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इसराइल-हमास संघर्षः राहत की पहली खेप ग़ज़ा पहुंची, 24 घंटे में क्या क्या हुआ पढ़ें
ग़ज़ा की मिस्र से लगती सीमा पर स्थित रफ़ाह क्रॉसिंग को शनिवार को खोला गया. इसराइल ने राहत सामग्री से लदे 20 ट्रकों को ग़ज़ा में आने की इजाज़त दी है.
लाइव कवरेज
दिलनवाज़ पाशा and संदीप राय
इसराइल पर आयोजक ने की टिप्पणी, टेक सम्मेलन से पीछे हटे गूगल और मेटा
मेटा और गूगल टेक जगत के सबसे बड़े सालाना आयोजनों में से एक ‘वेब समिट’ में शामिल नहीं होंगे.
वेब समिट के आयोजक ने ग़ज़ा पर हमले के बाद इसराइल की कार्रवाई की आलोचना की थी.
गूगल के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा है, “हम वेब समिट में शामिल नहीं होंगे.”
आयरलैंड के उद्यमी और वेब समिट के सह-संस्थापक पैडी कोसग्रेव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा था, “कई पश्चिमी सरकारों और नेताओं की बयानबाज़ी और कार्यों से हैरान हूं.”
“युद्ध अपराध सिर्फ़ युद्ध अपराध हैं, भले ही वो मित्र राष्ट्र ही क्यों ना कर रहे हैं और उन्हें यही कहा जाना चाहिए.”
हालांकि इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद पैडी ने माफ़ी मांग ली थी और कहा था कि हमास के 'बर्बर हमले की आलोचना करते हैं और इसराइल के अस्तित्व के अधिकार का समर्थन करते हैं.'
पैडी ने कहा, “मैं स्पष्ट रूप से इसराइल के अस्तित्व और अपनी रक्षा करने के अधिकार का समर्थन करता हूं. मैं स्पष्ट रूप से द्विराष्ट्र समाधान का समर्थन करता हूं.”
पैडी के बयान के बाद से कई बड़ी कंपनियां वेब समिट से अलग हो चुकी हैं. मेटा और गूगल के अलावा सीमेंस और इंटेल ने भी ख़ुद को इससे अलग कर लिया है.
ये आयोजन इस साल लिस्बन में 13-16 नवंबर के बीच होगा, इसमें क़रीब 2300 स्टार्ट अप और 70 हज़ार से अधिक लोग हिस्सा लेंगे.
फ़लस्तीनी झंडा लेकर श्रीनगर की सड़कों पर उतरीं महबूबा मुफ़्ती
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती शनिवार को फ़लस्तीनी झंडा लेकर श्रीनगर की सड़क पर उतरीं.
उन्होंने इसराइल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों की अगुवाई की और ग़ज़ा पर बमबारी को तुरंत रोके जाने की मांग की.
'चुप क्यों है दुनिया?'
महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “अभी तक ग़ज़ा में 1500 फ़लस्तीन बच्चे और हज़ारों बेगुनाह लोग मारे गए हैं और सारी दुनिया तमाशा देख रही है. और जब यूक्रेन में दो साल के अंदर 500 बच्चे मारे गए तो पूरी दुनिया चीखने लगी. आज जब हज़ारों लोग मारे जा रहे हैं तब कोई बात नहीं कर रहा है.“
उन्होंने कहा, “हम दुनिया के मुल्कों से कहना चाहते हैं कि आप इसराइल पर दबाव डालकर संघर्ष विराम कराएं. इस वक़्त फ़लस्तीन में जुल्म हो रहा है, वहां सप्लाई बंद है, दवाइयां बंद हैं, वहां खाना बंद है, पानी बंद है, लोगों पर बमबारी हो रही है.“
महबूबा ने आगाह किया, “जो होलोकॉस्ट में यहूदियों के साथ हुआ आज इसराइल वही फ़लस्तीनियों के साथ कर रहा है और इसके नतीजे आने वाले वक्त में बहुत ख़तरनाक़ हो सकते हैं.“
ग़ज़ा पहुंची राहत सामग्री की पहली खेप, कार्यकर्ताओं ने ऐसे मनाया जश्न- देखें तस्वीरें
गज़ा और मिस्र को जोड़ने वाली रफ़ाह बॉर्डर क्रॉसिंग को आज मदद का सामान ले जाने के लिए खोल दिया गया.
