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इसके साथ ही कहा गया है कि -
अफ़ग़ान सरकार के शीर्ष स्तर इस मामले की सार्वजनिक रूप कड़ी निंदा की जाए
सभी चरमपंथी संगठनों और उनके पनाहगाहों के ख़िलाफ़ ऐसे कदम उठाए जाएं जिनकी पुष्टि की जा सके.
अफ़ग़ानिस्तान में टीटीपी के नेतृत्व और इस हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों को पकड़कर पाकिस्तान के हवाले किया जाए
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आतंकवाद के लिए अफ़ग़ान ज़मीन के इस्तेमाल को रोकने की दिशा में सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएं
बीबीसी ने अपने इंडिया ऑपरेशन के पुनर्गठन की घोषणा की
जो बाइडन के गणतंत्र दिवस पर भारत आने की संभावनाएं कम
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के गणतंत्र दिवस के मौके पर अगले महीने भारत की राजधानी दिल्ली आने की संभावनाएं कम हो गयी हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इस घटनाक्रम से अवगत लोगों ने मंगलवार को बताया है कि बाइडन के गणतंत्र दिवस के प्रमुख अतिथि के रूप में भारत आने की संभावनाएं कम हैं.
बाइडन के भारत दौरा टलने के साथ ही अगले महीने होने जा रही चार देशों के संगठन क्वाड की बैठक पर भी सवाल खड़ा हो गया है.
इस मुद्दे पर अब तक अमेरिकी सरकार या भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत की ओर से पुख़्ता जानकारी नहीं आई है.
इससे पहले सितंबर में अमेरिकी राजदूत एरिक गारसेटी ने कहा था कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति नरेंद्र मोदी को 26 जनवरी पर चीफ़ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया था.
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राज्य सभा में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ा विधेयक पास, विपक्ष ने जताई आपत्ति
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राज्य सभा में मंगलवार को भारतीय चुनाव आयुक्त की नियुक्ति
से जुड़ा विधेयक पारित होने पर विपक्षी नेताओं ने आपत्ति दर्ज कराई है.
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा है, “ये एक विधेयक नहीं है. ये एक बुलडोज़र है जिससे बीजेपी के नेतृत्व वाली
केंद्र सरकार ने भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता ख़त्म कर दी है.”
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वहीं, डीएमके सांसद टी सिवा ने कहा है, “…ये पूरी तरह से सरकार के हित में होगा. ये उस तरह से निष्पक्ष नहीं हो सकता, जैसी इससे अपेक्षा की जाती है. एक लोकतांत्रिक देश में ऐसा कैसे स्वीकार्य हो सकता है.”
राज्य सभा में मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक पारित किया गया है.
इस विधेयक को 10 अगस्त, 2023 को पेश किया गया था. इस विधेयक के तहत एक चयन समिति की ओर से भेजी गई सिफारिशों के आधार पर भारत के राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्त करेंगे.
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इसका विरोध करते हुए कहा, “एक बात समझ नहीं आई कि क्या सरकार को मुख्य न्यायाधीश पर भरोसा नहीं है. क्या सरकार को शीर्ष अदालत पर भरोसा नहीं है."
"तीन सदस्य थे – प्रधानमंत्री थे, नेता विपक्ष थे, और भारत के मुख्य न्यायाधीश थे. चीफ़ जस्टिस को हटाकर वहां अपने एक मंत्री को लाएंगे जिसे राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सिफारिश पर नियुक्त करते हैं. वहां निष्पक्षता कहां रहेगी. वहां योग्यता कहां रहेगी."
"आज का दिन भारतीय लोकतंत्र पर एक कलंक है जब स्वतंत्र–निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित करने के लिए मोदी सरकार ने आयोग के गठन की प्रक्रिया बदल दी है.”
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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी ओर से वॉकआउट करने की वजह भी यही रही.
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तुर्की में फुटबॉल मैदान पर रेफ़री के साथ हुई मारपीट, लीग गेम्स निलंबित
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तुर्की के अंकारा शहर में हुए एक फुटबॉल मैच के दौरान रेफरी को पीटे जाने के बाद सभी लीग गेम्स निलंबित कर दिए गए हैं.
