तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को 'पैसे लेकर सवाल पूछने' के मामले में लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया है.
शुक्रवार को संसद की एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट लोकसभा में पास हो गई. एथिक्स कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने का सुझाव दिया था.
लोकसभा स्पीकर ने कहा कि कमेटी की सिफ़ारिश से सदन सहमत है.
स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “सदन कमेटी के निष्कर्षों
को स्वीकार करता है कि एक सांसद के रूप में महुआ मोइत्रा का आचरण अनैतिक और अनुचित
था, और उनका सांसद बना रहना अनुपयुक्त है.”
इस रिपोर्ट पर बहस कराए जाने और महुआ मोइत्रा को लोकसभा में अपनी बात रखने की मांग को लोकसभा स्पीकर ने ये कहते हुए ठुकरा दिया कि उन्हें पैनल की बैठक के दौरान अपना पक्ष रखने का मौका मिल चुका है.
इससे पहले दोपहर बाद एथिक्स कमेटी के चेयरमैन विनोद कुमार सोनकर ने जैसे ही रिपोर्ट पेश की, कांग्रेस और टीएमसी के सदस्य अध्यक्ष के आसन के करीब पहुंच गए और नारे लगाते हुए रिपोर्ट की प्रति दिए जाने की मांग की.
टीएमसी के सदस्य कल्याण बनर्जी ने रिपोर्ट की सिफ़ारिश पर वोटिंग से पहले बहस कराए जाने की मांग की. कमेटी ने मोइत्रा को सदन से निष्कासित करने की सिफ़ारिश की है.
हंगामे के बीच अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे बीजेपी सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने सदन की कार्रवाई को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया.
इस बीच लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिख कर अपील की है कि सदन में बहस के लिए सदस्यों को तीन चार दिन का वक्त दिया जाना चाहिए ताकि वे इसका अध्ययन कर सकें.
उन्होंने लिखा है, "मैं अपील करता हूं कि एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट पर बहस के लिए कम से कम तीन दिन बाद की तारीख और समय तय करें."
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, "जैसा कि अधीर रंजन ने कहा अगर हमने इस रिपोर्ट का संज्ञान लेने के लिए 3-4 दिन का समय दिया होता और फिर सदन के सामने अपनी राय रखी होती तो आसमान नहीं गिर जाता क्योंकि सदन एक बेहद संवेदनशील मामले पर फैसला लेने जा रहा है... क्या आचार समिति की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांत को खत्म कर सकती है, जो दुनिया की हर न्याय प्रणाली का सिद्धांत है? हमने अखबार में जो पढ़ा जिसे अभियुक्त बनाया गया, उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया, यह कैसी प्रक्रिया है?..."
लोकसभा में एथिक्स कमेटी के प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के ख़िलाफ़ विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार किया. लोकसभा की कार्यवाही को 11 दिसम्बर, 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया है.