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तालिबान के प्रवक्ता ने कहा काम पर लौटें महिला स्वास्थ्यकर्मी, उनके काम में नहीं डाली जाएगी कोई बाधा
विभुराज, मोहम्मद शाहिद, शुभम किशोर and कीर्ति दुबे
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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए आत्मघाती बम धमाके में अब तक कम से कम 90 लोगों के मारे जाने की सूचना आ रही है.
यहां हम आपको वो सब बता रहे हैं जो अब तक इस बारे में स्पष्ट हो सका है –

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अफ़ग़ानिस्तान के काबुल में गुरुवार को हुए धमाकों के बाद मेडिकल सुविधाओं की कमी की ख़बरें सामने आ रही हैं.
इस बीच तालिबान ने महिला स्वास्थ्यकर्मियों को काम पर लौटने को कहा है.
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद के ट्विटर हैंडल से लिखा गया, “इस्लामी अमीरात के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी महिला कर्मचारियों को केंद्र और प्रांतों में नियमित रूप से अपने काम पर लौटने को कहा है. इस्लामिक अमीरात की तरफ़ से उनके काम में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी.”
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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से ही इस बात पर चर्चा चल रही है कि क्या महिलाओं को नौकरी करने दी जाएगी या नहीं.
काबुल में प्रवेश के बाद अपनी पहली प्रेसवार्ता तालिबान प्रवक्ता ने कहा था कि महिलाओं को वही अधिकार मिलेंगे जो शरिया क़ानून में तय हैं.
ज़बीउल्लाह मुज़ाहिद ने कहा था, "हम शरिया व्यवस्था के तहत महिलाओं के हक़ तय करने को प्रतिबद्ध हैं. महिलाएं हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने जा रही हैं. हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि उनके साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा."
कई अन्य तालिबान लीडर भी महिलाओं को काम करने देने के बारे में बयान देते रहे हैं पर फ़िलहाल कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है.
ग़ौरतलब है कि हाल ही में देश राष्ट्रीय टीवी और रेडियो संस्थान में महिलाओं को काम करने से रोक दिया गया था.

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को एक रेप पीड़िता को आत्मदाह के लिए उकसाने के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को गिरफ़्तार कर लिया है.
इसके बाद पुलिस उन्हें हजरतगंज थाने ले गयी जहां मेडिकल कराए जाने के बाद उन्हें देर शाम मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. इसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
इस मामले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अमिताभ ठाकुर और बसपा सांसद अतुल राय के ख़िलाफ़ रेप पीड़िता और मामले में गवाह सत्यम राय को आत्महत्या के लिए उसकाने, उनके ख़िलाफ़ साजिश रचने और धमकी देने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.
इस मामले में पुलिस पहले भी ठाकुर से पूछताछ कर चुकी है.
शुक्रवार को ही अमिताभ ठाकुर ने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान किया था. वो पहले सीएम योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ चुनाव लड़ने का एलान भी कर चुके हैं.
उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें पुलिस ठाकुर को ज़बरदस्ती लेकर जाती हुई दिख रही है.
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि काबुल एयरपोर्ट पर हुआ हमला “दुखी करने वाला है.”
अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी मिशन की शुरुआत पूर्व राष्ट्रपति जॉज बुश के कार्यकाल में हुई थी. ओबामा ने भी राष्ट्रपति रहते हुए हज़ारों सैनिकों को वहां भेजा था.
ओबामा ने कहा कि अमेरिकी सैनिक “हीरो हैं जो मुश्किल परिस्थिति में लोगों की जान बचाने के मिशन में जुटे रहे.”
ओबामा ने एक बयान जारी कर कहा, “एक राष्ट्रपति के तौर पर उन अमेरिकी लोगों के साथ दुखी होने से बुरा कुछ नहीं है जिन्होंने इस देश की सेवा के लिए अपनी जान दे दी.”
उन्होंने कहा कि वो उन अमेरिकी और अफ़ग़ान परिवार के साथ हैं जिन्होंने अपने चाहने वालों को खो दिया.
“मैं उन अफ़ग़ान और अमेरिकी लोगों के बारे में सोच रहा हूं जिन्होंने अपने परिवार को खोया है, इनमें से कई अमेरिका के साथ ख़ड़े रहे और एक बेहतर ज़िदगी की उम्मीद में सबकुछ दांव पर लगाने को तैयार थे.”
अमेरिकी डिफेंस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2001 में संघर्ष की शुरुआत से अब तक अफ़ग़ानिस्तान में 2400 से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं.

