काबुल: एयरपोर्ट के बाहर धमाके में कम से कम 60 की मौत, 140 ज़ख़्मी

काबुल एयरपोर्ट के पास हुए धमाके में कम से कम 60 लोगों की मौत हुई है और कम से कम 140 लोग ज़ख़्मी हुए हैं. कथित इस्लामिक स्टेट ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे, अनंत प्रकाश and विभुराज

  1. जातिगत जनगणना पर बीजेपी क्या चाहती है, खुलकर बताए: उपेंद्र कुशवाहा

    उपेंद्र कुशवाहा

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    बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जदयू के शीर्ष नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को कहा है कि बीजेपी को जातिगत जनगणना के मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट करनी चाहिए.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ उन्होंने कहा है कि, "इस मुद्दे पर बीजेपी में टकराव की स्थिति है. कुछ नेता इसके पक्ष में बात कर रहे हैं, वहीं कुछ नेता इसके ख़िलाफ़ हैं. उन्हें अपनी पार्टी में आम राय स्थापित करनी चाहिए."

    जदयू संसदीय दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का ये बयान तब आया है जब उनकी पार्टी के सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार ने कुछ दिन पहले इस मांग का समर्थन कर रहे अन्य दलों के नेताओं के साथ मिलकर पीएम मोदी से मुलाक़ात की है.

    विरोधियों को साथ लाने वाला मुद्दा

    बिहार एक ऐसा राज्य है जहां की राजनीति पर संख्या बल के लिहाज़ मजबूत ओबीसी समाज का प्रभुत्व रहा है.

    ऐसे में जब से केंद्र सरकार ने संसद में ये बताया है कि जनगणना के तहत एससी और एसटी जातियों की गणना पर विचार हो रहा है.

    इसके बाद से बिहार के राजनीतिक दल जातिगत जनगणना को लेकर एक साथ आते दिख रहे हैं.

    इस मुद्दे पर एक दूसरे के धुर विरोधी एनडीए सदस्य जदयू प्रमुख नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव भी एक सुर में बोलते दिख रहे हैं.

    बीजेपी की बिहार शाखा ने भी शुरुआत में इस मांग का समर्थन किया था.

    बीजेपी विधायकों ने बिहार विधानसभा में इस मुद्दे पर सर्वसम्मति से पास किए गए दो प्रस्तावों का समर्थन भी किया था.

    नीतीश कुमार

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    इमेज कैप्शन, पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद मीडिया से बात करते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

    बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने दिए संकेत

    लेकिन केंद्र सरकार ने हाल ही में संकेत दिया है कि शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे को अलग नज़र से देख रहा है.

    इस वजह से राज्य स्तर के नेताओं विशेषत: उच्च जातियों से आने वाले नेता जातिगत जनगणना को एक विभाजनकारी प्रक्रिया बताते हुए इसकी आलोचना कर रहे हैं.

    हाल ही में अपनी पार्टी आरएलएसपी का जदयू में विलय करने वाले कुशवाहा ने इस विचार पर अपना एतराज़ जताया कि जनगणना में अब ज़्यादा वक़्त नहीं बचा है, ऐसे में सभी जातिगत जनगणना को अगले एक दशक का इंतज़ार करना पड़ सकता है.

    वह कहते हैं, “इस डिजिटल एज में क्या समस्या है? आपको सिर्फ जाति के लिए एक नया खाना डालना है...मैं इस तरह की व्यर्थ की आपत्तियों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता. मुझे उम्मीद है कि पीएम के साथ हमारे सीएम की बैठक से नतीजा निकलेगा और केंद्र सरकार इस आवश्यकता को ध्यान में रखकर कदम उठाएगी.”

  2. केंद्र सरकार की नई ड्रोन पॉलिसी के बारे में जानें ख़ास बातें, नए ड्रोन नियमों को उदारीकृत ड्रोन नियम, 2021 कहा गया है

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    केंद्र सरकार ने गुरुवार को ड्रोन उड़ाने के नियमों को उदार बनाने का एलान किया है.

