इसराइल और हमास का संघर्ष जारी, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ
संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी के मुताबिक इसराइल की चेतावनी के बाद करीब 10 लाख फ़लस्तीनी उत्तरी ग़ज़ा से ग़ज़ा के दक्षिणी हिस्से में पहुंच गए हैं.
लाइव कवरेज
कीर्ति दुबे and राजेश आर्य
हमास को पूरी तरह मिटा देंगे- इसराइली राजदूत का दावा
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ब्रिटेन
में इसराइल की राजदूत ने बीबीसी से कहा कि इसराइल 'हमास को मिटा देगा.'
यूके
में इसराइल की राजदूत ज़िपि होटावली सात अक्टूबर को इसराइल में ही थीं, जब हमास ने
इसराइल पर हमला किया था.
बीबीसी
रेडियो 5 लाइव से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमने सुना है कि 80 प्रतिशत शवों को क्षत-विक्षत किया गया, युवा महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, छोटे बच्चों का सिर काट दिया गया, इस तरह के अत्याचार,
बर्बरता दुनिया ने द्वितीय विश्व
युद्ध के बाद से नहीं देखी.”
“हमास का ग़ज़ा पट्टी में अस्तित्व ख़त्म
हो जाएगा. इसराइल अपनी सीमाओं में एक आतंकवादी संगठन को बर्दाश्त नहीं कर सकता.”
ब्रेकिंग न्यूज़, अब ओलंपिक में भी होगा क्रिकेट, 2028 में कुल पांच खेलों के शामिल होने को मंजूरी
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साल
2028 में लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में क्रिकेट भी शामिल रहेगा.
इंटरनेशल
ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने सोमवार को हुई वोटिंग के दौरान क्रिकेट और चार अन्य खेलों
को 2028 के ओलंपिक खेलों में शामिल करने का फ़ैसला किया.
वोटिंग के दौरान आईओसी के दो सदस्यों ने इसका विरोध किया
जबकि एक सदस्य अनुपस्थित रहा.
ओलंपिक में ट्वेंटी-20 क्रिकेट मुक़ाबले होंगे. हाल में चीन
में हुए एशियाई खेलों में भी क्रिकेट का खेल शामिल था. रितुराज गायकवाड़ की अगुवाई
में भारतीय पुरुष टीम ने एशियाई खेलों का गोल्ड हासिल किया. वहीं भारतीय महिला टीम
भी गोल्ड लेकर लौटी थी.
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भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेलों में शामिल है और लंबे समय से इसे ओलंपिक में शामिल करने की मांग उठती रही थी.
क्रिकेट के अलावा बेसबॉल, फ्लैग फुटबॉल, सिक्सेज़ और स्क्वैश को भी 2028 ओलंपिक खेलों में शामिल किया गया है.
बीबीसी संवाददाता जान्हवी मुले के मुताबिक ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी 120 साल से ज़्यादा समय के बाद हुई है. आखिरी बार ओलंपिक में क्रिकेट साल 1900 में था. तब ब्रिटेन और फ़्रांस की टीम ने क्रिकेट मुक़ाबले में हिस्सा लिया था.
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सूर्यकुमार यादव ने जाहिर की खुशी
भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ने इस फ़ैसले पर खुशी जाहिर की है.
सोशल प्लेटफ़ॉर्म एक्स (ट्विटर) पर उन्होंने लिखा है, "दुनिया के मंच पर ये अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का एक और मौका है. "
इसराइल-हमास संघर्ष: दक्षिणी ग़ज़ा में संघर्ष विराम को लेकर कहां फंसा है पेंच?
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दक्षिणी इसराइल से रिपोर्ट कर रही हैं बीबीसी की चीफ़
इंटरनेशनल संवाददाता लीस डुसेट के मुताबिक ग़ज़ा और पूरी दुनिया की तमाम निगाहें
रफ़ा क्रॉसिंग पर लगी हैं.
ये बॉर्डर क्रॉसिंग ग़ज़ा को मिस्र से जोड़ती है.
दक्षिणी ग़ज़ा में अस्थाई संघर्ष विराम की रिपोर्टों को इसराइल के प्रधानमंत्री के
कार्यालय ने जल्दी ही ख़ारिज कर दिया.