राहत सामग्रियों से भरे ट्रक जैसे ही रफ़ाह क्रॉसिंग पर मिस्र की तरफ़ से ग़ज़ा में दाखिल हुए वहां खड़े वॉलंटियर्स ने ताली बजा कर खुशी जताई.
फिलहाल केवल 20 ट्रकों को ही ग़ज़ा में प्रवेश की अनुमति मिली है जबकि वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम और अन्य मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ग़ज़ा में जो हालात हैं उससे निपटने के लिए हर रोज़ कम से कम 100 ट्रक राहत सामग्री की ज़रूरत है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि वो मिस्र और फ़लस्तीनी रेड क्रीसेंट सोसाइटी के साथ बातचीत कर दवाओं की आपूर्ति ग़ज़ा के अस्पतालों तक पहुंचाने को सुनिश्चित किया जा रहा है.
संगठन का कहना है कि अभी कुछ ही संख्या में ट्रकों को जाने की मंजूरी दी गई है और बाकी ट्रक इजाज़त के इंतज़ार में मिस्र की ओर खड़े हैं.
कितनी राहत समाग्री?
- डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इन ट्रकों में 1200 लोगों के लिए दवाएं और अन्य ज़रूरी सामान हैं.
- इनमें 235 घायलों के लिए पोर्टेबल ट्रॉमा बैग हैं.
- 1500 लोगों के लिए क्रॉनिक डिज़ीज मेडिसिन और 3 लाख लोगों के लिए तीन महीने के लिए बेसिक ज़रूरी दवाएं हैं.
पाकिस्तान की अबाबील बैलिस्टिक मिसाइलः अमेरिका ने चीन की कंपनियों पर लगाये प्रतिबंध
पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए पुर्ज़े और तकनीक मुहैया कराने पर अमेरिका ने चीन स्थित तीन कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है.
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि ये प्रतिबंध वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के तहत लगाए गए हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बताया है कि जिन तीन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है वो चीन में स्थित हैं और पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए तकनीक और पुर्जे मुहैया कराती हैं.
पाकिस्तान का पुराना मित्र देश चीन उसे लंबे समय से हथियार और तकनीक निर्यात करता रहा है.
जिन कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाये हैं वो हैं- जनरल टेक्नॉलॉजी लिमिटेड, बीजिंग लुओ लुओ टेक्नॉलॉजी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और चांगझाऊ यूटेक कंपोज़िट कंपनी लिमिटेड.
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है, “अमेरिका वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए वह प्रसार गतिविधियों का समर्थन करने वाले ख़रीद नेटवर्क को बाधित करने के लिए क़दम उठाएगा.”
कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने अबाबील बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था. इसके बाद ही अमेरिका ने ये प्रतिबंध लगाये हैं.
अबाबील पाकिस्तान की सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे सबसे पहले साल 2017 में सामने लाया गया था.
माना जाता है कि ये मिसाइल अभी विकास के स्तर पर ही है और इसे अभी तक सेना में शामिल नहीं किया गया है.
रिपोर्टों के मुताबिक़ ये मिसाइल 2200 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है और इस पर परमाणु और पारंपरिक हथियार तैनात किए जा सकते हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, पाकिस्तान लौटे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़, चार साल बाद हुई वापसी
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग-एन नेता नवाज़ शरीफ़ इस्लामाबाद पहुंच गए हैं. शनिवार को उनका विमान इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा.