जायकुर रिज़ेसपोर और एमकेई अंकारागुजु क्लब के बीच मंगलवार को हो रहा मैच ड्रॉ हो गया था.
इसके बाद एमकेई अंकारागुजु के अध्यक्ष फ़ारूक़ कोजा दौड़कर मैदान पर आए और रेफरी को घूंसा मार दिया.
टीम के समर्थकों ने भी मैदान पर आकर रेफरी के साथ मारपीट की.
इसके बाद लीग के अन्य मैचों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. रेफरी हलील उमुत मेलर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
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त्रिपुरा: सीपीएम का दावा- 'हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मस्जिद को मंदिर बताकर फैला रहे हैं तनाव'
....में
Author, पिनाकी दास
पदनाम, अगरतला से, बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज स्रोत, Pinaki Das/BBC
सीपीएम ने मंगलवार को दावा किया है कि त्रिपुरा में हिंदू संगठनों से
जुड़े कुछ लोग एक प्राचीन मस्जिद को मंदिर बताकर समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश
कर रहे हैं.
सीपीएम के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी ने बताया है कि साल 1993
के बाद से हर साल धीमाताली में स्थित मस्जिद के पास संघाती मेला लगता आया है. और बीजेपी
के सत्ता में आने के बाद भी ऐसा हो रहा है.
चौधरी ने दावा किया है कि सत्तारूढ़ दल की समर्थित संस्थाएं इस इमारत को जगन्नाथ मंदिर के रूप में परिभाषित कर रही हैं.
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि हाल ही में पुलिस की वर्दी पहने सुरक्षाकर्मियों ने अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों को इस जगह पर प्रार्थना करने से रोका था.
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चौधरी ने बताया, "हाल ही में संपन्न हुए संघाती मेले में मुख्यमंत्री मानिक साहा को एक तस्वीर भेंट की गयी जिसमें इस इमारत की तस्वीर को जगन्नाथ मंदिर के रूप में परिभाषित किया गया. यह आग भड़काने का एक विभाजनकारी कदम है. यह संभव है कि सीएम ने उस समय इस पर ध्यान न दिया हो. हम मुख्यमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे तनाव पैदा करने और एकता भंग करने की कोशिश करने वालों के प्रयासों को विफल करें."
उन्होंने ये भी कहा कि वह पुलिस प्रमुख को ये बताना चाहते हैं कि ये एक संज्ञेय अपराध है. "मुसलमानों को इस जगह पर प्रार्थना करने से रोकना स्वीकार्य नहीं है. ये देखना घोर निराशाजनक है कि वर्दी पहने हुए पुलिसकर्मी लोगों को प्रार्थना करने से रोकते हों. ये स्थिति सच में खेदजनक है."
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इस मामले में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े शाह आलम ने कहा है कि सीपीएम इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है. शाह आलम मानिक साहा को तस्वीर दिए जाने के मुद्दे पर किसी तरह की टिप्पणी करने से बचते नज़र आए.
हालांकि, उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि 35 सालों से ज़्यादा समय तक चले लेफ़्ट के शासन के दौरान वक़्फ बोर्ड की कई संपत्तियां राज्य सरकार को दे दी गयीं या काडर की ओर से कब्जा ली गयीं.
वहीं, आगामी क्रिसमस पर रैली निकाले जाने को लेकर जेएसएम की शीर्ष नेता मिल रानी जमातिया ने कहा कि हम रैली निकालने को लेकर अडिग हैं जो ईसाई बने आदिवासियों की डिलिस्टिंग की मांग करती है.
उन्होंने कहा कि ये आंदोलन 1966-67 से जारी है और तब इसका नेतृत्व एमपी कार्तिक ओरांग कर रहे थे.
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पाकिस्तान: अल-अजीजिया स्टील मिल्स मामले में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ बरी
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इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने अल-अजीजिया स्टील मिल्स मामले में सज़ा के ख़िलाफ़ नवाज़ शरीफ़ की अपील पर उन्हें बरी करने का आदेश दिया है.
इस्लामाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अमीर फ़ारूक़ की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने मामले पर पक्षों की बहस पूरी होने के बाद मंगलवार दोपहर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर आज शाम सुनवाई हुई.
