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यूक्रेन जंग: हवाई हमलों में दर्जनों रूसी सैनिकों की जान जाने की ख़बर

कई रिपोर्टों में बताया गया है कि रूसी सैनिकों के एक ट्रेनिंग सेंटर पर दो मिसाइलें आकर गिरीं.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे and प्रियंका झा

  1. कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने फिर किसानों को बातचीत के लिए किया आमंत्रित, कहा- शांति बनाएं रखें

    बुधवार से किसान ‘दिल्ली चलो’ मार्च शुरू कर रहे हैं. हरियाणा और पंजाब को जोड़ने वाले शंभू बॉर्डर पर किसान मौजूद हैं और हरियाणा में दाखिल होने की कोशिश कर रहे हैं.

    सुरक्षाबल उन पर आंसू गैस के गोले छोड़ रहे हैं.

    इन सबके बीच केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने किसानों को पांचवें दौर की बैठक के लिए आमंत्रित किया है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा- “सरकार चौथे दौर के बाद पांचवें दौर में सभी मुद्दे जैसे की एमएसपी की माँग, फसलों की विविधता, पराली का विषय, एफ़आईआर पर बातचीत के लिए तैयार हैं. मैं दोबारा किसान नेताओं को चर्चा के लिए आमंत्रित करता हूँ. हमें शांति बनाये रखना ज़रूरी है.”

    इससे पहले किसान नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के बीच चार दौर की बैठक बेनतीजा साबित हुई है.

    किसान मांग कर रहे हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी बनाया जाए और किसानों की कर्ज़ माफ़ी हो. साल 2020-21 के बीच हुए किसान प्रदर्शन में जिन भी किसानों पर केस हैं उन्हें रद्द कर दिया जाए.

    पिछली बैठक में केंद्र सरकार ने किसानों को पांच साल तक दाल, जौ, मक्का और कपास जैसी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का ऑफ़र दिया था जिसे किसान संगठनों ने ख़ारिज कर दिया था.

  2. एक ड्रग जो अमेरिका और मेक्सिको के लिए बन गई है मुसीबत

  3. जाने-माने रेडियो प्रेज़ेंटर अमीन सायानी का निधन

      • Author, मधु पाल, बीबीसी हिंदी के लिए

    जाने-माने रेडियो प्रसारक अमीन सायानी का निधन हो गया. उन्होंने रेडियो सीलोन से 1952 से प्रसारण करियर की शुरुआत की थी.

    सायानी ने 91 की उम्र में मुंबई में अंतिम सांस ली.

    अमीन सायानी लोकप्रिय रेडियो शो "बिनाका गीत माला" प्रस्तुत किया करते थे.

    60 के दशक से लेकर 90 के दशक तक ऐसा कोई अभिनेता या अभिनेत्री नहीं थी जो अमीन सयानी के रेडियो प्रोग्राम का हिस्सा ना बना हो.

    अमीन सायानी 43 सालों तक लगातार रेडियो से जुड़े रहे.

  4. शंभू बॉर्डर से फिर किसानों का दिल्ली मार्च शुरू, सुरक्षाबलों ने दागे आंसू गैस के गोले

    बुधवार को हरियाणा-पंजाब को जोड़ने वाले शंभू बॉर्डर से किसान दिल्ली चलो मार्च फिर से शुरू कर रहे हैं.

    मार्च शुरू होने से पहले किसानों को मास्क, दस्ताने और सेफ़्टी सूट बांटे गए. वहीं, मार्च शुरू होने के बाद सुरक्षाबलों ने किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे.

    प्रशासन के बैरिकेड और सीमेंट ब्लॉक को हटाने के लिए किसानों ने ट्रैक्टर तैयार रखे हैं.

    केंद्र सरकार और किसानों के बीच चार दौर की बैठक बेनतीजा होने के बाद किसान आज से दिल्ली चलो मार्च फिर शुरू कर रहे हैं.

    केंद्र सरकार ने किसानों को पांच साल तक दाल, जौ, मक्का और कपास जैसी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का ऑफ़र दिया था जिसे किसान संगठनों ने ख़ारिज कर दिया.

    वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने किसानों को फिर से बातचीत की अपील की है.

    मुंडा ने कहा, “सरकार चौथे दौर के बाद पांचवें दौर में सभी मुद्दे जैसे की एमएसपी की माँग, फसल के विविधिकरण, पराली का विषय, एफ़आईआर पर बातचीत के लिए तैयार हैं. मैं दोबारा किसान नेताओं को चर्चा के लिए आमंत्रित करता हूँ. हमें शांति बनाये रखना ज़रूरी है.”

  5. दिग्गज वकील और संवैधानिक क़ानून के विशेषज्ञ फ़ली एस. नरीमन का निधन

    भारत के दिग्गज वकील और संवैधानिक क़ानून के विशेषज्ञ फली एस नरीमन का बुधवार को निधन हो गया.

    95 साल के नरीमन का निधन उनके दिल्ली स्थित आवास पर हुआ.

    साल 1993 के मशहूर 'द सेकंड जजेज केस’ में नरीमन वकील रहे और ये केस जीता. इसी के बाद जजों की नियुक्ति के लिए चल रहा वर्तमान कॉलेजियम सिस्टम लाया गया था.

    साल 1972 में उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था, हालांकि 1975 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अपालकाल के फ़ैसले के विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया था.

    नरीमन 1999 से 2005 के बीच राज्यसभा के मनोनीत सदस्य रहे.

    उन्होंने कई किताबें लिखी है. जिनमें बीफ़ोर मेमरी फ़ेड्स, गॉड सेव द ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट और द स्टेट ऑफ़ द नेशन शामिल हैं.

    हाल ही में उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 370 को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की कड़ी निंदा की थी. फली सैम नरीमन सिविल लिबर्टी के बड़े समर्थक थे.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़ली एस नरीमन की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन न्याय को आम लोगों के लिए सहज बनाने में समर्पित कर दिया.

    पीएम ने एक्स पर लिखा- “ फ़ली नरीमन जी सबसे उत्कृष्ट क़ानूनविद में से थे. उन्होंने अपना जीवन आम नागरिकों के लिए न्याय आसान बनाने में समर्पित कर दिया. उनके निधन की ख़बर से दुखी हूं. उनके परिवार के साथ मेरी संवेदनाएं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. ”

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी उनकी मौत पर दुख जताते हुए लिखा- " फ़ली नरीमन के योगदान ने न केवल ऐतिहासिक केसों को आकार दिया है, बल्कि हमारे संविधान की पवित्रता और नागरिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए क़ानूनी जानकारों की पीढ़ियों को भी प्रेरित किया है. ईश्वर करे कि उनकी प्रतिबद्धता हमेशा हमारा मार्गदशन करती रहे."

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी फ़ली नरीमन के निधन पर शोक जताया है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा- " कानून के प्रख्यात और वरिष्ठ अधिवक्ता, नागरिक स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक फ़ली एस नरीमन का निधन क़ानूनी व्यवस्था के लिए एक बड़ी क्षति है. पद्म विभूषण पाने वाले नरीमन अपने सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता सराहनीय रही है. उनके परिवार के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. "

    सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने उनकी मौत पर दुख प्रकट करते हुए लिखा- " फ़ाली एस नरीमन इस दुनिया से चले गए. वो बॉम्बे हाईकोर्ट के वकीलों की उस आखिरी पीढ़ी का हिस्सा थे जिन्होंने देश में संवैधानिक क़ानून को तराशा. ऐसी आवाज़ जो हमेशा सेक्युलर भारत के पक्ष में उठती रही, हमेशा स्वतंत्र न्यायपालिका के लिए उठती रही. उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं."

    वरिष्ठ वकील प्रशात भूषण ने नरीमन के लिए लिखा- "मैं उनसे जल्द मिलने की तैयारी कर रहा था वो हमारे संविधान और नागरिक स्वतंत्रता के एक मज़बूत स्तंभ थे. उनका इस तरह चले जाना देश के लिए, कानून से जुड़े लोगों के लिए ये बड़ा नुकसान है. "

    देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी फ़ली नरीमन को याद करते हुए एक बयान जारी किया है. उन्होंने लिखा है कि वो एक आइकॉनिक शख्सियत थे जिन्हें हर वो शख़्स याद करेगा जिसने उन्हें जाना है. वह हमारे समाज में विविधता के प्रशंसक थे.

