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अल-क़ायदा के प्रमुख अल-ज़वाहिरी अपनी मौत की अफ़वाहों की बीच 9/11 हमले की बरसी पर एक घंटे के नए वीडियो में नज़र आए.
विभुराज and अनंत प्रकाश
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9/11 हमले की 20वीं बरसी पर अल-क़ायदा के प्रमुख आयमान अल-ज़वाहिरी एक वीडियो में नज़र आए.
यह वीडियो सामने आने पर एक बार फिर यह सवाल पैदा हो गया है कि क्या अल-ज़वाहिरी ज़िंदा हैं?
पिछले एक साल में कई बार उनके मौत की अफ़वाहें उड़ चुकी हैं.
जिहादी समूहों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखने वाले ख़ुफ़िया समूह साइट ने इसकी जानकारी दी.
साइट की डायरेक्टर रीटा कार्ट्ज़ ने ट्वीट किया, “अपनी मौत की अफ़वाहों की बीच अल-क़ायदा के नेता अल-ज़वाहिरी 60 मिनट के एक नए वीडियो में नज़र आए.”
रीटा ने बताया, “इस बार ज़वाहिरी ने ऐसे सबूत सामने रखे जिससे पता चल सके कि उनकी मौत नहीं हुई है.”
एक घंटे के इस वीडियो में ज़वाहिरी ने सीरिया में अल-क़ायदा से सम्बद्ध समूह के रूसी सैन्य बेस पर रेड का ज़िक्र किया.
इस वीडियो क्लिप की शुरुआत में अल-ज़वाहिरी को “अल्लाह उनकी हिफ़ाज़त करे” कहकर पेश किया गया है. वीडियो में तालिबान मीडिया और इसके लड़ाकों को भी दिखाया गया है.
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'तालिबान की जीत, अल-क़ायदा की जीत'
रीटा कार्ट्ज़ ने अपने ट्वीट में कहा कि ज़वाहिरी का वीडियो सामने आना यह बताता है कि अफ़गानिस्तान में तालिबान की जीत कैसे अल-क़ायदा की जीत है.
उन्होंने कहा कि यह वीडियो 9/11 हमले के बाद जिहादी समूहों की सक्रियता की गंभीरता का भी सूचक है.
9/11 हमले की बरसी पर अल-क़ायदा समेत कई आतंकी समूहों ने जश्न मनाया था. अल-क़ायदा ने अफ़गानिस्तान में तालिबान की वापसी को “अल्लाह की ओर से पवित्र इशारा” तक बताया था.
अमेरिकी सेना के ऑपरेशन में ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद अल-क़ायदा की ज़िम्मेदारी अल-ज़वाहिरी के हाथों में दी गई थी.
पिछले कुछ समय में ज़वाहिरी की मौत की अपुष्ट ख़बरें आती रहीं लेकिन किसी ख़ुफ़िया एजेंसी के पास उनकी मौत को लेकर ठोस सबूत नहीं थे.

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अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह के परिवार ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को सूचना दी है कि तालिबान ने सालेह के भाई रोहुल्ला अज़ीज़ी की हत्या कर दी है.
सालेह के भतीजे ने रॉयटर्स को एक टेक्स्ट मैसेज़ भेजकर ये सूचना दी है.
उन्होंने लिखा है कि “उन्होंने कल उनकी हत्या कर दी है और हमें उन्हें दफ़नाने नहीं दे रहे हैं. वे कह रहे हैं कि उनका शव सड़ना चाहिए.”
तालिबान सूचना सेवा के उर्दू भाषा अकाउंट में बताया गया है कि ख़बरों के मुताबिक़, पंजशीर में संघर्ष के दौरान रोहुल्ला सालेह मारे गए हैं.
पश्चिमी देशों के समर्थन वाली अफ़ग़ानिस्तान की सरकार में राष्ट्रीय सूचना निदेशालय के प्रमुख रह चुके अमरुल्लाह सालेह के बारे में अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.

