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रूस का ब्रिटेन पर निशाना, कहा- यूक्रेन को दी गई मदद नहीं भूलेंगे

रूस के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके यूक्रेन की मदद करने के लिए सीधे ब्रितानी सरकार को निशाना बनाया है.

लाइव कवरेज

मोहम्मद शाहिद, कमलेश मठेनी and प्रियंका झा

  1. रूस के अंधाधुंध हमले और यूक्रेन के शहरों से उठता तबाही का धुआं

    यूक्रेन के शहरों पर रूसी सेना के अंधाधुंध हमले जारी हैं जिसका यूक्रेन पूरी जी-जान से मुक़ाबला करने की कोशिश कर रहा है.

    दूसरी ओर नेटो की ये कोशिश है कि यूक्रेन से उठ रही जंग की लपटें यूरोप के बाकी हिस्सों तक ना पहुंचे.

  2. संघर्ष विरामः मारियुपोल से लोगों को सुरक्षित निकालने की समयसीमा शुरू

    रूस ने यूक्रेन के जिन दो शहरों में अस्थायी संघर्ष विराम का एलान किया है उनके बारे में और जानकारी सामने आ रही है. सबसे पहले बता दें कि लोगों को बाहर निकालने के लिए जो समय दिया गया है वो शुरू हो चुका है.

    रूसी सैनिकों ने दक्षिण-पूर्व के मारियुपोल शहर की घेराबंदी की थी और लगातार हमले किए जा रहे थे.

    मारियुपोल सिटी काउंसिल से मिली जानकारी के अनुसार-

    • ये संघर्ष विराम शनिवार स्थानीय समयानुसार 09.00 बजे (07.00 जीएमटी) से शाम 16.00 बजे तक लागू रहेगा.
    • इस दौरान स्थानीय समयानुसार 11.00 बजे (09.00 जीएमटी) से लोगों को बाहर निकाला जाना शुरू किया जाएगा.
    • इस दौरान जो मानवीय कॉरिडोर खोला जाएगा वो मारियुपोल से लेकर पश्चिम में बसे शहर ज़ेपोरज़िया तक होगा.
    • शहर के तीन ठिकानों से बसें चलाई जाएंगी. साथ ही निजी वाहनों को भी इस रास्ते जाने की अनुमति दी जाएगी.
    • शहर प्रशासन ने कहा है कि ड्राइवर इस मौक़े का पूरा फायदा उठाएं और अपनी गाड़ियों के हर एक कोने का इस्तेमाल यहां से लोगों को निकालने में करें.
    • जिस रास्ते को लेकर सहमति बनी है उससे हट कर यात्रा करने की सख्त मनाही है.
  3. रूसी राष्ट्रपति पुतिन की आंखों में क्यों किरकिरी रहा है यूक्रेन?

  4. ब्रेकिंग न्यूज़, संघर्ष विराम के बाद बोले मारियुपोल के मेयर, नागरिकों को निकालने के अलावा कोई विकल्प नहीं

    यूक्रेन के दो शहरों में रूस के अस्थायी संघर्ष विराम के ऐलान और मानवीय कॉरिडोर पर सहमति बनने के बाद यूक्रेन के सबसे बड़े बंदरगाह शहर मारियुपोल के मेयर वेडिम बोइचेंको ने एक भावुक बयान दिया है.

    उन्होंने कहा, "मारियुपोल उसके मकानों और सड़कों से नहीं, बल्कि उसके निवासियों से है."

    बोइचेंको ने कहा, "कब्ज़ा करने वालों की ओर से लगातार जारी हमलों की वजह से अब नागरिकों को सुरक्षित तरीके से मारियुपोल से निकालने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है."

    इससे पहले मारियुपोल के मेयर ने अपील की थी कि रूसी सेना की घेराबंदी के बीच नागरिकों को शहर छोड़ने दिया जाए.

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को दक्षिणी यूक्रेन के दो शहरों मारियुपोल और वोल्नोवाखा में अस्थायी संघर्ष विराम का ऐलान किया है. इसके साथ ही मॉस्को के समयानुसार शनिवार सुबह 10 बजे इन इलाक़ों में मानवीय कॉरिडोर भी खोले जाएंगे.

