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इसराइल-हमास युद्ध में अब तक 18,205 फ़लस्तीनियों की मौत, ख़ान यूनिस में घुसे टैंक

हमास के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि सात अक्टूबर से शुरू हुए इसराइल के साथ युद्ध में अब तक 18,205 फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे and अनंत प्रकाश

  1. आर्टिकल 370: महबूबा मुफ़्ती ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आइडिया ऑफ़ इंडिया की हार'

    जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला 'आइडिया ऑफ़ इंडिया की हार है.'

    महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि ये गांधी के उस भारत की भी हार है जिसे पाकिस्तान को दरकिनार कर जम्मू-कश्मीर के लोगों ने चुना था.

    सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद वीडियो बयान जारी कर उन्होंने कहा, “ मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों से कहना चाहती हूं कि हिम्मत मत छोड़ो. सुप्रीम कोर्ट का आज का फ़ैसला एक पड़ाव है मंज़िल नहीं है. हमारे विरोधी चाहते हैं कि हम उम्मीद छोड़ दें लेकिन ऐसा नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 370 अस्थायी है, ये हमारी नहीं भारत के तसव्वुर की हार है.”

    उन्होंने कहा, “यहां के मुसलमानों ने जिस तरह पाकिस्तान को दरकिनार करके यहां के पंजाबी, हिंदी, सिख, बौद्ध और गांधी के भारत के साथ हाथ मिलाया आज ये उस आइडिया ऑफ़ इंडिया की हार है.”

    महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “ 1947 के बाद जब संविधान बना तो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला. लेकिन 70 साल बाद एक ऐसी सरकार आई जो हमेशा ये रट लगाए रहती थी कि सत्ता में आए तो आर्टिकल 370 हटा देंगे और उन्होंने वो कर दिया. ये हमारी हार नहीं है. धोखा उन्होंने किया. उन्होंने जम्मू कश्मीर में उन ताकतों को मज़बूत किया जो कहती थी कि भारत के साथ जाना गलत है.”

    सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से फ़ैसला देते हुए जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने का फ़ैसला बरकरार रखा है.

    पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 रद्द कर दिया था. चार साल बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने उस फ़ैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर फ़ैसला सुनाया है.

  2. LIVE: मध्य प्रदेश में कैसा है राजनीतिक माहौल और कौन हो सकता है मुख्यमंत्री

    मध्य प्रदेश में कैसा है राजनीतिक माहौल और कौन हो सकता है मुख्यमंत्री, भोपाल में वरिष्ठ पत्रकारों के साथ चर्चा कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता सलमान रावी.

    कैमरा: अरविंद साहू

  3. जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फ़ैसले को सही ठहराते हुए चीफ़ जस्टिस ने क्या कहा

    सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का केंद्र सरकार के फ़ैसले को वैध ठहराया है.

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 हमेशा से अस्थायी प्रवधान था. कोर्ट के मुताबिक़ राष्ट्रपति ने जो फ़ैसला लिया वो वैध है.

    अपना फ़ैसला सुनाते हुए चीफ़ जस्टिस ने ये महत्वपूर्ण बाते कहीं-

    • विलय पत्र पर हस्ताक्षर के बाद जम्मू-कश्मीर की संप्रभुता खत्म हो गयी थी. इसलिए अब जम्मू-कश्मीर की आंतरिक संप्रभुता नहीं है.
    • अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रवधान था.
    • जब संविधान सभा भंग हुई तो सभा की केवल ट्राज़िटरी पावर खत्म हुई लेकिन इसका कोई असर राष्ट्रपति के फ़ैसले लेने की शक्ति पर नहीं पड़ता.
    • अनुच्छेद 370 को अनुच्छेद 367 में संशोधन करके लाया गया था, यह अल्ट्रा वायर्स (क़ानूनी अधिकार से परे) था क्योंकि इंटरप्रिटेशन क्लॉज़ का इस्तेमाल संशोधन के लिए नहीं किया जा सकता.
    • राष्ट्रपति ने जो फ़ैसला लिया वह सत्ता का दुरुपयोग या दुर्भावनापूर्ण नहीं, इसके लिए राज्य के साथ किसी सहमति की ज़रूरत नहीं थी.
    • भारतीय संविधान के सभी प्रावधानों को जम्मू-कश्मीर में लागू करना वैध है.
    • 370(1)(डी) के तहत लिए गए कई संवैधानिक आदेशों से पता चलता है कि केंद्र और राज्य ने एक सहयोगी प्रक्रिया के माध्यम से भारत का संविधान जम्मू और कश्मीर में लागू किया. जम्मू-कश्मीर के एकीकरण की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी और ऐसे में इस फ़ैसले को राष्ट्रपति की शक्तियों के गलत इस्तेमाल के रूप में नहीं देख जा सकता. इसलिए हम राष्ट्रपति के फ़ैसले को वैध ठहराते हैं.
    • सॉलिसिटर जनरल ने बयान दिया कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा. हम लद्दाख को अलग करने के फैसले को बरकरार रखते हैं.
    • हम चुनाव आयोग को पुनर्गठन अधिनियम के तहत जल्द से जल्द (सितंबर, 2024 तक) चुनाव कराने का निर्देश देते हैं.
  4. आर्टिकल 370: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर क्या बोले बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा

    भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आर्टिकल 370 हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है.

    उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जम्मू कश्मीर को देश की मुख्यधारा में जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया है.

    सोशल प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जेपी नड्डा ने लिखा, "माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा धारा 370 के विषय में दिये गये फ़ैसले का भारतीय जनता पार्टी स्वागत करती है. उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने धारा 370 और 35ए को हटाने के लिए दिए गये निर्णय, उसकी प्रक्रिया और उद्देश्य को सही ठहराया है."

  5. आर्टिकल 370: पीएम मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बताया, 'एकता को सर्वोपरि रखने वाला फ़ैसला'

    जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को वैध ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की तारीफ़ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ये ऐतिहासिक फ़ैसला है.

    सोशल प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पीएम मोदी ने लिखा,“अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर आज आया का सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है. कोर्ट ने 5 अगस्त 2019 को भारत की संसद के लिए गए फैसले को संवैधानिक रूप से बरकरार रखा है. यह जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में हमारी बहनों और भाइयों के लिए आशा, प्रगति और एकता की एक शानदार घोषणा है.”

    उन्होंने कहा, “कोर्ट ने अपने गहन ज्ञान से एकता के उस सार को मजबूत किया है जिसे हम भारतीय होने के नाते सबसे ऊपर रखते हैं.”

    “मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपके सपनों को पूरा करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता अटूट है.”

    'सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आशा की किरण'

    पीएम मोदी ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि विकास का फ़ायदा न केवल आप तक पहुंचे, बल्कि इसका फ़ायदा हमारे समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों तक भी पहुंचे, जो अनुच्छेद 370 के कारण भेदभाव का शिकार थे.”

    उन्होंने कहा, “आज का फैसला सिर्फ कानूनी फैसला नहीं है, यह आशा की किरण है, उज्जवल भविष्य का वादा है और एक मजबूत, अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है.”

  6. आर्टिकल 370: कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद पीएम मोदी से की ये अपील

    कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने आर्टिकल 370 हटाए जाने को वैध ठहराने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से अनुरोध किया है कि वो जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा जल्दी बहाल करें.

    उन्होंने फ़ैसले का विरोध कर रहे लोगों से अपील की है कि वो ऐसा नहीं करें.

    कर्ण सिंह ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने बहुत बारीकी से हर एक विषय को देखा है. चीफ़ जस्टिस जो पढ़ रहे थे, उसमें एक-एक क्लॉज, एक-एक सब क्लॉज उन्होंने देखा है, और सब परिस्थितियां देखते हुए वो नतीजे पर पहुंचे हैं. मैं इसका स्वागत करता हूं."

    कर्ण सिंह महाराज हरि सिंह के बेटे हैं. महाराज हरि सिंह ने ही जम्मू कश्मीर के भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे.

    सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 370 हटाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को सोमवार को वैध ठहराया.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक कर्ण सिंह ने कहा, "बहुत दिन से ये बात हवा में थी, अब कम से कम स्पष्ट हो गया है कि जो हुआ वो वैध था. राजनीतिक रूप से चाहे कोई समझे की नहीं होना चाहिए था, वो बात और है. लेकिन न्यायिक दृष्टिकोण से वो वैध है."

