ग़ज़ा के अल-शिफ़ा अस्पताल के हालात को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि यहां स्थिति 'कब्रिस्तान जैसी' है.
इस बीच अमेरिकी
राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि ग़ज़ा पट्टी के अस्पतालों को सुरक्षित रखने की ज़रूरत
है.
डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमीयर ने बताया है कि फ़िलहाल इस अस्पताल में 600 लोग
हैं.
उनके अनुसार, ''अस्पताल के आसपास कई शव पड़े हैं, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. इन शवों को दफ़नाया नहीं जा रहा है. ये अस्पताल अब काम नहीं कर रहा है. ये एक कब्रिस्तान जैसा बन गया है.''
डॉक्टरोंं ने भी बताया है कि अस्पताल में शवों का ढेर लग गया है और कई शव सड़ने लगे हैं.
उत्तरी ग़ज़ा का
ये अस्पताल पिछले कई दिनों से चर्चा में है.
मेडिकल और खाने-पीने
की सुविधाओं के न होने के कारण डब्लूएचओ का दावा है कि अब इस अस्पताल ने काम करना बंद कर दिया है.
इसराइली सेना ने क्या कहा?
हालांकि इसराइल की सेना का दावा है कि हमास इस अस्पताल को बेस की तरह इस्तेमाल कर रहा है. उसके अनुसार, अस्पताल के नीचे स्थित सुरंग में हमास का कमांड और कंट्रोल सेंटर है.
इसराइली सेना के प्रवक्ता डेनियल हगारी का कहना है कि ग़ज़ा के एक बच्चों के अस्पताल को भी हमास हथियार रखने के लिए इस्तेमाल कर रहा था.
हालांकि बीबीसी इसराइल के इन दावों को प्रमाणित नहीं कर पाया है. वहीं हमास और अस्पताल प्रशासन दोनों इसराइल दावे को ग़लत करार दे रहे हैं.
हमास का दावा है कि ग़ज़ा में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 11,240 हो गई है. वहीं यूएन ने बताया है कि दो लाख फ़लस्तीनी उत्तरी ग़ज़ा छोड़कर दक्षिणी ग़ज़ा जा चुके हैं.
इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा है कि इसराइल को अपने बंधकों को छुड़ाने और अपनी रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन उसे आम नागरिकों को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का सम्मान करना चाहिए.