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बाइडन ने बनाया कोविड-19 टास्क फोर्स, कहा, 'ज़िंदगियां' बचानी है तो मास्क लगाइए

बाइडन ने कहा कोरोना की दूसरी लहर का बुरा दौर आना अभी बाक़ी है. उन्होंने लोगों से मास्क इस्तेमाल करने की गुज़ारिश की.

लाइव कवरेज

  1. बाइडन के समर्थकों ने ट्रंप के समर्थकों को क्या संदेश दिया?

    अमेरिका में सामाजिक विभाजन की खाई को पाटना, जो बाइडन की उम्मीदवारी का एक महत्वपूर्ण विषय रहा.

    उन्होंने अपने सबसे हालिया संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘वे हर अमेरिकी के राष्ट्रपति होंगे.’ साथ ही यह भी कि ‘वे अमेरिकी मूल्यों को फिर से स्थापित करने का प्रयास करेंगे’, जिनसे खिलवाड़ करने का आरोप वे डोनाल्ड ट्रंप पर लगाते रहे हैं.

    हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे उन सात करोड़ लोगों के लिए ‘ख़ुशी का मौक़ा’ शायद नहीं होंगे, जिन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को अपना वोट दिया.

    पर जो लोग शनिवार को व्हाइट हाउस के क़रीब जमा हुए, वो इसे एक अच्छे संदेश के रूप में देख रहे हैं.

    बीबीसी संवाददाताओं की एक टीम ने वॉशिंगटन में जो बाइडन के कुछ समर्थकों से पूछा कि ‘अब जब डेमोक्रैटिक पार्टी की चुनाव में जीत पक्की हो गयी है, तो वो रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?’

    कई ने कहा कि ‘आने वाले दिनों में हर घर-परिवार में होने वाली चर्चा का ढर्रा बदलेगा.’ एक महिला समर्थक ने कहा कि ‘मुझे विश्वास है कि जो बाइडन हर अमेरिकी के राष्ट्रपति साबित होंगे. जो लोग चुनाव में उनके साथ नहीं थे, उन्हें उन पर विश्वास करना चाहिए.’

    इस महिला ने बताया कि उनके परिवार के बहुत से सदस्य मियामी और फ़्लोरिडा में रहते हैं जो डोनाल्ड ट्रंप के पिछड़ने का विलाप कर रहे हैं.

    यहीं एक 55 वर्षीय समर्थक जो अब तक रिपब्लिकन पार्टी के कट्टर समर्थक रहे, उन्होंने इस चुनाव में अपनी पार्टी बदली. वे अपने रुझान में आये इस बदलाव को ‘समझौता’ कह रहे थे. उन्होंने कहा कि 'कट्टर विचारधारा से अमेरिका जैसा देश आगे नहीं बढ़ सकता.'

    पर बहुत से लोगों ने स्पष्ट रूप से यही संदेश दिया कि ‘हमें नस्लवादी एजेंडे को पीछे छोड़ना ही होगा और आपसी प्रेम पर ज़ोर देना होगा.’

  2. कमला हैरिस की माँ के तमिलनाडु स्थित गाँव में ख़ुशी की लहर

    अमरीका के उप-राष्ट्रपति पद के लिए कमला हैरिस की अनुमानित जीत की ख़बर के बाद तमिलनाडु में उनके पुरखों के गाँव में उत्साह का माहौल है.

    चेन्नई से क़रीब 350 किलोमीटर दूर थुलासेन्द्रपुरम गाँव में हैरिस के नाना पीवी गोपालन रहते थे.

    बीते मंगलवार को उनकी जीत के लिए विशेष पूजा भी आयोजित की गई थी.

    आज यहां लोग हैरिस के लिए बधाई संदेश के पोस्टरों के साथ खुशी मना रहे हैं.

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, ट्रंप की टीम लड़ने के लिए है तैयार

    सीबीएस न्यूज़ की ख़बर के मुताबिक़, ट्रंप की प्रचार टीम ने अब भी उम्मीद नहीं छोड़ी है.