याद रहे कि हाई कोर्ट की इसी दो सदस्यीय पीठ ने पिछले महीने 29 नवंबर को एवनफील्ड मामले में नवाज़ शरीफ़ को बरी करने का आदेश जारी किया था.
इमेज कैप्शन, नवाज़ शरीफ़ इस्लामाबाद हाई कोर्ट से बाहर निकलते हुए
24 दिसंबर, 2018 को इस्लामाबाद की जवाबदेही अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को अल-अजीजिया मामले में सात साल की जेल की सज़ा सुनाई थी.
उन्हें दस साल के लिए किसी भी सार्वजनिक पद पर रहने से प्रतिबंधित कर दिया. उनके नाम की सभी संपत्ति जब्त कर ली गई थी और लगभग डेढ़ अरब रुपये का जुर्माना लगाया गया था.
पूर्व प्रधानमंत्री ने जवाबदेही अदालत के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ इसी साल इस्लामाबाद हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. सुनवाई के बाद आज कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है.
इस मामले की गहराई में जाएं तो जवाबदेही अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक, अल-अजीजिया स्टील मिल्स की स्थापना नवाज़ शरीफ़ के पिता मियां मुहम्मद शरीफ़ ने 2001 में सऊदी अरब में की थी, जिसका प्रशासनिक कामकाज नवाज़ शरीफ़ के बेटे हुसैन नवाज़ चलाते थे.
जवाबदेही अदालत में शरीफ़ परिवार की ओर से दी गई दलीलों में कहा गया कि स्टील मिल स्थापित करने के लिए सऊदी सरकार से कुछ पूंजी ली गई थी.
हालांकि, एनएबी के वकीलों का कहना था कि इस संबंध में शरीफ़ परिवार द्वारा किए गए दावे बिना किसी दस्तावेजी सबूत पर आधारित हैं और यह ज्ञात नहीं है कि इस मिल को स्थापित करने के लिए पैसा कहां से आया.
वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान वापसी पर क्या नवाज़ शरीफ़ मिलेगी ज़मानत ?
उस वक्त एनएबी ने दावा किया था कि शरीफ़ परिवार ने पाकिस्तान से अवैध तरीके से पैसा लेकर इस मिल में निवेश किया था.
हुसैन नवाज़ ने अदालत को बताया कि उनके दादा ने उन्हें पाँच मिलियन डॉलर से अधिक दिए थे, जिसकी मदद से उन्होंने अल-अज़ीज़िया स्टील मिल्स की स्थापना की थी.
उनके अनुसार, इस मिल के लिए अधिकांश पूंजी क़तर के शाही परिवार द्वारा मुहम्मद शरीफ़ के अनुरोध पर दी गई थी.
वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान में जारी उठापटक पर क्या बोले नवाज़ शरीफ़?
इस मामले की जांच के लिए गठित संयुक्त जांच दल ने जवाबदेही अदालत के समक्ष दावा किया कि नवाज़ शरीफ़ खुद अल-अजीजिया स्टील मिल्स के असली मालिक हैं.
एनएबी अधिकारियों ने नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ दावा किया था कि उन्हें हुसैन नवाज़ की कंपनियों से भारी मुनाफा मिला है, जिससे पता चलता है कि असली मालिक वह हैं, न कि उनके बेटे.
गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई के दौरान एनएबी अपने आरोप को साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत उपलब्ध कराने में असमर्थ रहा था.
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पाकिस्तान चुनाव में क्यों नहीं दिख रहा लोगों का जोश
अफीम के उत्पादन में म्यांमार ने अफ़ग़ानिस्तान को पीछे छोड़ा
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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक़, म्यांमार अफ़ीम उत्पादन
के मामले में अफ़ग़ानिस्तान को पीछे छोड़कर दुनिया में पहले स्थान पर आ गया है.
इस साल म्यांमार में अफ़ीम उत्पादन 36 फीसद बढ़कर 1080 टन
तक बढ़ने की संभावना है. वहीं, अफ़ग़ानिस्तान में 330 टन उत्पादन होने की ख़बरें है.