    नागर विमानन मंत्रालय ने गुरुवार को इस बारे में विस्तृत नियम जारी किए हैं. सरकार का दावा है कि नए नियमों को मार्च में जारी नियमों से काफी उदार बनाया गया है.

    मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, नए नियमों को ''उदारीकृत ड्रोन नियम, 2021'' का नाम दिया गया है.

    सरकार को उम्मीद है कि इससे 2030 तक भारत के ''वैश्विक ड्रोन हब'' बनकर उभरने में मदद मिलेगी.

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    पुराने नियम पांच महीने में ही रद्द हो गए

    इससे पहले, मार्च 2021 में नए नियम जारी किए थे. उन नियमों को ''मानवर​हित विमान प्रणाली (यूएएस) नियम, 2021'' कहा गया था.

    हालांकि उन्हें काफी कठोर और 'प्रतिबंधात्मक' माना जा रहा था. लोगों की नकारात्मक राय के बाद, महज पांच महीने में उन नियमों को रद्द करने का फ़ैसला लिया है.

    सरकार का दावा है कि नए नियमों से अर्थव्यवस्था के क़रीब सभी क्षेत्रों जैसे कृषि, खनन, बुनियादी ढांचे, परिवहन, रक्षा, निगरानी, पुलिस कार्य, ​​आपातकालीन सेवा, मैपिंग आदि को बहुत लाभ मिलेगा.

    उसका मानना है कि अपनी पहुंच, कई कामों में इस्तेमाल होने, और उपयोग में आसानी के चलते अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है. इससे भारत के पिछड़े और दुर्गम इलाकों को सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना जताई गई है.

    ड्रोन

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    नए ड्रोन नियमों की प्रमुख विशेषताएं

    • अब माइक्रो ड्रोन (गैर-व्यावसायिक उपयोग वाले) और नैनो ड्रोन के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी.
    • ड्रोन के आयात के लिए अब नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए की मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी. इसकी बजाय इसका आयात विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी डीजीएफटी के जरिए नियंत्रित किया जाएगा.
    • नए नियम में साफ किया है कि अब ग्रीन ज़ोन में ड्रोन उड़ाने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होगी. साथ ही अब फॉर्म की संख्या घटाकर 25 से केवल 5 कर दी गई है. वहीं ड्रोन पर लगने वाले शुल्क को 72 की बजाय अब केवल 4 कर दिया गया है.
    • अब येलो ज़ोन का दायरा एयरपोर्ट की 45 ​किलोमीटर की परिधि की बजाय केवल 12 किलोमीटर तक ही होगा. जबकि ड्रोन का वजन सीमा को 3 क्विंटल से बढ़ाकर 5 क्विंटल कर दिया गया है.
  3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सत्ता बदलते ही लोगों पर राजद्रोह केस दर्ज करने का चलन 'परेशान करने वाला' है

    सुप्रीम कोर्ट

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    सत्ता बदलने पर राजद्रोह जैसे मामले दर्ज करने को सुप्रीम कोर्ट ने ‘परेशान करने वाला चलन’ बताया है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस अधिकारी को गिरफ्तारी से सुरक्षा देते हुए ये बात कही.

    छत्तीसगढ़ सरकार ने निलंबित आईपीएस अधिकारी गुरजिंदर पाल सिंह के ख़िलाफ़ आय से अधिक संपत्ति के मामलों के अलावा, राजद्रोह केस और दो आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं.

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने छत्तीसगढ़ पुलिस को निर्देश दिया कि वे अपने ही निलंबित आईपीएस अधिकारी गुरजिंदर पाल सिंह को गिरफ्तार नहीं करेंगे.

    हालांकि उच्चतम न्यायालय ने सिंह को भी यह निर्देश दिया है कि वह जांच में सहयोग करें.

    सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा,‘’देश में यह चलन काफी परेशान करने वाला है और पुलिस विभाग भी इसके लिए जिम्मेदार है.