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रूस के विदेश मंत्री सरगेई लावरोव ने काबुल में हमले के बाद पश्चिमी देशों की आलोचना की.
रोम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, “एक सबक सीखना होगा. किसी जगह पर विदेशी सिस्टम और आचरण थोपने के भयानक नतीजे हो सकते हैं.”
उन्होंने काबुल एयरपोर्ट पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में ज़रूरत है एक “अंतरिम सरकार” की जिसमें “सभी राजनीतिक ताकतें शामिल हों.”
एक ओर अमेरिका और यूरोपीय देश अपने लोगों को बाहर निकालने की कोशिश में लगे है, रूस उन चंद देशों में से है जो चिंतित नहीं दिख रहा.
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केरल में पिछले 24 घंटों मे कोविड-19 के 32,801 नए मामले दर्ज किए गए हैं.
इसके साथ ही 18,573 लोग बीमारी से ठीक हो गए और 179 लोगों की मौत हो गई. केरल में पॉज़िटिविटी रेट 19.22 दर्ज की गई.
पिछले कई दिनों से केरल में मामलों की संख्या देश के दूसरे राज्यों के कुल मामलों से अधिक रही है.केरल की सरकार की इसके लिए आलोचना भी हो रही है.
समाचार एजेंसी एनएनआई के मुताबिक केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के इस पर सफ़ाई देते हुए कहा, “अगर केरल का मॉडल ग़लत है तो कौन सा मॉडल सही है? केरल में किसी की भी ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत नहीं हुई है. किसी को भी मेडिकल सुविधा या बेड की कमी नहीं हुई है.”
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उन्होंने कहा कि कई लोग तथ्यों को नकार कर जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं.
“दूसरी लहर को लेकर अनावश्यक विवाद खड़े किए जा रहे हैं. कुछ लोग दूसरी लहर के आंकड़ों को लेकर लोगों में डर पैदा कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा कि पिछली तीन सीरो प्रेवेलेंस स्टडी में ये सामने आया है कि केरल में सबसे कम आबादी संक्रमित हुई है.
"हमने एक बूंद वैक्सीन भी बर्बाद नहीं की है और एक्सट्रा डोज़ भी लोगों को दिए हैं."

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने शुक्रवार को कहा कि तालिबान ने कहा है कि तुर्की काबुल एयरपोर्ट का संचालन करे लेकिन इस बारे में अभी तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ है.
बोस्निया के दौरे पर जाने से पहले इस्तांबुल के अतातुर्क एयरपोर्ट पर उन्होंने एक न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस के दौरान कहा, “तालिबान ने काबुल एयरपोर्ट का संचालन करने के लिए हमसे निवेदन किया है. हमने अब तक इस मसले को लेकर कोई फ़ैसला नहीं किया है.”
उन्होंने कहा, “प्रशासन (अफ़ग़ानिस्तान) के बारे में स्पष्ट हो जाने के बाद ही इस बारे में हम कोई फ़ैसला लेंगे.”
तालिबान के साथ तुर्की के प्रतिनिधियों की काबुल में तुर्की दूतावास में तीन घंटे से अधिक समय तक हुई बैठक का भी अर्दोआन ने ज़िक्र किया.

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हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बैठक कब हुई थी लेकिन उन्होंने कहा कि ‘अगर ज़रूरत हुई तो इस तरह की बैठकें फिर होंगी.’
राष्ट्रपति अर्दोआन ने बताया कि बुधवार को काबुल से शुरू हुई तुर्की के सैनिकों की वापसी जारी है. उन्होंने गुरुवार को हुए हमले की भी निंदा की.
जून में यह चर्चा जारी थी कि नेटो सेनाओं के देश छोड़ने के बाद तुर्की हामिद करज़ई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का संचालन संभाल सकता है लेकिन 15 अगस्त को तालिबान ने काबुल को भी अपने नियंत्रण में ले लिया था.
इसके बाद से एयरपोर्ट का संचालन फ़िलहाल अमेरिका के नियंत्रण में है.