  5. यूक्रेन के दो शहरों के लिए अस्थायी संघर्ष विराम का ऐलान, अब तक क्या-क्या हुआ

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को दक्षिणी यूक्रेन के दो शहरों मारियुपोल और वोल्नोवाखा में संघर्ष विराम का ऐलान किया है.

    इसके साथ ही मॉस्को के समयानुसार सुबह 10 बजे इन इलाक़ों में मानवीय कॉरिडोर भी खोले जाएंगे.

    रूस की इस घोषणा की अब यूक्रेन ने भी पुष्टि कर दी है. दोनेत्स्क क्षेत्र की सेना के प्रमुख ने बताया है कि प्रशासन फिलहाल लोगों को मदद पहुंचाने और बचाव कार्य की तैयारियों में जुटा हुआ है.

    मारियुपोल यूक्रेन का सबसे बड़े बदंरगाह वाला शहर है, जिसे रूस की सेना ने कई दिनों से घेरा हुआ है. इसके साथ ही वोल्नोवाखा में भी भारी संघर्ष जारी है.

    इससे पहले मारियुपोल के मेयर ने अपील की थी कि रूसी सेना की नाकाबंदी के बीच नागरिकों को शहर छोड़ने दिया जाए.

    अन्य जगहों पर भी लड़ाई जारी है. ख़ारकीएव में कई जगह धमाकों की आवाज़ सुनाई दे रही है. पूर्व में स्थित सुमी शहर में भी स्थानीय समयानुसार सुबह 5 बजे से हमले जारी हैं.

  6. यूक्रेन ने की दो शहरों में रूस के अस्थायी संघर्ष विराम की पुष्टि

    रूसी रक्षा मंत्रालय की तरफ से यूक्रेन के दो शहरों में अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा के बाद अब यूक्रेन ने भी संघर्ष विराम की पुष्टि की है. रूस ने कहा था कि संघर्ष विराम पर यूक्रेन की भी सहमति है.

    रूस ने यूक्रेन के दक्षिण-पूर्व में बसे दो शहरों मारियुपोल और वोल्नोवाखा के लिए संघर्ष विराम की घोषणा की थी ताकि वहां फंसे लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके और जो लोग शहर से बाहर जाना चाहते हैं उन्हें जाने दिया जाए.

    अब दोनेत्स्क रीजनल मिलिटरी एडमिनिस्ट्रेशन के प्रमुख पावेलो किरिलेन्कों ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की है.

    उन्होंने कहा है कि ये संघर्ष विराम शनिवार को यूक्रेन के स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे (जीएमटी के अनुसार सुबह 7 बजे और भारतीय समयानुसार दोपहर 12.30 बजे) से लागू होगा.

    उन्होंने कहा है कि उनका प्रशासन फिलहाल लोगों को वहां से निकालने की तैयारी में जुट गया है.

  7. मारियुपोल और वोल्नोवाख़ा क्यों हैं अहम?

    देश के दक्षिणपूर्व की तरफ बसा मारियुपोल बंदरगाह शहर है. यहां की आबादी 4 लाख 50 हज़ार है.

    मारियुपोल में यूक्रेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है और रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जाता है. रूसी सेना ने गुरुवार को इसकी घेरबंदी कर इस पर हमले शुरू कर दिए थे.

    अगर ये शहर रूसी सेना के कब्ज़े में आ गया तो इससे क्राइमिया को दोनेत्स्क और लुहांस्क के साथ सड़क संपर्क के ज़रिए जोड़ा जा सकेगा. 2014 में रूस ने क्राइमिया पर कब्ज़ा कर लिया था. वहीं दोनेत्स्क और लुहांस्क रूस समर्थित अलगाववादियों के कब्ज़े वाले इलाक़े हैं.

    वोल्नोवाखा छोटा शहर है और मारियुपोल के उत्तर में है. रूसी हमले शुरू होने के साथ ही यहां पर भी संघर्ष तेज़ हो गया था. ये शहर रूस के लिए इस मायने में अहम है कि ये मारियुपोल और दोनेत्स्क को जोड़ने वाली सड़क पर है.

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, रूस ने दो शहरों में की अस्थायी संघर्षविराम की घोषणा

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के दसवें दिन रूस ने यूक्रेन के दो शहरों में संघर्षविराम की घोषणा की है. ये संघर्षविराम मारियुपोल और वोल्नोवाखा शहरों के लिए होगा.

    रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि शनिवार को जीएमटी सुबह 7 बजे यानी मॉस्को के समयानुसार सुबह 10 बजे और भारतीय समयानुसार शनिवार दोपहर 12.30 बजे से मारियुपोल और वोल्नोवाखा के लिए मानवीय कॉरिडोर खोले जाएंगे. इस दौरान लोग शहर छोड़ कर जा सकेंगे.

    रूसी सेना के अनुसार मॉस्को के समयानुसार 10 बजे इन शहरों पर हमले रोक दिए जाएंगे ताकि लोगों की मदद के लिए मानवीय कॉरिडोर खोले जा सकें.

    इसके ज़रिए मारियुपोल और वोल्नोवाखा शहरों के नागरिकों की मदद की जाएगी.

    रूसी सरकार समर्थित मीडिया स्पुतनिक ने भी जानकारी दी है कि संघर्षविराम के दौरान आम लोगों की मदद के लिए मानवीय कॉरिडोर खोले जाएंगे.

    संघर्षविराम का ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन के अधिकांश हिस्सों में मानवीय संकट की आशंका ज़ाहिर की जा चुकी है. इनमें कीएव, खारकीएव, सुमी, चेर्निगोव और मारियुपोल शहर सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

    यूक्रेन के राष्ट्रपति के सहयोगी मिखाइल पोदोलियाक ने कहा था कि लगभग 2 लाख लोग मारियुपोल से निकलने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि करीब 20 हज़ार लोग दोनेत्स्क क्षेत्र के वोल्नोवाखा इलाक़े को भी छोड़ना चाहते हैं.

    मौजूदा समय में यूक्रेन को सबसे बड़े बंदरगाहों वाले दो शहर मारियुपोल और वोल्नोवाखा को रूस की सेना ने घेरा हुआ है और यहां हमले जारी हैं.

    इससे पहले मारियुपोल के मेयर ने अपील की थी कि रूसी सेना की नाकाबंदी के बीच नागरिकों को शहर छोड़ने दिया जाए. अन्य जगहों पर भी लड़ाई जारी है.

    खारकीएव में कई जगह धमाकों की आवाज़ सुनाई दे रही है. पूर्व में स्थित सुमी शहर में भी स्थानीय समयानुसार सुबह 5 बजे से हमले जारी हैं.

  9. यूक्रेन के मारियुपोल शहर को रूसी सेना ने घेरा, हवाई हमले जारी

    यूक्रेन के सबसे बड़े बंदरगाह वाले शहर मारियुपोल पर रूसी हेलिकॉप्टर के लगातार फ़ायरिंग करने के वीडियो फुटेज को बीबीसी ने सत्यापित किया है. गुरुवार से रूसी सेना ने इस शहर की घेराबंदी की हुई है.

    मारियुपोल में क़रीब 4 लाख 50 हज़ार लोगों की आबादी रहती है. यूक्रेन के दक्षिण में बसा ये शहर क्राइमिया के नज़दीक है और रूसी सीमा से भी क़रीब है.

    लुहांस्क और दोनेत्स्क में रूस समर्थित विद्रोहियों को क्राइमिया में मौजूद सेना में शामिल होने के मकसद से भी ये शहर अहम है. अगर ये शहर रूसी सेना के कब्ज़े में आ गया तो इससे क्राइमिया को दोनेत्स्क और लुहांस्क के साथ जोड़ा जा सकेगा.

    रूसी सेना ने शहर को घेर लिया है और लगातार जारी हमलों की वजह से यहां बिजली और पानी की आपूर्ति ठप हो गई है.

    शहर के अधिकारियों ने यहां मानवीय संकट पैदा होने की आशंका ज़ाहिर की है.

  10. यूक्रेन पर रूस के हमले के 10 दिन: अब तक क्या-क्या हुआ?

    यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का आज 10वां दिन है. अब तक क्या-क्या हुआ, उसपर एक नज़र:

    • हमले के बाद से मारे गए नागरिकों की कुल संख्या अब तक स्पष्ट नहीं है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी का कहना है कि 24 फ़रवरी को शुरू हुए हमले के बाद से अब तक 10 लाख से ज़्यादा लोग यूक्रेन छोड़कर जा चुके हैं और लाखों देश छोड़ने की कोशिश में हैं.
    • नाइपर नदी और ब्लैक सी के संगम स्थल के पास स्थित यूक्रेन का ख़ेरसोन शहर सबसे पहले रूस के कब्ज़े में आया.
    • रूसी मिसाइलें यूक्रेन की राजधानी कीएव और दूसरे सबसे बड़े शहर ख़ारकीएव को निशाना बना रही हैं. वहीं, सड़क से कीएव तक जा रहे रूस का विशाल सैन्य काफ़िला फिलहाल रुका हुआ है.
    • मारियुपोल का दक्षिणी बंदरगाह रूस ने घेर लिया है और अब उसके सैनिक दूसरे बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं. दोनों पर रूस के कब्ज़ा करने से यूक्रेन का समुद्री रास्ता अवरुद्ध हो जाएगा.
    • रूसी सेना ने शुक्रवार को घंटों तक गोलाबारी करने के बाद यूरोप के सबसे बड़े ज़ेपोरज़िया परमाणु संयंत्र पर कब्ज़ा कर लिया था. इसके बाद से विश्व के नेताओं में चिंता बढ़ गई है, जिनका कहना है कि हमले से तबाही मच सकती है.
    • चेर्नोबिल प्लांट, जहां 1986 में परमाणु घटना घटी थी, वो भी अब रूस के नियंत्रण में है. ये प्लांट अब बंद हो चुका है.
    • यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर ज़ेलेंस्की ने अपने देश पर नो-फ़्लाई ज़ोन लागू करने से लगातार इनकार करने के लिए पश्चिम देशों की निंदा की है. उन्होंने पश्चिम देशों से कहा है, "जो लोग मरेंगे वे आपकी वजह से मरेंगे."
    • अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके बाद रूबल की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है, साथ ही रूस में कारोबार और निवेश को भी झटका लगा है.
    • बीबीसी सहित कई स्वतंत्र मीडिया घरानों ने रूस में आए नए क़ानून को देखते हुए वहां काम रोक दिया है. नए क़ानून के तहत यूक्रेन में युद्ध की रिपोर्टिंग को सेंसर किया गया है.
    • सैमसंग, एयरबीएनबी और कार्टियर जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भी रूस को निर्यात और वहां काम बंद कर दिया है.
  11. मारियुपोल के मेयर की अपील- रूसी सेना कर रही क्रूर हमले, मानवीय कॉरिडोर की ज़रूरत

    यूक्रेन के बड़े शहरों में से एक मारियुपोल के मेयर वेदिम बोइचेन्को ने कहा है कि रूसी सेना ने शहर के घेराबंदी कर दी है और 'क्रूर हमले' कर रही है जिससे लोगों को बचाने के लिए मानवीय कॉरिडोर की ज़रूरत है.

    बोइचेन्को ने कहा कि वो संघर्षविराम चाहते हैं और चाहते हैं कि एक मानवीय कॉरिडोर बनाया जाए, ताकि खाने और पानी की व्यवस्था की जा सके और लोगों के लिए ज़रूरी दवाओं की भी आपूर्ति की जा सके.

    बोइचेन्को इससे पहले यहां मानवीय त्रासदी की चेतावनी दे चुके हैं. शहर पर गुरुवार से ही रूसी सेना के हमले जारी हैं.

    ये शहर क़रीब 4 लाख 50 हज़ार लोगों का ठिकाना है. रूसी हमलों के बीच यहां बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है.

    मारियुपोल में यूक्रेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है और रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जाता है.

    अगर ये शहर रूसी सेना के कब्ज़े में आ गया तो इससे क्राइमिया को दोनेत्स्क और लुहांस्क के साथ सड़क संपर्क के ज़रिए जोड़ा जा सकेगा. दोनेत्स्क और लुहांस्क रूस समर्थित अलगाववादियों के कब्ज़े वाले इलाक़े हैं.

    इस बीच मिल रही अपुष्ट ख़बरों के अनुसार उत्तरपूर्व में बसे शहर सूमी और ख़ारकीएव के एक ट्रेन स्टेशन पर भी रॉकेट हमला हुआ है.

  12. अमेरिकी सीनेट से मिलेंगे यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी सीनेट को ज़ूम के ज़रिए मिलने का न्योता दिया है.

    ज़ेलेंस्की लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के संपर्क में है. लेकिन ये पहली बार है जब रूसी आक्रमण के बाद पूरी अमेरिकी सीनेट यूक्रेन के नेता से बात करेगी.

