गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम पुलिस को बिना उचित कारण के एक वकील
को हथकड़ी लगाने के मामले में 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है.
इस मामले में हुई कई सुनवाई के बाद बुधवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट के न्यायाधीश देवाशीष बरूआ
की एकल पीठ ने कहा कि पुलिस द्वारा उक्त वकील को बिना उचित कारण के हथकड़ी लगाना भारत
के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है.
यह मामला 2016 में कार पार्किंग को लेकर हुई मारपीट
से जुड़ा है.
असम पुलिस के एक होम गार्ड द्वारा एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें
आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ता मोनोजीत बिस्वास ने 5 अक्टूबर 2016 को उनके साथ मारपीट
की थी, क्योंकि उन्होंने याचिकाकर्ता को अपने घर के पास कार पार्क करने से रोका था.
होम गार्ड की एफआईआर के आधार पर बिस्वास के ख़िलाफ़ आईपीसी
की धारा 294, 325, 341 और 353 के तहत मामला दर्ज किया गया.
उसी दिन पेशे से वकील बिस्वास ने भी
होम गार्ड के ख़िलाफ़ धारा 294, 323, 392 और 511 के तहत एक जवाबी एफआईआर दायर की जिसमें आरोप लगाया
गया था कि उनके साथ भी मौखिक और शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार किया गया था.
इस मामले के संदर्भ में याचिकाकर्ता मोनोजीत बिस्वास ने बीबीसी
से कहा,"इस पूरे मामले में मेरी लड़ाई पुलिस व्यवस्था में हथकड़ी लगाने को लेकर थी.यह कार
पार्किंग से जुड़ा एक छोटा मामला था और मैं खुद चलकर पुलिस स्टेशन में हाजिर हुआ था."
"लेकिन बावजूद इसके मुझे हथकड़ी पहना कर कोर्ट ले जाया गया. मुझे हथकड़ी में जेल भेजा
गया. जबकि हथकड़ी लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बहुत पहले का आदेश है जिसकी पूरी
तरह अनदेखी की गई थी. आप सामान्य मामलों में किसी को इस तरह हथकड़ी नहीं लगा सकते."
याचिकाकर्ता मोनोजीत का कहना है कि उन्होंने यह मामला किसी
व्यक्तिगत पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ नहीं किया था बल्कि उस व्यवस्था के ख़िलाफ़ किया था
जिसमें ऐसे छोटे मामलों में हथकड़ी पहना कर व्यक्ति की सामाजिक छवि और इज्जत को खत्म
कर दिया जाता है.
गाड़ी पार्किंग को लेकर मारपीट के इस मामले में पुलिस द्वारा आरोप
पत्र दायर करने के बाद कोर्ट ने मोनोजीत को साल 2020 में बरी कर दिया था.
याचिकाकर्ता मोनोजीत ने हाई कोर्ट का रुख करने से पहले अपने
बुनियादी मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए असम मानवाधिकार आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज
कराई थी.लेकिन उनके मामले में जांच अधिकारी की मौत हो जाने से आयोग ने इसमें आगे सुनवाई
नहीं की.
इसके बाद मार्च 2021 में मोनोजीत ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में एक रिट याचिका
दर्ज करवाई.
उसी याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने बुधवार को अपने
फैसले में कहा "याचिकाकर्ता एक वकील है और याचिकाकर्ता को हथकड़ी लगाना और उसे
अदालत में ले जाकर परेड करना."
"उसके बाद हथकड़ी के साथ जेल में वापस भेजना, वह भी बिना उचित कारण बताए, न केवल गारंटीकृत संविधान के अनुच्छेद
21 के तहत याचिकाकर्ता के मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि यह वकालत के पेशे को चलाने
के लिए उनकी गरिमा और प्रतिष्ठा को भी अपमानित करता है.''
इस फैसले को सुनाते हुए हाई कोर्ट ने असम सरकार को याचिकाकर्ता
को 2 महीने के भीतर 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है.