राहुल गांधी ने आदिवासियों के लिए पेश किया कांग्रेस का संकल्प पत्र, क्या है इसमें?

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा वन संरक्षण और भूमि अधिग्रहण कानूनों में किए गए सभी संशोधनों को कांग्रेस वापस लेगी.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे and दीपक मंडल

  1. ए राजा के भारत और ‘जय श्री राम’ वाले बयान पर तमिलनाडु के राज्यपाल का जवाब

    ए राजा और  आरएन रवि

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    तमिलनाडु के सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा ने बीते सप्ताह बयान दिया था कि भारत पारंपरिक रूप से एक ‘देश नहीं बल्कि उपमहाद्वीप है.’

    उन्होंने जय श्रीराम के नारे को लेकर भी बयान दिया था. उनके बयान पर विवाद भी हुआ था.

    अब तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने इस बयान पर प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने कहा है कि ‘कुछ लोग अंग्रेज़ों के भारत तोड़ो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं.’

    रवि ने चेन्नई में एक बुक लॉन्च के मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा-“एक जगह जो भारत की आत्मा रही, जिसने हज़ारों साल पहले ना जाने कितने सिद्ध और ऋषि हमें दिए. इन ऋषियों ने ‘आइडिया ऑफ़ इंडिया’ दिया. उस जगह के लोगों को ये कहने में कठिनाई हो रही है कि हम भारत हैं. ये विडंबना है.”

    “जिस ‘भारत तोड़ो’ प्रोजक्ट की शुरुआत अंग्रेज़ों ने की वो आज भी चल रहा है. कुछ लोग कहते हैं कि भारत देश नहीं है.वो ये भी नहीं मानते की भगवान राम हैं. अगर आप इन बातों को मानने से इनकार करते हैं तो आप तमिलनाडु की संस्कृति और पहचान को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं. आप सच को नकार रहे हैं. ”

    बीते सप्ताह ए राजा ने कहा था कि एक देश का मतलब है एक भाषा, एक संस्कृति, एक परंपरा. भारत एक देश नहीं बल्कि एक उपमहाद्वीप था. यहाँ तमिलनाडु एक देश है, जिसकी एक भाषा और एक संस्कृति है. मलयालम एक अन्य भाषा और संस्कृति है... इन सभी के एक साथ आने से ही भारत बना है - इसलिए भारत एक उपमहाद्वीप बनता है, एक देश नहीं.

    उन्होंने बिलकिस बानो गैंग रेप केस में दोषियों की रिहाई पर कथित रूप से लगाए गए ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे ज़िक्र करते हुए कहा कि “हम ऐसे लोगों के ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता’ के नारे क़तई स्वीकार नहीं करेंगे. तमिलनाडु ये कभी स्वीकार नहीं करेगा. आपको मुझे राम का दुश्मन कहना हो तो कहें.”

    ए राजा के इस बयान की कांग्रेस ने भी निंदा की थी और आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इससे दूरी बनाते हुए कहा था कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं.

  2. सीएए के ख़िलाफ़ असम में कई संगठनों का विरोध-प्रदर्शन शुरू

    असम में विरोध प्रदर्शन

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    सोमवार को केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून की अधिसूचना जारी कर दी. साल 2019 में पारित हुए इस कानून को लोकसभा के चुनाव की तारीखों के एलान से ठीक पहले नोटिफाई किया गया है.

    अधिसूचना जारी होने के बाद असम में इस कानून के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.

    इस क़ानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी. लेकिन इस कानून में मुसलमान शरणार्थियों को नागरिकता नहीं देने का प्रावधान है.

    समाजिक कार्यकर्ता, नेता और समाज के एक तबके का कहना था कि ये क़ानून 'खुले तौर पर मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है जो संविधान की आत्मा के विपरीत है.'

    साल 1979 में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने और उन्हें डिपोर्ट किए जाने की मांग लेकर छह साल तक आंदोलन चलाने वाले ऑल असम स्टूडेंट यूनियन यानी एएएसयू ने कहा कि वह 'अदालत के अंदर और बाहर इस कानून के ख़िलाफ़ लड़ेगा.'

