स्वीडन में क़ुरान जलाए जाने की घटना के दौरान हिंसक प्रदर्शन
स्वीडन में पुलिस ने क़ुरान जलाने की घटना के बाद हुए हिंसक प्रदर्शन को तितर-बितर कर दिया है.
स्वीडन के मालमो शहर में क़ुरान की एक प्रति को जला दिया गया था.
एक चौक पर दो सौ के क़रीब लोग इकट्ठा हुए. यहां एक इराक़ी शरणार्थी ने ऐलान किया था कि वो क़ुरान की प्रति को जला देगा.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ इस व्यक्ति पर पत्थरबाज़ी की गई जबकि कुछ लोगों ने उसे बचाने के लिए पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ दिया.
इस घटनाक्रम के दौरान दो लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.
हाल के महीनों में स्वीडन में क़ुरान को जलाने की कई घटनाएं हुई हैं. सरकार का कहना है कि वो ऐसी घटनाओं को ग़ैर-क़ानूनी घोषित करने के रास्ते निकालने का प्रयास कर रही है.
स्वीडन में क़ुरान जलाए जाने के विवाद ने विदेशों में इसकी छवि पर बुरी तरह असर डाला है.
सिक्युरिटी सर्विस सैपो ने चेतावनी दी है कि इसकी वजह से देश में सुरक्षा के हालात काफी ख़राब हुए हैं.
अधिकांश मुस्लिम बहुल देशों ने इस पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की. जुलाई में इराक़ में प्रदर्शनकारियों ने जब सुना कि स्टाकहोम में पुलिस ने क़ुरान की और प्रतियों को जलाने की मंज़ूरी दी है, उसने स्वीडन के दूतावास में आग लगा दी.
इस मुद्दे ने स्वीडिश लोगों को पशोपेश में डाल दिया है क्योंकि यहां बोलने की आज़ादी का ऐतिहासिक और बुनियादी अधिकार 1766 से ही है.