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लेबनान-इसराइली सीमा से घुसपैठ की आशंका, इसराइल ने शुरू किया सर्च अभियान

इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सेज ने कहा है कि लेबनान के साथ लगती इसराइल की सीमा पर विस्फोट के बाद 'टेररिस्ट' के घुसपैठ की आशंका है.

लाइव कवरेज

दीपक मंडल and संदीप राय

  1. 26 सप्ताह की गर्भवती महिला के गर्भपात की मांग वाली याचिका का मामला क्या है?

      • Author, उमंग पोद्दार
      • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 26 सप्ताह की गर्भवती एक विवाहित महिला की गर्भपात की मांग वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखी.

    कोर्ट ने एम्स से आज महिला का मेडिकल परीक्षण करने को कहा है. अब इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी.

    सरकार ने क्या कहा?

    सरकार ने दलील दी कि उन्हें ऐसा कोई देश नहीं मिला जहां24 हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाज़त हो.इसमें कहा गया है कि भारत में कुछ स्थितियों मेंक़ानून24 सप्ताह के बाद गर्भपात की अनुमति देता है, जबमां की जान बचाने की ज़रूरत हो या भ्रूण में पर्याप्त असामान्यता हो.

    इस मामले में सरकार ने कहा था कि एम्स के मेडिकल बोर्ड ने कहा है कि बच्चा व्यवहार्य है और उसके बचने की उचित संभावना है.उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने विरोधाभासी बातें कही हैं और कभी-कभी "हमें लोगों को खुद से बचाने की ज़रूरत होती है."

    याचिकाकर्ताओं ने क्या दी दलील?

    गर्भवती महिला के वकील ने तर्क दिया कि उन्हें28 सितंबर को गर्भावस्था के बारे में पता चला और5 दिनों के भीतर वह इसे समाप्त करने के लिए अदालत में आईं. उन्होंने पिछले साल सितंबर में अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया था और तब से वह प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित हैं.

    “प्रसवोत्तर मनोविकृति के लिए वह जो दवाएँ ले रही हैं वह भ्रूण के लिए स्वस्थ नहीं है.गर्भावस्था के बारे में पता चलने के बाद से उन्होंने दवाएँ लेना बंद कर दिया है, लेकिन जब वह एक दिन भी दवा नहीं लेती हैं, तो उन्हें दैनिक गतिविधियाँ करने में परेशानी होती है.इस प्रकार, उन्हें अपने और बच्चे के स्वास्थ्य की ख़ातिर गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए.”

    वकील ने यह भी कहा, "जन्म के बाद मां खाने, नहाने या किसी भी तरह से अपनी देखभाल करने में विफल हो सकती है. आत्महत्या का ख़तरा भी है."

    हालाँकि, जब अदालत दस्तावेज़ों पर ग़ौर कर रही थी, तो उसे प्रसवोत्तर मनोविकृति के लिए उसके नुस्खे की वैधता पर संदेह हुआ.मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इस बात का कोई संदर्भ नहीं है कि डॉक्टर किस चीज़ के लिए दवा लिख रहे हैं.हस्तलिखित नुस्खा भी कुछ नहीं कहता."

    इस वजह सेकोर्ट ने एक आदेश पारित किया कि एम्स अधिक परीक्षण करेगा, आदर्श रूप से आज दोपहर2 बजे और सोमवार को मामले पर फिर से सुनवाई करेगी.

    इसने डॉक्टरों से निम्नलिखित बातों पर ध्यान देने को कहा:

    1. क्या भ्रूण किसी महत्वपूर्ण असामान्यता से पीड़ित है?

    2. क्या याचिकाकर्ता की गर्भावस्था को पूरी अवधि तक जारी रखने से उन दवाओं से नुक़सान होगा जो वह अपनी स्थिति के लिए ले रही है?

    3. याचिकाकर्ता की मानसिक और शारीरिक स्थिति क्या है?

    नौ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच ने गर्भपात की इजाज़त दे दी थी. हालाँकि, एक दिन बाद, एक डॉक्टर ने सरकारी वकील को ईमेल करके कहा कि उन्हें गर्भपात के लिए भ्रूण का हृदय रोकना होगा, अन्यथा यह समय से पहले प्रसव होगा और भ्रूण का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाएगा.

    तब सरकार ने कोर्ट के आदेश को वापस लेने की अर्ज़ी दाख़िल की. अब कोर्ट की तीन जजों की बेंच इस मामले की दोबारा सुनवाई कर रही है.