    'अब बंद करें विरोध'

    उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने दो बातें बहुत अच्छी बात कहीं. मैं चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ को बधाई देता हूं. एक उन्होंने कहा कि हमें स्टेटहुड (राज्य का दर्जा) जल्दी से जल्दी मिलना चाहिए. जम्मू कश्मीर को यूनियन टैरेटरी बनाना हमें मंजूर नहीं था."

    कर्ण सिंह ने कहा, "(पीएम) मोदी से प्रार्थना है कि जल्दी से जल्दी राज्य का दर्जा दें."

    उन्होंने कहा, "दूसरी बात उन्होंने (सुप्रीम कोर्ट ने) कहा कि चुनाव सितंबर 2024 तक हो जाने चाहिए."

    कर्ण सिंह ने कहा, " मुझे पता है कि जम्मू कश्मीर के कुछ लोगों को ये फ़ैसला अच्छा नहीं लगेगा. उनसे मेरी प्रार्थना है कि अब वो इसे (फैसले को) स्वीकार कर लें. अब विरोध करने का लाभ नहीं है. वो राजनीति के लिए तैयार हो जाएं, जब चुनाव हों तो चुनाव डट कर लड़ें"

  7. अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर उमर अब्दुल्ला ने कहा- निराश हूं

    सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का केंद्र सरकार के फ़ैसले को वैध ठहराया है.

    इस फ़ैसले पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से निराश हैं.

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लटेफॉर्म एक्स पर लिखा- “निराश हूं लेकिन हतोत्साहित नहीं. संघर्ष जारी रहेगा. बीजेपी जहां है वहां तक पहुंचने में उसे दशकों लग गए. हम लंबी दौड़ के लिए भी तैयार हैं.”

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 हमेशा से अस्थायी प्रावधान था. कोर्ट के मुताबिक़ राष्ट्रपति ने जो फ़ैसला लिया वो वैध है.

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, चीफ़ जस्टिस का चुनाव आयोग को निर्देश: जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव सितंबर तक कराएं

    सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वो सितंबर 2024 तक जम्मू कश्मीर में चुनाव कराएं.

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आर्टिकल 370 हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फ़ैसला सुनाया. चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ ने फैसले की वैधता बरकरार रखी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “हम निर्देश देते हैं कि भारत का चुनाव आयोग 30 सितंबर 2024 तक जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव कराने के लिए कदम उठाए.”

  9. आर्टिकल 370 हटाए जाने का फ़ैसला वैध: चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संविधान के आर्टिकल 370 को हटाए जाने के फ़ैसले को वैध ठहराया है.

    आर्टिकल 370 हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “हम संविधान के आर्टिकल 370 को हटाने के लिए राष्ट्रपति की ओर से संवैधानिक आदेश जारी करने की शक्ति के इस्तेमाल को वैध ठहराते हैं.”

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ ने लद्दाख को अलग करने के फ़ैसले की वैधता भी बरकरार रखी.

    चीफ़ जस्टिस ने कहा, “सॉलिसिटर जनरल ने बयान दिया कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा. हम लद्दाख को अलग करने के फैसले को बरकरार रखते हैं. हम चुनाव आयोग को पुनर्गठन अधिनियम और धारा 14 के तहत जल्द से जल्द चुनाव कराने का निर्देश देते हैं.” "

  10. ब्रेकिंग न्यूज़, जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था- चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

    सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि जम्मू कश्मीर के पास भारत के दूसरे राज्यों से अलग कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं है.

    अनुच्छेद 370 हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उन्होंने सोमवार को ये कहा. कोर्ट की पांच जजों की पीठ अपना फ़ैसला सुना रही है.

    चीफ़ जस्टिस ने कहा, 'जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. ये संविधान के आर्टिकल एक और 370 से साफ़ है.'

    चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फ़ैसला पढ़ते हुए कहा है-“हम मानते हैं कि आर्टिकल 370 अस्थायी है. इसे एक अंतरिम प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बनाया गया था. राज्य में युद्ध की स्थिति के कारण यह एक अस्थायी व्यवस्था थी. यह एक अस्थायी प्रावधान है और इस लिए इसे संविधान के भाग 21 में रखा गया है.”

    उन्होंने ये भी कहा कि हमारा मानना है कि भारत के साथ एक्सेशन पर हस्ताक्षर करने के बाद जम्मू-कश्मीर की कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं है.