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उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर में एक रैली के दौरान पहले की सरकारों पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, ''2017 से पहले तक राशन अब्बाजान कहने वाले हजम कर जाते थे.'’
समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें योगी आदित्यानाथ कहते दिख रहे हैं पीएम मोदी मे हर तबके के लोगों तक विकास पहुंचाया और विकास सबका हुआ, तुष्टीकरण किसी का नहीं.
उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार ने हर ग़रीब को बिना किसी भेदभाव के शौचालय और राशन दिया.
योगी ने कहा, “क्या ये राशन 2017 के पहले भी मिलता था?...क्योंकि तब तो अब्बाजान कहने वाले राशन हजम कर जाते थे. तब कुशीनगर का राशन नेपाल पहुंच जाता था, बांग्लादेश पहुंच जाता था.”
उन्होंने कहा, ''अब ग़रीबों का राशन कोई नहीं निगलेगा, तो राशन नहीं निगल पाएगा, लेकिन जेल चला जाएगा.”
योगी आदित्यनाथ आज संतकबीरनगर, कुशीनगर और गोरखपुर के दौरे पर थे.
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योगी के बयान की आलोचना
सोशल मीडिया पर कई लोग योगी आदित्यनाथ के इस बयान को ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा बताकर इसकी आलोचना कर रहे हैं.
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष उमर अबदुल्ला ने भी योगी आदित्यनाथ के बयान पर आपत्ति जताई.
उन्होंने वीडियो रिट्वीट कर लिखा, “मैं हमेशा कहता हूं कि बीजेपी सांप्रदायिकता और मुसलमानों के प्रति नफ़रत को छोड़कर किसी और एजेंडे पर कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहती.''
''यहां एक सीएम हैं जो फिर से चुने जाने के लिए कह रहे हैं कि मुसलमानों ने हिंदुओं का राशन खा लिया.”

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तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने उन ख़बरों को ग़लत ठहराया है जिनके मुताबिक अल-क़ायदा अभी भी अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय है.
उन्होंने कहा, “हमने दोहा समझौते में वादा किया है कि हम अफ़ग़ानिस्तान में किसी तरह की धन उगाही का सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर या भर्ती का सेंटर नहीं रहने देंगे.”
पाकिस्तानी समाचार चैनल जियो न्यूज़ पर शाहीन से पूछा गया कि अगर अल-क़ायदा 9/11 जैसा एक और हमला करता है तो तालिबान अल-क़ायदा के साथ क्या करेगा?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''हमने यह नीति बनाई है कि अफ़ग़ानिस्तान के इलाके का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा.”
“हम इस पर क़ानून बनाएंगे और निगरानी रखेंगे और हमारे सुरक्षाबल और खुफ़िया एजेंसियां अधिक सक्रिय रहेंगी.”
सुहैल शाहीन ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को 'ग़लत' बताया जिसमें अफ़ग़ानिस्तान में अल-क़ायदा के होने की बात कही गई है.
उन्होंने कहा, ''किसी ने भी ऐसे आतंकी गतिविधियों वाले केंद्र की पहचान नहीं की है. अगर यूएन कहता है कि ऐसे केंद्र हैं, तो वो उनकी जानकारी दे.''

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अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन अतिरिक्त प्रोटोकॉल के तहत तकनीकी वार्ता जारी रखने पर सहमत हो गए हैं.
ईरानी मीडिया के अनुसार, इस समय ईरान के दौरे पर गए आईएईए के महानिदेशक राफ़ेल ग्रॉसी और अध्यक्ष मोहम्मद एस्लामी के बीच तेहरान में रविवार को हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी.
ग्रॉसी की यह यात्रा आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की 13 सितंबर यानी सोमवार को होने वाली बैठक के ठीक एक दिन पहले हुई है.
राफ़ेल ग्रॉसी का ईरान का यह पहला दौरा है. वहीं मोहम्मद एस्लामी बीते 29 अगस्त को ही ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के अध्यक्ष बनाए गए हैं.
हालाँकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने हाल में जारी अपने नए रिपोर्ट में ईरान की आलोचना की है.
आईएईए का कहना है कि ईरान ने पुरानी और अघोषित संयंत्रों में यूरेनियम के प्रभाव और कुछ निगरानी उपकरणों को पहुंच से दूर रखने जैसे दो मुद्दों पर काफ़ी समय बर्बाद किया.