नवाज़ शरीफ़ चार साल के आत्म-निर्वासन के बाद पाकिस्तान लौटे हैं और कहा जा रहा है कि मौजूदा सरकार से सुलह के बाद उनकी वापसी संभव हुई है.
पूर्व सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने कहा है कि नवाज़ शरीफ़ एयरपोर्ट से सीधे लाहौर जाएंगे और वहां एक सभा को संबोधित करेंगे.
मरियम औरंगजेब ने दावा किया कि पूरे पाकिस्तान में लोग नवाज़ शरीफ़ का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.
जुलाई 2017 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पनामा मामले में नवाज़ शरीफ़ को अयोग्य घोषित कर दिया था जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.
ऐसा उनके साथ तीसरी बार हुआ और इससे पहले उन्हें पांच साल पूरा करने से पहले ही दो बार प्रधानमंत्री की कुर्सी से हटा दिया गया था.
इसराइल ने अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइज़री, कहा- 'मुसलमान देशों की यात्रा न करें'
इसराइल के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की सुरक्षा परिषद ने एक साझा बयान में विदेश में रह रहे इसराइली नागरिकों के लिए यात्रा एडवाइज़री जारी की है.
इसमें कहा गया है कि देश के बाहर रह रहे 'इसराइल के नागरिक ख़तरे में है'. मिस्र (सिनाई प्रांत समेत), जॉर्डन और मोरक्को के लिए ट्रैवल अलर्ट का स्तर बढ़ा दिया गया है.
इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि अग्रिम सूचना तक किसी भी मध्य पूर्व के देश या अरब देश, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, बहरीन, मोरक्को और यूएई की यात्रा से बचें.
इसके अलावा मलेशिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया जैसे मुसलिम बहुल देशों की यात्रा ना करने के लिए भी कहा गया है.
इन देशों के लिए पहले ही ट्रैवल अलर्ट जारी किए जा चुके थे. बयान में कहा गया है कि मालदीव जैसे देश की यात्रा करने से बचें, जिसके लिए ट्रैवल अलर्ट जारी नहीं किया गया था.
रफ़ाह बॉर्डर खुला: ग़ज़ा में दाखिल हुए ट्रक और दूसरे वाहन- देखें तस्वीरें
मिस्र से लगती ग़ज़ा की बॉर्डर क्रॉसिंग खोल दी गई है. राहत सामग्री से लदे ट्रक और दूसरे वाहन ग़ज़ा में दाखिल हो रहे हैं.
लंबे अर्से से ट्रक बॉर्डर के दूसरे ओर खड़े थे. राहत एजेंसियां क्रॉसिंग को खोले जाने के लिए दबाव बना रही थीं.
बॉर्डर से आईं ताज़ा तस्वीरों में ट्रक और दूसरे वाहन ग़ज़ा में दाखिल होते दिख रहे हैं. सहायताकर्मी मदद सामग्री को ट्रकों से उतारने में जुटे हैं.
देखें तस्वीरें
ब्रेकिंग न्यूज़, इसराइल-हमास संघर्ष: रफ़ाह बॉर्डर क्रॉसिंग खोली गई, मिस्र से ग़ज़ा में दाखिल हुए ट्रक
मिस्र और ग़ज़ा के बीच रफ़ाह बॉर्डर हमास और इसराइल संघर्ष के दौरान पहली बार खुला है और मिस्र की तरफ़ से राहत सामग्री से लदे ट्रक ग़ज़ा में दाख़िल हो रहे हैं.
इसरइल अभी तक राहत सामग्री से भरे बीस ट्रकों को ही ग़ज़ा की तरफ़ जाने देने के लिए तैयार हुआ है. ईंधन ले जाने की अनुमति नहीं है.
अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये क्रॉसिंग कितनी देर तक खुली रहेगी.