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टोक्यो में जारी पैरालंपिक्स खेलों में महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी भविना पटेल ने भारत के लिए पहला पदक सुनिश्चित कर दिया है.
वो टेबल टेनिस क्लास 4 इवेंट के सेमीफ़ाइनल में पहुंच गई हैं जिसके बाद वो कांस्य पदक की दावेदार बन गई हैं.
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भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, अफ़ग़ानिस्तान से लौटने की इच्छा रखने वाले ज़्यादातर भारतीयों को निकाल लिया गया है.
हालांकि कुछ के अभी भी वहां फंसे होने की आशंका है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बाग्ची ने कहा, “हमारा आकलन यह है कि वहां से लौटने की इच्छा रखने वाले अधिकांश भारतीयों को निकाल लिया गया है. कुछ और के अफ़ग़ानिस्तान में होने की संभावना है. मेरे पास इसकी सटीक संख्या नहीं है.”
उन्होंने कहा, “अंतिम उड़ान में क़रीब 40 लोग थे. हम ऐसी खबरें सुन रहे थे कि अफ़ग़ान नागरिकों को हवाई अड्डे तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है. हम जानते हैं कि अफ़ग़ान सिख और हिंदुओं सहित कुछ अफ़ग़ान नागरिक 25 अगस्त को हवाई अड्डे पर नहीं पहुंच सके. हमें उनके बिना आना पड़ा.”
भारत आने वाले अफ़ग़ानों के संबंध में, विदेश मंत्रालय ने ई-इमरजेंसी वीज़ा की घोषणा की है. बाग्ची ने कहा कि ये छह महीने के वीज़ा हैं और वो फ़िलहाल छह महीने की वीज़ा व्यवस्था के तहत यहां आ रहे हैं.
तालिबान को मान्यता देने के सवाल पर बाग्ची ने कहा, "वर्तमान में, काबुल में सरकार बनाने वाली किसी भी गुट के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है. मान्यता के संबंध में कुछ भी अभी जल्दबाज़ी होगी.”
“हम स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं, हालात लगातार बदल रहे हैं.”
“हमने काबुल और दुशांबे से 6 अलग-अलग उड़ानों में 550 से अधिक लोगों को निकाला है. इनमें से 260 से अधिक भारतीय थे. भारत सरकार ने अन्य एजेंसियों के माध्यम से भारतीय नागरिकों को निकालने में भी मदद की. हम अमेरिका, ताजिकिस्तान जैसे अलग-अलग देशों के संपर्क में थे.”
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पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग के प्रमुख मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान के मसले पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.
प्रेस कॉन्फ़्रेंस की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि वो केवल सैन्य मसलों पर ही ख़ुद को सीमित रखेंगे.
उनका कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य हालात तेज़ी से बदले हैं और किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि इतनी तेज़ी से हालात बदलेंगे.
उनका कहना था कि सीमा पर पाकिस्तान की ओर हालात क़ाबू में हैं.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने सीमा सुरक्षा और इंटेलिजेंस में सहयोग के अलावा सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए कई बार पेशकश की थी, सिर्फ़ कुछ ही अफ़ग़ान अफ़सर यहां आए जबकि सैकड़ों ट्रेनिंग के लिए भारत गए.

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उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की शांति का मसला पाकिस्तान में शांति जारी रहने से जुड़ा है.
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान अब अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को निकालने का सबसे अहम हिस्सा है और 5,500 विदेशी लोगों को पाकिस्तान के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान से निकाला जा चुका है.
मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने कहा कि अफ़ग़ान जनता के बाद इस जंग से सबसे ज़्यादा नुक़सान पाकिस्तान को हुआ है.
उनका कहना था कि 80 हज़ार से ज़्यादा मौतें, 102 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है और अभी भी गिनती जारी है.

