अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव: 2016 के मुक़ाबले इस बार कैसा रहा नतीजा

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जो बाइडन ने कहा है कि वो सभी अमेरिकी नागरिकों के राष्ट्रपति होंगे न कि जिन्होंने वोट किया है केवल उनके. जो बाइडन ने ऐसा कहकर चुनाव के बाद टकराव की आशंका को कम करने की कोशिश की है.

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इसमें कोई शक नहीं है कि आपने इस साल पोस्टल बैलट के बारे में बहुत कुछ सुना होगा.
पोस्ट के ज़रिए वोट डालना कोई नई बात नहीं है. 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनावों में कुल मतदान में एक चौथाई पोस्टल बैलट के ज़रिए मतदान था.
लेकिन इस साल कोविड-19 महामारी के कारण अमेरिकी बाहर निकलने में हिचकिचा रहे थे जिसके कारण पोस्टल बैलट मतदान बहुत अधिक हुआ.
कुछ राज्यों ने मेल-इन बैलट को आते ही गिनना शुरू कर दिया था, कुछ ने चुनाव से एक दिन पहले मतगणना शुरू की थी जबकि बाकियों ने चुनाव के दिन तक इसकी गणना नहीं शुरू की थी.
बाइडन और ट्रंप की चुनावी जंग के प्रमुख राज्य पेंसिलवेनिया और विस्कॉन्सिन में बैलट की गणना चुनाव के दिन ही शुरू हुई जिसकी प्रक्रिया साधारण मतगणना से ज़्यादा लंबी है.
वहीं, मिशिगन के प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेताया है कि उसे सभी वोट गिनने में शुक्रवार तक का समय लग सकता है. अब ब्लूमबर्ग न्यूज़ का कहना है कि इन प्रमुख राज्यों से अंतिम परिणाम बुधवार शाम तक आएंगे.
ट्रंप ने एक ट्वीट करके अस्पष्ट दावा किया है कि लोग ‘चुनाव परिणाम चुराना’ चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने कोई सबूत पेश नहीं किया है लेकिन कहा है कि ‘चुनाव समाप्त होने के बाद मतदान नहीं किया जा सकता है.’
महामारी के कारण इस साल कई राज्यों ने अपने क़ानून में बदलाव किया है. मतगणना में अधिक समय लगेगा क्योंकि अधिकतर लोगों ने डाक से मेल भेजा है.
अधिकतर राष्ट्र और राज्य आधारित शोध दिखाते हैं कि इसमें अलग-अलग मामले हो सकते हैं लेकिन धांधली जैसा होना बहुत मुश्किल है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मतगणना के बीच ट्वीट कर अपने प्रतिद्वंद्वी पर 'चुनाव की चोरी' का आरोप लगाया है.
ट्रंप ने लिखा - “हम आगे हैं लेकिन वे चुनाव परिणाम हमसे चुराना चाहते हैं. हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे, चुनाव ख़त्म होने के बाद वोट नहीं डाले जा सकते.”
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप का चुनावी अभियान देखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमरीका में बीबीसी के सहयोगी सीबीएस नेटवर्क से कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप आज रात ‘अपनी मज़बूती’और ‘अपने नज़रिए’को दिखाना चाहते हैं.
ट्विटर ने उनके ट्वीट पर निर्देश लिखे हैं कि चुनाव या दूसरी नागरिक प्रक्रिया के तहत इस ट्वीट की कुछ या सभी सामग्री विवादित और भ्रामक हो सकती हैं.
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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के आ रहे परिणाम के दौरान डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडन ने भाषण दिया है. उन्होंने कहा है कि वो अभी जहां पर हैं इसे देखकर ख़ुश हैं.
वो कहते हैं, “विस्कॉन्सिन और मिशिगनको लेकर ख़ुश हैं. चुनाव तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक कि हर एक बैलट गिन नहीं लिया जाता.”
“हमें लग रहा है कि हम जीतने जा रहे हैं, आपका धैर्य सराहनीय है, हम अच्छा महसूस कर रहे हैं. नतीजे आने में समय लगेगा, वोट गिने जाने में समय लगेगा क्योंकि हर वोट गिना जाएगा, डाक से भेजे गए वोट भी. मैं या ट्रंप घोषित नहीं कर सकते कि कौन जीता, यह अमरीकी जनता तय करेगी.”
अमेरिका में ट्रंप फिर बनेंगे राष्ट्रपति या फिर बाइडन को मिलेगी कुर्सी. जानकारों के साथ चर्चा कर रही हैं बीबीसी संवाददाता सारिका सिंह.


