उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया है.
इसके साथ ही उत्तराखंड समान नागरिक संहिता विधेयक पास करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है.
विधानसभा के सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है.
बता दें कि 6 फरवरी की सुबह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के पटल पर यह विधेयक रखा था.
विपक्षी विधायकों को विधेयक पढ़ने-समझने के लिए समय दिए जाने की मांग के बाद सत्र को दो बजे तक स्थगित किया गया था.
चूंकि कई और सदस्य इस पर विचार करना चाहते थे इसलिए इस विधेयक पर चर्चा 7 फरवरी को भी जारी रही.
कुछ देर पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संबोधन के बाद विधेयक को पारित कर दिया गया.
इसके अलावा राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10 फ़ीसदी क्षैतिज आरक्षण का विधेयक भी सदन ने ध्वनिमत से पारित किया.
संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने राम मंदिर निर्माण के लिए सदन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने का प्रस्ताव पेश किया, इसे भी ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.
इसके बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.
यूसीसी लाना देवभूमि का सौभाग्यः धामी
यूसीसी पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि इस विधेयक पर सार्थक चर्चा हुई है.
उन्होंने कहा कि भारत में कई बड़े प्रदेश हैं लेकिन यह अवसर उत्तराखंड को मिला है, यह देवभूमि का सौभाग्य है.
उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण विधेयक नहीं है बल्कि भारत की एकात्मा का सूत्र है. हमारे संविधान शिल्पियों ने जिस अवधारणा के साथ हमारा संविधान बनाया था, देवभूमि उत्तराखंड से वही अवधारणा धरातल पर उतरने जा रही है.
सीएम ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत का सपना देख रहे हैं. उनके नेतृत्व में देश तीन तलाक और धारा-370 जैसी ऐतिहासिक गलतियों को सुधार रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि समान नागरिक संहिता का विधेयक देश को विकसित, संगठित, समरस और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए किए जा रहे महान यज्ञ में उत्तराखंड द्वारा अर्पित एक आहूति है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अब समस्त सरकारी सुविधाओं का लाभ केवल वही दंपत्ति ले पाएंगे जिन्होंने विवाह का पंजीकरण करा लिया हो. पंजीकरण न होने की स्थिति में भी किसी विवाह को अवैध या अमान्य नहीं माना जाएगाी.
"जिस प्रकार से अभी तक जन्म व मृत्यु का पंजीकरण होता था, उसी प्रकार की प्रक्रिया को अपनाकर विवाह और विवाह विच्छेद दोनों का पंजीकरण भी किया जा सकेगा. हमारी सरकार के सरलीकरण के मंत्र के अनुरूप यह पंजीकरण एक वेब पोर्टल के माध्यम से भी किया जा सकेगा."
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब इस कानून के ज़रिए दंपत्ति में से यदि कोई भी, बिना दूसरे की सहमति से अपना धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से विवाह विच्छेद करने और गुजारा भत्ता लेने का पूरा अधिकार होगा.
प्रवर समिति में भेजना चाहती थी कांग्रेस
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा था कि प्रदेश सरकार यूसीसी के नाम पर सामान्य सत्र को विशेष सत्र का रूप दे रही है, जो नियमों के विरुद्ध है.
उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिवालय की ओर से विधायकों को जो सूचना दी गई है कि उसमें साफ़ है कि पांच सितंबर 2023 को आहूत सत्र को आगे बढ़ाया गया है.
यही बात मंगलवार को सत्र शुरू होते समय वरिष्ठ कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने भी कही थी.
कांग्रेस ने सत्र शुरू होने से पहले भी विरोध प्रदर्शन किया था और सत्र के दौरान दोनों पक्षों में कई बार तीखी बहस भी हुई थी लेकिन ख़ास बात यह रही कि कांग्रेस के किसी भी विधायक ने विधेयक का विरोध नहीं किया.
नेता प्रतिपक्ष समेत कांग्रेस के विधायकों ने इस विधेयक को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रवर समिति को भेजने का आग्रह किया था.
दो दिन की इस चर्चा में एक उल्लेखनीय बात और रही, वह भी राम मंदिर निर्माण की चर्चा.
बीजेपी के विधायकों ने यूसीसी के बजाय राम मंदिर पर चर्चा ज़्यादा की. संभवतः इसलिए भी क्योंकि राम मंदिर निर्माण के बाद विधानसभा का यह पहला सत्र था.