भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने सोमवार को
ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे से जुड़ी अपनी रिपोर्ट वाराणसी की ज़िला अदालत को सील
बंद लिफाफे में सौंप दी है.
हिंदू पक्ष ने इस रिपोर्ट को सील बंद लिफाफे में सौंपने पर आपत्ति
दर्ज कराई है.
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, “रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में सौंपी गयी है. अंजुमन इंतेज़ामिया का कहना है
कि इस रिपोर्ट के बारे में किसी से बात न की जाए. और मीडिया को ये रिपोर्ट न दिखाई
जाए. माननीय अदालत ने इसके लिए अगली तारीख़ 21 दिसंबर निर्धारित की है, जब दोनों
पक्षों को सुनने के बाद अगला आदेश पारित किया जाएगा.”
जैन ने एएसआई के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया है.
उन्होंने कहा, “एएसआई ने इस रिपोर्ट को सील बंद लिफाफे में पेश करके सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर का उल्लंघन किया है. ये रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश ही नहीं हो सकती थी. हमने प्रार्थना पत्र दिया है कि रिपोर्ट की कॉपी हमें ईमेल पर उपलब्ध कराई जाए.
मंदिर पक्ष की ओर से बीती 16 मई को जिला जज की अदालत में सील
एरिया को छोड़कर समस्त ज्ञानवापी परिसर की वैज्ञानिक विधि से जांच (एएसआई सर्वे) का
प्रार्थना पत्र दाखिल किया था.
वाराणसी के जिला जज की अदालत ने गत 21 जुलाई को ज्ञानवापी
परिसर (सील किये गये वजूखाने को छोड़कर) के सर्वे का आदेश एएसआई को दिया था. 24 जुलाई से सर्वे शुरू हुआ इसके खिलाफ प्रतिवादी
पक्ष अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट गया था, सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को हाई कोर्ट जाने का आदेश देते हुए 26 जुलाई
तक सर्वे पर रोक लगा दी थी.
25 जुलाई को हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 3 अगस्त
तक के लिये रोक लगा दी थी. तीन अगस्त को हाई
कोर्ट ने परिसर में सर्वे की अनुमति दी जिसके बाद 4 अगस्त से सर्वे फिर से शुरू हुआ.
4 अगस्त से शुरू हुआ एएसआई सर्वे 2 नवंबर तक चला. इस एएसआई सर्वे
में डिप्टी डायरेक्टर डॉ आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में लखनऊ, उन्नाव, रुड़की, आगरा, प्रयागराज, सारनाथ, पटना,
दिल्ली और कोलकाता के पुरातत्व विशेषज्ञों के अलावा जीपीआर एवं अन्य
तकनीकी अध्ययन के लिये हैदराबाद से विशेषज्ञ शामिल थे.
वाराणसी जिला अदालत के 21 जुलाई के आदेश के अनुसार
एएसआई को अपनी रिपोर्ट में यह बताना है कि क्या ज्ञानवापी में मंदिर को ध्वस्त करके
मस्जिद बनाई गयी है?
इस बीच सर्वे के दौरान साक्ष्य के रूप में मिली लगभग 250 सामग्रियों
को अदालत के आदेश के बाद छह नवंबर को एडीएम प्रोटोकॉल की देखरेख में कोषागार के डबल
लॉक में रखवाया गया है.
मुस्लिम पक्ष ने क्या की है मांग?
इस बीच रिपोर्ट जमा होने के पूर्व मुस्लिम पक्ष (अंजुमन इंतेज़ामिया मसाजिद) की तरफ से एक प्रार्थना पत्र जिला न्यायालय में दिया गया जिसमें यह अपील की गयी है कि किसी भी पक्ष को बगैर हलफनामा दिए रिपोर्ट की प्रति न दी जाय, ऐसा पिछले वर्ष हुए कोर्ट सर्वे से संबंधित जानकारियों के सार्वजनिक होने के बाद किया गया है.
मुस्लिम पक्ष का मानना है कि चूँकि मामला संवेदनशील है और लाखों लोगों की भावनायें इससे जुड़ी हैं ऐसे में रिपोर्ट या उससे संबंधित कोई भी जानकारी सार्वजनिक होने से सामाजिक ताने बाने पर असर पड़ सकता है.
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता मेराजुद्दीन ने बताया कि याचिका में यह मांग भी की गई है कि रिपोर्ट में ज्ञानवापी को लेकर जो भी विवरण दिए गए हैं, उसकी जानकारी मुस्लिम पक्ष को भी दी जाए.
यदि यह जानकारी किसी भी तरह सार्वजनिक होती है तो उसके पहले रिपोर्ट की सूचीबद्ध जानकारी उन्हें प्राप्त होनी चाहिए ताकि उन्हें यह पता चल सके कि सर्वे में एएसआई ने जिन तथ्यों को डाला है उसमें क्या विवरण हैं.
चार वादी महिलाओं के अधिवक्ता विष्णु हरिशंकर जैन ने बताया, "एएसआई ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट देकर उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है, हमने आज कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया है कि इस रिपोर्ट की कॉपी हमें 21 तारीख को दी जाय."
वाराणसी के जिला न्यायाधीश अजय कृष्ण विश्वेश ने इस मामले में अगली तारीख 21 दिसंबर नियत की है.