इससे पहले इसराइल में अमेरिका के दूतावास ने रफ़ाह बार्डर को खोलने जाने के बारे में जानकारी दी थी.
ब्रेकिंग न्यूज़, इसराइल ने दी रफ़ाह बॉर्डर से 20 ट्रकों की एंट्री को मंजूरी, संयुक्त राष्ट्र ने मदद को बताया 'नाकाफ़ी'
मिस्र की तरफ़ से रफ़ाह नाके के रास्ते राहत सामग्री से लदे ट्रकों का पहला काफ़िला ग़ज़ा की तरफ़ बढ़ा है.
इससे पहले इसराइल में अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि गज़ा और मिस्र के बीच रफ़ाह बॉर्डर को खोला जाएगा.
यदि इस क़दम की पुष्टि होती है तो ग़ज़ा में फंसे विदेशी नागरिकों को बाहर निकलने का मौक़ा मिलेगा.
दवाइयों, खाद्य सामग्री और पानी से लदे दर्जनों ट्रक मिस्र की तरफ़ से सीमा पार कर ग़ज़ा में दाख़िल होने का इंतज़ार कर रहे थे.
रफ़ाह नाका एकमात्र ऐसा रास्ता है जो ग़ज़ा में जाता है और जिस पर इसराइल का नियंत्रण नहीं है.
हमास ने बीती रात दो अमेरिकी बंधकों को मानवीय आधार पर रिहा कर दिया था.
इसी बीच ग़ज़ा में राहत कार्य करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा है कि जो मदद आने की उम्मीद है वो नाकाफ़ी है.
एजेंसी ने कहा है कि ये समंदर में एक बूंद के जैसे है.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी से जुड़ी जूलिएट टॉमा ने कहा है कि राहम सामग्री के लगातार आते रहने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, “ग़ज़ा के लोगों को निरंतर और सतत मदद की ज़रूरत है…इसमें वॉटर स्टेशनों के लिए ईंधन भी शामिल है.”
इसराइल ने रफ़ाह नाके के रास्ते राहत सामग्री से लदे 20 ट्रकों को जाने की अनुमति दी है लेकिन ईंधन जाने पर रोक लगा दी है.
हालांकि जूलिएट टॉमा का कहना है कि ग़ज़ा के वॉटर पंपों को चालू करने के लिए ईंधन आवश्यक है.
उन्होंने कहा, “ग़ज़ा में पानी ख़त्म हो रहा है, कई इलाक़ों में पानी पूरी तरह ख़त्म हो चुका है.”
बंधकों की रिहाई पर बोले इसराइली अधिकारी- 'हमारा दबाव काम कर रहा है'
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के वरिष्ठ सलाहकार मार्क रेगेव ने बीबीसी से कहा, ‘बंधकों को बिना शर्त के लिए रिहा किया गया है और ये जश्न का दिन है.’
हमास ने अमेरिकी बंधक जूडिथ और नैटली रानन को रिहा कर दिया है.
इसराइली अधिकारी ने कहा है कि जो दबाव हमास पर बनाया गया है उसी के तहत 'अमेरिकी मां और बेटी को रिहा किया गया है.'
मार्क रेगेव ने कहा, “मुझे लगता है कि हमास ये समझ रहा है कि वो भारी दबाव में है. उस पर कूटनीतिक दबाव भी है और ज़ाहिर है इसराइल की सैन्य शक्ति का दबाव भी है. मुझे लगता है कि इसी वजह से हमास अब क़दम उठा रहा है, जैसे बंधकों को रिहा करना.”
उन्होंने कहा, “मैं ये मानता हूं कि अगर हम इस दबाव को बनाये रखेंगे तो हमास और बंधकों को रिहा करने के लिए मजबूर हो जाएगा. हम इस दबाव को बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम हमास पर हमले कर रहे हैं और ज़बरदस्त हमले कर रहे हैं.”
