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अरबिंदो घोष कैसे ICS अधिकारी से बन गए स्वतंत्रता सेनानी और दार्शनिक?- विवेचना
अरबिंदो घोष का जन्म 15 अगस्त 1872 को कोलकाता में हुआ और उनकी शिक्षा इंग्लैंड में हुई, जहाँ उन्होंने आईसीएस परीक्षा पास की लेकिन नौकरी नहीं की.
इसके बाद बड़ौदा में रहते हुए उन्होंने भारतीय भाषाएं सीखीं और यहीं से स्वतंत्रता आंदोलन की ओर उनका झुकाव बढ़ा.
कलकत्ता में उन्होंने 'युगांतर' और 'बंदे मातरम' जैसे उग्र राष्ट्रवादी अख़बारों के ज़रिए अंग्रेज़ी हुकूमत को चुनौती दी.
अलीपुर षड्यंत्र केस में जेल जाने के बाद उनके जीवन में गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन आया.
1910 में वे पॉन्डिचेरी चले गए, राजनीति छोड़ दर्शन और अध्यात्म में लीन हुए और एक महान दार्शनिक के रूप में पहचाने गए. विवेचना में इस बार रेहान फ़ज़ल बता रहे हैं अरबिंदो घोष की कहानी.
वीडियो एडिटर: सदफ़ ख़ान
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.