    एएएसयू और 30 ग़ैर-राजनीतिक जनतीय दल ने सोमवार को इस क़ानून की कॉपियां जलायी और राज्य में कई जगह इसे लेकर प्रदर्शन किए गए.

    16 पार्टियों के संगठन यूनाइटेड अपोज़िशन फोरम, असम यानी यूओएफ़ए ने भी मंगलवार को राज्यव्यापी हड़ताल का एलान किया है.

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद से राज्य में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

    राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों को अलर्ट पर रखा गया है. शहरों के हर मेन रोड पर बैरिकेड लगाए गए हैं.

  3. सीएए की आधिसूचना जारी होने पर शरद पवार ने क्या कहा

    शरद पवार

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    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने नागरिकता संशोधन क़ानून की अधिसूचना जारी किए जाने को संसदीय लोकतंत्र पर हमला बताया है.

    साल 2019 में केंद्र सरकार के संशोधित नागरिकता क़ानून यानी सीएए को संसद में पारित किया गया था. चार साल बाद केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है.

    इस क़ानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी. लेकिन इस कानून में मुसलमान शरणार्थियों को नागरिकता नहीं देने का प्रावधान है.

    शरद पवार ने पत्रकारों से बात करते हुए इस पर कहा- “भारतीय चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव की घोषणा करने वाला है और इससे कुछ दिन पहले इस तरह का फ़ैसला संसदीय लोकतंत्र पर हमला है. हम इसकी निंदा करते हैं.”

    सीएए जब 2019 में लाया गया था तो इसे लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किए गए. समाजिक कार्यकर्ता, नेता और समाज के एक तबके का कहना था कि ये क़ानून 'खुले तौर पर मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है जो संविधान की आत्मा के विपरीत है.'

    एनसीपी ने अपने बयान में कहा है कि सीएए की अधिसूचना जारी करने का फ़ैसला इलेक्टोरल बॉन्ड से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है.

    ये फ़ैसला उसी दिन किया गया है कि जिस दिन इलेक्टोरल बॉन्ड पर स्टेट बैंक की याचिका को खारिज कर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला बरकरार रखा है.

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की एसबीआई की याचिका खारिज करने के बाद मंगलवार शाम पांच बजे एसबीआई को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सारी जानकारी देनी है. 15 मार्च तक ये जानकारी चुनाव आयोग को अपनी वेबसाइट पर जारी करनी है.

    इलेक्टोरल बॉन्ड वो तरीका है जिससे कोई शख़्स, बिजनेस घराने राजनीतिक दलों को चंदा देते हैं. अब तक नियम था कि बॉन्ड खरीदने वालों की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी. 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक घोषित कर दिया.

    अब एसबीआई को अप्रैल 2019 से खरीदे गए इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी.

  4. ग़ज़ा में रमज़ान के बावजूद लड़ाई जारी

  5. बीजेपी-टीडीपी के बीच हुआ सीटों का बँटवारा, छह सीट बीजेपी को मिली

    चंद्रबाबू नायडू- अमित शाह

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    भारतीय जनता पार्टी, तेलगू देशम पार्टी और पवन कल्याण की जन सेना पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव और आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए सीटों का बँटवारा हो गया है.

    सीट शेयरिंग पर बनी सहमति के बाद तय हुआ है कि बीजेपी 6 लोकसभा सीटों पर आंध्र प्रदेश में चुनाव लड़ेगी. वहीं टीडीपी 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जनसेना को दो सीटें दी गई हैं.

    विधानसभा की बात करें तो इसमें बीजेपी को 10 सीटें मिली हैं. टीडीपी 144 सीटों पर और जनसेना 21 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

    9 मार्च को बीजेपी, टीडपी और जनसेना से गठबंधन में आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने का एलान किया था.

    इससे पहले 8 मार्च को चंद्रबाबू नायडू ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी.

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  6. पाकिस्तान की नई सरकार में इशाक़ डार बने विदेश मंत्री, जानिए कौन हैं

    इशाक़ डार

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    पाकिस्तान की नई सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया है.