काहिरा में मौजूद बीबीसी के सूत्रों ने बताया कि अस्थाई
सीज़फ़ायर समझौते पर सैद्धांतिक तौर पर सहमति बन गई है लेकिन ऐसा लगता है कि अब कुछ
मुश्किल बातें हैं, जिनके हल तलाशे जाने हैं.
मिस्र ने साफ़ कर दिया है कि वो तब तक क्रॉसिंग नहीं
खोलेंगे जब तक उनके स्टाफ़ की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती है.
इसराइल ग़ज़ा में दाखिल होने वाली सभी लॉरियों की जांच
करना चाहता है. वो ये तय करना चाहता है कि उनके जरिए कहीं हथियार तो नहीं लाए जा
रहे हैं.
इसराइली सेना ने कहा- सीज़फ़ायर को लेकर कोई सहमति नहीं हुई
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इसराइल की सेना ने कहा है कि दक्षिणी ग़ज़ा में
सीज़फ़ायर की उन्हें कोई जानकरी नहीं है, ना ही इस पर कोई सहमति बनी है.
इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेक्ट ने बीबीसी को बताया, " सीज़फ़ायर पर कोई सहमति नहीं है, हमें इसे लेकर कोई जानकारी
नहीं है. मैं भी ये सब रिपोर्ट में देख रहा हूं. मैं इसकी पुष्टि नहीं करता."
समाचार
एजेंसी रॉयटर्स ने थोड़ी देर पहले अपनी रिपोर्ट में मिस्र के सुरक्षा अधिकारियों
के हवाले से कहा था कि मिस्र-ग़ज़ा की सीमा खुलते समय दक्षिणी ग़ज़ा में सीज़फ़ायर
पर सहमति बन गयी है.
सोमवार को ग़ज़ा की मिस्र से लगती बॉर्डर क्रॉसिंग (रफ़ा क्रॉसिंग) खुलने की
ख़बर है.
मिस्र पर इस क्रॉसिंग को खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय
सहायता एजेंसियों का दवाब है.
अमेरिका ने शनिवार को अपने नागरिकों को क्रॉसिंग के
खुलने पर तैयार रहने के लिए कहा था और दक्षिण की ओर जाने की सलाह दी थी. कई
फ़लस्तीनी-अमेरिकी पहले से ही क्रॉसिंग के करीब जुट गए हैं
न्यूज़क्लिक केस: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पुरकायस्थ और चक्रवर्ती, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती
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न्यूज़ वेबसाइट न्यूज़क्लिक के संस्थापक और एडिटर इन चीफ़ प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर
हेड अमित चक्रवर्ती ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को
ख़ारिज कर दिया था.
पुरकायस्थ और चक्रवर्ती ने दिल्ली पुलिस की ओर से आतकंवाद रोधी
क़ानून अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) में अपनी गिरफ़्तारी को
चुनौती दी थी.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहंती के मुताबिक चीफ़ जस्टिस डीवाई
चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की है.
हालांकि, बेंच ने कहा है कि वो याचिका को जल्दी लिस्ट करने पर विचार करेंगे.
पुरकायस्थ और चक्रवर्ती की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने
कोर्ट से मामले की जल्दी सुनवाई करने का अनुरोध किया.
सिब्बल ने कहा, “ये न्यूज़क्लिक
का मामला है. पत्रकार पुलिस की हिरासत में हैं. वो 75 साल के बुजुर्ग आदमी हैं.”
दिल्ली हाई कोर्ट ने बीते शुक्रवार को उनकी याचिका ख़ारिज कर दी थी.
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तीन अक्टूबर को न्यूज़क्लिक से जुड़े पत्रकारों और कर्मचारियों के घर छापेमारी की थी. पूछताछ के बाद पुरकायस्थ और चक्रवर्ती को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
इसराइल लेबनान की सीमा पर रहने वालों को इलाके से हटा रहा है
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इसराइल ने लेबनान की सीमा
के पास उत्तरी इसराइल से लोगों को
सुरक्षित निकालने का काम शुरू कर दिया है.
इसराइली सेना ने कहा है कि सीमा पर दो किलोमीटर
के दायरे में रहने वाले लोगों को इलाके से निकाल कर सरकारी गेस्ट हाउस में रखा जाएगा.
रविवार को सीमा पर स्थित
गांव के एक शख़्स की हिज़बुल्ला के मिसाइल हमले में मौत हो गई थी.
