पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक और मत्स्य
पालन मंत्री अखिल गिरी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर की गई
टिप्पणी पर राज्य में विवाद बढ़ता जा रहा है.
तृणमूल ने इस टिप्पणी की निंदा करते
हुए खुद को इससे अलग कर लिया है. विवाद बढ़ने के बाद अकिल गिरी ने भी इसके लिए
माफ़ी मांग ली है. लेकिन भाजपा ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन तेज़ कर दिया है और
मंत्री को बर्खास्त करने की मांग उठाई है.
हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब तक
इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
विधायक गिरी ने नंदीग्राम में कहा था,
"शुभेंदु
का कहना है कि मैं सुंदर नहीं हूं. हम
किसी को उसके रूप से नहीं आंकते. हम राष्ट्रपति के पद का सम्मान करते हैं. लेकिन
हमारी राष्ट्रपति कैसी दिखती हैं?"
विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने कहा, "मेरा आशय माननीय राष्ट्रपति का अनादर करने से नहीं था. मैं केवल उन बयानों का जवाब दे रहा था जो बीजेपी नेताओं ने मुझ पर हमला करते हुए किए हैं. अगर किसी को लगता है कि मैंने राष्ट्रपति का अनादर किया है, तो मैं इस बयान के लिए माफ़ी मांगता हूं. देश के राष्ट्रपति का मैं बहुत सम्मान करता हूं."
दूसरी ओर, बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी ने रविवार को गिरी के ख़िलाफ़ नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है.
चटर्जी ने गिरी के ख़िलाफ़ आईपीसी और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अधिनियम की धाराओं के तहत तत्काल कार्रवाई की मांग की है. मालदा में भी गिरी के ख़िलाफ़ एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.
उधर, बांकुड़ा और पुरुलिया ज़िले में कई स्थानों पर आदिवासियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने रविवार को विरोध प्रदर्शन किया. आदिवासियों ने ममता बनर्जी सरकार के एक अन्य मंत्री ज्योत्सना मांडी के काफिले को बांकुड़ा में लगभग आधे घंटे तक रोक कर प्रदर्शन किया.
कांग्रेस ने भी तृणमूल नेता की टिप्पणी की निंदा की है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि राजनीति कोई सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं है. “लेकिन टीएमसी के नेताओं को यह बात कौन सिखाएगा? बंगाल में सत्ता परिवर्तन कर ही टीएमसी को सबक सिखाया जा सकता है.”