वहीं हमास ने कहा है कि अमेरिकी बंधकों को मानवीय आधार पर रिहा किया गया है.
अमेरिका ने मध्यस्थता के लिए क़तर का शुक्रिया अदा किया है. वहीं हमास की तरफ़ से कहा गया है कि अगर सुरक्षा हालात बेहतर हुए तो आगे और सभी नागरिक बंधकों को रिहा कर दिया जाएगा.
7 अक्तूबर को दक्षिणी इसराइल पर किए गए हमले के दौरान हमास ने क़रीब 200 लोगों को अग़वा कर लिया था. इनमें इसराइल के अलावा अमेरिका और कई अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं.
दो अमेरिकी बंधकों की रिहाई पर अमेरिका राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी ख़ुशी ज़ाहिर की है.
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हमास-इसराइल संघर्षः काहिरा शांति सम्मेलन आज, कौन हिस्सा ले रहा है
हमास और इसराइल के बीच जारी संघर्ष और ग़ज़ा के मानवीय संकट पर चर्चा के लिए मिस्र आज काहिरा में एक शांति सम्मेलन का आयोजन कर रहा है. इसमें दुनिया के बीस से अधिक नेता शामिल हो रहे हैं. यहां ग़ज़ा के हालात पर मंथन किया जाएगा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ इस सम्मेलन में मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सीसी, फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख महमूद अब्बास, ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली और संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस शामिल हो रहे हैं. इसके अलावा अरब जगत के कई राष्ट्र प्रमुख भी शामिल होंगे.
हालांकि, इस सम्मेलन में इसराइल, हमास और ईरान का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा. महमूद अब्बास फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख हैं जिनका वेस्ट बैंक पर सीमित नियंत्रण है. वो हमास के विरोधी समूह से हैं.
मेज़बान मिस्र का कहना है कि इस सम्मेलन का मुख़्य मक़सद शांति बहाल करना है. लेकिन इस सम्मेलन से बहुत कुछ हासिल होने की उम्मीदें कम ही हैं क्योंकि इसमें इसराइल और ईरान दोनों ही शामिल नहीं है. हमास को ईरान का समर्थन प्राप्त है.
मिस्र ऐसा एकमात्र देश है जिसकी सीमा ग़ज़ा से लगी है और इस सीमा को इसराइल नियंत्रित नहीं करता है. वैश्विक नेताओं ने मिस्र से रफ़ा क्रॉसिंग खोलने की अपील की है ताकि ग़ज़ा तक ज़रूरी मानवीय मदद पहुंचाई जा सके.
पाकिस्तान पहुंचने से पहले बोले नवाज़ शरीफ़, 'चेहरे पर सुर्खी के साथ लौट रहा हूं’
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) पार्टी के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने कहा है, “मैं चेहरे पर चमक के साथ वतन जा रहा हूं, हम 28 मई वाले हैं, 9 मई वाले नहीं.”
पाकिस्तान में 9 मई को इमरान ख़ान के समर्थकों ने उनकी गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे और सैन्य प्रतिष्ठानों में हिंसा की थी.
इसके बाद पाकिस्तान की सेना ने इमरान ख़ान के समर्थकों पर क्रैकडाउन भी किया था. वहीं, 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किए थे. तब नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे.
बीते साल इमरान ख़ान के सत्ता से हटने के बाद मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेतृत्व में पाकिस्तान में गठबंधन सरकार बनीं.
चार साल बाद पाकिस्तान लौट रहे नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि, “हम इंसाफ़ चाहते हैं, हमने पहले भी कहा है कि सब अल्लाह पर छोड़ा है, आज भी कहता हूं कि सब अल्लाह पर छोड़ता हूं.”
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं वो शख़्स हूं जिसने जेलें देखी हैं, मेरी बेटी न मंत्री थी न सलाहकार थी फिर भी पकड़ लिया लेकिन आख़िरकार उन्हें क्लीन चिट मिली जो मिलनी ही चाहिए थी.”
