाकिस्तान आई थीं. छुट्टियां मनाने के बाद उंदल परिवार ने स्वात जाने का फ़ैसला किया ताकि पूरा परिवार एक साथ कुछ अच्छा समय बिता सके.
परिवार का कहना है कि किसी को भी इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि इस यात्रा का अंजाम इतना बुरा हो सकता है.
1 जुलाई को, लाहौर निवासी आमिर उंदल अपने परिवार के साथ महोदंद क्षेत्र के सैफ़ुल्लाह झील में नाव पर सवार थे, तभी नाव पलट गई. इस हादसे में परिवार के छह सदस्यों की मौत हो गई.
इनमें पूर्व लेफ्टिनेंट कमांडर आमिर उंदल, उनके 20 वर्षीय बेटे अब्दुल्ला उंदल, दो बेटियां फ़रवा उंदल (27) और रविल उंदल (23) शामिल हैं. फ़रवा उंदल के दो छोटे बच्चे भी मृतकों में शामिल हैं.
आमिर उंदल की तीसरी बेटी बुशरा अभी भी लापता हैं और बचावकर्मी उनकी तलाश में जुटे हुए हैं.
इस परिवार के छह सदस्यों का अंतिम संस्कार गुरुवार शाम को लाहौर में किया गया.
चश्मदीदों और परिवार के सदस्यों के अनुसार, हादसे के वक़्त सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कमांडर आमिर उंदल ने अपने बच्चों को बचाने की कोशिश की और इसमें उनकी भी जान चली गई.
एफ़आईआर में क्या कहा गया है?

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स्वात में हुई इस घटना के संबंध में कनान लियाकत की शिकायत पर कलाम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है.
हादसे से जुड़ी एफ़आईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने यह दावा किया है कि उसके चाचा आमिर उंदल अपने परिवार के साथ स्वात में पर्यटक स्थलों की सैर और मनोरंजन के लिए आए थे, जहां उन्होंने पाकिस्तान नौसेना के विश्राम गृह जलबिंदर में रात बिताई और फिर महोदंद क्षेत्र में सैफ़ुल्लाह झील घूमने के लिए गए.
शिकायत के मुताबिक़, शाम को उन्हें पाकिस्तानी नौसेना कार्यालय से सूचना मिली कि उनके चाचा और उनका परिवार सैफ़ुल्लाह झील में एक हादसे का शिकार हो गया है और सभी पीड़ितों को कलाम अस्पताल ले जाया जा रहा है.
एफ़आईआर में आगे कहा गया है कि पूछताछ करने पर पता चला कि आमिर उंदल अपने परिवार के साथ झील की सैर के लिए नाव पर सवार हुए थे.
पुलिस में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नाव का इंजन ख़राब था और यात्रियों को इसी हालत में नाव में बिठा दिया गया था. बाद में इंजन को चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन वह चालू नहीं हो सका और चालक की कथित लापरवाही के कारण नाव पलट गई.
स्वात पुलिस के अनुसार, अभियुक्तों को गिरफ़्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है और घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है.
दूसरी ओर स्वात की रेस्क्यू टीम का कहना है कि लापता महिला बुशरा की तलाश के लिए तलाशी अभियान अभी भी जारी है.
'बच्चों को अपनी बाहों में जकड़ लिया'

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चश्मदीद साद क़रीम के मुताबिक़, "सैफ़ुल्लाह झील में आमतौर पर यात्रियों को नावों में किनारे पर बिठाया जाता है और फिर नाव को गहरे पानी की ओर धकेला जाता है और कुछ दूरी तय करने के बाद नाव का इंजन चालू किया जाता है."
उनका कहना है कि हादसे का शिकार हुई नाव के साथ भी ऐसा ही किया जा रहा था, लेकिन जब नाव अपेक्षाकृत गहरे पानी में पहुंची, तो चालक इंजन चालू नहीं कर पाया.
साद के मुताबिक़, "बहाव के कारण नाव जल्द ही उस जगह पर पहुँच गई जहाँ झील का पानी इशो नदी में मिल जाता है. वहाँ पानी का बहाव बहुत तेज़ है और वहीं पर नाव डूब गई."
साद ने बताया, उन हालात को देखते हुए, नाव चालक ने भी मदद के लिए पुकार लगाई, जिसके बाद एक और नाव मदद के लिए रवाना भी हो गई.
उनका कहना है, "हम यह सब किनारे से देख रहे थे. जैसे ही चालक ने मदद के लिए पुकारा, मैंने भी एक और नाव ली और पानी में उतर गया, और मुझसे पहले ही एक और नाव उनके नाव तक पहुँच चुकी थी."
साद क़रीम के मुताबिक़, जैसे ही बचाव नौका हादसे का शिकार नाव के पास पहुंची, नाव पर सवार लोगों को तुरंत रेस्क्यू बोट में कूदने के लिए कहा गया.
"इस समय, प्रभावित नाव का चालक ख़ुद कूद गया और रेस्क्यू बोट तक पहुंच गया, लेकिन मेहमान, ज़ाहिर तौर पर पानी के तेज़ बहाव के डर से कूदने में असमर्थ रहे."
उनका कहना है, "वे डरे हुए थे और कूद नहीं रहे थे. परिवार के मुखिया ने तो एक बार कूदने की कोशिश भी की, लेकिन फिर वापस मुड़कर अपने बच्चों को बचाने की कोशिश करने लगे."

