स्पेन बना फ़ुटबॉल वर्ल्ड चैंपियन, अर्जेंटीना की हार की 5 अहम वजहें

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स्पेन ने फीके और कमोबेश निराशाजनक रहे वर्ल्ड कप फ़ाइनल में अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार पुरुष फुटबॉल विश्व कप का ख़िताब अपने नाम किया.
मैच का एकमात्र गोल फेरान टोरेस ने किया, उन्होंने 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही अर्जेंटीना की कड़ी चुनौती को आख़िरकार तोड़ दिया.
यूरोपीय चैंपियन स्पेन ने पूरे मुक़ाबले में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन अर्जेंटीना की तुलना में अधिक और बेहतर मौके बनाए. दूसरी ओर अर्जेंटीना का खेल काफी हद तक रक्षात्मक और मुकाबले की रफ़्तार पर ब्रेक लगाने वाला रहा.
अतिरिक्त समय शुरू होने से ठीक पहले एंज़ो फर्नांदेज को रेड कार्ड दिखाए जाने के बाद टीम 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने पर मजबूर हुई.
मैच के 106वें मिनट में फेरान टोरेस ने स्थानापन्न खिलाड़ी निको विलियम्स के हेडर को कंट्रोल करते हुए नज़दीक से जोरदार शॉट लगाया, जिसे अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज़ रोक नहीं सके.
यही गोल स्पेन को वर्ल्ड चैंपियन बनाने के लिए काफी साबित हुआ.
हालाँकि विश्लेषकों के मुताबिक बहुप्रतीक्षित फाइनल उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका.
मुक़ाबला लगातार रुकावटों और कड़े संघर्ष के कारण रोमांचक होने के बजाय थकाऊ बन गया.
मैदान के बाहर हालांकि वर्ल्ड कप का रंग-रूप पूरी तरह अलग था.
मैच से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हेलीकॉप्टरों के बेड़े के साथ न्यू जर्सी पहुंचे, जबकि वर्ल्ड कप के इतिहास के पहले हाफ-टाइम शो में शकीरा, मैडोना और जस्टिन बीबर ने प्रस्तुति दी.
इस कारण मध्यांतर सामान्य 15 मिनट की बजाय 27 मिनट का रहा.
स्पेन ने कैसा खेल दिखाया

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पहले हाफ में खेल में लय नहीं बन पाई, लेकिन स्पेन के लामिन यमाल और मिकेल ओयारज़ाबाल ने अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज की कड़ी परीक्षा ली.
मार्टिनेज ने दोनों मौकों पर शानदार बचाव किया.
स्पेन के खिलाड़ी लगातार रेफरी स्लावको विनचिच के फैसलों पर नाराज़गी जताते रहे.
विशेषकर तब, जब एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने दानी ओल्मो पर देर से टैकल किया, लेकिन उन्हें तुरंत कार्ड नहीं दिखाया गया.
मैच का पहला पीला कार्ड 40वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज़ को मिकेल ओयारज़ाबाल को गिराने पर मिला. हालांकि चोट के कारण उन्हें कुछ देर बाद मैदान छोड़ना पड़ा.
इंजरी टाइम में मुकाबला और तनावपूर्ण हो गया, जब पहले से पीला कार्ड देख चुके एंज़ो फर्नांदेज को स्पेन के डिफेंडर पाउ क्यूबार्सी पर लापरवाही भरा टैकल करने के कारण दूसरा पीला कार्ड मिला और उन्हें मैदान से बाहर भेज दिया गया.
एमिलियानो मार्टिनेज़ अर्जेंटीना के सबसे बड़े डिफेंडर साबित हुए. उन्होंने निर्धारित समय के अंतिम क्षणों में लामिन यमाल की फ्री-किक पर शानदार बचाव कर मैच को अतिरिक्त समय तक पहुंचाया.
अतिरिक्त समय में भी उन्होंने निको विलियम्स के हेडर पर बेहतरीन बचाव किया.
इसके बाद विलियम्स ने एक गोल भी किया, लेकिन स्थानापन्न खिलाड़ी मिकेल मेरिनो की ओर से निकोलस ओटामेंडी पर फाउल किए जाने के कारण उसे रद्द कर दिया गया.
अर्जेंटीना ने नॉकआउट चरण में मिस्र और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की थी, लेकिन फ़ाइनल में वह ऐसा नहीं कर सका.
स्पेन ने 1-0 की जीत के साथ दूसरी बार 16 साल बाद पुरुष वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली.
इस जीत के साथ स्पेन ने इतिहास भी रच दिया. वह एक ही समय में पुरुष और महिला फुटबॉल वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम रखने वाला दुनिया का पहला देश बन गया.
अर्जेंटीना की हार की 5 अहम वजहें

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1. लियोनेल मेसी पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भरता

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स्पेन ने फाइनल में लियोनेल मेसी को आश्चर्यजनक रूप से पूरी तरह शांत रखा. अर्जेंटीना के कप्तान, जिन्होंने फाइनल से पहले टूर्नामेंट में आठ गोल किए थे, इस मैच में गोल नहीं कर पाए.
यही नहीं अपनी चपलता से विपक्षी खिलाड़ियों को छकाने वाले मेसी की पासिंग भी उस दर्जे की नहीं रही, जिसके लिए वो जाने जाते हैं.
अगर यह महान लियोनेल मेसी के वर्ल्ड कप करियर का आखिरी मुकाबला था, तो इसका अंत मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना के खिताब गंवाने और मेसी के मैच पर प्रभाव नहीं छोड़ पाने की निराशा के साथ हुआ. टूर्नामेंट के बाकी मुक़ाबलों में मेसी का जादू छाया रहा, लेकिन फाइनल में स्पेन ने मेसी पर कड़ी निगरानी रखी. वह केवल एक शॉट ही लगा सके और वह भी गोल के निशाने पर नहीं था.
2. डिफेंसिव मोड में टीम