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कोरोना के मामलों में कमी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों को चरणबद्ध से खोलने का फ़ैसला किया है.
कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए 1 सितंबर से स्कूल फिर से खुलेंगे, वहीं कक्षा 6 से 8 के छात्र 8 सितंबर से स्कूल जाएंगे.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि किसी भी छात्र को स्कूल आने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.
सिसोदिया ने कहा, “छात्रों के स्कूल आने के लिए उनके माता-पिता की सहमति ज़रूरी होगी. अगर किसी के माता-पिता इजाज़त नहीं देते उसे स्कूल आने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा और उसे एबसेंट भी नहीं माना जाएगा.”
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केंद्रीय मंत्री नारायण राणे और शिव सेना के बीच ज़ुबानी जंग लगातार जारी है. अब केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि उन्हें शिव सेना और उसके नेताओं के बारे में बहुत कुछ मालूम है और वो उसको ‘एक एक करके’ बाहर लाएंगे.
किसी का भी नाम लिए बग़ैर उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि किसने भाई की पत्नी के ऊपर तेज़ाब फेंकने को कहा था.
पिछले सप्ताह रत्नागिरी ज़िले में ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को ‘थप्पड़ मारने’ की बात कही थी. इसके बाद मंगलवार को उन्हें गिरफ़्तार किया गया था जिसके कुछ घंटों बाद ही उन्हें ज़मानत मिल गई थी.
समाचार एजेंसी एएनआई से अपने बयान पर उन्होंने कहा है कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं कहा है.
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उन्होंने कहा, “मैंने कुछ ग़लत नहीं किया. वे (शिव सेना) ताक़त के मज़े ले रहे हैं तो उन्होंने मुझे गिरफ़्तार किया. महाराष्ट्र कोविड के मामले में नंबर वन है. कोविड के दौरान उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया. सुशांत सिंह (राजपूत) की हत्या हुई. दिशा सालियान की हत्या हुई और अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं.”
शुक्रवार को उन्होंने कहा, “मैंने उनके साथ 39 साल काम किया है. मैं उनके बारे में बहुत कुछ जानता हूं. मैं जानता हूं कि किसने किसको अपनी भाई की पत्नी पर ही तेज़ाब फेंकने को कहा था. यह किस तरह के संस्कार हैं?”
राणे ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत शिव सेना के साथ की थी और 1999 में वो राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. हालांकि, 2005 में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बहर कर दिया गया.
इसके बाद वो कांग्रेस में शामिल हुए थे और साल 2017 तक वो वहां पर रहे. 2017 में उन्होंने अपना दल महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष बनाया. 2018 में उन्होंने अपना समर्थन बीजेपी को दिया और बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया.
अक्तूबर 2019 में उन्होंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया. बीते महीने मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय का पद दिया गया था.

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काबुल एयरपोर्ट के नज़दीक़ गुरुवार को दो बम धमाकों के बाद बीती रात से डॉक्टर और नर्सें 150 घायल लोगों के इलाज में लगेहुए हैं.
तालिबान के नियंत्रण के बाद अस्पतालों में स्टाफ़ की कमी है और वहां पर मरीज़ों की भीड़ लगी हुई है.
अंतरराष्ट्रीय मेडिकल चैरिटी संस्था ‘इमर्जेंसी’, दकाबुल सर्जिकल सेंटर चलाती है. उसका कहना है कि उनके यहां दो घंटे के अंदर 60 घायल पहुंचे थे जिनमें से 16 की वहां आते ही मौत हो गई थी.
संस्था की अध्यक्ष रॉसेला मिचियो जो कि अफ़ग़ानिस्तान में नहीं हैं. उनका कहना है कि जो स्टाफ़ अपनी शिफ़्ट ख़त्म करके चले गए थे वो तुरंत मदद के लिए वहां पहुंचे.
बीबीसी के टुडे प्रोग्राम से उन्होंने कहा, “पूरी रात अस्पताल के तीन ऑपरेशन थिएटर में काम जारी रहा. अंतिम मरीज़ का ऑपरेशन सुबह 4 बजे किया गया था.”
उन्होंने बताया कि कुछ मरीज़ आईसीयू में हैं तो ‘स्थिति अभी भी कुछ गंभीर बनी हुई है.’
अस्पताल के मेडिकल कॉर्डिनेटर ने ट्विटर पर अपनी पोस्ट में लिखा है कि मरीज़ ‘डरे हुए हैं, उनकी आंखें एकदम सूनी हो चुकी हैं. हमने बहुत कम ही ऐसी स्थिति देखी है.’