इसराइल ने बीती रात
लेबनानी चरमपंथी समूह हिज़बुल्ला के सैन्य ठिकानों पर हमला किया. इसमें किसी के
मारे जाने की कोई ख़बर नहीं है.
मीडिया रिपोर्ट हैं कि दक्षिणी ग़ज़ा में इसराइल, अमेरिका और मिस्र के बीच सीज़फ़ायर के लिए सहमति बन गई है.
साथ ही ख़बर है कि मिस्र
और ग़ज़ा की सीमा पर स्थित रफ़ा क्रॉसिंग भी सोमवार को लगभग दो घंटे के लिए खोली
जाएगी.
ब्रेकिंग न्यूज़, हमास ने कहा- 'हमें संघर्ष विराम की कोई जानकारी नहीं': रॉयटर्स
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ग़ज़ा के चरमपंथी संगठन हमास के हवाले से बताया है कि उन्हें संघर्ष विराम को लेकर कोई जानकारी नहीं है.
रॉयटर्स ने कुछ देर पहले मिस्र के दो सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया था कि अमेरिका, मिस्र और इसराइल के बीच दक्षिणी ग़ज़ा में संघर्ष विराम को लेकर सहमति बनी है. ये संघर्ष विराम स्थानीय समय के मुताबिक सुबह नौ बजे से लागू होना है.
रॉयटर्स ने हमास के मीडिया ऑफ़िस के हवाले से बताया है कि उन्हें 'मानवीय आधार पर प्रस्तावित संघर्ष विराम' को लेकर कोई जानकारी नहीं है.
मिस्र की रफ़ा क्रॉसिंग ग़ज़ा का इकलौता बॉर्डर है जिस पर इसराइल का नियंत्रण नहीं है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का मिस्र पर इसे खोलने को लेकर लगातार दवाब बढ़ रहा था.
ग़ज़ा से बाहर निकलने के लिए इस बॉर्डर के करीब बड़ी संख्या में लोग जमा हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, दक्षिणी ग़ज़ा में सीज़फ़ायर पर सहमति, मिस्र से लगती क्रॉसिंग खुलेगी: रॉयटर्स
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मिस्र के दो सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिका, इसराइल और मिस्र दक्षिणी ग़ज़ा में संघर्ष विराम के लिए सहमत हो गए हैं. संघर्ष विराम स्थानीय समय के मुताबिक सुबह नौ बजे से होगा.
इस दौरान ग़ज़ा की मिस्र से लगती बॉर्डर क्रॉसिंग (रफ़ा क्रॉसिंग) खुलेगी.
मिस्र पर इस क्रॉसिंग को खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों का दवाब है.
अमेरिका ने शनिवार को अपने नागरिकों को क्रॉसिंग के खुलने पर तैयार रहने के लिए कहा था और दक्षिण की ओर जाने की सलाह दी थी. कई फ़लस्तीनी-अमेरिकी पहले से ही क्रॉसिंग के करीब जुट गए हैं.
सोमवार को एक बार फिर अमेरिकी दूतावास ने इस सलाह को दोहराया था.
यूएन और एक्शनएड जैसी सहायता एजेंसियों ने भी मानवीय सहायता ग़ज़ा तक पहुंचाने के लिए इस क्रॉसिंग को खोलने की अपील की थी.
मिस्र-ग़ज़ा की सीमा खुली तो कौन-कौन यहां से निकल पाएगा
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मिस्र की
ग़ज़ा के साथ लगने वाली सीमा रफ़ा क्रॉसिंग को खोलने के लिए मिस्र पर राजनयिकों और
सहायता देने वाली अंतरराष्ट्रीय का दबाव है.
इस
क्रॉसिंग के खुलने से वो लोग जिनके पास दो जगहों की नागरिकता है, और जो विदेशी लोग
ग़ज़ा में फंसे हैं, वो ग़ज़ा छोड़ सकेंगे.
अमेरिका
ने शनिवार को अपने नागरिकों को क्रॉसिंग के खुलने पर तैयार रहने के लिए कहा था और
दक्षिण की ओर जाने की सलाह दी थी. कई फ़लस्तीनी-अमेरिकी पहले से ही क्रॉसिंग के
करीब जुट गए हैं.
सोमवार
को एक बार फिर अमेरिकी दूतावास ने इस सलाह को दोहराया था.
