60 से ज़्यादा भारतीय इसराइल क्यों पहुँचे, इसराइली राजदूत इस मौक़े पर बोले

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भारतीय मज़दूर, जिन्हें इसराइल की कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करने के लिए बीते महीनों में भर्ती किया गया था, उनका पहला बैच इसराइल रवाना हो गया है.
भारत में इसराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने इसकी जानकारी दी और कहा कि 60 से अधिक भारतीय मज़दूर रवाना हुए हैं.
उन्होंने मंगलवार को एक्स पर लिखा, “आज हमने गर्वमेंट टू गर्वमेंट समझौते के तहत इसराइल जाने वाले 60 से अधिक भारतीय कंस्ट्रक्शन मज़दूरों के पहले बैच को इसराइल रवाना किया."
“मुझे यक़ीन है कि ये लोग दोनों देशों के बीच पीअर-टू-पीअर संबंधों के ऐम्बैस्डर बनेंगे.”
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नवंबर 2023 में इसराइली सरकार ने भारत सरकार से कंस्ट्रक्शन मज़दूरों की आपातकालीन ज़रूरत की बात कही थी और दिसंबर में ख़ुद इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू ने पीएम नरेंद्र मोदी से इसे लेकर बात की थी.
बीते कुछ महीनों में हरियाणा और यूपी में इसराइल की कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी.
सात अक्टूबर में हमास के इसराइल पर हमले के बाद से गज़ा में युद्ध हो रहा है और देश में श्रमिकों की भारी कमी है.
जब ये भर्तियां शुरू हुई थीं तो व्यापार संगठनों और उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र सरकार इस भर्ती के लिए उन सारे नियमों को ताक पर रख रही है, जिसके तहत संघर्ष वाली जगहों पर नौकरी के लिए जाने वाले भारतीय कामगारों को सुरक्षा मिलती है.
द हिंदू अख़बार में इस साल जनवरी में एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें कहा गया था कि जिन कामगारों को इसराइल जाना होगा, उनको विदेश मंत्रालय की वेबसाइट 'ई माइग्रेट' पर रजिस्टर करने की भी ज़रूरत नहीं होगी. सरकार के कई मंत्रियों और एजेंसियों ने इन कामगारों की सलामती और सुरक्षा का ज़िम्मा उठाने से भी इनकार किया है.