    सीजेआई ने कहा-"अनुच्छेद 370 (3) संवैधानिक एकीकरण के लिए लाया गया था न कि बांटने लिये. संविधान सभा भंग होने के बाद 370(3) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता ये दलील स्वीकार नहीं की जा सकती क्योंकि यह संवैधानिक इंटिग्रेशन को रोकता है."

    "कोर्ट राष्ट्रपति के फ़ैसले पर अपील पर सुनवाई नहीं कर सकता.हालाँकि कोई भी फ़ैसला न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है. लेकिन 370(1)(डी) के तहत लिए गए कई संवैधानिक आदेशों से पता चलता है कि केंद्र और राज्य ने एक सहयोगी प्रक्रिया के माध्यम से भारत का संविधान जम्मू और कश्मीर में लागू किया है."

    "इससे पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर के एकीकरण की प्रक्रिया अतीत से चल रही थी और ऐसे में इस फ़ैसले को राष्ट्रपति की शक्तियों के गलत इस्तेमाल के रूप में नहीं देख जा सकता. इसलिए हम राष्ट्रपति के फ़ैसले को वैध ठहराते हैं."

  11. महबूबा मुफ्ती को नज़रबंद करने के दावे पर एलजी मनोज सिन्हा ने दिया जवाब

    पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को नज़रबंद किए जाने के दावे को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है.

    उन्होंने कहा है कि इस तरह के दावे 'निराधार' हैं और किसी को भी गिरफ्तार या नज़रबंद नहीं किया गया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सिन्हा ने कहा- “ये दावा निराधार है, ना ही किसी को गिरफ़्तार किया गया है और ना ही नज़रबंद किया गया है. ये भ्रामक अफ़वाह फैलाने की कोशिश है. किसी को भी राजनीतिक कारणों से गिरफ़्तार या नज़रबंद नहीं किया गया है. "”

    पीडीपी ने दावा किया है कि पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया गया है.

    पार्टी ने एक्स पर लिखा, "सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाए जाने से पहले ही, पुलिस ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के आवास के दरवाजे सील कर दिए हैं और उन्हें अवैध रूप से नजरबंद कर दिया है."

    सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अनुच्छेद-370 को हटाए जाने की संवैधानिक वैधता पर फ़ैसला सुनाने वाला है.

    साल 2019 में भारत सरकार ने संविधान के इस अनुच्छेद को निरस्त कर दिया था. चार साल बाद अब सुप्रीम कोर्ट इसे लेकर अपना फैसला सुनाने वाला है.

    सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और सूर्यकांत 16 दिनों तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 5 सितंबर को अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिय था.

  12. ब्रेकिंग न्यूज़, अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले महबूबा मुफ़्ती को किया गया नज़रबंद करने का दावा

    पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने दावा किया है कि पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया गया है.

    उनकी पार्टी ने ये जानकारी दी है. हालांकि समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस दावे को 'निराधार' बताया है.

    पार्टी ने एक्स पर लिखा, "सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाए जाने से पहले ही, पुलिस ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के आवास के दरवाजे सील कर दिए हैं और उन्हें अवैध रूप से नजरबंद कर दिया है."

    इस दावे पर मनोज सिन्हा ने कहा है- ये दावा निराधार है, ना ही किसी को गिरफ़्तार किया गया है और ना ही नज़रबंद किया गया है. ये भ्रामक अफ़वाह है."

    अधिकारियों ने कहा कि इस बीच, पुलिस ने पत्रकारों को नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक़ अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के गुपकर स्थित आवास के पास जाने से रोक दिया है.

    सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अनुच्छेद-370 को हटाए जाने की संवैधानिक वैधता पर फ़ैसला सुनाने वाला है.

    साल 2019 में भारत सरकार ने संविधान के इस अनुच्छेद को निरस्त कर दिया था. चार साल बाद अब सुप्रीम कोर्ट इसे लेकर अपना फैसला सुनाने वाला है.

    सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और सूर्यकांत 16 दिनों तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 5 सितंबर को अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिय था.

  13. अनुच्छेद-370 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले याचिकाकर्ता ने क्या कहा

    सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अनुच्छेद-370 को हटाए जाने की संवैधानिक वैधता पर फ़ैसला सुनाने वाला है.