पिछले साल तालिबान की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के
बाद से अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती में 95 फीसद की कमी आई है.
इसी बीच म्यांमार में जारी गृहयुद्ध की वजह से अफ़ीम
की खेती लाभकारी होने की वजह से तेजी से बढ़ी है.
इस रिपोर्ट के
लेखक जेरेमी डगलस ने कहा है, "साल 2021 के फरवरी महीने में हुए
सैन्य तख़्तापलट के बाद से आर्थिक, सुरक्षा और शासन में व्यवधान अभी भी दूरदराज के
क्षेत्रों में किसानों को जीवन यापन करने के लिए अफीम की ओर ले जा रहे हैं.”
दुनिया भर में हेरोइन नामक नशीला पदार्थ बनाने में अफ़ीम का
मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है.
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मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह चौहान से मिलते ही फूट-फूटकर रोईं महिला समर्थक
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मध्य प्रदेश की
राजधानी भोपाल में मंगलवार को शिवराज सिंह चौहान ने अपनी महिला समर्थकों के साथ
मुलाक़ात की.
शिवराज सिंह
चौहान ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि “अपने लिए कुछ मांगने
जाने से बेहतर मैं मरना समझूंगा.”
इसी दौरान उनकी
मुलाक़ात महिला समर्थकों से हुई जो शिवराज सिंह को देखते ही काफ़ी भावुक हो गयीं.
समाचार एजेंसी एएनआई
की ओर से जारी वीडियो में महिला समर्थक शिवराज सिंह चौहान से मिलते हुए भावुक होती
नज़र आ रही हैं.
शिवराज से बात करते हुए एक महिला कहती हुई दिख रही हैं कि 'बहनों ने आपको चुना था भइया. आपको वोट दिया था. आपने इतनी मेहनत की.'
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वहीं, शिवराज सिंह चौहान इस दौरान अपनी महिला समर्थकों को ढांढ़स बंधाते नज़र आए.
मध्य प्रदेश में बीजेपी ने उज्जैन दक्षिण सीट से चुनाव जीतकर विधायक बनने वाले डॉ मोहन यादव के हाथ में राज्य की कमान सौंपी है. इसने बीजेपी कार्यकर्ताओं समेत तमाम राजनीतिक पंडितों को चौंकाया है.
अधीर रंजन का दावा: बीजेपी का आदिवासी-ओबीसी सीएम चुनना राहुल गांधी की उठाई मांग का असर
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कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया है कि बीजेपी का छत्तीसगढ़ में आदिवासी और मध्य प्रदेश में ओबीसी मुख्यमंत्री चुनना उनकी पार्टी की ओर से उठाई गई मांग का असर है.
अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया, " (कांग्रेस नेता) राहुल गांधी जो बात उठाते हैं, (पीएम नरेंद्र) मोदी तुरंत उस बात को अपनाते हैं और लागू करने में लग जाते हैं."
बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेता विष्णुदेव साय और मध्य प्रदेश में ओबीसी समुदाय से आने वाले मोहन यादव को मुख्यमंत्री चुना है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक अधीर रंजन चौधरी ने इसे राहुल गांधी की उठाई मांग का असर बताया.
उन्होंने कहा, "राहुल (गांधी) जो कहते हैं कि उसका असर (पीएम नरेंद्र) मोदी पर होता है. जब राहुल गांधी जाति जनगणना के बारे में कह चुके हैं तब एक के बाद एक राज्यों में जो (बीजेपी के) चीफ़ मिनिस्टर बनते हैं वो उसी समीकरण के मुताबिक बनते हैं. जहां जातिगत समीकरण ठीक रहे. "
उन्होंने कहा, "ये जातिगत जनगणना की मांग कांग्रेस पार्टी कर रही है, उसका असर है. ये उस असर की झलक है."
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'राहुल गांधी से सीखा और रेवड़ी बांटने लगे'
अधीर रंजन चौधरी ने ये दावा भी किया कि राहुल गांधी ने कर्नाटक में जो रणनीति अपनाई थी, बीजेपी ने उसी के मुताबिक राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए चुनावी योजना बनाई.