  2. इसराइली सेना बोली- आम लोग हमारे दुश्मन नहीं हैं

    इसराइली सेना के प्रवक्ता जोनाथन कॉनरिकस ने कहा है कि ग़ज़ा पट्टी से एक इलाक़े को ख़ाली करने का फ़ैसला इसराइल का ‘मानवीय उपाय’ है.

    एक्स पर पोस्ट किए गए ताज़ा वीडियो में उन्होंने कहा कि उनका मक़सद ज़िंदगियां बचाना है, ‘आम लोग हमारे दुश्मन नहीं हैं.’

    उन्होंने कहा कि ग़ज़ा पट्टी में हमले के दौरान सेना आम लोगों को कम से कम नुक़सान पहुंचाना चाहती है और वो अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष के क़ानूनों को लेकर प्रतिबद्ध है.

    उन्होंने इलाक़े को ख़ाली करने पर कहा, “हम जानते हैं कि इसमें समय लगेगा और यह आसान प्रक्रिया नहीं है.”

    इलाक़ा ख़ाली करने के आदेश से ग़ज़ा पट्टी की आधी आबादी तक़रीबन 11 लाख लोग प्रभावित होंगे.

  3. इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष के बीच पीएम मोदी ने दिया ये संदेश

    दिल्ली में हो रहे जी-20 देशों के नौवें पार्लियामेंट्री स्पीकर्स समिट (पी-20) में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की.

    उन्होंने इस दौरान कहा कि एक बँटी हुई दुनिया चुनौतियों का समाधान नहीं दे सकती है.

    पीएम मोदी ने कहा, “दुनिया के अलग-अलग कोनों में जो कुछ भी घट रहा है उससे आज कोई भी अछूता नहीं है. संघर्ष और टकराव से आज दुनिया संकटों से जूझ रही है, इन संकटों से भरी दुनिया किसी के भी हित में नहीं है.”

    “मानवता के सामने जो बड़ी चुनौतियां हैं, उनका समाधान एक बंटी हुई दुनिया नहीं दे सकती. यह शांति और भाईचारे का समय है, साथ मिलकर चलने का समय है, साथ आगे बढ़ने का समय है.”

    “यह सबके विकास और कल्याण का समय है. हमें वैश्विक विश्वास के संकट को दूर करना होगा और मानवता केंद्रित सोच पर आगे बढ़ना होगा.”

    इसी के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सीमा-पार आतंकवाद का भी ज़िक्र किया.

    उन्होंने कहा, “भारत दशकों से क्रॉस-बॉर्डर टेररिज़्म का सामना कर रहा है. आतंकवादियों ने भारत में हज़ारों निर्दोषों की जान ली है. संसद के नए भवन के पास ही आपको भारत की पुरानी संसद भी दिखाई देगी.”

    “क़रीब 20 साल पहले आतंकवादियों ने हमारी संसद को भी निशाना बनाया था और आप जानकर चौंक जाएंगे कि उस समय संसद का सत्र चल रहा था. आतंकियों की तैयारी सांसदों को बंधक बनाने की और उन्हें ख़त्म करने की थी. भारत ऐसी अनेकों आतंकी वारदातों से निपटते हुए आज यहां पहुंचा है.”

    “अब दुनिया को भी एहसास हो रहा है कि आतंकवाद दुनिया के लिए कितनी बड़ी चुनौती है. आतंकवाद चाहे कहीं भी होता है, किसी भी कारण से होता है, किसी भी रूप में होता है लेकिन वो मानवता के विरुद्ध होता है. ऐसे में आतंकवाद को लेकर हम सभी को लगातार सख़्ती बरतनी ही होगी.”

    “हालांकि इसका एक वैश्विक पक्ष और है जिसकी तरफ़ में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं. आतंकवाद की परिभाषा को लेकर आम सहमति न बन पाना ये बहुत दुखद है.”

    “आज भी संयुक्त राष्ट्र में इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन कॉम्बेटिंग टेररिज़्म कॉन्सेंसस का इंतज़ार हो रहा है. दुनिया के इसी रवैये का फ़ायदा मानवता के दुश्मन उठा रहे हैं. दुनियाभर की संसद को, प्रतिनिधियों को ये सोचना होगा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ हम कैसे मिलकर के काम कर सकें.”

  4. ग़ज़ा पट्टी के इलाक़े को ख़ाली करने के सवाल पर यूएन से भिड़ा इसराइल

    संयुक्त राष्ट्र ने इसराइल को उस आदेश को वापस लेने को कहा है, जिसमें उसने 11 लाख लोगों को उत्तरी से दक्षिणी ग़ज़ा जाने के लिए कहा है.