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साद का कहना है, "इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसे वहां मौजूद कई लोगों ने भी देखा. उन्होंने अपने सभी बच्चों को अपने साथ इकट्ठा किया और अपनी बाहों में भर लिया."
रेस्तरां मालिक के मुताबिक़, "फिर एक मिनट से भी कम समय में नाव डूब गई और उसमें सवार सभी लोग उसके साथ डूब गए."
साद क़रीम ने बताया, इन दृश्यों को देखकर कुछ स्थानीय लोग उन्हें बचाने की कोशिश में पानी में कूद गए, लेकिन सब कुछ इतनी तेज़ी से हुआ कि किसी को कुछ करने का मौक़ा ही नहीं मिला.
"यह पूरी घटना एक मिनट से भी कम समय में घटित हुई. उस एक मिनट के भीतर, नाव और उस पर सवार लोग पानी में समा गए."
सैफु़ल्लाह झील पर नाव चलाने वाले एक अन्य चश्मदीद, मुस्तफ़ा ख़ान ने भी घटना का लगभग ऐसा ही वर्णन किया.
उनके मुताबिक़ "जब नाव डूब रही थी तो ऐसा लग रहा था मानो परिवार का मुखिया अपने बच्चों को हर संभव तरीके से बचाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन उस समय पानी का बहाव बहुत तेज़ था और कोई कुछ नहीं कर सका."
'ख़ुशी के लिए बनाई योजना, लेकिन आख़िरी यात्रा साबित हुई'

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जीशान उंदल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कमांडर आमिर उंदल के भतीजे हैं.
दुर्घटना के समय वो भी अपने परिवार के साथ कलाम में पिकनिक पर मौजूद थे. उन्हें इस घटना की जानकारी पाकिस्तानी नौसेना ने दी.
जीशान उंदल का कहना है कि सूचना मिलते ही वह तुरंत कलाम अस्पताल पहुंचे.
उन्होंने बताया, "जब मैं अस्पताल पहुंचा, तो वहां छह लोगों के शव थे, जिनमें मेरी चचेरी बहन के दो छोटे बच्चों के शव भी शामिल थे."
उनका कहना है कि अस्पताल में लोगों ने उन्हें बताया कि आमिर उंदल अपने बच्चों को बचाने की कोशिश में डूब गए थे, जबकि उन्होंने अपना पूरा जीवन समंदर में बिताया था और वे एक कुशल तैराक थे.
जीशान उंदल का कहना है कि आमिर उंदल के साथ उनका रिश्ता सिर्फ चाचा-भतीजे का नहीं था.
उनका कहना है कि इस हादसे में आमिर उंदल के अलावा उनकी विवाहित बेटी फ़रवा और उनके दो छोटे बच्चे भी मारे गए.
जबकि छुट्टियां मनाने के लिए अमेरिका से आईं आमिर की बड़ी बेटी बुशरा उंदल अभी भी लापता हैं.
जीशान उंदल के मुताबिक़, "जब इस यात्रा की योजना बनाई जा रही थी, तब मेरे चाचा ने कहा कि हम सभी को कुछ समय साथ बिताना चाहिए, क्योंकि भविष्य में क्या होगा यह कोई नहीं जानता."
उनका कहना है कि बुशरा उंदल को पहाड़ों और पानी से बहुत ज़्यादा लगाव था.
जीशान का कहना है, "जब वह अमेरिका से पाकिस्तान आ रही थीं तो उन्होंने उसी समय कहा था कि इस बार हम निश्चित रूप से स्वात जाएंगे."
जीशान उंदल कुछ क्षणों के लिए चुप रहते हैं, फिर धीरे से कहते हैं कि शायद परिवार के किसी भी सदस्य ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि मौज-मस्ती के लिए बनाई गई यह यात्रा उनके जीवन की आख़िरी यात्रा बन जाएगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.