    साल 2019 में भारत सरकार ने संविधान के इस अनुच्छेद को निरस्त कर दिया था. चार साल बाद अब सुप्रीम कोर्ट इसे लेकर अपना फैसला सुनाएगा.

    फ़ैसले से पहले इस मामले में याचिकाकर्ता और वकील मुज़फ़्फ़र इक़बाल ख़ान ने कहा है कि इस फ़ैसले का असर ना सिर्फ़ जम्मू कश्मीर पर बल्कि पूरे देश पर पड़ेगा.

    उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा- “सवाल यही है कि क्या राज्य की विधानसभा, संविधान सभा के अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती है. अगर इस पर सकरात्मक फ़ैसला आया तो इस फ़ैसले का असर केशवनंदा भारतीय केस के फ़ैसले पर भी होगा जिसे 13 जजों की बेंच ने सुनाया था. इसमें कहा गया था कि संसद संविधान सभा की सभी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.”

    “ दूसरा सवाल सुप्रीम कोर्ट के सामने ये है कि क्या बिना विधानसभा से विचार विमर्श किए राज्य को इस तरह दो केंद्र शासित राज्यों में बांटा जा सकता है. हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट जम्मू कश्मीर के लोगों के हक़ की सुरक्षा करेगी. इस फ़ैसला का असर सिर्फ़ जम्मू कश्मीर नहीं बल्कि पूरे देश की पीढ़ियों पर होगा, साथ ही पूरे देश की राजनीति पर इस फ़ैसले का असर होगा.”

    सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और सूर्यकांत 16 दिनों तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 5 सितंबर को अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिय था.

  14. अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले उमर अब्दुल्ला क्या बोले

    जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को साल 2019 में भारत सरकार ने निरस्त कर दिया था.

    चार साल बाद सोमवार को केंद्र सरकार के इस फ़ैसले की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा.

    फैसला आने से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि उन्हें इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार था और उन्हें इंसाफ़ की उम्मीद है.

    उन्होंने कहा- “ जब हम 2019 में सुप्रीम कोर्ट में गए थे तब न्याय की उम्मीद लेकर गए थे, आज भी हमारे जज्बात वही हैं. हमें इस दिन का बेसब्री से इंतजार था. सोमवार (11 दिसंबर) को जज अपना फैसला सुनाएंगे, हमें इंसाफ की उम्मीद है."”

    “सुप्रीम कोर्ट को फैसला देना है, फैसला देने दीजिए.”

    घाटी में सिक्योरिटी बढ़ाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा- "जनता पर यकीन होना चाहिए, यहां लोगों ने कब बीते चार सालों में कानून को अपने हाथों में लिया. 2019 में नहीं लिया, 2020 में नहीं लिया."

    "आज जब हम ग़ज़ा में जो कुछ हो रहा है उससे बहुत नाराज़ हैं लेकिन फिर भी हम दिमाग से काम ले रही हैं, माहौल को बिगाड़ने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. फ़ैसला आने के बाद भी लोग माहौल नहीं बिगाड़ेंगे. पुलिस को लोगों को पकड़ने की ज़रूरत नहीं है, लोगों पर भरोसा करना चाहिए.”

    सुप्रीम कोर्ट में चीफ़ जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वालीपांच जजों की बेंचके फ़ैसला सुनाने से पहले घाटी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गयी है.

  15. दिल्ली सरकार डीटीसी बसों के लिए लेकर आने वाली है व्हाट्सएप टिकट सर्विस

    दिल्ली सरकार दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर अब डीटीसी की बसों में भी व्हाट्सएप-आधारित बस टिकट की सुविधा शुरू करने की योजना बना रही है.

    अधिकारियों का कहना है कि परिवहन विभाग डीटीसी और क्लस्टर बसों के लिए डिजिटल टिकटिंग प्रणाली शुरू करने पर काम कर रहा है.

    दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी डीएमआरसी में पहले से ही व्हाट्सएप आधारित टिकटिंग प्रणाली का इस्तेमाल होता है. यह सेवा इस साल मई में शुरू की गई थी और बाद में इसे गुरुग्राम रैपिड मेट्रो सहित रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के सभी रूट पर लागू कर दिया गया.

    दिल्ली मेट्रो टिकट खरीदने के लिए यात्रियों को व्हाट्सएप पर +91 9650855800 नंबर 'Hi' टेक्स्ट करना होगा या मेट्रो टिकट खरीदने के लिए दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा. ये सुविधा हर नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर के लिए है.