    यूएन ने ये जानकारी दी थी. लेकिन यूएन का कहना है कि अगर ऐसा कोई आदेश दिया गया है तो इसे तुरंत रद्द करना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता तो त्रासदी के हालात और भी भयावह हो जाएंगे.

    दरअसल इसराइली सेना के प्रतिनिधियों ने ग़ज़ा पट्टी में यूएन का नेतृत्व कर रहे लोगों को इस आदेश की जानकारी दी थी. लेकिन इसराइल के दूतों ने कहा है कि ग़ज़ा पट्टी खाली करने के आदेश पर यूएन की प्रतिक्रिया 'शर्मनाक' है.

    संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के दूत ने कहा कि इसराइल ग़ज़ा के लोगों को पहले से सावधान कर रहा था ताकि हमास से युद्ध के दौरान उन लोगों को कम से कम नुकसान पहुंचे, जो बेकसूर हैं.

    इसराइल के राजदूत ने कहा, ''पिछले कई साल से संयुक्त राष्ट्र हमास को और अधिक हथियारों से लैस करने की कोशिशों से आंखें मूंदे रहा है. उसने हमास की ओर से और आम नागरिकों और ग़ज़ा पट्टी पर होने वाले हमलों पर भी ध्यान नहीं दिया. लेकिन अब वो इसराइल के साथ खड़ा होने के बजाय उसे नसीहत दे रहा है.''

    इसराइली सेना ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वादी ग़ज़ा में रहने वाले 11 लाख लोग अगले 24 घंटों में दक्षिणी ग़ज़ा चले जाएं. संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि 11 लाख लोगों की ये आबादी ग़ज़ा पट्टी की आबादी की लगभग आधी है.

    इसराइली हमले से सबसे ज़्यादा प्रभावित घनी आबादी वाला ग़ज़ा शहर है. इसराइली सेना ने ग़ज़ा और यरुशलम के समय के मुताबिक़ ये चेतावनी आधी रात से पहले दी.

    हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा है कि उसका मानना है कि इतने लोगों का दक्षिणी ग़ज़ा की ओर जाना इतना आसान नहीं होगा. इसमें लोग हमले के शिकार हो सकते हैं.

  5. इसराइली सेना ने अब सीधे ग़ज़ा शहर के लोगों से ये कहा

    इसराइली सेना (आईडीएफ़) ने सीधे ग़ज़ा शहर के आम लोगों से कहा है कि वो शहर छोड़कर दक्षिण में चले जाएं.

    सेना के अधिकारियों ने शहर को जारी किए गए बयान में कहा है, “ग़ज़ा शहर में आप तब ही वापस लौटकर आएंगे जब दोबारा घोषणा की जाएगी.”

    ग़ज़ा पट्टी में ग़ज़ा सिटी इकलौता मुख्य शहरी इलाक़ा है.

    आईडीएफ़ ने कहा है कि हमास चरमपंथी शहर के नीचे सुरंगों और आम लोगों के बीच इमारतों के अंदर हैं. आम लोगों से अपील है कि वो शहर ख़ाली करके ‘अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए चले जाएं और ख़ुद को हमास के आतंकियों से दूर रखें ताकि वो उन्हें मानव ढाल न बना सकें.’

    इसमें कहा गया है, “आने वाले दिनों में आईडीएफ़ ग़ज़ा शहर में अपने महत्वपूर्ण ऑपरेशन चलाएगी और पूरी कोशिश करेगी कि आम लोगों को नुक़सान न पहुंचे.”

    इसराइल ने ये घोषणा तब की है जब अनुमान है कि उसकी सेना ग़ज़ा में ज़मीनी हमला शुरू कर सकती है क्योंकि उसके हज़ारों सैनिक सीमा पर इकट्ठे हो रहे हैं.

    वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने मज़बूत अपील करते हुए इस फ़ैसले को रद्द करने की अपील की है और कहा है कि इलाक़े को ख़ाली कराने से ‘नुक़सानदेह स्थिति’ पैदा हो सकती है.

  6. 'ऑपरेशन अजय' के तहत इसराइल से लौटे भारतीयों ने क्या बताया?

    इसराइल से भारतीयों को निकालने के लिए शुरू किए गए 'ऑपरेशन अजय' के तहत 200 भारतीयों का पहला जत्था स्वदेश पहुंच गया है.