    कैंपेन के वरिष्ठ अधिकारी ने सीबीएस को बताया कि उन्हें शुरू से पता था कि ये ज़रूरत से ज़्यादा लंबा मुक़ाबला होगा. उन्होंने कहा कि जब तक आगे का रास्ता है, चार साल और की उम्मीद भी बाक़ी है.

    जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप की महत्वपूर्ण राज्यों में दी गई क़ानूनी चुनौती सफल होगी तो अधिकारी ने कहा कि कुछ भी हो सकता है और ट्रंप ने इससे भी ज़्यादा आक्रामक चीज़ें पहले की हैं.

    अधिकारी ने कहा कि कैंपेन के मुख्य दफ्तर में किसी को बाइडन की मीडिया की दी गई अनुमानित जीत पर हैरानी नहीं हुई. वे लड़ने के लिए तैयार हैं और ट्रंप की ‘वोटर फ्रॉड’ हॉटलाइन पर काम कर रहे हैं.

  4. अमेरिका चुनाव: डोनाल्ड ट्रंप पर बाइडन के भारी पड़ने की पाँच वजहें

  5. पाकिस्तान में बाइडन और कश्मीर पर उनके नज़रिए की चर्चा गर्म

  6. अमेरिकी चुनाव: डोनाल्ड ट्रंप ने हार नहीं मानी तब क्या होगा

  7. बाइडन का राष्ट्रपति बनना मोदी सरकार के लिए कैसा?

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बाइडन को राष्ट्रपति चुनाव में जीत की बधाई दी है. पीएम मोदी ने जो बाइडन की जीत को शानदार बताया है. भारतीय प्रधानमंत्री ने कमला हैरिस को भी बधाई दी और भारत से उनकी जड़ों को भी याद किया. कमला हैरिस की माँ तमिलनाडु की थीं.

    मोदी ने ट्विटर पर लिखा है, ''आपकी कामयाबी बेहतरीन है. आपकी जीत से न केवल भारत स्थित आपके रिश्तेदारों गौरवान्वित हैं बल्कि सभी भारतीय-अमेरिकी नागरिकों के लिए गौरव का पल है. मोदी और ट्रंप की दोस्ती की चर्चा तो पूरे कार्यकाल में रही लेकिन बाइडन प्रशासन के साथ कैसे रिश्ते बनते हैं ये देखना बाक़ी है. हलांकि कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका अहम साझेदार हैं ऐसे में सरकार बदलने से भारत के साथ रिश्तों पर असर नहीं पड़ेगा.

    बाइडन ने कश्मीर और सीएए पर जताई थी चिंता

    हालांकि बाइडन ने अपने चुनावी कैंपेन में कश्मीर और सीएए को लेकर चिंता ज़ाहिर की थी. बाइडन ने चुनावी कैंपेन के दौरान अपना पॉलिसी पेपर जारी किया था. उसमें सीएए और कश्मीर में मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई थी. जो बाइडन ने कहा था कि कश्मीरियों के सभी तरह के अधिकार बहाल होने चाहिए.

    बाइडन ने कहा था कि कश्मीरियों के अधिकारों को बहाल कराने के लिए जो भी क़दम उठाए जा सकते हैं उसे भारत उठाए. इसके साथ ही बाइडन ने भारत के नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए को लेकर भी निराशा ज़ाहिर की थी. बाइडन ने नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न यानी एनआरसी को भी निराशाजनक कहा था.

    जो बाइडन की कैंपेन वेबसाइट पर प्रकाशित एक पॉलिसी पेपर में कहा गया था, ''भारत में धर्मनिरपेक्षता और बहु-नस्ली के साथ बहु-धार्मिक लोकतंत्र की पुरानी पंरपरा है. ऐसे में सरकार के ये फ़ैसले बिल्कुल ही उलट हैं.''

    जो बाइडन का यह पॉलिसी पेपर एजेंडा फ़ॉर मुस्लिम-अमरीकन कम्युनिटीज़ टाइटल से प्रकाशित हुआ था. कश्मीर को लेकर बाइडन के इस पॉलिसी पेपर में कहा गया था, ''कश्मीर लोगों के अधिकारों को बहाल करने के लिए भारत को चाहिए कि वो हर क़दम उठाए. असहमति पर पाबंदी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना, इंटरनेट सेवा बंद करना या धीमा करना लोकतंत्र को कमज़ोर करना है.''

