विश्व शक्तियों के साथ 2015 में हुए ईरान के परमाणु समझौते को बचाने के लिए 11 महीने से चल रही वार्ता एक बार फिर से बेनतीजा रह सकती है.
यूरोपीय संघ का कहना है कि उसे फ़िलहाल इस पर निर्णय लेने के लिए और समय चाहिए. वियना से ईरानी वार्ताकार अली बघेरी कानी भी वापस चले गए हैं.
बातचीत की ज़िम्मेदारी संभाल रहे यूरोपीय संघ के शीर्ष राजदूत एनरिक मोरा ने ट्वीट कर के ये स्पष्ट कर दिया है कि कोई एक्सपर्ट लेवल वार्ता नहीं है. न तो अब कोई औपचारिक बैठक हो रही है. उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों में वियना वार्ता को ख़त्म करने पर फ़ैसला होगा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, मोरा का ट्वीट ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार अली बघेरी के विचार-विमर्श के लिए सोमवार वियना से वापस तेहरान जाने के बाद आया है. ईरानी मीडिया में ऐसी भी रिपोर्ट आई है कि वियना वार्ता में अब विशेषज्ञ शामिल होंगे.
उधर वॉशिंगटन में, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने रिपोर्टरों से कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के साथ परमाणु समझौते के "क़रीब" आ गए हैं लेकिन अब भी कुछ "अहम मसलों" पर निर्णय लेना बाक़ी है.
अगर ये वार्ता विफल होती है तो इसके बाद पश्चिमी देश ईरान पर और कठोर प्रतिबंध लगा सकते हैं. इसके परिणमा स्वरूप यूक्रेन संकट की वजह से पहले से ही बढ़े तेल के दामों में और आग लग सकती है.
फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी की ओर से यूरोपीय वार्ताकार पहले ही इस वार्ता से अस्थायी तौर पर अलग हो चुके हैं. इनका मानना है कि उनसे जो बन सकता था वो किया और अब दोनों मुख्य पक्षों का काम है कि वो आपसी मुद्दे सुलझाएं.
हालांकि, बीते सप्ताह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने इस प्रक्रिया को ये कहते हुए और जटिल बना दिया कि अमेरिका ये गारंटी दे कि वो यूक्रेन पर हमले की वजह से रूस पर लगाए प्रतिबंधों का असर ईरान के साथ व्यापार, निवेश और सैन्य-तकनीकी सहयोग पर नहीं पड़ने देगा.
सोमवार को लावरोफ ने ईरानी विदेश मंत्री हुसैन आमिरअब्दोल्लाहियां से फ़ोन पर हुई बातचीत में इस बात पर ज़ोर दिया कि नए परमाणु समझौते में इसके किसी भी सदस्य के साथ भेदभाव न हो.
हालांकि, रूस के इस कदम के बाद फ्रांस ने उसे ऐसा न करने को लेकर चेताया है. सोमवार को तेल के दाम साल 2008 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गए हैं.