    बीते सप्ताह, अमेरिका में यूक्रेन के राजदूत ओक्साना मार्करोवा सीनेट के सदस्यों से मिले थे. इस दौरान उन्होंने कहा था कि उनके देश को रूस से लड़ने के लिए तत्काल हथियारों की ज़रूरत है.

    इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि रूस के आक्रमण के बाद से अब तक क़रीब 12 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर जा चुके हैं. इनमें से आधे पड़ोसी देश पोलैंड में हैं.

    रूस के आक्रमण से पहले यूक्रेन की कुल आबादी करीब 4.4 करोड़ थी.

  13. रूस-यूक्रेन संकट: सिंगापुर ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान किया

    यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के विरोध में सिंगापुर ने रूस पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया है. सिंगापुर ने कहा है कि वो रूस से सामान के आयात को सीमित करेगा और कुछ रूसी बैंकों पर भी पाबंदी लगाएगा.

    इसके अलावा सिंगापुर ने रूस के साथ क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन और ऐसे किसी भी वित्त संस्थान को प्रतिबंधित करने का फ़ैसला किया है जो रूस के सेंट्रल बैंक को सहयोग कर सकते हैं.

    सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने इससे पहले संसद में कहा था कि "सिंगापुर का इरादा रूस के ख़िलाफ़ उचित प्रतिबंध लगाने के लिए कई समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर काम करना है."

    सिंगापुर क्षेत्रीय पड़ोसियों में प्रतिबंधों को लागू करने वाला पहले देश है. हालांकि, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संघ (आसियान) के अन्य सदस्य देशों ने रूस की कार्रवाई की निंदा की है.

  14. रूस के ख़िलाफ़ जंग जीतेगा यूक्रेन, बीबीसी से बोले अमेरिकी विदेश मंत्री

    अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें भरोसा है यूक्रेन रूस के ख़िलाफ़ जंग जीतेगा.

    उन्होंने कहा, "अगर रूस का इरादा यूक्रेन की सरकार को गिराकर वहां अपने इशारों पर चलने वाली सरकार बनाना है तो 4.5 करोड़ यूक्रेनी इसे स्वीकार नहीं करेंगे."

    ब्लिंकन ने ये भी कहा कि युद्ध शायद वैसा नहीं है जैसा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोचा था. यूक्रेनी सेना की ओर से मिल रही टक्कर से रूस की सेना नौवें दिन भी देश पर कब्ज़ा नहीं कर पाई है.

    ब्लिंकन ने अपने छह दिवसीय यूरोपीय दौरे के पहले दिन बीबीसी की कूटनीतिक संवाददाता जेम्स लैंडेल से बातचीत की. ये पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भरोसा है कि यूक्रेन जीतेगा, उन्होंने कहा, "समय के साथ, बिल्कुल".

    ब्लिंकन ने कहा, "मैं आपको ये नहीं बता सकता कि ये कब तक चलेगा. ये भी नहीं बता सकता कि इसमें कितना समय लगेगा. लेकिन रूस के ख़िलाफ़ 4.5 करोड़ यूक्रेनी अपनी आज़ादी और भविष्य के लिए लड़ रहे हैं, एक ऐसे यूक्रेन के लिए लड़ाई जारी है जिसमें रूस का दखल न हो. ये अपने आप में ही बहुत कुछ कहता है."

    ये पूछे जाने पर कि क्या युद्ध को ख़त्म करने के लिए अमेरिका रूस में सत्ता परिवर्तन चाहेगा. ब्लिंकन ने जवाब दिया, "हम ये नहीं चाहते हैं और किसी भी स्थिति में ये हम तय नहीं कर सकते. रूस के लोगों को अपना नेतृत्व तय करने की ज़रूरत है."

  15. रूस या अमेरिका- दुनिया के हथियारों के बाज़ार में सबसे बड़ा खिलाड़ी कौन

    रूस और यूक्रेन के बीच जंग की असली वजह है 'डर'. रूस को 'डर' है कि यूक्रेन नेटो का सदस्य बनता है तो उसकी सुरक्षा को ख़तरा होगा. वहीं, यूक्रेन को रूस का 'डर' है. इसी 'डर' की वजह से वो नेटो की सदस्यता चाह रहा था और उसका डर, आख़िरकार हक़ीक़त में बदल ही गया.