नवाज़ शनिवार को वापस पाकिस्तान पहुंच सकते हैं. वो चार साल से लंदन में निर्वासित जीवन जी रहे थे.
पाकिस्तान की अदालत से अग्रिम ज़मानत मिलने के बाद वो देश वापस लौट रहे हैं. उन्हें तुरंत गिरफ़्तारी से छूट मिल गई है.
शरीफ़ पाकिस्तान से बाहर जाने से पहले जेल में बंद थे और भ्रष्टाचार के मामले में सज़ा काट रहे थे.
पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें साल 2019 में इलाज कराने के लिए जेल से निकलने और विदेश जाने की अनुमति दी थी. शरीफ़ ने चार सप्ताह के भीतर लौटने का वादा किया था लेकिन वो चार साल तक नहीं लौटे.
पाकिस्तान में अगले साल जनवरी में आम चुनाव होने हैं. विश्लेषक नवाज़ शरीफ़ की वापसी को चुनाव अभियान की शुरुआत के रूप में भी देख रहे हैं.
इसराइल ने अल क़ुद्स अस्पताल को ख़ाली करने का आदेश दिया, डब्ल्यूएचओ प्रमुख चिंतित
फ़लस्तीनी रेड क्रीसेंट का कहना है कि इसराइल ने उत्तरी ग़ज़ा के अल क़ुद्स अस्पताल को खाली करने का आदेश दिया है.
स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली इस संस्था का कहना है कि अल क़ुद्स अस्पताल में इस समय चार सौ मरीज़ भर्ती हैं और यहां कई हज़ार विस्थापित लोगों ने शरण ली हुई है.
रेड क्रीसेंट ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान कर रहा है कि एक और मानवीय त्रासदी को रोकने के लिए तुरंत क़दम उठाये जाएं.
वहीं हमास के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इसराइल की लगातार बमबारी में अब तक चार हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं.
ग़ज़ा में अब तक दस लाख से अधिक नागरिक विस्थापित हुए हैं. यहां खाने और पीने के पानी का गंभीर संकट है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ. टेड्रॉस एडहॉनम गीब्रिएसुस ने कहा है, "अल क़ुद्स अस्पताल को खाली कराने के आदेश की रिपोर्टें परेशान करने वाली है. विश्व स्वास्थ्य संगठन बार-बार ये कह चुका है कि इन क्षमता से अधिक भरे हुए अस्पतालों से मरीज़ों को सुरक्षित निकालना असंभव है. अस्पताल की सुरक्षा की जानी चाहिए और उनके जीवनरक्षक कार्य चालू रहने चाहिए."
ब्रेकिंग न्यूज़, गगनयान की टेस्ट फ़्लाइट का सफलतापूर्वक हुआ परीक्षण
भारत के पहले महत्वाकांक्षी मानव मिशन ‘गगनयान’ की टेस्ट फ़्लाइट सफलतापूर्वक लॉन्च की गई.
इससे पहले 8.45 बजे के क़रीबन ये टेस्ट फ़्लाइट होल्ड पर रख दी गई थी.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) की तरफ़ से कहा गया था कि 'हम जल्द ही इस पर वापस लौटेंगे. टीवी-डी1 नाम के इस मिशन का लाइव प्रसारण किया जा रहा था.'
इसके बाद 10 बजे के क़रीब दोबारा परीक्षण किया गया जो सफल रहा. टेस्ट फ़्लाइट की सफलता की घोषणा के साथ ही इसरो के प्रमुख एस. सोमनाथ ने बधाई दी.
टीवी डी1 टेस्ट फ़्लाइट के डायरेक्टर एस शिवकुमारन कहा कि इस तरह से पहले कभी नहीं हुआ.