    ''जब एक राजनीतिक पार्टी सत्ता में आती है तो पुलिस अधिकारी भी सत्ताधारी पार्टी का पक्ष लेने लगते हैं और जब दूसरी पार्टी सत्ता में आती है तो वह उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने लगती है, इसे बंद करने की जरूरत है''

    पीठ के सदस्य जस्टिस सूर्यकांत नेराज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले चार हफ्तों में इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे और तब तक आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी.

  4. अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक में क्या कहा

    अफ़ग़ानिस्तान

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    अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर चर्चा के लिए बुलाए गए सर्वदलीय बैठक में केंद्र सरकार ने कहा कि वहां हालात चिंताजनक हैं और भारतीय नागरिकों को वापस लाना फिलहाल सर्वोच्च प्राथमिकता है.

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफ़ग़ानिस्तान की ताज़ा स्थिति के बारे में सभी राजनेताओं को इसकी जानकारी दी.

    पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी में हुई इस बैठक में डॉक्टर एस जयशंकर के अलावा केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता पियूष गोयल और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी मौजूद थे.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान से जितने ज़्यादा लोगों का लाना मुमकिन हैं, भारत इसकी कोशिश कर रहा है.

    सरकार ने ये भी बताया कि युद्ध प्रभावित अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति गंभीर रूप से चिंताजनक है और तालिबान ने दोहा समझौते में किए गए वादों को तोड़ दिया है.

    फरवरी, 2020 में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए दोहा समझौते में ये कहा गया था कि लोगों की लोकतांत्रिक और धार्मिक स्वतंत्रता को बरकरार रखा जाएगा और काबुल में ऐसी सरकार का गठन किया जाएगा जिसके तहत अफ़ग़ान समाज के सभी तबकों को सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.

    इस मीटिंग में एनसीपी नेता शरद पवार, राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी, द्रमुक के टीआर बालू, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल भी शामिल थीं.

  5. तुर्की ने अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू किया

    तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन

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    तुर्की ने घोषणा की है कि उसने अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है.

    नेटो के हिस्से के रूप में अफ़ग़ानिस्तान में तुर्की के 500 से अधिक सैनिक तैनात थे.

    इससे पहले, ये अनुमान लगाया गया था कि काबुल हवाई अड्डे को चलाने में मदद के लिए 31 अगस्त के बाद तुर्की की सैन्य उपस्थिति को बनाए रखा जा सकता है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने बुधवार को कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता की जरूरत है.

    उन्होंने कहा कि तुर्की इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में सभी पक्षों के साथ करीबी बातचीत जारी रखेगा.

  6. सरकार संपत्ति बेचने में व्यस्त है, अपना ख्याल खुद ही रखें: राहुल गांधी

    राहुल गांधी

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    देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को सरकार पर निशाना साधा है.

    उन्होंने व्यंग्य के लहज़े में सरकार के बारे में कहा कि वह सरकारी संपत्तियों की "बिक्री में व्यस्त" है, लिहाज़ा उन्हें अपना ध्यान ख़ुद ही रखना होगा.

    राहुल गांधी ने इस बारे में ट्विटर पर लिखा, "कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या चिंताजनक है. अगली लहर में गंभीर नतीज़ों से बचने के लिए टीकाकरण अभियान को और तेज करना चाहिए."

    उन्होंने आगे कहा, "कृपया अपना ख्य़ाल रखें, क्योंकि भारत सरकार अभी बिक्री में व्यस्त है."

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    राहुल गांधी केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं कि पिछले 70 साल में बनाई गए सरकारी संपत्तियों को वह ''संपत्ति मौद्रीकरण पाइपलाइन योजना'' के जरिए बेचती रही है.

    एक दिन में 46 हजार से ज़्यादा मामले सामने आए

    देश में पिछले 24 घंटों के दौरान 607 मौतों के साथ 46,164 लोग कोरोना से संक्रमित हुए.