    रूस यूक्रेन की जंग के बीच एक और 'डर' की चर्चा हो रही है - वो है तीसरे विश्व युद्ध की संभावना का 'डर'.

    हालांकि इस डर का फिलहाल कोई ठोस आधार नहीं है, लेकिन अलग-अलग देशों ने इस 'डर' के मद्देनज़र रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का फ़ैसला भी ले लिया है. ताज़ा उदाहरण जर्मनी और चीन का है.

    किसी भी बड़ी जंग के डर को दूर करने का दुनिया के मुल्कों के पास एक ही तरीका है - वो है हथियार.

    जिस देश के पास हथियारों का जितना बड़ा ज़खीरा है, दुश्मन से लड़ाई में वो देश ख़ुद को उतना ही सशक्त मानता है. इसलिए दुनिया के 'डर के इस बाज़ार' यानी 'हथियारों के बाज़ार' को समझना ज़रूरी है.

  16. यूक्रेन के एक और परमाणु संयंत्र की तरफ बढ़ रही रूसी सेना- UN में अमेरिकी राजदूत

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत ने कहा है कि रूस के सैनिक यूक्रेन के एक और परमाणु संयंत्र के क़रीब पहुंच गए हैं.

    यूक्रेन के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र, ज़ेपोरज़िया पर गुरुवार को रूस के हमले के बाद लिंडा थॉमस ग्रीनफ़ील्ड ने चेताया कि दुनिया एक आपदा से बाल-बाल बची है और अब रूस के सैनिक यूक्रेन के एक और सबसे बड़े परमाणु संयंत्र की ओर बढ़ रहे हैं.

    वो संभवतः कीएव के दक्षिण में लगभग 200 मील की दूरी पर युज़ॉक्रिंस्क पावर स्टेशन का ज़िक्र कर रही थीं.

    थॉमस ग्रीनफ़ील्ड ने कहा, "एक ख़तरा बरकरार है. रूस की सेना द्वारा ख़तरनाक हमलों को रोकने की मांग के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकसाथ आना चाहिए."

    यूक्रेन पर हमले के बाद रूसी सैनिकों ने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर क़ब्ज़ा जमा लिया. इसके बाद से यहां से होने वाले रेडिएशन में बढ़त दर्ज की गई है. इसके बाद गुरुवार को रूसी सेना ने ज़ेपोरज़िया संयंत्र पर भी फायरिंग की थी.

  17. जर्मनी के बाद चीन की बारी, रक्षा बजट में 7.1 फ़ीसदी करेगा बढ़ोतरी

    चीन ने शनिवार को घोषणा की है कि वो 2022 में अपने रक्षा बजट में 7.1 फीसदी की बढ़ोतरी करेगा. अमेरिका के बाद सबसे बड़ा रक्षा बजट चीन का ही है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, एक सरकारी बजट रिपोर्ट से पता लगता है कि चीन की सरकार ने 230 अरब डॉलर (लगभग 17,577 अरब रुपये) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवंटित किए हैं.

    चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स की अंग्रेज़ी वेबसाइट पर विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि सकारात्मक आर्थिक विकास और सुरक्षा ख़तरा बढ़ने की वजह से चीन ने अपना रक्षा बजट बढ़ाया है.

    इससे पहले मार्च 2021 में चीन ने 209 अरब डॉलर का रक्षा बजट पेश किया था. बीते साल चीन का रक्षा बजट 6.8 फीसदी बढ़ा था और साल 2020 में कोरोना के बावज़ूद ये 6.6 प्रतिशत था.

    चीन का रक्षा बजट उसके वार्षिक जीडीपी अनुमान से भी ज़्यादा है. प्रधानमंत्री ली केकियांन ने शनिवार को ऐलान किया था कि बीजिंग की वार्षिक जीडीपी दर 5.5 फीसदी रह सकती है. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, चीन की संसद के वार्षिक सत्र के उद्घाटन के दौरान ली केकियांन ने कहा, "बीजिंग सैन्य प्रशिक्षण और युद्ध की तैयारी को बढ़ाएगा और चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के हितों की रक्षा करेगा."