यूएन और
एक्शनएड जैसी सहायता एजेंसियों ने भी मानवीय सहायता ग़ज़ा तक पहुंचाने के लिए इस क्रॉसिंग को खोलने की अपील की है.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों का कहना है रफ़ा क्रॉसिंग
सोमवार को "कुछ घंटों के लिए" खुलेगी.
एनबीसी न्यूज ने एक
फ़लस्तीनी अधिकारी का हवाला देते हुए कहा है कि क्रॉसिंग स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे, लगभग दो घंटे के लिए खुलेगा.
एबीसी न्यूज ने एक
सुरक्षा सूत्र का हवाला देते हुए कहा कि क्रॉसिंग सोमवार को कुछ घंटों के लिए
खुलेगी "और फिर देर दोपहर में बंद हो जाएगी".
मिस्र-ग़ज़ा की सीमा को ‘दो घंटे के लिए खोला’ जाएगा- अमेरिकी मीडिया
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इसराइल में अमेरिकी दूतावास ने कहा था कि जो लोग ग़ज़ा-मिस्र सीमा
पर रफ़ा क्रॉसिंग के "करीब जाना चाहते हैं, वो जाएं."
अब अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों का कहना है रफ़ा क्रॉसिंग सोमवार को
"कुछ घंटों के लिए" खुलेगी.
अमेरिका के दो मीडिया संस्थानों ने नाम ना छापते हुए एक अधिकारी के हवाले से
ये रिपोर्ट छापी है.
एनबीसी न्यूज ने एक फ़लस्तीनी अधिकारी का हवाला देते हुए कहा है कि
क्रॉसिंग स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे, लगभग दो घंटे के लिए खुलेगा.
एबीसी न्यूज ने एक सुरक्षा सूत्र का हवाला देते हुए कहा कि
क्रॉसिंग सोमवार को कुछ घंटों के लिए खुलेगी "और फिर देर दोपहर में बंद हो
जाएगी".
रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि
"मिस्र में ग़ज़ा में लोगों के लिए बहुत सारी सामग्री जुटा कर रखी गई है और रफ़ा
को खोला जाएगा."
ब्लिंकन ने ये बात मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी से मुलाकात के बाद
कही थी
इसराइली दूत ने कहा- ग़ज़ा पर कब्ज़ा करने में कोई दिलचस्पी नहीं
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संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत ने कहा है कि इसराइल को
"ग़ज़ा पर कब्ज़ा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है."
सीएनएन से बात करते हुए जिलाड अर्डन ने कहा है कि “हम अपने सर्वाइवल के लिए लड़ रहे
हैं...और हमास को पूरी तरह ख़त्म करना ही हमारा मक़सद है, इसके लिए जो भी करना पड़े, करेंगे.”
जब उनसे पूछा गया कि अगर हमास ख़त्म हुआ तो ग़ज़ा पर किसका राज होगा?
इसके जवाब में उन्होंने कहा- "युद्ध के बाद क्या होगा इस बारे में हम अभी
नहीं सोच रहे हैं.”
अर्डन का ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बयान के बाद आया
है.
सीबीएस 60 मिनट्स को दिए गए इंटरव्यू में बाइडन
से पूछा गया था कि क्या वह "इस समय ग़ज़ा पर इसराइल के कब्ज़े का समर्थन करेंगे?"
इसके जवाब में अमेरिकी
राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक "बड़ी गलती" होगी.
बाइडन ने कहा- “हमास, और हमास के चरमपंथी सभी
फ़लस्तीनी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करते और मुझे लगता है कि इसराइल के लिए ग़जा
पर फिर कब्ज़ा करना एक गलती होगी. ”
रविवार रात प्रसारित इस
इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हालांकि ग़ज़ा के अंदर जा कर चरमपंथियों को बाहर निकालना एक ज़रूरी
काम है."
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें
"विश्वास है कि इसराइल युद्ध के नियमों के तहत कार्रवाई करेगा."
बाइडन ने बार-बार कहा है कि
हमास से अपनी रक्षा करना इसराइल का अधिकार और कर्तव्य है.
एक हफ़्ते पहले हमास के हमले को
उन्होंने "सरासर दुष्ट कृत्य" बताया था.
पांच लाख लोगों ने छोड़ा उत्तरी ग़ज़ा- इसराइली सेना
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इसराइली सेना (आईडीएफ़) ने कहा है कि पांच लाख लोग उत्तरी
ग़ज़ा छोड़ चुके हैं.