    इससे देश में कोरोना के अब तक के मामलों की संख्या 3,25,58,530 तक जा पहुंची है,

    जबकि मरने वालों की संख्या 4,36,365 हो गई है.

    इस समय देश में सक्रिय मामलों की तादाद पहले से बढ़कर 3,33,725 हो गई है.

  7. अफ़ग़ानिस्तान को वित्तीय मदद किन-किन देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने रोकी?

    अफ़ग़ानिस्तान, तालिबान

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    अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण की परियोजनाओं के लिए विशेष अमेरिकी निरीक्षक के अनुसार देश के कुल बजट का 80 फीसदी हिस्सा विदेशी मदद से मिलता है.

    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद इस आर्थिक मदद के बंद हो जाने का खतरा मंडरा रहा है.

    अभी तक कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों, वित्तीय एजेंसियों और कुछ देशों ने अफ़ग़ानिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय मदद रोक दी है.

    • विश्व बैंक ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निमाण से जुड़ी परियोजनाओं से अपना हाथ खींच लिया है.
    • अगस्त में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की तरफ़ से अफ़ग़ान हुकूमत तो 440 मिलियन डॉलर की मदद मिलनी थी, जो अब अधर में लटक गई है.
    • अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान के सात अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को फ़्रीज़ कर दिया है.
    • जर्मनी ने भी अफ़ग़ानिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोकने का फ़ैसला किया है. इस साल वो अफ़ग़ानिस्तान को 300 मिलियन डॉलर देने वाला था. स्वीडन और फिनलैंड ने भी ऐसे ही कदम उठाए हैं.
    • यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के विकास के मद में दी जाने वाली आर्थिक सहायता रोक देगा. यूरोपीय संघ की तरफ़ से अफ़ग़ानिस्तान को साल 2021 से 2024 के बीच 1.4 अरब डॉलर की रकम मिलनी थी.
    अफ़ग़ानिस्तान, तालिबान

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    हालांकि दूसरी तरफ़ मानवीय सहायता के मद में दी जाने वाली मदद बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

    19 अगस्त को ब्रिटेन ने कहा था कि वो इस साल मानवीय सहायता के रूप में दी जाने वाली रकम को बढ़ाकर 268 मिलियन पाउंड कर देगा.

    हालांकि प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार ने अभी तक ये साफ़ नहीं किया है कि तालिबान के आने से इस राशि के भुगतान पर कोई असर पड़ेगा या नहीं.

    पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान के दान दाता संगठनों और देशों की एक कॉन्फ्रेंस में उसे 12 अरब डॉलर की सहायता राशि देने का वादा किया गया था.

    लेकिन सत्ता में बदलाव से इन भुगतानों पर क्या असर पड़ेगा, ये अभी तक साफ़ नहीं है.

  8. हमले की चेतावनी के बावजूद काबुल एयरपोर्ट के बाहर भारी भीड़: 'देश से बाहर निकलने के लिए मरने को तैयार हैं ये लोग'

    काबुल एयरपोर्ट के बाहर भीड़

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    अफ़ग़ानिस्तान में काबुल एयरपोर्ट के बाहर हमले के ख़तरे की चेतावनी दी गई है, लेकिन इससे एयरपोर्ट के बाहर भीड़ पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है.

    एक तरफ़ जहां काबुल एयरपोर्ट पर तैनात पश्चिमी देशों के सैनिक वहां भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ तालिबान लड़ाके एयरपोर्ट के बाहर सुरक्षा की निगरानी कर रहे हैं, जहां हजारों की संख्या में लोग अब भी मौजूद हैं.

    हालांकि तालिबान ने कहा था कि वे अफ़ग़ान नागरिकों को हवाई अड्डे पर नहीं जाने देंगे.

