पश्चिम बंगाल में राशन वितरण घोटाले
की जांच कर रही ईडी की टीम की छापेमारी के दौरान कथित तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के
हमले में कम से कम तीन अधिकारी घायल हो गए.
राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने विधाननगर के अस्पताल जाकर घायल ईडी अधिकारियों से मुलाक़ात की है. उसके बाद उन्होंने बताया कि घायल अधिकारियों की अच्छे से देखभाल की जा रही है.
उन्होंने कहा, "घायल लोगों की बहुत अच्छे से देखभाल की जा रही है. जो भी ज़रूरी होगा वो किया जाएगा. वे भी इसका बहुत बहादुरी से सामना कर रहे हैं. इस मामले को यूं ही जाने नहीं दिया जाएगा."
राज्यपाल ने इस घटना के बाद राज्य के गृह सचिव और DGP को मिलने के लिए बुलाया.
उत्तेजित समर्थकों के पथराव में एक कार को भी नुक़सान पहुंचा है. इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है.
इस मामले में पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक पहले से ही जेल में बंद हैं. ईडी ने उन्हें कुछ महीने पहले गिरफ़्तार किया था.
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एनआईए से इसकी जांच कराने की मांग की है.
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी (ईडी) बीजेपी के इशारे पर तृणमूल कांग्रेस को अपमानित करने के लिए लगातार उकसाने वाला ऐसा काम कर रही है.
ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर 24-परगना ज़िले के संदेशखाली में सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों के हमले में सहायक निदेशक राजकुमार दास समेत तीन अधिकारी घायल हो गए. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बाक़ी दोनों अधिकारियों के नाम क्रमशः सोमनाथ दास और अंकुर हैं.
शुक्रवार सुबह ईडी की एक पांच-सदस्यीय टीम उत्तर 24-परगना जिले के संदेशखाली में तृणमूल नेता शाहजहां शेख के घर छापेमारी के लिए पहुंची थी. उसके साथ केंदरीय बल के जवान भी थे.
स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में पहुंचते ही स्थानीय तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने इस टीम को घेर लिया. दोनों पक्षों के बीच कहासुनी के बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई. स्थानीय लोगों ने उन पर पथराव किया. उनकी एक गाड़ी को भी नुक़सान पहुंचा है. इसके बाद इस टीम को खदेड़ कर भगा दिया गया.
ईडी की एक अन्य टीम बनगांव में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष शंकर के घर भी छापेमारी के लिए पहुंची थी. इन दोनों नेताओं को पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का करीबी माना जाता है.
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने अपने एक ट्वीट में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करने और इसकी जांच एनआईए से कराने की मांग की है.
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निशित प्रामाणिक ने भी इस घटना की तीव्र निंदा की है.
इस मामले पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि ऐसा लगता है पश्चिम बंगाल में 'किम जोंग' की सरकार है. वहां लोकतंत्र नाम की कोई चीज़ नहीं है. वहां मंत्री जाते हैं, तो उनको प्रोटोकॉल की गाड़ियां नहीं मिलती. ये ममता बनर्जी का लोकतंत्र है.
दूसरी ओर, राजनीतिक विवाद तेज होते ही तृणमूल कांग्रेस का भी बयान आया है.
पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, "संदेशखाली की घटना चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है. लेकिन केंद्रीय एजेंसियां भाजपा के इशारे पर तलाशी के नाम पर स्थानीय लोगों को उकसाने में जुटी है."
उनका कहना था कि भाजपा नेताओं के घर तो छापे नहीं मारे जाते. भगवा पार्टी जहां कमज़ोर है, वहीं इस तरह की कार्रवाई के ज़रिए आम लोगों को उकसाने का प्रयास किया जा रहा है.