आईडीएफ
के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जोनाथन कॉनरिकस ने कहा है कि पांच लाख लोग उत्तरी गज़ा
से निकल चुके हैं, जो लोग उत्तर के इलाके से निकलना चाह रहे हैं , हमास उनके लिए
मुश्किलें पैदा कर रहा है.
उन्होंने
कहा
किआईडीएफ़ ने आम लोगों को निकलने के लिए दो सुरक्षित निकासी
मार्ग बनाए हैं और जैसे-जैसे सैन्य अभियान आगे बढ़ेगा,
आम लोगों के लिए ग़ज़ा शहर में रहना असुरक्षित होगा.
इसराइली
सेना ने जिस रास्ते को निकासी के लिए सुरक्षित बताया था वहां शुक्रवार को वहां बम
विस्फोट में 70 लोगों की मौत हुई. जब कॉनरिकस से इस धमाके के बारे में पूछा गया तो
उन्होंने दोहराया कि आईडीएफ सक्रिय रूप से आम लोगों को निशाना नहीं बनाता है.
हालांकि
प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान उन्होंने इशारे में ये भी कहा कि ऑपरेशन में आम लोगों के
हताहत होने को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता.
उन्होंने
कहा- “हम हमास पर हमला करते हैं, हम उनके बुनियादी ढांचे पर हमला करते हैं और
हम सक्रिय रूप से कमांडरों को निशाना
बना रहे हैं,
जब आप एक लाइव टारगेट पर निशाना बनाते हैं तो कोलैट्रल डैमेज होता है. वहां आप पहले
चेतावनी नहीं दे सकते क्योंकि फिर टारगेट बच निकलेगा.”
शुक्रवार को इसराइली सेना ने ग़ज़ा के उत्तर में रह रहे 11 लाख लोगों से चौबीस
घंटों के भीतर इलाक़ा खाली कर दक्षिणी ग़ज़ा में शिफ़्ट होने के लिए कहा था.
यूएन सहित कई मानवाधिकार संस्थाओं ने इसराइल के इस आदेश की आलोचना करते हुए
इसे ‘असंभव’ बताया था.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा- देश का बंटवारा जिन्ना नहीं, हिंदू महासभा की मांग के कारण हुआ
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय
महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने देश के बंटवारे को लेकर बयान दिया है.
स्वामी
प्रसाद मौर्य ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान का बंटवारा ‘जिन्ना की वजह से नहीं बल्कि हिन्दू महासभा के हिंदू राष्ट्र की मांग’ के कारण कारण हुआ.
बांदा में एक कार्यक्रम में
पहुंचे सपा नेता ने कहा, “भारतीय संविधान कहता है कि धर्म, जाति, लिंग के आधार पर किसी के
साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है. हम नारा देते हैं कि हिंदू, मुस्लिम, सिख-ईसाई आपस
में हैं सब भाई-भाई. अगर हिंदू, हिंदू राष्ट्र की बात करेगा, तो मुस्लिम क्यों नहीं
करेगा, सिख क्यों नहीं करेगा, बौद्ध
क्यों नहीं करेगा, जैन क्यों नहीं बात करेगा. हिंदू राष्ट्र
की मांग करने वाले लोग देश के दुश्मन हैं."
"बहुत समय पहले
हिंदू राष्ट्र की मांग हिंदू महासभा ने किया था. जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष सावरकर
भी रहे हैं. जब भारत और पाकिस्तान बन गया, भारत-पाकिस्तान जिन्ना की वजह से नहीं बंटा. इसकी मांग हिंदू महासभा ने की
थी और देश का बंटवारा हुआ."
इससे पहले
मौर्य ने रामचरित मानस को लेकर भी बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि रामचरित मानस
में कुछ चौपाइयां विवादित और जाति सूचक हैं जिसे हटा देना चाहिए या फिर इसे पूरी
तरह बैन कर देना चाहिए.
इस मामले में
स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ़ लखनऊ में केस दर्ज हुआ था.
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अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा- इसराइल का ग़ज़ा पर कब्ज़ा करना ‘बड़ी ग़लती होगी’
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि ‘इसराइल का ग़ज़ा पर कब्ज़ा करना एक बड़ी ग़लती’ होगी.
