रूस से फ़िनलैंड क्यों जा रहे हैं लोग?
वालीमा में रूस और फिनलैंड के बॉर्डर पर बसें और गाड़ियां रुक रही हैं और लोग कस्टम्स के लिए अपने पासपोर्ट की जांच करवा रहे हैं. ये राजधानी हेलिंस्की से क़रीब 193 किलोमीटर दूर है. ये यूक्रेन के लोग नहीं हैं बल्कि रूस के नागरिक हैं.
भले ही यहां आने वालों की तादाद बहुत ज़्यादा ना हो लेकिन लोगों के आने का सिलसिला जारी है. लोग रूस से बाहर निकले को लेकर बेताब हैं क्योंकि ये आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार यूक्रेन पर आक्रमण के विरोध में प्रदर्शन करने वालों से निबटने के लिए देश में मार्शल लॉ लागू कर सकती है.
हमने पश्चिम की तरफ़ आ रही एक युवा रूसी महिला से बात की. वो हालात को लेकर परेशान नज़र आ रहीं थीं.
वो कहती हैं, "यूक्रेन के लोग भी हमारे ही लोग हैं, हमारा परिवार हैं, हमें उनकी हत्याएं नहीं करनी चाहिए."
हमने पूछा कि क्या वो वापस रूस जाएंगी?
वो कहती हैं कि जब तक ये निर्दयी सरकार है तब तक तो शायद नहीं.
फ़िनलैंड में उन जैसे लोगों के लिए बहुत सहानुभूति है. यहां के लोग यूक्रेन के लोगों के लिए भी भावुक हैं.
फ़िनलैंड पारंपरिक तौर पर तटस्थ रहा है. लेकिन यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यहां लोगों का नज़रिया बदल रहा है.
आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि यूक्रेन के बाद रूस अपने दूसरे पड़ोसी राज्यों की तरफ़ भी आक्रामक हो सकता है.
एक ताज़ा सर्वे के मुताबिक फ़िनलैंड में ऐसे लोगों की तादाद बढ़ रही है जो चाहते हैं कि उनका देश भी नेटो गठबंधन का हिस्सा बन जाए. लोगों को लगता है कि नेटो की सदस्यता उन्हें सुरक्षा दे सकती है.