    सोमवार को शहबाज़ शरीफ़ सरकार की 19 सदस्यीय कैबिनेट ने शपथ ली. इसी के साथ देश का नया विदेश मंत्री पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ के नेता इशाक़ डार को बनाया गया है.

    डार पाकिस्तान के वित्त मंत्री रह चुके हैं. देश में गहराते आर्थिक संकट के बीच उन्हें विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है.

    पीएमएल-एन की सरकार में मुख्य सहयोगी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने कैबिनेट का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था.

    पिछली शहबाज़ शरीफ़ सरकार में पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो ज़रदारी विदेश मंत्री थे.

    73 साल के डार पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और काफ़ी सधे हुए नेता है. वो नवाज़ शरीफ़ के रिश्तेदार भी हैं और क़रीबी भी.

    डार चार बार देश के वित्त मंत्री रह चुके हैं. माना जा रहा है किदेश की कूटनीति में अर्थशास्त्र की भूमिका को प्रभावी बनाने के इरादे से उन्हें ये मंत्रालय दिया गया है.पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से एक और डील करने की कोशिश कर रहा है ऐसे में डार का इस पद पर आना अहम है.

    पाकिस्तान की कोशिश है कि अधिक से अधिक विदेशों से धन जुटाया जा सके ताकि देश आर्थिक संकट से निपट सके.

    रॉयटर्स से बात करते हुए डार ने कहा था, “आर्थिक कूटनीति आज के समय की मांग है.”

  7. अजित डोभाल ने इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू से की मुलाक़ात, क्या हुई बात

    अजित डोभाल और बिन्यामिन नेतन्याहू

    इमेज स्रोत, @IsraeliPM/X

    भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने सोमवार को इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाकात की. दोनों के बीच ग़ज़ा में चल रहे युद्ध को लेकर बात हुई.

    इस मुलाक़ात में बंधकों को रिहा कराने और ग़ज़ा में मानवीय सहायता पहुंचाने को लेकर चर्चा हुई.

    इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स अकाउंट पर डोभाल के साथ प्रधानमंत्री नेतन्याहू की तस्वीर जारी करते हुए लिखा- “प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने आज भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाक़ात की और उन्हें ग़ज़ा में लड़ाई के हालिया घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी.”

    “दोनों पक्षों ने बंधकों को छुड़ाने की कोशिश और मानवीय सहायता के मुद्दे पर भी चर्चा की.”

    इसराइल दक्षिणी ग़ज़ा के रफ़ा बॉर्डर पर ज़मीनी हमले की तैयारी कर रहा है.

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    बीते दिनों ग़ज़ा में युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की युद्ध नीतियों की आचोलना करते नज़र आए.

    बीते शनिवार को एक अमेरिकी चैनल को इंटरव्यू देते हुए जो बाइडन ने कहा था- “नेतन्याहू इसराइल की मदद करने से ज्यादा इसराइल को नुकसान पहुंचा रहे हैं.”

    उन्होंने बताया कि वो “एक युद्धविराम चाहते” हैं, युद्धविराम की डील ऐसी हो कि उसमें बंधकों को वापस लाने का प्रावधान हो.

    बाइडन के इस बयान पर नेतन्याहू ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने आकलन में ग़लत हैं और उन्होंने ग़ज़ा में अपनी नीतियों का बचाव किया, ख़ास कर उन्होंने रफ़ा में संभावित ज़मीनी हमले का बचाव किया.

    नेतन्याहू ने रविवार को पॉलिटिको के दिए गए इंटरव्यू में कहा- “मुझे ठीक से नहीं पता कि राष्ट्रपति का क्या मतलब था, लेकिन अगर उनका मतलब ये था कि मैं अधिकतर इसराइलियों की इच्छा के ख़िलाफ़ निजी नीतियां अपना रहा हूं और इससे इसराइल के हितों को नुकसान पहुंच रहा है, तो वह ग़लत हैं.”

  8. नमस्कार!

    आपका दिन शुभ हो बीबीसी हिंदी के लाइव ब्लॉग में आपका स्वागत है.

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