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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कमियाँ गिनाई हैं.
उन्होंने एक चिट्ठी लिखकर मुख्यमंत्री को गन्ना किसानों की समस्याओं के बारे में बताया.
इस चिट्ठी कोट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा कि “उम्मीद है भूमिपुत्रों की बात ज़रूर सुनी जाएगी.”
चिट्ठी में वरुण गांधी ने पहले राज्य सरकार के अभी तक के उठाए क़दमों की सराहना की लेकिन फिर किसानों की समस्याएं गिनाते हुए कुछ सुझाव भी दिए.
उन्होंने लिखा, ''गन्ना किसानों का कहना है कि लागत बहुत बढ़ गई है लेकिन पिछले चार सत्रों में गन्ने के रेट मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े हैं.''
''सरकार ने गन्ने का भुगतान पिछली सरकार के मुकाबले अधिक कराया है लेकिन इस सत्र का भुगतान बाकी है.”
वरुण गांधी ने गन्ने की एमएसपी बढ़ाने, बटाइदार किसानों की मिलों में गन्ना आपूर्ति की सुविधा और सस्ते बीज और उर्वरक देने की मांग भी की.
इसके अलावा उन्होंने पशुओं की समस्या, गेंहू की खरीद से पीएम किसान योजना से जुड़े मुद्दों का भी ज़िक्र किया.
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पहले भी दे चुके हैं अपनी ही सरकार को 'नसीहत'
यह पहली बार नहीं है जब वरुण गांधी ने खुलकर किसानों के पक्ष में बोला है और अपनी सरकार को नसीहत दी है.
5 सितंबर को मुज़फ़्फ़रनगर में हुई महपंचायत की एक क्लिप शेयर करते हुए वरुण गांधी ने ट्वीट भी किया था.
उन्होंने लिखा था, ''मुज़फ़्फ़रनगर में आज लाखों किसान धरना प्रदर्शन में जुटे हैं. वे हमारे अपने लोग हैं. हमें उनके साथ सम्मानजनक तरीक़े से फिर से बात करने की ज़रूरत है.''
वरुण गांधी ने लिखा था, ''उनके दर्द और मुद्दे समझने की ज़रूरत है. हमें उन तक पहुँचने की ज़रूरत है.''
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अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने अपने अख़बार में छपे उत्तर प्रदेश सरकार के एक विज्ञापन में 'ग़लत तस्वीर' के इस्तेमाल पर माफ़ी मांगी है.
अख़बार में 'ट्रांसफ़ॉर्मिंग उत्तर प्रदेश अंडर योगी आदित्यनाथ' (योगी आदित्यनाथ के शासन में बदलता उत्तर प्रदेश) शीर्षक के साथ छपे इस फ़ुल पेज विज्ञापन में मुख्यमंत्री की बड़ी सी तस्वीर लगी है.
योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के नीचे ऊँची इमारतें, फ़्लाईओवर और चमचमाती सड़कें देखी जा सकती हैं.
विज्ञापन में लिखा गया है- 2017 से पहले निवेश के मामले में बाहर के लोग उत्तर प्रदेश के नाम पर हंसते थे. पिछले साढ़े चार सालों में हमने उत्तर प्रदेश को लेकर बनी नकारात्मक छवि को तोड़ दिया है.
हालाँकि यह विज्ञापन सामने आने पर कुछ फ़ैक्ट चेकर्स ने ध्यान दिलाया कि ये इमारतें और फ़्लाईओवर उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की हैं.
इन तस्वीरों में कोलकाता में चलने वाली काली-पीली टैक्सी भी देखी जा सकती है.
यह बात सामने आने पर उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना होने लगी.
लोगों ने सवाल किया कि क्या उत्तर प्रदेश के विकास को दिखाने के लिए बीजेपी सरकार के पास अपने किए कामों की कोई तस्वीर भी नहीं है?
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तंज़ और तीखी प्रतिक्रियाएं
तस्वीर पर पत्रकारों और फ़ैक्ट चेकर्स के अलावा राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रिया दी.
पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पूरे मामले को लेकर चुटकी ली.
उन्होंने ट्वीट किया,“ठग योगी के यूपी के विज्ञापन में कोलकाता का एमएए फ्लाईओवर है. हमारा जे डब्लू मैरियट और मशहूर पीली टैक्सी है. अपनी नीयत बदलें या फिर एड एजेंसी!”
मोइत्रा ने यह भी लिखा कि वो अपने ख़िलाफ़ नोएडा में एफआईआर होने का इंतज़ार करेंगी.
टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने पत्रकार वीर सांघवी का एक ट्वीट रिट्वीट किया जिसमें लिखा था- तो योगीजी यूपी को बंगाल बना देंगे? क्यों नही? अच्छा आइडिया है.
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अख़बार की माफ़ी पर भी उठे सवाल
विवाद बढ़ने पर अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से इसके लिए माफ़ी माँगी.
इस ट्वीट में लिखा गया है, "अख़बार ने उत्तर प्रदेश सरकार का एक विज्ञापन तैयार किया था जिसमें भूलवश ग़लत तस्वीर छप गई थी."
ट्वीट में लिखा गया, ''हमें इस ग़लती का गहरा अफ़सोस है और यह तस्वीर अख़बार के सभी ऑनलाइन संस्करणों से हटा ली गई है."
हालाँकि सोशल मीडिया पर लोगों ने यह सवाल भी किया कि इसके लिए इंडियन एक्सप्रेस माफ़ी क्यों माँग रहा है?
कई लोगों ने पूछा कि क्या अख़बार के मार्केटिंग विभाग ने यह तस्वीर चुनी थी? और अगर हाँ तो क्या इसे यूपी सरकार की मंज़ूरी के बिना छाप दिया गया?
लोगों ने पूछा है कि क्या अख़बार ने किसी दबाव में आकर माफ़ी माँगी है. अब यह मामला थमता नज़र नहीं आ रहा है और विवाद जारी है.