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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जैसे-जैसे वोटों की गिनती जारी है वैसे-वैसे प्रमुख राज्यों में दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच अप्रत्याशित रूप से कांटे की टक्कर जारी है.
जीत के लिए सबसे ज़रूरी फ़्लोरिडा राज्य में 97 फ़ीसदी मतों की गणना के बाद डोनाल्ड ट्रंप की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन पर तीन पॉइंट की बढ़त है. वहीं, एरिज़ोना में जो बाइडन आगे हैं जिसे कंज़रवेटिव राज्य माना जाता रहा है.
इसके अलावा दोनों उम्मीदवारों की नॉर्थ कैरोलाइना में कड़ी टक्कर है.
बीबीसी के नॉर्थ अमेरिका संपादक का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप का प्रदर्शन अभी तक अनुमान से कहीं बेहतर है.
एरिज़ोना डेमोक्रेट्स के पास जा सकता है लेकिन जो बाइडन के व्हाइट हाउस में पहुंचने के लिए मध्य-पश्चिम राज्यों के परिणामों पर काफ़ी कुछ निर्भर करेगा. कई अमरीकियों ने पोस्ट बैलट से मतदान किया है जिसके कारण कई राज्यों को परिणाम घोषित करने में कई दिन लगेंगे.

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अगर आपने अभी अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम जानने शुरू किए हैं तो हम आपको ताज़ा अपडेट बताते हैं.
ऐसा अनुमान है कि दोनों उम्मीदवार 100-100 से अधिक इलेक्टोरल कॉलेज वोट हासिल कर चुके हैं.
31 राज्यों के आए संभावित परिणामों के अनुसार, बाइडन 192 और ट्रंप 114 वोट हासिल कर चुके हैं जबकि जीत का जादुई आंकड़ा 270 है.
वक़्त धीरे-धीरे गुज़र रहा है और किसी की जीत की भविष्यवाणी करना बहुत जल्दबाज़ी होगी. अब मध्य-पश्चिमी राज्यों पर नज़रें होंगी.
कहां पर किसको है बढ़त:


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दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष तरीक़े से होता है. इसका यही मतलब है कि कुछ इलाक़ों या वोटरों की अहमियत दूसरे इलाक़ों या वोटरों से ज़्यादा साबित होती है.
इस बार के चुनाव में व्हाइट हाउस में जीत कर वही उम्मीदवार पहुँचेगा या फिर वहां वही बरक़रार रह पाएगा, जिसे 538 में से कम से कम 270 इलेक्टोरल कॉलेज के वोट मिलेंगे.
अमेरिका में आबादी के हिसाब से हर प्रांत के वोट निर्धारित होते हैं. जो भी उम्मीदवार उस इलाक़े का सबसे ज़्यादा पॉपुलर वोट हासिल कर लेता है, अमूमन वही सारे इलेक्टोरल वोट ले जाता है.
अमेरिकी चुनावों में सबकी नज़र इस बात पर रहती है कि कहां यह ट्रेंड यह साफ़ नहीं है. इसका मतलब लोग यह देखते हैं कि किसी को जिताने में यह अस्पष्ट रुझान कितना अहम रोल निभाएगा.
इन राज्यों को 'पेंडुलम स्टेट' या 'हिंज' कहा जाता है. इस बार के चुनाव में इनकी संख्या दस से भी ज़्यादा है.
बीबीसी उन छह राज्यों के बारे में आपको बताना चाहता है जो निर्णायक साबित हो सकते हैं. ये राज्य हैं- नॉर्थ कैरोलाइना, फ्लोरिडा, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन, विस्कॉन्सिन और एरिज़ोना.
दो अन्य राज्यों, जॉर्जिया और टेक्सस में आबादी के स्वरूप में बदलाव से मुक़ाबला बहुत कड़ा है.