    हवाई अड्डे पर काम कर रहे एक अफ़ग़ान नागरिक उड्डयन अधिकारी के मुताबिक निर्देशों के बावजूद लोग अब भी एयरपोर्ट तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

    उन्होंने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "किसी भी आत्मघाती हमलावर के लिए भीड़-भाड़ वाली जगहों पर हमला करना बहुत आसान होता है और लोगों को बार-बार चेतावनी दी गई है."

    लेकिन अधिकारी के मुताबिक़ लोग जाने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा, "वे इस देश से बाहर निकलना चाहते हैं और वे इसके लिए अपनी जान देने के लिए तैयार हैं. सब अपनी जान से खेल रहे हैं."

    नेटो के एक राजनयिक ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि हालांकि तालिबान ने हवाई अड्डे के बाहर सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी ली है, लेकिन खुद को 'इस्लामिक स्टेट' कहने वाले चरमपंथी संगठन की वजह से पैदा हुए ख़तरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

    एक अन्य अधिकारी ने कहा कि बुधवार को लोगों को काबुल से बाहर निकालने का काम धीमा हो गया था, लेकिन गुरुवार को इसके तेज़ होने की उम्मीद है.

  9. सुप्रीम कोर्ट के लिए नौ जजों की नियुक्ति का प्रस्ताव केंद्र ने राष्ट्रपति को भेजा

    सुप्रीम कोर्ट

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    सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत में जजों की नियुक्ति के लिए नौ नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को मंज़ूरी के लिए भेजी है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ 34 जजों की क्षमता वाले सुप्रीम कोर्ट में इस समय दस पद रक्त हैं.

    न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि सरकार इस बारे में जल्द ही फ़ैसला ले सकती है. पिछले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहली बार तीन महिला जजों की नियुक्ति के लिए अपनी सिफ़ारिश भेजी थी.

    इनमें जस्टिस बीवी नागरत्न भी शामिल हैं जिनके नाम को अगर मंज़ूरी मिली तो वे सितंबर, 2027 में भारत की चीफ़ जस्टिस बनने वाली पहली महिला जज होंगी.

    कर्नाटक हाई कोर्ट की तीसरी सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस नागरत्न के अलावा तेलंगाना हाई कोर्ट की चीफ़ जस्टिस हिमा कोहली और गुजरात हाई कोर्ट की पांचवीं सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस बेला एम त्रिवेदी के नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट जज के लिए की गई है.

    इनमें से जस्टिस कोहली अगर सुप्रीम कोर्ट के लिए पदोन्नत नहीं हुईं तो वे एक सितंबर को रिटायर हो जाएंगी.

    भारत में हाई कोर्ट जजों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 62 साल है जबकि सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल पूरे होने पर रिटायर होते हैं.

    इन नामों के अलावा केरल हाई कोर्ट के जस्टिस सीटी रविकुमार, मद्राह हाई कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंद्रेश के नाम की सिफारिश कॉलेजियम ने की है.

    इनके अलावा सीनियर एडवोकेट और पूर्व एडिशनल सॉलिसीटर जनरल पीएस नरसिंह के नाम को अगर मंज़ूरी मिल गई तो वे छहे ऐसे वकील होंगे जिन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट लाया जाएगा.

    इनके साथ ही कुछ हाई कोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों के नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन के लिए की गई है. इनमें कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस श्रीनिवास ओका, गुजरात हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस विक्रम नाथ और सिक्किम हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी हैं.

  10. दक्षिण कोरिया बना ब्याज दर बढ़ाने वाला पहला बड़ा एशियाई देश

    कोरिया

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    दक्षिण कोरिया बड़ी अर्थव्यवस्था वाला पहला एशियाई देश बन गया है जिसनेकोरोना महामारी के बीच बैंक के ब्याज दर बढ़ाए है. बैंक ऑफ़ कोरिया ने अपने ब्याज की आधार दर 0.5 फ़ीसदी से बढ़ा कर0.75 फ़ीसदी कर दिया है.

    इसका उद्देश्य देश के घरेलू कर्ज़ और घर की कीमतों पर अंकुश लगाने में मदद करना है.जिनकी कीमतबीते कुछ महीनों में तेज़ी से बढ़ी है.