  6. किसानों ने देश को आत्मनिर्भर बनाया, उन्हें रोकने के लिए बड़े बैरिकेड लगाए जा रहे- डल्लेवाल

    किसान बुधवार को अपना 'दिल्ली चलो' मार्च फिर शुरू कर रहे हैं. किसान हरियाणा पंजाब की सीमा शंभू बॉर्डर पर हैं और यहां आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे.

    इससे पहले मीडिया से बात करते हुए किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है कि हम अशांति पैदा नहीं करना चाहते. किसान दिन रात मेहनत करते हैं, अगर उन्हें रोकने के लिए बड़े-बड़े बैरिकेड लगाए जा रहे हैं तो ये सही नहीं है.

    डल्लेवाल ने कहा, “हमारी मंशा किसी भी तरह अशांति पैदा करने की नहीं है और ना ही हमारे लिए ये सम्मान की बात है कि हमें तो ऐसा करना ही है. लेकिन बात ये है कि हमने दिल्ली जाने का प्रोग्राम बनाया और ये आज नहीं बनाया. सात नवंबर को हमने आह्वान किया था कि हम दिल्ली जाएंगे, तो आज अगर सरकार कह रही है कि हमारे पास समय कम है तो मुझे लगता है कि ये सरकार की टाल-मटोल की नीति है.”

    “सरकार को देश के किसान-मजदूर के पक्ष में फ़ैसला लेना चाहिए. देश के किसान ने देश को आत्मनिर्भर बनाया है, रात-दिन मेहनत की है. देश में सात लाख किसान ख़ुदकुशी कर चुके हैं. लेकिन अगर ऐसे हालात में किसान से बात करने के बजाय उन्हें रोकने के लिए इतने बड़े-बड़े बैरिकेड लगाए तो ये सही नहीं है..

    केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच चार दौर की बात के बाद भी सहमति नहीं बनी. इसके बाद किसानों ने अपना मार्च जारी रखने का एलान किया है

  7. दिल्ली मार्च से पहले किसान नेता ने पीएम मोदी से कही ये बात

    बुधवार से किसान दिल्ली मार्च फिर शुरू कर रहे हैं.

    किसान संगठनों और मोदी सरकार के बीच चार दौर की बैठक के बाद भी सहमति नहीं बनी. इसके बाद किसानों ने अपना मार्च जारी रखने का एलान किया है.

    किसानों की मुख्य मांगें हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को क़ानूनी गारंटी बनाया जाय. किसानों के कर्ज़ माफ़ किए जाएं और साल 2020-21 में किसानों के प्रदर्शन के दौरान किसानों पर किए गए केस वापस लिए जाएं.

    21 फ़रवरी को दिल्ली चलो मार्च फिर शुरू होने से पहले किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा है कि किसान-मज़दूरों पर अर्धसैनिक बल के ज़रिए सरकार ज़ुल्म करा रही है. देश का पीएम होने के नाते नरेंद्र मोदी को संविधान की रक्षा करनी चाहिए और हमें शांतिपूर्ण तरीक़े से दिल्ली जाने देना चाहिए, ये हमारा अधिकार है.

    पंढेर ने कहा, “मज़दूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा -ग़ैर राजनीतिक अपने प्रदर्शन के नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है. हमने प्रधानमंत्री जी को अपील की थी और कहा था कि ये सरकार मज़दूर-किसानों के ख़ून की प्यासी ना बने, मुझे नहीं लगता कि हम अपनी बात उन तक पहुँचाने में सफल हुए हैं. सरकार से हम कहते हैं, अगर मारना है तो हमें मार दीजिए लेकिन किसान मज़दूरों पर ज़ुल्म ना करें. हम आज भी प्रधानमंत्री महोदय से आग्रह करेंगे कि आगे आइए और इस मोर्चे का शांतिपूर्ण हल कीजिए.”