    व्हाट्सएप टिकटिंग सर्विस का इस्तेमाल करके ली गई टिकटों को कैंसिल नहीं किया जा सकता.

  16. कांग्रेस सांसद से जुड़ी एक कंपनी पर छापा, 351 करोड़ की नकदी मिली

    कांग्रेस सांसद के परिवार के स्वामित्व वाली एक डिस्टिलरी (शराब बनाने का कारखाना) कंपनी के ख़िलाफ़ आयकर विभाग की छापेमारी में 351 करोड़ रुपये कैश जब्त किए गए हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने ये जानकारी दी है.

    यह किसी भी जांच एजेंसी की ओर से की गई एकल कार्रवाई में बरामद हुआ "अब तक का सबसे अधिक" कैश है.

    ये डिस्टलरी झारखंड से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के परिवार से जुड़ी है. हालांकि अब तक साहू की ओर से इसे लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है.

    बौध डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों और अन्य के ख़िलाफ़ आयरकर विभाग की छापेमारी का रविवार को पांचवां दिन था.

    कर चोरी और "ऑफ़-द-बुक" लेनदेन के आरोप में टैक्स अधिकारियों ने 6 दिसंबर को छापेमारी शुरू की थी.

    सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि नोटों की गिनती की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है और कुल 351 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गयी है.

    गिनती में आयकर विभाग और विभिन्न बैंकों के लगभग 80 लोगों की नौ टीमें शामिल थीं जो रोटेशन में 24 घंटे की शिफ्ट में काम कर रही थीं.

    न्यूज़ एजेंसी को सूत्रों ने बताया कि नकदी को ले जाने के लिए लगभग 200 बैग और ट्रंक का इस्तेमाल किया गया.

  17. अमेरिकी मीडिया में खालिस्तान समर्थक नेताओं पर नई रिपोर्ट को भारत ने किया ख़ारिज

    विदेश मंत्रालय ने रविवार को पूरी तरह इस दावे से इनकार किया कि पश्चिमी देशों में खालिस्तान समर्थकों के ख़तरे से निपटने के लिए इस साल अप्रैल में कोई लिखित आदेश जारी किया गया था.

    विदेश मंत्रालय का ये खंडन अमेरिकी मीडिया आउटलेट द इंटरसेप्ट की एक रिपोर्ट को लेकर आया जिसमें दावा किया गया था कि इस तरह का एक ‘गोपनीय मैमो’ विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने जारी किया था और इस आदेश में कई ख़ालिस्तानी नेताओं के नाम थे, जिसमें हरदीप सिंह निज्जर का भी नाम शामिल था जिनकी 18 जून को कनाडा में हत्या हो गयी.

    इस साल सितंबर में कनाडा सरकार ने आरोप लगाया था कि उसके पास इस बात के सबूत हैं जो इशारा करते हैं कि निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ हो सकता है. भारत इस दावे को पूरी तरह ख़ारिज करता रहा है.

    रविवार को द इंटरसेप्ट की रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक बयान जारी करते हुए कहा- “हम मज़बूती से कहते हैं कि ये रिपोर्ट पूरी तरह फेक और मनगढंत है. ऐसा कोई मैमो जारी नहीं किया गया. ये भारत के खिलाफ़ चलाए जा रहे कैंपेन का हिस्सा है. ये आउटलेट पाकिस्तान का नरैटिव फैलाने के लिए जाना जाता है. जो लोग इस तरह के फेक न्यूज़ को फैला रहे है, वो अपनी खुद की विश्वसनीयता खो रहे हैं.”

    रविवार को द इंटरसेप्ट ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अप्रैल 2023 को उत्तरी अमेरिका के भारतीय वाणिज्य दूतावासों को एक ‘गोपनीय मैमो’ जारी किया जिसमें कहा था कि पश्चिमी देशों में सक्रिय सिख प्रवासी संगठनों के खिलाफ़ एक ‘सोफ़ेस्टिकेटेड क्रैकडाउन’ किया जाए.

    इस मैमो में कई सिख खालिस्तान समर्थकों का नाम था जो भारत सरकार के विरोधी हैं , इसमें हरदीप सिंह निज्जर का नाम भी शामिल था.

  18. नमस्कार!

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