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मेसी को अर्जेंटीना की रणनीति से भी ज्यादा मदद नहीं मिली. टीम ने अपने आक्रामक खेल पर भरोसा करने के बजाय स्पेन के खेल को बाधित करने और उन्हें निराश करने की कोशिश की. कुछ लोगों का मानना है कि स्पेन की जीत का अंतर और बड़ा हो सकता था, क्योंकि टीम ने कई आसान मौके गंवाए. अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो 'डीबू' मार्टिनेज़ ने कई शानदार बचाव किए और अपनी टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी साबित हुए.
यह कहा जा सकता है कि अर्जेंटीना की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि उसने स्पेन के लगातार हमलों का सामना करते हुए मैच को अतिरिक्त समय तक खींच लिया. खासकर 93वें मिनट में एंज़ो फर्नांदेज़ को दूसरा पीला कार्ड मिलने के बाद 10 खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए निर्धारित समय तक बराबरी बनाए रखना आसान नहीं था.
मैच के अंतिम क्षणों में अर्जेंटीना के पास जीत छीनने का भी मौका था. जूलियानो सिमोने की अगुवाई में दो खतरनाक हमले हुए, लेकिन यदि फुटबॉल में भी किस्मत होती है, तो वह इस दिन स्पेन के साथ थी. एक मौका कॉर्नर में बदल गया, जबकि दूसरा शॉट गोलपोस्ट के ऊपर से निकल गया.
3. स्पेन के मिडफ़ील्ड का दबदबा

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पूरे टूर्नामेंट में स्पेन के मिडफ़ील्ड ने खेल की रफ़्तार को अपने मुताबिक नियंत्रित किए रखा और विरोधी टीमों को लंबे समय तक गेंद अपने पास रखने का मौका नहीं दिया. स्पेन अपने तेज़ पासिंग के लिए पहले से ही मशहूर है, लेकिन इस टूर्नामेंट में उनकी गेंद छीनने और दबाव बनाने की क्षमता भी उतनी ही प्रभावशाली रही. खिताबी मुक़ाबले में स्पेन के खिलाड़ियों ने मैदान पर अधिकांश समय तक गेंद को अपने काबू में किए रखा और अर्जेंटीना को लय हासिल नहीं करने दी.
4. एक खिलाड़ी की कमी

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दूसरे हाफ के इंजरी टाइम के तीसरे मिनट में एंज़ो फर्नांदेज़ को पाउ क्यूबार्सी पर जानबूझकर किए गए फाउल के लिए दूसरा पीला कार्ड दिखाया गया और उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा. इसके बाद अर्जेंटीना की टीम को 10 खिलाड़ियों के साथ स्पेन का मुक़ाबला करना पड़ा. 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना किसी भी टीम के लिए मुश्किल होता है, खासकर ऐसी स्पेनिश टीम के खिलाफ जिसने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक गोल खाया था. अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ में छह मिनट बीतने के बाद स्पेन ने अपनी अतिरिक्त खिलाड़ी की बढ़त का फ़ायदा उठाया और फेरान टोरेस ऐसी जगह मौजूद थे, जहां से उन्हें गेंद को गोल तक पहुँचाने में कोई दिक्कत नहीं हुई.
इसके अलावा पहले हाफ के अंत में चोट लगने के कारण मार्टिनेज को मैदान छोड़ना पड़ा. इसके बाद कोच लियोनेल स्कालोनी को अनुभवी डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी को उतारना पड़ा, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में केवल एक मैच खेलने का मौका मिला था और वह भी ग्रुप स्टेज में.
5. स्पेन ने दिखाई टीम की ताकत

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ये सही है कि स्पेन के पास किलियन एम्बाप्पे, लियोनेल मेसी या क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसे सुपरस्टार नहीं हैं, लेकिन उसके पास एक ऐसी टीम है जो एक बेहतरीन मशीन की तरह सामूहिक रूप से खेलती है.
मिकेल ओयारज़ाबाल के पांच गोल, रोड्री और पेड्री की शानदार प्लेमेकिंग, मार्क कुकुरेया का दमखम और मिकेल मेरिनो का बेंच से आकर मैदान पर शानदार प्रदर्शन करना- इस पूरी टीम में किसी एक खिलाड़ी को सबसे अलग बताना मुश्किल है. यह एक ऐसे ऑर्केस्ट्रा की तरह है, जिसमें हर खिलाड़ी अपनी भूमिका बखूबी निभाता है.
इस सफलता का बड़ा श्रेय मुख्य कोच लुइस दे ला फुएंते को भी जाता है. भले ही वह मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले कोच न हों, लेकिन उन्होंने स्पेनिश टीम को संवारा, एकजुट किया और उसे फिर से विश्व फुटबॉल के शिखर पर पहुंचाया.
दे ला फुएंते ने 2022 में स्पेन की राष्ट्रीय टीम की कमान संभाली थी. उसी साल कतर में हुए वर्ल्ड कप में स्पेन को प्री-क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के ख़िलाफ़ पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा था, जो टीम के लिए एक बड़ा झटका था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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