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असम पुलिस ने जोरहाट में हुई नौका दुर्घटना मामले में रविवार को अंतर्देशीय जल परिवहन विभाग के छह कर्मचारियों को गिरफ़्तार किया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, बीते बुधवार बृह्मपुत्र नदी पर निमती घाट के नज़दीक एक निजी नाव और सरकारी नाव के बीच आमने -सामने से टक्कर होने के बाद दो लोगों की मौत हो गयी है.
इस दुर्घटना के बाद एक व्यक्ति को लापता बताया जा रहा है.
इस टक्कर से निजी नाव पलट गयी थी जिसमें दुर्घटना के वक़्त 92 यात्री सवार थे.
जोरहाट के एसपी अंकुर जैन ने बताया है कि निजी नाव में काम करने वाले लोगों से पूछताछ की गयी है और कई अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं.
उन्होंने कहा, “हमने निमती घाट से अंतर्देशीय जल परिवहन विभाग के छह कर्मचारियों को गिरफ़्तार किया है.''
''क्योंकि हमें पता चला है कि इन कर्मचारियों ने ग़लतियां की और प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया. ये हादसा टाला जा सकता था.”
उन्होंने बताया कि पुलिस ने आईपीसी के सेक्शन 304 एवं सेक्शन 34 के तहत मुकद्दमा दर्ज किया है और सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ इसी धारा का इस्तेमाल किया गया है.
जैन ने बताया कि, “माजुली ज़िले के कमलाबाड़ी इलाके की एक निजी नाव पर काम करने वाले लोगों को पूछताछ के लिए उठाया गया है.''
उन्होंने कहा, ''हम माजुली पुलिस के साथ संपर्क में हैं और जल्द ही जोरहाट से एक टीम वहां पहुंचेगी.”