उन्होंने कहा, “ये तीन प्रयोगों का एक गुलदस्ता है. इसमें हमने तीन सिस्टम की विशेषताओं को देखा है जिनको हम इस प्रयोग के ज़रिए जानना चाहते थे. इसके ज़रिए हमने टेस्ट व्हीकल, क्रू एस्केप सिस्टम और क्रू मॉड्यूल का पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है.”
इसराइल-ग़ज़ा संघर्षः अब तक 22 पत्रकारों की मौत, कई लापता
पत्रकार सुरक्षा समिति के मुताबिक़, 7 अक्तूबर को इसराइल और हमास के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से 22 पत्रकारों की मौत हो चुकी है.
समिति ने एक बयान में बताया है कि इनमें 18 फ़लस्तीनी पत्रकार शामिल हैं, तीन इसराइली हैं और एक लेबनानी है.
सीपीजे (कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स) का कहना है कि इनमें से 15 मौतें इसराइल के हवाई हमलों में हुई हैं, दो पत्रकार हमास के हमले में मारे गए हैं.
सीपीजे के मुताबिक़ आठ पत्रकार घायल हुए हैं, तीन या तो लापता हैं या हिरासत में हैं.
सीपीजे के प्रवक्ता ने कहा है, “सीपीजे इस बात पर ज़ोर देता है कि पत्रकार भी नागरिक हैं जो संकट के समय में मुश्किल काम कर रहे हैं और युद्ध में शामिल पक्षों को उन्हें निशाना नहीं बनाना चाहिए.”
सीपीजे ने अपने बयान में कहा है कि ग़ज़ा में काम कर रहे पत्रकारों पर ख़तरा अधिक है क्योंकि वहां इसराइल के ज़मीनी अभियान की भी आशंका है.
ग़ज़ा पर इसराइल लगातार बमबारी कर रहा है. हमास के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक़ अब तक चार हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी बमबारी में मारे जा चुके हैं. दक्षिणी इसराइल में हमास के हमले में 1400 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
सीपीजे ने कहा है कि वह पत्रकारों के लापता होने, हिरासत में लिए जाने और पत्रकारों के घरों को निशाना बनाये जाने की कई रिपोर्टों की जांच भी कर रही है.
सीपीजे ने अब तक मारे गए पत्रकारों की सूची भी जारी की है.
ब्रेकिंग न्यूज़, गगनयान: भारत के पहले मानव मिशन की टेस्ट फ़्लाइट लिफ़्ट ऑफ़ नहीं कर सकी
भारत का महत्वाकांक्षी गगनयान टेस्ट फ़्लाइट के दौरान लिफ़्ट ऑफ़ नहीं कर सका.
भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने शनिवार सुबह श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारत के प्रस्तावित मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की पहली परीक्षण उड़ान की पूरी तैयारी की थी.
टेस्ट फ्लाइट का काउंटडाउन किया जा रहा था, रॉकेट के फ़ायर होने से 5 सेकंड पहले इसे होल्ड कर दिया गया.
इसरो की तरफ़ से कहा गया है कि 'हम जल्द ही इस पर वापस लौटेंगे. टीवी-डी1 नाम के इस मिशन का लाइव प्रसारण किया जा रहा था.'
इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा, "साढ़े आठ बजे लिफ्ट ऑफ़ किया जाना था, फिर ख़राब मौसम की वजह से इसे 8.45 किया गया. ऑटोमैटिक लांच सीक्वेंस (एएलएस) बहुत सटीक रहा लिफ्ट ऑफ़ का कमांड दिया गया लेकिन इंजन चालू नहीं हुआ. हम पता लगाएंगे कि क्या हुआ है. पूरा व्हिकल सुरक्षित है. हम व्हिकल के पास जाएंगे और देखेंगे कि क्या हुआ है. जो हुआ है उसकी समीक्षा के बाद हम जल्द ही वापस लौटेंगे."