    बीते सप्ताह जर्मनी ने भी रूस की आक्रामकता को देखते हुए रक्षा बजट में बड़ा इज़ाफा किया था. जर्मनी ने इस वर्ष अपने सशस्त्र बलों के विशेष कोष में 100 अरब यूरो देने का फैसला किया है.

    जर्मनी का रक्षा बजट अब कुल जीडीपी का 2 फीसदी है. इससे पहले साल 2021 में जर्मनी का पूरा रक्षा बजट ही 47 अरब यूरो का था. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, जर्मनी अपने पुराने हो चुके टॉरनैडो की जगह अमेरिका से एफ़-35 लड़ाकू विमान ख़रीद सकता है.

  18. सैमसंग ने रोकी रूस में अपने फ़ोन और चिप की बिक्री

    स्मार्टफ़ोन बनाने वाली जानीमानी कंपनी सैमसंग ने 'मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति' के मद्देनज़र रूस में अपने फ़ोन और चिप्स की बिक्री रोक दी है.

    कंपनी ने कहा है कि वो "इस जटिल स्थिति पर नज़र बनाए रखेगें और उसके बाद ही कोई फ़ैसला लेंगे."

    दक्षिण कोरिया का सैमसंग रूस में सबसे अधिक बिकने वाला स्मार्टफ़ोन ब्रांड है. इसके बाद सबसे अधिक बिक्री चीन के शाओमी और अमेरिका के एपल के स्मार्टफ़ोन की होती है.

    कंपनी ने रूस में अपने सामान की बिक्री तो रोकी ही है, साथ ही कहा है कि वो यूक्रेन में जारी मानवीय राहत काम में सहयोग के लिए 60 लाख डॉलर की मदद करेगा.

    इसमें इलेक्ट्रोनिक्स के साथ-साथ कर्मचारियों से इकट्ठा किया गया पैसा भी शामिल होगा.

    इससे पहले शुक्रवार को माइक्रोसॉफ्ट ने रूस में अपने सामान की बिक्री रोक दी थी.

    हर्मीस, केरिंग और शनेल जैसे लग्ज़री सामान बनाने वाली फ्रांस की कई कंपनियों ने भी रूस में मौजूद अपनी दुकानों को बंद कर दिया है. वहीं कार्ल्सबर्ग बीयर बनाने वाली डेनमार्क की कंपनी ने भी रूस को होने वाला निर्यात रोक दिया है.

  19. स्वीडन और फिनलैंड के नेटो में शामिल होने को लेकर चर्चा

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने फिनलैंड के साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और बढ़ाने को लेकर सहमति जताई है.

    दरअसल, यूक्रेन पर रूस के हमले से रूस की सीमा से लगते यूरोपीय देशों में चिंता पैदा हो गई है.

    फिनलैंड के राष्ट्रपति सौली निनस्तो के साथ व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान राष्ट्रपति बाइडन ने फिनलैंड को एक मजबूत रक्षा सहयोगी बताया है. लेकिन, दोनों नेताओं ने फिनलैंड के नेटो का हिस्सा बनने को लेकर कुछ नहीं कहा.

    फिनलैंड की रूस के साथ 1300 किलोमीटर सीमा लगती है और 1917 तक ये रूस के नियंत्रण में था.

    रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद फिनलैंड और स्वीडन में अधिकतर लोग इसके नेटो सदस्य बनने के पक्ष में नज़र आ रहे हैं. हालांकि, रूस ने फिनलैंड और स्वीडन को नेटो में शामिल होने को लेकर चेतावनी दी थी.

    स्वीडन को लंबे समय से निष्पक्षता के लिए जाना जाता है, लेकिन इस मुद्दे पर पहली बार पोल किया गया है जिसमें 51 प्रतिशत लोगों ने नेटो से जुड़ने के पक्ष में वोट किया है.

  20. यूरोप के आसमान पर नेटो का पहरा

    यूक्रेन में जंग की वजह से यूरोप में नेटो अपने ऑपरेशंस को बढ़ा रहा है. नेटो ने पूर्वी यूरोप में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है.

    बीबीसी को मौक़ा मिला यूक्रेन-बेलारूस के पास पोलैंड की सीमा पर एक सर्विलांस फ्लाइट में जाने का. ये ख़ास अवाक्स विमान, एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम से लैस है.

    देखिए बीबीसी यूरोप संवाददाता जेसिका पार्कर की रिपोर्ट.