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जापान का कहना है कि उसे पूर्वी चीन सागर में अपने द्वीपों के पास एक पनडुब्बी की गतिविधियों को पता लगा है और ये पनडुब्बी चीन की हो सकती है.
चीन के जहाज इस इलाके में जापानी इलाके के पास से नियमित रूप से गुजरते रहे हैं लेकिन टोक्यो का कहना है कि 'पनडुब्बी की घुसपैठ' सामान्य घटना नहीं है.
इसके बाद जापान ने पनडुब्बी की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए एक युद्धपोत और विमान भेजा है.
चीन ने इस घटना पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है. पूर्वी चीन सागर में कुछ द्वीपों को लेकर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद है.

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सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने शनिवार को अफ़ग़ानिस्तान के हालात को लेकर कई देशों के ख़ुफ़िया प्रमुखों की बैठक की मेज़बानी की है.
इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है लेकिन ख़ुफ़िया सूत्रों ने पाकिस्तानी मीडिया को इसकी पुष्टि की है.
डॉन अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान के नेतृत्व में रूस, चीन, ईरान और कुछ मध्य एशिया के देशों के ख़ुफ़िया प्रमुखों ने इस बैठक में भाग लिया है.
अख़बार एक सूत्र के हवाले से लिखता है, "पाकिस्तान का इस बैठक की मेज़बानी करना इस क्षेत्र और अफ़ग़ानिस्तान में शांति को लेकर हमारी ईमानदारी को दिखाता है."
पाकिस्तान में स्थित जामिया दारुल उलूम हक़्क़ानिया कोई साधारण मदरसा नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण मदरसा है जहां शैक्षणिक परंपरा का पालन करने के साथ-साथ इसने अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत आक्रमण के बाद से राजनीतिक और सैन्य रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
अब इस मदरसे से पढ़े हुए कई छात्र अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार का हिस्सा हैं. देखिए यह रिपोर्ट

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आम आदमी पार्टी ने रविवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय संयोजक के पद पर चुन लिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने आम आदमी पार्टी के सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है.
इसके साथ ही पार्टी नेताओं पंकज गुप्ता और एनडी गुप्ता को क्रमश: सचिव एवं कोषाध्यक्ष बनाया गया है.
आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने बीते शनिवार 34 सदस्यों वाली कार्यकारिणी सभा का भी चुनाव किया है जिसमें अरविंद केजरीवाल शामिल हैं.
बीते साल पार्टी के संविधान में बदलाव करके इस पद पर किसी व्यक्ति को दो बार से ज़्यादा चुने जाने की व्यवस्था की गयी थी.
इसके साथ ही कार्यकाल को तीन वर्षों से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया है.

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महीनों चले विरोध प्रदर्शन के बाद आख़िरकार मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से 'अडानी एयरपोर्ट' का टैग हटा लिया गया है.
इस एयरपोर्ट का नियंत्रण अडानी समूह के पास जाने से पहले जो नाम वाला बोर्ड था, उसे वापस लगा दिया गया है.
इस मुद्दे को उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता दिलराज अल्वा ने पत्रकारों को शनिवार को बताया कि अडानी समूह ने एयरपोर्ट के कामकाज की जिम्मेदारी संभालने के बाद इसके नाम में 'अडानी एयरपोर्ट' शब्द जोड़ दिया था.
हालांकि सूचना के अधिकार क़ानून के तहत जब जानकारी मांगी गई तो ये पता चला कि एयरपोर्ट के संचालन और रखरखाव के कॉन्ट्रैक्ट में नाम बदलने को लेकर किसी तरह का कोई प्रावधान नहीं था.
इसके बाद भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण और मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निदेशक को इस सिलसिले में क़ानूनी नोटिस देकर एयरपोर्ट के नाम में 'अडानी' टैग जोड़ने को लेकर सवाल पूछा गया.
इस क़ानूनी लड़ाई का ये नतीज़ा निकला कि शुक्रवार को मंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम को पहले की तरह कर दिया गया.
दिलराज अल्वा ने बताया कि उन्होंने मंगलुरु एयरपोर्ट के फ़ेसबुक और ट्विटर एकाउंट दोनों ही जगहों पर बदलाव किए हैं.