    इस पेपर में कश्मीर के साथ चीन के वीगर मुसलमानों और म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर भी बात कही गई थी. बाइडन के पॉलिसी पेपर में लिखा गया था, ''मुस्लिम बहुल देशों और वे देश जहां मुसलमानों की आबादी अच्छी-ख़ासी है, वहां जो कुछ भी हो रहा है उसे लेकर अमरीका के मुसलमान चिंतित रहते हैं. मैं उनके उस दर्द को समझता हूं. पश्चिमी चीन में वीगर मुसलमानों को निगरानी कैंपों में रहने पर मजबूर करना बहुत ही शर्मनाक है. अगर बाइडन अमरीका के राष्ट्रपति बनते हैं तो वो शिन्जियांग में नज़रबंदी कैंपों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएंगे. राष्ट्रपति के तौर बाइडन इसे लेकर कोई ठोस क़दम उठाएंगे. म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ जो कुछ भी हुआ और हो रहा वो वीभत्स है. इससे शांति और स्थिरता दांव पर लगी है.''

    ट्रंप ने भी दिए थे झटके

    हालांकि ट्रंप की भी कई ऐसी नीतिया रही हैं जिनसे भारत को नुक़सान हुआ है. ट्रंप सरकार ने अपनी प्रिफ्रेंशियल ट्रेड पॉलिसी (कारोबार में तवज्जो) के जनरल सिस्टम ऑफ़ प्रिफरेंसेज़ में से भारत को बाहर कर दिया था. इस नीति की वजह से भारत से अमरीका जाने वाले 1930 उत्पाद अमरीका में आयात शुल्क देने से बच जाते थे. साल 1970 के दशक में अमरीकी सरकार ने विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के मंसूबे के साथ इस नीति को अपनाया था. इसके अलावा एचबी1 वीज़ा पर भी ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ रही हैं.

    लेकिन ट्रंप प्रशासन सीएए, एनआरसी और कश्मीर को लेकर चुप रहा था. इस मामले में पाकिस्तान ने अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश की थी लेकिन ट्रंप प्रशासन पर इसका असर नहीं पड़ा था.

  8. बाइडन ने ट्रंप समर्थकों को भी आश्वस्त किया

    बाइडन ने ट्रंप समर्थकों को भी संबोधित किया. उन्होंने कहा, “एक-दूसरे को एक मौक़ा देकर देखते हैं. अब वक़्त है कि हम कड़वाहट भरी बयानबाज़ी से दूर रहें. एक-दूसरे से दोबारा मिलें, एक-दूसरे को दोबारा सुनें..अपने प्रतिद्वंद्वियों को दुश्मन मानना छोड़ें.” “मैं उन सबके लिए भी उतनी ही मेहनत से काम करूंगा जिन्होंने मुझे वोट नहीं दिया.”

    बाइडन ने कहा कि उनका पहला काम कोरोना महामारी पर नियंत्रण करना होगा. बाइडन ने एक आशावादी संदेश के साथ अपने भाषण का अंत किया. आख़िर में उन्होंने कहा, “भरोसा फैलाइए. आप सभी को प्यार, ब्लैस अमेरिका.” इसके बाद उनके परिवार वाले स्टेज पर आए. आतिशाबाज़ी की गई.

  9. तोड़ने नहीं जोड़ने का काम करूंगा: बाइडन

    बाइडन ने कहा, “आप लोगों ने जो भरोसा मुझमें दिखाया है, उसे देख मैं बहुत खुश हूं. मैं ऐसा राष्ट्रपति बनने का वादा करता हूं जो तोड़ने की बजाय जोड़ने का काम करेगा. जो लाल रंग वाले राज्य या नीले रंग वाले राज्य नहीं देखेगा बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका देखेगा. मैं दिल से कोशिश करूंगा कि आप सबका भरोसा जीत सकूं.”

    बाइडन ने अफ्रीकी-अमरीकी वोटरों का ख़ासतौर से धन्यवाद किया जिनकी वजह से उनके प्रचार को बढ़त मिली जब वो शुरुआती मुक़ाबले में पिछड़ रहे थे.