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दिलीप कुमार शर्मा
गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
असम के डिमा हसाउ ज़िले में एक संदिग्ध चरमपंथी हमले में पांच लोगों की मौत हो गई है और एक व्यक्ति घायल हुआ है.
पुलिस ने इस हमले के पीछे चरमपंथी संगठनडिमासा नेशनल लिबरेशन आर्मी (डीएनएलए) के सदस्यों का हाथ होनेकी बात कही है.
पुलिस की एक जानकारी के अनुसार, यह हमला गुरुवारकी रात क़रीब 8.30 बजेदयांगमुख इलाके से गुज़र रहे ट्रकों पर किया गया.डीएनएलए के संदिग्ध चरमपंथियों ने सीमेंट बनाने की सामग्री और कोयले से लदे सात ट्रकों पर पहले अंधाधुंध फायरिंग की और बाद में ट्रकों को आग के हवाले कर दिया.
पुलिस ने और क्या बताया
पुलिस ने इस हमले में मरने वाले ट्रक चालकों और उनके खलासियों के शव बरामद किए हैं.

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पहाड़ी ज़िले डिमा हसाउ के पुलिस अधीक्षक जयंत सिंह ने बताया,"यह हमला रात के करीब साढ़े आठ बजे के आसपास हुआ. हमें अब तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार हथियार से लैस पांच लोग आए थे उन्होंने ही इस घटना को अंजाम दिया है. हमारा पूरा शक डीएनएलए के चरमपंथियों पर है. असम राइफल्स के जवानों के साथ मिलकर पुलिस हमलावरों के ख़िलाफ़ अभियान चला रही है."
गुवाहाटी से क़रीब 200 किलोमीटर दूर इस पहाड़ी ज़िले में चरमपंथी हमलों का लंबा इतिहास रहा है. लेकिन बीते कुछ सालों में डीएचडी जैसे कई खूंखार चरमपंथी संगठनों के कैडर सरकार के समक्ष हथियार समर्पण कर शांति वार्तामें लौट आए थे.
कौन है डीएनएलए
लेकिन डिमासाजनजाति समुदाय के लिए एक अलग राज्य की मांग उठाते हुए करीब डेढ़ साल पहले 2019 में डीएनएलएनामक यह संगठन सामने आया है. बीते कुछ महीनों में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में इस संगठन के कई कैडर मारे जा चुके हैं.
एक जानकारी के अनुसार डिमाहसाउ और कार्बी-आंगलोंग ज़िले में फिलहाल डीएनएलएके करीब 50 से 60 कैडर सक्रिय है.

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25 अगस्त 1989 को सुबह क़रीब 7:30 बजे गिलगित से इस्लामाबाद जा रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ़्लाइट नंबर 404 में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित कुल 54 लोग सवार थे. इनमे पांच दुधमुंहे बच्चे भी शामिल थे.
इस फ़्लाइट को गिलगित से रवाना हुए 32 साल बीत चुके हैं, लेकिन यह अभी तक लापता है.
उसके साथ क्या हुआ और किन परिस्थितियों में हादसा हुआ, इसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका है.नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ें पूरी स्टोरी.

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पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को कहा कि अगर उन्हें स्वतंत्रता के साथ फ़ैसले नहीं लेने दिए गए तो वो ‘किसी को नहीं छोड़ेंगे.’
सिद्धू ने कहा, “मैंने हाई कमांड से कहा कि वो मुझे फ़ैसले लेने दें और मैं ये सुनिश्चित करूंगा कि राज्य में अगले दो दशकों तक कांग्रेस तरक्की करे. नहीं तो मैं किसी को नहीं छोड़ूगा.”
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सिद्धू के बयान पर टिप्पणी करते हुए पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि वो मीडिया में लगाये जा रहे कयासों पर सिद्धू से सवाल नहीं करेंगे.
उन्होंने कहा, “मैं उस बयान का संदर्भ देखूंगा. वो पार्टी के अध्यक्ष हैं, उनके अलावा फ़ैसले कौन ले सकता है."
सिद्धू के बयान को उनके सलाहकार के इस्तीफ़े से जोड़कर देखा जा रहा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिद्धू को माली को सलाहकार पद से हटाने के लिए कहा गया था क्योंकि वो लगातार सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट कर रहे थे. शुक्रवार को माली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया.
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