संसद से सड़क तक नई दिल्ली में सोमवार को क्या-क्या हुआ?

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देश की राजधानी नई दिल्ली में सोमवार का दिन काफ़ी हंगामेदार रहा.

एक ओर जहां जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का मार्च प्रस्तावित था. वहीं दूसरी ओर संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत होने जा रही थी.

जैसे जैसे दिन चढ़ता गया वैसे वैसे नई दिल्ली के जंतर-मंतर इलाक़े में मौसमी उमस के साथ-साथ भीड़ बढ़ती गई.

सुबह नौ बजे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी आगे बढ़े तो उनको सुरक्षाबलों का सामना करना पड़ा, इस दौरान आंसू गैस के गोले भी दागे गए.

दूसरी ओर संसद में मॉनसून सत्र की जैसे ही शुरुआत हुई तो लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया.

विपक्ष की मांग थी कि सदन में नीट पेपर लीक और अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के मुद्दे पर चर्चा की जाए.

लोकसभा और राज्यसभा में क्या हुआ?

लोकसभा में सदन की शुरुआत में केंद्रीय क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन बिल, 2026 पेश किया.

इसके बाद जब केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने बोलना शुरू किया तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. तेज़ हंगामे के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन को 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया.

वहीं राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि "ये लाखों स्टूडेंट्स के भविष्य का मामला है, जंतर-मंतर पर हज़ारों बच्चे वहां आए हैं और उन पर लाठीचार्ज हुआ है, सरकार उन्हें मारने की कोशिश कर रही है. सरकार उन्हें दबाने और कुचलने की कोशिश कर रही है."

इसके बाद राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दोपहर 12 बजे तक के लिए सदन को स्थगित कर दिया.

जब 12 बजे दोनों सदन दोबारा बैठे तो फिर विपक्ष ने हंगामा किया. इसके बाद सदनों को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

राहुल गांधी का आया बयान

संसद परिसर से बाहर निकलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से पत्रकारों ने प्रतिक्रिया जाननी चाहिए, लेकिन इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा.

हालांकि उन्होंने सोमवार शाम अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, "इस देश में युवा जनता बहुसंख्यक है. प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं. वो लड़के-लड़की जो दिल्ली की सड़कों पर चल रहे हैं वो अपराधी नहीं हैं. वो अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं."

"उनके अधिकार हैं कि एक ऐसा शैक्षिक ढांचा हो जो उनका सम्मान करे, एक ऐसा शैक्षिक ढांचा हो जो निष्पक्ष हो. वो जो कुछ कर रहे हैं इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. पुलिस और सरकार जो कर रही है वो घिनौना है, ऐसा बर्ताव करने का कोई तरीक़ा नहीं है."

वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष सरकार से शिक्षा नीति पर चर्चा चाहती है लेकिन वो "इस पर राज़ी नहीं है और हमारे बच्चों पर आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं, उनकी पिटाई कर रहे हैं."

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद परिसर के बाहर कहा कि "सरकार स्टूडेंट्स की चिंता नहीं कर रही है बल्कि उनको मारने का काम कर रही है. आपको परीक्षा आयोजित करनी नहीं आती है तो आप किसी और को दो."

"इस सरकार ने स्टूडेंट्स पर जो लाठीचार्ज किया ये लोकतंत्र पर हमला है. जो लोग अपनी बात रखने के लिए आते हैं, उनको ऐसा डराया जाता है तो ये लोकतंत्र नहीं है. सरकार को इस पर विचार करने के लिए हमने कई बार कहा. एक ओर बेरोज़गारी चल रही है तो दूसरी ओर परीक्षा नहीं हो पा रही है."

खड़गे ने कहा कि मॉनसून सत्र में 'चंदा चोरी' भी उनका अहम मुद्दा है.

सपा सांसदों का जंतर-मंतर तक मार्च

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने संसद के बाहर पत्रकारों से कहा कि 'सरकार में अंहकार इतना है कि वो सुनना तो दूर.. यहां तक आना भी चाहें.. तो प्रताड़ना दे रहे हैं.'

उन्होंने दावा करते हुए कहा, "पेपर लीक में जितने लोग शामिल होते हैं वो भाजपाई हैं. 20 से ज़्यादा पेपर लीक हुए हैं और कोई भी पकड़ा नहीं गया. सरकार नौकरी इसलिए नहीं दे रही है क्योंकि आरक्षण देना पड़ेगा. दुख है कि आज लाठी चली है."

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने पत्रकारों से कहा कि "जब बिना हिंसा के विरोध हो रहा हो, तो लाठीचार्ज का क्या कारण है? लाठीचार्ज बिना हिंसा का काम नहीं है. यह हिंसा का काम है. मुझे इसका लॉजिक समझ नहीं आता."

"इसी तरह यहां संसद में, हर कोई जानता है कि ये पूरे देश के ज्वलंत मुद्दे हैं. इन पर चर्चा करना लॉजिकल होगा. संसद वह जगह है जहां हम लोगों की आवाज़, लोगों की चिंताओं को सामने ला सकते हैं."

वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने पार्टी सांसद डिंपल यादव के नेतृत्व में संसद से लेकर जंतर मंतर तक मार्च किया.

डिंपल यादव ने कहा, "पूरे देश की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जहां युवा अपनी बात रखना चाहते हैं और सरकार सुनना नहीं चाहती है. सब बातचीत करना चाहते हैं लेकिन ये निष्ठुर सरकार अपने आगे किसी की चलने नहीं देना चाहती है."

इसके बाद अखिलेश यादव ने दावा किया था कि उनकी पार्टी के सांसदों को पुलिस ने थाने में बैठाकर रखा हुआ है. उन्होंने कहा कि ये सरकार का अहंकार बोल रहा है.

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने दावा किया कि सरकार ने संसद परिसर के दरवाज़ों को बंद कर दिया और वो सांसदों को बाहर नहीं जाने दे रही है ताकि वो जंतर-मंतर न पहुंच सकें.

बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?

बीजेपी सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि "नीट के मुद्दे को लेकर सरकार बहुत संवेदनशील है, नीट की परीक्षा को लेकर सरकार ने उचित कदम उठाए. भारत सरकार के लिए भारतीय छात्र के लिए क्या महत्व रखते हैं ये हमने समय-समय पर देखा है. कॉकरोच जनता पार्टी की जहां तक बात है, तो किसी भी मौक़े का फ़ायदा उठाने के लिए कुछ अवसरवादी लोग तैयार रहते हैं."

सीजेपी के संसद मार्च को लेकर कमलजीत सहरावत ने कहा, "किसी भी विषय को रखने के लिए एक उचित प्लेटफ़ॉर्म होता है और किसी भी तरह की अराजकता फैलाना उचित नहीं है."

एनडीए सरकार में सहयोगी जेडीयू के सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि "नीट पेपर लीक मामले पर सरकार ने कोई कवर अप नहीं किया और सरकार ने एग्ज़ाम कैंसल किया और उस पर कार्रवाई हुई."

"एजेंसियों के ज़रिए फ़ुलप्रूफ़ एग्ज़ाम दोबारा कराया गया. कुछ कमी रही तो उसे ठीक किया जाएगा और ये मुद्दा अब नहीं रहा है."

बीजेपी सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कहा कि "अगर कोई समस्या है तो उस पर प्रदर्शन की जगह सही ढंग से चर्चा करनी चाहिए. देश के जितने युवा हैं और एजुकेशन सिस्टम के लिए मोदी सरकार ने बहुत काम किया है. इस प्रदर्शन का कोई मतलब ही नहीं है."

"छात्रों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें बताना चाहिए कि क्या समस्याएं हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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