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी जब कर्नाटक जाकर पांच प्रण किए थे. पांच वादे किए थे कि सत्ता में आएंगे तो हम ये पांच वादे लागू करेंगे. मोदी जी और बीजेपी ने सीख लिया उनसे.चुनाव शुरू होने से पहले छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान जाकर वादे करना शुरू कर दिया."
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "राहुल गांधी जब वादे करते थे तब मोदी और बीजेपी रेवड़ी, रेवड़ी कहकर शोर मचाते थे. वही रेवड़ी मोदी जी तीनों राज्यों में बांटने लगे."
शिवराज सिंह चौहान ने भजनलाल शर्मा के राजस्थान का सीएम चुने जाने पर क्या कहा
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी भजनलाल शर्मा को दिए जाने पर अपनी
पहली टिप्पणी दी है.
शिवराज सिंह चौहान ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा
है, “माननीय श्री भजन लाल शर्मा जी को भाजपा विधायक दल की बैठक में राजस्थान
का मुख्यमंत्री मनोनीत किए जाने पर हार्दिक शुभकामनाएं. मुझे
पूर्ण विश्वास है कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन
एवं आपके नेतृत्व में राजस्थान प्रगति, विकास तथा जनकल्याण
के क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित करेगा.”
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शर्मा हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में पहली बार सांगानेर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं.
पार्टी ने पहली बार में ही उन्हें मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपने का फ़ैसला किया है जिसे कई राजनीतिक विशेषज्ञ मोहन यादव की तरह चौंकाने वाला फ़ैसला मान रहे हैं.
सोमवार को बीजेपी ने मध्य प्रदेश में भी तमाम शीर्ष नेताओं को दरकिनार करते हुए मोहन यादव जैसे नेता को ज़िम्मेदारी सौंपी थी.
इसके बाद आज बीजेपी ने राजस्थान में भी सबको चौंकाते हुए पहली बार विधायक बने शख़्स को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला किया है.
सीबीएसई ने बताया, कब होंगी 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं
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सीबीएसई बोर्ड ने मंगलवार शाम दसवीं और बारहवीं कक्षाओं की
बोर्ड परीक्षाओं के लिए कार्यक्रम जारी कर दिया है.
इस कार्यक्रम के तहत बारहवीं की परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू
होकर 2 अप्रैल तक चलेंगी.
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वहीं, दसवीं की परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होकर 13 मार्च तक चलेंगी.
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राजस्थान में क्या बीजेपी जातियों को साधने की कोशिश में है, पार्टी ने दिया जवाब
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राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी ने भजनलाल शर्मा को सरकार की कमान
सौपने का एलान किया है. विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद भजनलाल शर्मा ने राज्यपाल
कलराज मिश्र से मुलाक़ात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया.
भजनलाल शर्मा की सरकार में दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा उपमुख्यमंत्री
होंगे.
इस फ़ैसले को कई लोग बीजेपी की ओर से सभी जातियों को साधने की कोशिश के तौर
पर देख रहे हैं.
भजनलाल शर्मा ब्राह्मण हैं. छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेता विष्णुदेव
साय और मध्य प्रदेश में ओबीसी समुदाय से आने वाले मोहन यादव के बाद राजस्थान में भजनलाल
शर्मा के नाम का एलान हुआ तो कई लोगों ने इसे सवर्णों को खुश करने की कोशिश के तौर
पर देखा.
राजस्थान की ही बात करें तो दीया सिंह राजपूत हैं और प्रेमचंद बैरवा
दलित समुदाय से आते हैं.
इनके नाम के एलान के बाद पत्रकारों ने बीजेपी के सीनियर विधायक
किरोड़ी लाल मीणा से यही सवाल किया.
पत्रकारों ने पूछा कि राजपूत, ब्राह्मण और दलित नेताओं के जरिए क्या
ये जातियों को साधने की कोशिश है?
इस पर मीणा ने कहा, “हमें जाति को साधने की ज़रूरत नहीं. हमारे पास सबसे बड़ा चेहरा 36
कौम का है, नरेंद्र मोदी. उनके नाम पर हम तीन राज्यों में जीत गए. आगे 2024 में भी
जीतेंगे.”