    इन भारतीयों को लेकर पहला चार्टर्ड विमान शुक्रवार को तड़के भारत पहुंचा. दिल्ली एयरपोर्ट पर इन लोगों का स्वागत केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने किया. इस जत्थे के साथ भारत पहुंचे शाश्वत सिंह ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ 2019 से इसराइल में रहे रहे थे.

    पोस्ट डॉक्टरल रिसर्चर शाश्वत सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि वो लोग मध्य इसराइल में रह रहे थे. उन्होंने कहा कि अभी ये पता तो नहीं चल पा रहा है कि ये संघर्ष क्या रूप लेगा.

    शाश्वत सिंह ने भारत सरकार के इस अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि उम्मीद है कि वहां जल्दी ही हालात समान्य हो जाएंगे और भारतीय वहां काम कर लौट सकेंगे.

  7. 'इंडिया' गठबंधन गूगल, फेसबुक से हुआ नाराज, 2024 के लिए क्यों दी चेतावनी?

    विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हॉट्सऐप, फेसबुक और गूगल पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने का आरोप लगाया है.

    गठबंधन ने मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग और गूगल के सीईओ सुंदर पिचई को चिट्टी लिख कर कहा है कि फेसबुक और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म 2024 के चुनाव में निष्पक्षता बरकरार बनाए रखें.

    दोनों को लिखी गई 'इंडिया' गठबंधन की चिट्ठी में 'वॉशिंगटन पोस्ट' की उस रिपोर्ट का हवाला दिया गया है जिसमें फेसबुक, व्हॉट्सऐप और यूट्यूब पर बीजेपी और नरेंद्र मोदी सरकार का पक्ष लेने की बात कही गई है.

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस चिट्ठी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर जारी करते हुए कहा है कि 'वॉशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए फेसबुक और गूगल को चिट्ठी लिखी गई है.

    उन्होंने लिखा है कि वॉशिंगटन पोस्ट की इस रिपोर्ट में इन फ्लेटफॉर्मों पर भारत में समाज की एकता को चोट पहुंचाने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने की बात की गई है.

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, इसराइली सेना ने उत्तरी ग़ज़ा के 11 लाख लोगों को 24 घंटों में दक्षिणी ग़ज़ा जाने को कहा- यूएन

    इसराइली सेना ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वाडी ग़ज़ा में रहने वाले 11 लाख लोग अगले 24 घंटों में दक्षिणी ग़ज़ा चले जाएं.

    संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि 11 लाख लोगों की ये आबादी ग़ज़ा पट्टी की आबादी की लगभग आधी है. इसराइली हमले से सबसे ज्यादा प्रभावित घनी आबादी वाला ग़ज़ा शहर है.

    इसराइली सेना ने ग़ज़ा और यरुशलम के समय के मुताबिक़ ये चेतावनी आधी रात से पहले दी गई.

    हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने एक बयान में कहा है कि उसका मानना है कि इतने लोगों का दक्षिणी ग़ज़ा की ओर जाना इतना आसान नहीं होगा. इसमें लोग हमले के शिकार हो सकते हैं. इस बीच, इसराइल जमीनी हमला करने की तैयारी में लगा है. इस मकसद से उसने ग़ज़ा की सीमा पर अपनी सेना, तोपखानों और टैंक जमा कर लिए हैं. पिछले शनिवार को हमास के हमले के बाद इसराइल ग़ज़ा पर लगातार हवाई हमले कर रह रहा है.

  9. नीरज चोपड़ा 'वर्ल्ड एथलीट ऑफ द ईयर' अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट, फैन यहां कर सकते हैं वोटिंग

    भारत के दिग्गज जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा को 'वर्ल्ड एथलीट ऑफ द ईयर' अवॉर्ड 2023 के लिए नॉमिनेट किया गया है.

    नीरज को इस साल वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप और एशियन गेम्स 2022 में गोल्ड मेडल जीतने के लिए नॉमिनेट किया गया है.

    वर्ल्ड एथलीट ऑफ द ईयर अवॉर्ड के लिए इस बार नीरज समेत दुनिया भर के 11 खिलाड़ियों को नॉमिनेट किया गया है. इनमें अमेरिका के रायन क्रोजर (शॉट पुट),स्वीडन के मोंडो डुप्लेंटिस (पोल वॉल्ट), मोरक्को के सोउफियेन अल बक्काली (300 मीटर स्टीपलचेज और नॉर्वे के जैकब इंगब्रिग्सटन ( 1500 मीटर/500 मीटर) जैसे दिग्गज खिलाड़ी शामिल हैं.