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अमेरिकी चुनाव में सिर्फ़ ट्रंप और बाइडन के बीच टक्कर पर ही सबका ध्यान है जबकि इस चुनाव में कांग्रेस के नए सदस्यों के लिए भी मतदान हुए हैं.
अमरीकी संसद यानी कांग्रेस के निचले सदन पर हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण हैं.
इसके साथ ही वह सीनेट में भी अपनी बढ़त बनाना चाहते हैं. अगर डेमोक्रेट्स का दोनों सदनों में नियंत्रण हो जाता है तो वह ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने पर उनकी योजना में अड़ंगा डाल सकते हैं.
हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स की सभी 435 और सीनेट की 33 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं.
सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैक्कोनल दोबारा चुनाव जीत गए हैं जबकि उनकी पार्टी 12 राज्यों में सीट बचाने की कोशिश कर रही है. रिपब्लिकन पार्टी कोलोराडो में अपनी सीट हार गई है.
इसके अलावा अमरीका के लोग 11 राज्यों में नए गवर्नर भी चुन रहे हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के शुरुआती नतीजे बताते हैं कि कई राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन के बीच कड़ी चुनौती है.
फ़्लोरिडा में डोनाल्ड ट्रंप जो बाइडन पर संभावित रूप से निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं. हालांकि जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया, विस्कॉन्सिन, मिशिगन, एरिज़ोना, ओहायो, टेक्सास और नॉर्थ कैरोलाइना के परिणामों पर काफ़ी कुछ निर्भर करता है.
मंगलवार को चुनाव से पहले हुए मतदान में 10 करोड़ से अधिक लोगों ने अपना वोट दिया था जो अमरीकी इतिहास में एक सदी में सबसे अधिक मतदान है.
राष्ट्रपति पद के अलावा कांग्रेस पर किसका क़ब्ज़ा होगा यह भी देखना दिलचस्प होगा. व्हाइट हाउस के साथ-साथ रिपब्लिकन्स सीनेट में बरक़रार रहना चाहते हैं.
ऐसा अनुमान है कि हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण में रहेगा.
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष तरीक़े से होता है. इसका यही मतलब है कि कुछ इलाक़ों या वोटरों की अहमियत दूसरे इलाक़ों या वोटरों से ज़्यादा साबित होती है.

मैज़ी अभी सिर्फ़ 17 साल की हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने के लिहाज़ से वो काफी छोटी हैं लेकिन वो चाहती हैं कि उनकी आवाज़ तो कम से कम सुनी जाए.

व्हाइट हाउस के आस-पास का माहौल शांत है. अमेरिका में अधिकतर जगहों पर मतदान समाप्त हो चुके हैं.

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इस बार के चुनाव में व्हाइट हाउस में जीत कर वही उम्मीदवार पहुँचेगा या फिर वहां वही बरक़रार रह पाएगा, जिसे 538 में से कम से कम 270 इलेक्टोरल कॉलेज के वोट मिलेंगे.
चुनावी प्रक्रिया के दौरान एक शख़्स उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की तरह ड्रेस-अप होकर पहुंचे. उन्होंने कहा कि वो ट्रंप का समर्थन करने आए हैं.

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हालांकि कुछ ऐसे भी थे जो ट्रंप को समर्थन करने के लिए नहीं थे.

अमेरिका में आबादी के हिसाब से हर प्रांत के वोट निर्धारित होते हैं. जो भी उम्मीदवार उस इलाक़े का सबसे ज़्यादा पॉपुलर वोट हासिल कर लेता है, अमूमन वही सारे इलेक्टोरल वोट ले जाता है.
मतदान के दौरान अलग-अलग रूप-रंग में नज़र आए.

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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए 50 राज्यों में मतदान केंद्र नौ अलग-अलग टाइमज़ोन के मुताबिक़ अलग-अलग जगहों पर खुले. ऐसा अनुमान है कि इस बार के मतदान में लोगों की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से ज़्यादा रहेगी.

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अमेरिका के कई हिस्सों में मतदान अब भी हो जारी हैं. हालांकि कुछ राज्यों से शुरुआती रुझान और नतीजे आना शुरू हो चुके हैं.

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पोलिंग बूथ पर कुछ लोग अपने पालतू जानवरों के साथ भी पहुंचे.

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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए स्विंग स्टेट को जीतना ज़रूरी होता है. यही राज्य आपकी किस्मत का अंतिम फ़ैसला करते हैं.
स्विंग स्टेट उन राज्यों को कहा जाता है जिनके मतदाता का रुझान बदलता रहता है, यानी कभी वो डेमोक्रेट उम्मीदवार को चुनते हैं तो कभी रिपब्लिकन को.
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में व्हाइट हाउस के बाहर कैसी हलचल है, बता रहे हैं बीबीसी संवाददाता विनीत खरे.