    दुनिया भर के केंद्रीय बैंक कोविड -19 संक्रमण के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश में जुटे हैं, यह कोशिश जारी है कि कैसे उच्च मुद्रास्फ़ीति जैसे आर्थिक जोखिमों को संभाला जा सके.

    बीते लगभग तीन सालों में ये पहली बार है जब बैंक ऑफ कोरिया ने अपनी मुख्य ब्याज दर बढ़ाई है. ये फ़ैसला ऐसे वक़्त में लिया गया है जब दक्षिण कोरिया कोविड के कारण पनपने वाले आर्थिक संकटों से निपटने की कोशिश कर रहा है.

    पिछले सप्ताह श्रीलंका ब्याज दरें बढ़ाने वाला एशिया का पहला देश बना.

  11. कोरोना लैब से फैला या जानवर से इसपर अमेरिका की इंटेलिजेंस रिपोर्ट क्या कहती है?

    कोरोना

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    कोरोनो वायरस महामारी की उत्पत्ति कैसे हुई? इसे लेकर राष्ट्रपति जो बाइडन के अनुरोध पर तैयार की गई एक अमेरिकी खुफ़िया रिपोर्ट किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है. अमेरिकी मीडया रिपोर्ट्स के ज़रिए ये जानकारी सामने आई है.

    एजेंसी की राय इस बात पर बंटी हुई है कि क्या ये वायरस किसी जानवर के जरिए इंसानों में फैला या फिर ये किसी लैब में हुए हादसे के कारण दुनिभर में फैल गया.

    इस रिपोर्ट का सार आने वाले दिनों में प्रकाशित किया जाएगा.

    चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए इसे ‘विज्ञान-विरोधी’ बताया है.

    वांग यी ने कहा, ‘’अमेरिका ने इस रिपोर्ट के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के रिसर्च को नज़रअंदाज़ कर दिया है. ये रिपोर्ट सिर्फ़ अमेरिका का ‘राजनीतिक उद्देश्य’ पूरा करने के लिए है.‘’

    कोरोना महामारी चीन के वुहान शहर में साल 2020 की शुरुआत में पहली बार सामने आई और देखते ही देखते दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत का कारण बन गई.

    कोरोना

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    क्यों वायरस की उत्पत्ति पर बना हुआ है रहस्य?

    तमाम देश कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन वैज्ञानिक यह पता लगाने में जुटे हैं कि वायरस की उत्पत्ति आख़िर कहाँ से हुई?

    वुहान का दौरा करने वाली विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम ने इस साल की शुरुआत में एक रिपोर्ट में कहा कि ‘अधिक संभावना है कि यह एक बाजार में बेचे गए जानवर से फैली.’

    रिपोर्ट वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से वायरस के ग़लती से लीक होने की संभावना को ख़ारिज करती है.

    इस इंस्टीट्यूट में एक दशक से अधिक समय तक चमगादड़ों में कोरोना वायरस का अध्ययन किया जा रहा था. विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट को कुछ वैज्ञानिकों ख़ारिज़ कर चुके है.

    इस साल मई में राष्ट्रपति बाइडन ने अमेरिकी इंटेलिजेंस को डेटा का अध्ययन करने और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 90 दिन का वक़्त दिया था ताकि‘ रिपोर्ट के ज़रिए एक तय निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके‘ कि आखिर इस महामारी की उत्पत्ति कैसे हुई है.

    ख़ुफिया जानकारी के मुताबिक़ वुहान लैब के कई शोधकर्ताओं को नवंबर 2019 में अस्पताल में भर्ती कराया गया थालेकिन इसके बावजूदचीन ने अपनी लैब की गहन जांच की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. चीन के इंकार को ही बाइडन के रिपोर्ट तैयार करने के फैसले के पीछे की मुख्य वजह माना जाता है.