    फाइनल में एंट्री के लिए पोलिंग शुरू हो गई है. थ्री-वे वोटिंग प्रोसेस के बाद विजेता का एलान किया जाएगा. 11 दिसंबर को वर्ल्ड एथलेटिक्स के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विजेताओं के नाम के एलान किया जाएगा.

    वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल और वर्ल्ड एथलेटिक्स फैमिली अपने वोट ई-मेल के जरिये डालेगी वहीं फैन वर्ल्ड एथलेटिक्स के सोशल मीडिया प्लेट प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन वोटिंग कर सकते हैं.

  10. इसराइल पर हमास के हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के छह अरब डॉलर रोके?

    इसराइल पर हमास के हमले के बाद अमेरिका की ओर से ईरान को दी जाने वाली 6 अरब डॉलर की मानवीय सहायता रोक दिए जाने की ख़बर है.

    अमेरिका ने कहा है कि ईरान ने ये रकम अभी नहीं ली है. इसराइल पर हमास के हमले के बाद ईरान की 'भूमिका' को लेकर अमेरिका में आलोचना तेज होने के बाद ये फंड अनिश्चतता में फंस गया है.

    यह फंड पांच ईरानी-अमेरीकियों को ईरान की ओर से रिहा करने के लिए हुई सौदेबाजी का हिस्सा है. बीबीसी ने अपने अमेरिकी पार्टनर सीबीसी की रिपोर्ट का हवाला दिया है जिसमें कहा गया है कि अमेरिका ने शायद 'चुपचाप' कतर को कह दिया है कि वो इस फंड से कोई रकम जारी नहीं करे.

    दूसरी ओर, यूएन में ईरानी मिशन ने कहा है कि अमेरिका इस सौदे से पीछे नहीं हट सकता. भले ही ये कयास लगाया जा रहा हो कि इसराइल पर हमास के हमले के बाद ईरान में 'जश्न' मनाए जाने की ख़बरों के बाद ये फंड रोका गया.

    लेकिन ईरान ने कहा है कि इसराइल पर हमास के हमले में ईरान का हाथ होने का कोई सुबूत नहीं मिला है.

    पिछले महीने दक्षिण कोरिया में रखा हुआ ईरानी तेल के छह अरब डॉलर के फंड से प्रतिबंध हटा लिया गया था. यह सौदा पांच ईरान की ओर से पांच अमेरिकी-ईरानी नागरिकों को छोड़े जाने के एवज में हुआ था.

  11. इसराइल ने कहा- ग़ज़ा पर गिराए छह हजार बम , 3600 ठिकानों पर किए हमले

    इसराइल ने कहा है कि उसने ग़ज़ा पर अब तक छह हजार बम गिराए हैं, जिनका कुल वजन चार हजार टन है.

    इसराइल ने कहा है कि पिछले छह दिनों के दौरान ये बम ग़ज़ा में हमास के ठिकानों पर गिराए गए हैं. इसराइली वायुसेना ने कहा है कि अब तक उसने ग़ज़ा में 3600 ठिकानों पर हमले किए हैं.

    दूसरी ओर, फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि इसराइल की बमबारी में अब तक 1,537 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 500 बच्चे और 276 महिलाएं हैं.

    वहीं, हमास के हमले में अब तक 1300 इसराइली मारे गए हैं. हमास ने लगभग 150 इसराइलियों को बंधक बना रखा है.

  12. इसराइली सेना ने माना सुरक्षा में हुई चूक, यूएन ने कहा- ग़ज़ा के हालात दिल दहलाने वाले

    इसराइली सेना ने माना है कि सुरक्षा में चूक हुई है. इसराइली सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ ने हमास के हमले के बाद पहली बार मीडिया के सामने हमला रोकने में असफलता की बात स्वीकार की.

    दूसरी ओर, अमेरिका ने कहा है कि इसराइल को जितनी मदद चाहिए मिलेगी. अमेरिकी विदेश मंत्री ने इसराइल के दौरे के दौरान ये एलान किया है.

    इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि ग़ज़ा की स्थिति दिल दहलाने वाली है. डब्ल्यूएचओ ने ग़ज़ा में अब तक 11 मेडिकलकर्मी मारे जाने और 16 के घायल होने की सूचना दी है.

    उसने कहा है कि अब तक यहां हेल्थकेयर सुविधाओं को निशाना बनाते हुए 34 हमले हुए हैं.

    फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि इसराइल की बमबारी में अब तक 1,537 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 500 बच्चे और 276 महिलाएं हैं.

  13. नमस्कार!

    आपका दिन शुभ हो.

    ये लाइव पेज 24 घंटे के लिए उपलब्ध रहेगा.

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