गगनयान भारत का मानव को अंतरिक्ष में ले जाने वाला अंतरिक्ष यान होगा. इसरो के मुताबिक़, गगनयान ‘भारत के मानवीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का आधार’ होगा.
ये एक ऑर्बिटल व्हिकल है. इसका मक़सद मानव को अंतरिक्ष में ले जाना है. इस यान में सवार होने वाले यात्रियों के लिए स्पेस सूट रूस में तैयार किए गए हैं.
भारत ने हाल ही में चंद्रयान 3 को सुरक्षित चंद्रमा पर लैंड कराने में कामयाबी हासिल की है. भारत ने सूर्य के अध्ययन के लिए भी आदित्य एल 1 को अंतरिक्ष में स्थापित किया है.
अगर भारत का गगनयान कामयाब होता है तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अंतरिक्ष में मानव को भेजने की तकनीक है.
भारत-कनाडा विवादः ट्रूडो बोले, ‘भारत की वजह से लाखों लोगों को हो रहीं मुश्किलें’
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शुक्रवार को कहा है कि भारत के कनाडा के राजनयिकों पर कार्रवाई करने से दोनों देशों में दसियों लाख लोगों का जीना मुहाल हो गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ ट्रूडो ने कहा है कि ‘भारत सरकार ने कनाडा और भारत में रहने वाले दसियों लाख लोगों के जीवन को असामान्य रूप से मुश्किल बना दिया है. भारत कूटनीति के एक बहुत ही बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन करके ऐसा कर रहा है.’
टीवी पर प्रसारित प्रेस वार्ता में ट्रूडो ने कहा, “मैं कनाडा में रहने वाले उन दसियों लाख लोगों की ख़ुशियों और भलाई को लेकर चिंतित हूं जिनकी जड़े भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ती हैं. ”
कनाडा ने बताया है कि उसने भारत से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाया है. भारत ने इनका दर्जा समाप्त करने की धमकी दी थी.
भारत और कनाडा के बीच इस समय कूटनीतिक रिश्ते बेहद मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं.
जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि जून में कनाडा में हुई सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत है. भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.
इन आरोपों के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई है.
जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि कनाडा के राजनयिकों को वापस भेजने से यात्राएं और कारोबार प्रभावित होगा और कनाडा में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को दिक्कतें होंगी.
कनाडा में इस समय क़रीब बीस लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं जो कनाडा की आबादी का 5 प्रतिशत हैं. वहीं कनाडा में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सर्वाधिक संख्या भारतीय छात्रों की है.
हमास के हमले के निशाने पर थे सऊदी-इसराइल संबंधः अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि 7 अक्तूबर को दक्षिणी इसराइल पर हुए हमास के हमले का मक़सद इसराइल और सऊदी अरब के बीच बहाल हो रहे संबंधों को नुक़सान पहुंचाना था.
इस हमले में 1400 लोग मारे गए थे जिनमें इसराइल के अलावा कई देशों के लोग शामिल थे.
रॉयटर्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ बाइडन ने कहा है, “हमास के इसराइल पर हमले का एक कारण ये भी है कि… वो जानते थे कि मैं सऊदी के साथ बैठक करने वाला था.”
सऊदी अरब और इसराइल के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से ख़राब रहे हैं, हालांकि माना जाता है कि सऊदी अरब ने अपने पड़ोसी देशों संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन को 2020 में इसराइल से संबंध बहाल करने का समर्थन किया था.
7 अक्तूबर के हमले और इसराइल की ग़ज़ा पर बमबारी के बाद सऊदी अरब के वरिष्ठ राजनेता और सम्मानित बुज़ुर्ग प्रिंस तुर्की अल फैसल ने सार्वजनिक तौर पर हमास और इसराइल की नागरिकों पर हमला करने के लिए आलोचना की है.
प्रिंस तुर्की अल फैसल ने कहा था कि इस युद्ध में कोई हीरो नहीं है, सिर्फ़ पीड़ित है.