    बाइडन ने कहा कि उनका पहला काम कोरोना वायरस की महामारी को नियंत्रित करना होगा. बाइडन ने कहा, ''सोमवार को मैं एक ग्रुप की घोषणा करूंगा, जिनमें शीर्ष के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ हमारे कोविड प्लान को लेकर काम करेंगे. इस प्लान को 21 जनवरी 2020 से लागू किया जाएगा.''

    बाइडन ने कहा कि अमेरिका में ऐसा अब तक कभी नहीं हुआ है कि हमने कोशिश की और वो काम नहीं हुआ.

    कमला हैरिस अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति बनी हैं और उनका भाषण प्रमुख रूप से ऐतिहासिक तेवर का था. कमला ने अपने भाषण में कहा कि भले वो अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति हैं लेकिन आख़िरी नहीं हैं. कमला ने कहा कि उनकी जीत से देश भर की महिलाओं के बीच एक संदेश जाएगा कि असंभव कुछ भी नहीं है.

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, यह जीत लोगों की है- बाइडन

    बाइडन ने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अपने पहले भाषण में कहा, ''अमेरिका की जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है. यह जीत आपकी है. हमें 7.4 करोड़ वोट मिले हैं और इतना वोट आज तक किसी को नहीं मिला.''

    बाइडन ने कहा, ''आपने मेरे ऊपर भरोसा जताया है. इसे मैं विनम्रता से स्वीकार करता हूं. मैं अमेरिका का राष्ट्रपति हूं और सबको साथ लेकर चलूंगा. मैं रेड स्टेट और ब्लू स्टेट के रूप में नहीं देखता. अमेरिका का राष्ट्रपति हूं. मैं किसी पार्टी का राष्ट्रपति नहीं हूं. हम सब साथ मिलकर काम करेंगे. मैं इस मुल्क की रीढ़ को फिर से खड़ा करूंगा.''

  11. आपने उम्मीद को चुना है: कमला हैरिस

    कमला हैरिस ने कहा, ''आपने उम्मीद, मर्यादा, विज्ञान और सच को चुना है. आपने जो बाइडन को अगला राष्ट्रपति चुना है.''

  12. कमला हैरिस दे रहीं हैं भाषण

    जो बाइडन के साथ कमला हैरिस भी हैं. पहले कमला हैरिस भाषण दे रही हैं. कमला ने जो बाइडन को बधाई दी. कमला ने कहा कि लोकतंत्र स्टेट नहीं एक्ट होता है. कमला हैरिस ने भाषण देते हुए अपने परिवार और भारतीय माँ को याद किया.

    कमला ने अपनी माँ याद को याद किया. ब्लैक, एशियाई, व्हाइट, लातिनी महिलाओं को भी याद उन्होंने याद किया. कमला हैरिस ने कहा, “वे सब हमारे लोकतंत्र की रीढ़ की हड्डी हैं. वो औरतें जिन्होंने सौ साल पहले 19वें संशोधन के लिए लड़ाई की, 55 साल पहले वोटिंग के अधिकार के लिए संघर्ष किया और आज 2020 युवा पीढ़ी जो वोट कर रही है.” “मैं इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हो सकती हूं लेकिन मैं आख़िरी नहीं हूं.”

  13. ब्रेकिंग न्यूज़, राष्ट्रपति चुने जाने के बाद पहला भाषण देंगे बाइडन

    बीबीसी के अनुमान के मुताबिक़ डेमोक्रैटिक पार्टी के जो बाइडन राष्ट्रपति चुनाव जीत गए हैं. वो कुछ ही देर में अपनी रनिंगमेट कमला हैरिस के साथ पहला भाषण दे सकते हैं.

    भारतीय मूल से जुड़ी कमला हैरिस अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनने जा रही हैं. जो बाइडन बराक ओबामा के शासनकाल में उपराष्ट्रपति थे. ट्रंप के कैंपेन का कहना है कि अभी चुनाव ख़त्म नहीं हुआ है और उनकी टीम क़ानूनी लड़ाई शुरू करेगी.

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