    “आप एमएसपी को क़ानूनी गारंटी बनाने की बात करिए फिर इस मोर्च को शांतिपूर्ण रखा जा सकता है, लोगों की भावनाओं को काबू किया जा सकता है. “देश-दुनिया जान रही है कि पिछले दिनों जिस तरह का अत्याचार केंद्रीय अर्धसैनिक बलों मे किया है, देश कभी इस तरह की सरकार को माफ़ नहीं करेगा.”

    “हरियाणा के गावों में चप्पे-चप्पे पर पैरामिलिट्री फोर्स लगी हुई है. हमने कौन सा ज़ुल्म किया है, हम इस देश के नागरिक हैं. हमने एक नागरिक होने के नाते आपकी पार्टी को वोट किया होगा, आपको प्रधानमंत्री बनाया होगा. हमने कभी कल्पना नहीं की थी कि हमारे ऊपर आप अर्धसैनिक बल चढ़ा कर इस तरह ज़ुल्म करेंगे.”

    “अगर आपको मांग मानने से परेशानी है तोआप देश के संविधान की रक्षा कीजिए. हमें ढंग से शांति के साथ दिल्ली जाने दीजिए. ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है.”

  8. ग़ज़ा में तत्काल युद्धविराम के प्रस्ताव पर यूएन में अमेरिका ने किया वीटो

    अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में ग़ज़ा में तत्काल युद्धविराम की मांग करने वाले एक प्रस्ताव को वीटो कर दिया है.

    अमेरिका ये वीटो अपने ख़ुद के एक प्रस्ताव को लाने के बाद किया, जिसमें 'अस्थायी युद्धविराम' की अपील की गई थी.

    अमेरिका के सहयोगियों ने भी इस क़दम की निंदा की है और इस पर खेद व्यक्त किया है कि युद्धविराम प्रस्ताव को अमेरिका ने ब्लॉक कर दिया.

    अपने प्रस्ताव में अमेरिका ने इसराइल को चेताया है कि वह रफ़ाह में ना घुसे. इसराइल ने रफ़ाह में घुसने की बात की है और 10 मार्च तक हमास को सभी इसराइली बंधकों को छोड़ने की डेडलाइन दी है.

    इससे पहले भी अमेरिका संयुक्त राष्ट्र में वोट के दौरान "युद्धविराम" शब्द से परहेज करता रहा है.

    15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में 13 देशों ने अल्जीरिया के प्रस्ताव का समर्थन किया जबकि ब्रिटेन ने वोटिंग की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया.

    अमेरिका ने इस प्रस्ताव को वीटो किया और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफ़ील्ड ने कहा कि अभी हमास और इसराइल के बीच बातचीत चल रही है और ऐसे में ये तत्काल युद्धविराम का आह्वान करने का सही समय नहीं था.

    जो प्रस्ताव अमेरिका ने लाया है, उसमें अस्थायी युद्धविराम ‘जितना जल्दी संभव हो उतनी जल्दी’ लागू करने और इसराइली बंधकों को छोड़ने की शर्त पर बात की गई है.

    साथ ही ये भी कहा गया है कि ग़ज़ा पहुंच रही सहायता पर हर तरह की रोक हटाई जाए.

    हालांकि ये साफ़ नहीं है कि सुरक्षा परिषद अमेरिका के इस प्रस्ताव पर वोट करेगा या नहीं ख़ास कर जिस तरह के शब्दों का चयन अमेरिका की ओर से किया गया है, उसके बाद ये संशय बना हुआ है.

    अमेरिका के अल्जीरिया के युद्धविराम प्रस्ताव को वीटो करने के बाद, संयुक्त राष्ट्र में उत्तरी अफ्रीकी देश के दूत ने कहा कि इससे "फ़लस्तीनीयों को एक कड़ा संदेश जाएगा" और पता चलेगा कि "दुर्भाग्य से सुरक्षा परिषद एक बार फिर फेल हो हो गई."

  9. नमस्कार,

    आपका दिन शुभ हो.

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