सीबीएस के 60 मिनट्स को दिए गए इंटरव्यू में बाइडन से पूछा गया कि
क्या वह "इस समय ग़ज़ा पर इसराइल के कब्ज़े का समर्थन करेंगे?"
इसके जवाब
में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक "बड़ी गलती" होगी.
बाइडन ने कहा- “हमास, और हमास के चरमपंथी सभी फ़लस्तीनी लोगों का प्रतिनिधित्व
नहीं करते और मुझे लगता है कि इसराइल के लिए ग़जा पर फिर कब्ज़ा करना एक गलती होगी.
”
रविवार रात प्रसारित इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हालांकि ग़ज़ा के अंदर जा कर चरमपंथियों
को बाहर निकालना एक ज़रूरी काम है."
उन्होंने यह
भी कहा कि उन्हें "विश्वास है कि इसराइल युद्ध के नियमों के तहत कार्रवाई करेगा."
बाइडन ने
बार-बार कहा है कि हमास से अपनी रक्षा करना इसराइल का अधिकार और कर्तव्य है.
एक हफ़्ते
पहले हमास के हमले को उन्होंने "सरासर दुष्ट कृत्य" बताया था.
बीते सप्ताह
इसराइल के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन तेल
अवीव भी पहुंचे थे.
इसराइल ने 11 लाख लोगों को उत्तरी गज़ा से दक्षिणी ग़ज़ा में जाने का निर्देश दिया है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इसराइली सेना गज़ा में दाखिल हो सकती है.
हमास- इसराइल संघर्ष: अमेरिका में 6 साल के मुस्लिम बच्चे की चाकू मारकर हत्या
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इमेज कैप्शन, जोसेफ़ कज़ुबा पर छह साल के बच्चे की हत्या करने का आरोप है.
अमेरिका में एक शख़्स ने दो लोगों को मुस्लिम होने के कारण
चाकू मारा जिसमें से एक बच्चे की मौत हो
गई और एक महिला गंभीर रूप से घायल है.
अमेरिका के प्लेनफ़ील्ड
में 71 साल के जोसेफ़ कज़ुबा पर छह साल के बच्चे की हत्या करने और एक 32 साल की
महिला को ज़ख़्मी करने का आरोप है.
इलिनॉय केविल काउंटी शेरिफ
कार्यालय ने कहा कि हमास और इसराइल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण इन पीड़ितों को
निशाना बनाया गया.
कज़ुबा पर फ़र्स्ट-डिग्री हत्या, फ़र्स्ट -डिग्री
हत्या की कोशिश, हेट क्राइम और गंभीर मारपीट का आरोप लगाया गया
है.
एक बयान में विल काउंटी शेरिफ कार्यालय ने कहा कि शनिवार सुबह उन्हें एक
महिला का इमरजेंसी कॉल आया. महिला ने कहा कि उनके
मकान मालिक ने उन पर हमला कर दिया है.
महिला ने कहा कि वह "बाथरूम में छिपी हैं."
दोनों पीड़ितों को अस्पताल ले जाया गया लेकिन बच्चे की
मौत हो गई.
पुलिस ने जांच में पाया कि बच्चे को 26 बार चाकू मारा गया था.
शेरिफ कार्यालय का कहना है, "इस हमले में इस्तेमाल किया गया चाकू 12 इंच (31
सेमी) का मिलिट्री स्टाइल वाला चाकू था जिसमें सात इंच का ब्लेड था."
हमले में गंभीर रूप से घायल महिला के बचने की उम्मीद है.
शेरिफ कार्यालय ने कहा, "जासूस यह पता लगा सके हैं कि हमलावर ने दोनों
पीड़ितों को मुस्लिम होने और मध्य पूर्व में चल रहे हमास और इसराइल के संघर्ष के
कारण निशाना बनाया था."
सात अक्टूबर को हमास के इसराइल पर हमले से शुरू हुए संघर्ष
में हज़ारों की तदाद में आम लोग मारे गए हैं.
इसराइल में 1400 लोगों की मौत हुई है, वहीं इसराइल के हमले
में ग़ज़ा में 2450 लोगों की मौत हो गई है
और 1000 लोग लापता हैं.
नमस्कार!
आपका दिन शुभ हो.
ये लाइव पेज 24 घंटे के लिए उपलब्ध रहेगा.
15 अक्टूबर के लाइव अपडेट्स पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.