  12. मोदी सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान पर चर्चा के लिए बुलाई सर्वदलीय बैठक

    मोदी

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    केंद्र सरकार ने गुरुवार को अफ़ग़ानिस्तान पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है, यह बैठक सुबह 11 बजे से शुरू होगी.

    बीते सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट के ज़रिए यह जानकारी साझा की थी कि विदेश मंत्रालय सभी दलों के नेताओं के साथ अफ़ग़ानिस्तान के मामले पर चर्चा करेगा और उन्हें मौजूदा हालात से अवगत कराया जाएगा.

    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्ज़े के बाद से ही भारत का इस पूरे घटनाक्रम को लेकर रुख़ क्या है इसे लेकर संशय बना हुआ है.

    बीते दिनों भारत ने अपने 146 नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी करायी है. अब तक अफ़ग़ानिस्तान से 700 से ज्यादा लोगों को भारत लाया गया है जिसमें सिख और हिंदू समुदाय के अफ़ग़ान नागरिक शामिल हैं.

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  13. अफ़ग़ानिस्तानः काबुल एयरपोर्ट को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन ने जारी की चेतावनी

    काबुल एयरपोर्ट

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    अमेरिका और ब्रिटेन ने सुरक्षा के ख़तरों के मद्देनज़र अपने नागरिकों को काबुल एयरपोर्ट की ओर ना जाने का चेतावनी दी है.

    आतंकवादी हमले की आशंका के बीच इन देशों ने अपने नागरिकों को एयरपोर्ट की ओर ना जाने को कहा है.

    बुधवार को दोनों ही देशों ने अपने उन हज़ारों नागरिकों के लिए एक एलर्ट जारी किया जो काबुल एयरपोर्ट के बाहर और भीतर मौजूद हैं और अपनी देश वापसी के लिए उड़ान भरने का इंतज़ार कर रहे हैं.

    बीते 10 दिनों में काबुल से 82,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, 31 अगस्त तक ये देश अफ़ग़ानिस्तान खाली करने की कोशिश में जुटे हुए हैं

    अमेरिकी विदेश सचिव एंटनी ब्लिंकन के मुताबिक़ तालिबान ने देश खाली करने की अवधि 31 अगस्त से अधिक बढ़ाने की मांग को ख़ारिज कर दिया है लेकिन उसका कहना है कि 31 अगस्त के बाद भी विदेशी और अफ़ग़ान नागरिक देश छोड़ सकेंगे.

    अपने एलर्ट में अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि जो लोग एयरपोर्ट के ईस्ट और नॉर्थ गेट पर इंतज़ार कर रहे हैं वह ‘तुरंत अफ़ग़ानिस्तान छोड़ दें.‘

    इससे पहले,ब्रिटेन ने इसी तरह का एलर्ट जारी करते हुए लोगों को "सुरक्षित स्थान पर जाने और आगे की सलाह का इंतजार करने" के लिए कहा था.

    ब्रिटेन के विदेश कार्यालय का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति 'अस्थिर बनी हुई है' और साथ ही कहा गया कि 'यहां आतंकवादी हमले का निरंतर और बड़ा ख़तरा' बना हुआ है.

    सुरक्षा ख़तरे को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ने कोई अन्य जानकारी नहीं दी है.

    मंगलवार को एक भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अमेरिका अपनी एयरलिफ़्ट की प्रक्रिया जल्द पूरी कर लेगा क्योंकि अफ़गानिस्तान में इस्लामिक स्टेट समूह का ख़तरा बढ़ता जा रहा है.

    बीते 24 घंटों में अमेरिकी उड़ानों से लगभग 19,000 लोगों को सुरक्षित अफ़ग़ानिस्तान से निकाला है.

    ब्लिंकन ने बुधवार को कहा,‘’हाल के दिनों में अराजकता के बढ़ते मंज़र के बीच एयरलिफ्ट किया गया है.

    साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका अभी भी इस महीने के अंत तक काबुल हवाईअड्डे पर अपना परिचालन पूरा करने की राह पर है.

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