पाकिस्तान में चर्चों पर हमले के ख़िलाफ़ ईसाई अल्पसंख्यकों का प्रदर्शन

घटना के बाद जरांवाला में ईसाई समुदाय पर हुए हमले के विरोध में ईसाई और सामाजिक संगठनों ने कराची प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन किया है.

लाइव कवरेज

विकास त्रिवेदी and संदीप राय

  1. अटल बिहारी वाजपेयीः इसलिए अपने और पराए दोनों उनके मुरीद थे

  2. नेहरू म्यूज़ियम अब प्रधानमंत्री म्यूज़ियम: कांग्रेस-बीजेपी भिड़े, क्या कहा?

    नेहरू म्यूज़ियम

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    दिल्ली स्थित नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी का नाम अब आधिकारिक तौर पर बदल गया है. अब इसका नया नाम प्रधानमंत्री म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी है.

    म्यूज़ियम के वाइस चेयरमैन ए सूर्या प्रकाश ने ट्विटर पर इस बारे में जानकारी दी है. ये नया नाम सोमवार से लागू है.

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    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नेहरू म्यूज़ियम का नाम बदलने के फ़ैसले की आलोचना की है.

    जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ''आज से एक प्रतिष्ठित संस्थान को नया नाम मिला. दुनियाभर में मशहूर नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) अब पीएमएमएल-प्रधानमंत्री स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय बन गया है.''

    प्रधानमंत्री पर तंज़ कसते हुए जयराम रमेश ने लिखा, ''पीएम मोदी के पास भय, जटिलताओं और असुरक्षाओं का एक बड़ा बंडल है. खासकर जब बात हमारे पहले और सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेहरू की आती है. उनका एकमात्र एजेंडा नेहरू और नेहरूवादी विरासत को नकारना, विकृत करना, बदनाम करना और नष्ट करना है.''

    जयराम रमेश लिखते हैं, ''पीएम मोदी ने N को मिटाकर उसकी जगह P डाल दिया है. लेकिन आज़ादी के आंदोलन में नेहरू के योगदान को वो नहीं ले सकते. नेहरू ने जिस लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक सोच वाला देश को बनाया था, पीएम मोदी और उनके बारे में ढिंढोरा पीटने वाले अब उसी को बर्बाद करने पर तुले हैं.''

    कांग्रेस नेता ने लिखा- लगातार हमले के बावजूद जवाहरलाल नेहरू की विरासत दुनिया के सामने जीवित रहेगी और वो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे.

    नेहरू

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    बीजेपी ने क्या कहा

    जयराम रमेश के इस बयान पर अब बीजेपी नेता रविशंकर ने जवाब दिया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए रविशंकर ने कहा, ''कांग्रेस, जयराम रमेश की सोच और प्रधानमंत्री मोदी की सोच में एक बुनियादी फर्क है. कांग्रेस सोचती है कि जो हैं, नेहरू जी हैं और परिवार है. मोदी पीएम बने तो उन्होंने सारे प्रधानमंत्रियों को नेहरू स्मृति भवन में स्थान दिया. उसमें लाल बहादुर शास्त्री को स्थान क्यों नहीं मिला. न इंदिरा गांधी थीं, न राजीव गांधी और न ही मोरारजी देसाई. न चरण सिंह, न अटल बिहारी वाजपेयी थे.''

    रविशंकर बोले, ''मोदी जी ने कहा कि जो भी भारत का पीएम है, सबको स्थान मिलेगा. अभी तक अपनी स्वयं की मोदी जी ने नहीं लगाई है. ये है मोदी जी की सोच. सबको साथ लेकर चलना और सबको सम्मान देना.''

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  3. ऋषि सुनक कहां पहुंचकर बोले- मैं यहां प्रधानमंत्री की तरह नहीं, हिंदू होने के नाते आया हूं

    ऋषि सुनक

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    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक का एक बयान ख़बरों में है.

    15 अगस्त को कथावाचक मोरारी बापू ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में कथा सुना रहे थे.

    इस कार्यक्रम में ऋषि सुनक भी शरीक हुए थे. ऋषि सुनक ने मोरारी बापू की आरती की और मंच से अपनी बातें भी साझा कीं.

    सुनक ने अपनी बात जय सिया राम नारे से शुरू की. ऋषि सुनक बोले- ''भारत के स्वतंत्रता दिवस पर मोरारी बापू की कथा में आकर अच्छा लग रहा है.''

    ऋषि सुनक ने कहा,''मैं यहां प्रधानमंत्री की तरह नहीं, हिंदू की तरह आया हूं. मेरे लिए आस्था बेहद निजी है. ज़िंदगी के हर पहलू में ये मुझे दिशा दिखाता है. प्रधानमंत्री होना सम्मान की बात है लेकिन ये इतना आसान काम नहीं है. कड़े फ़ैसले लेने होते हैं. मुश्किल हालात का सामना करना होता है. ऐसे में हमारी आस्था हमें साहस और ताकत देती है ताकि देश के लिए अच्छे फ़ैसले लिए जा सकें.''

    ऋषि सुनक

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    ऋषि सुनक कहते हैं, ''मेरे लिए बेहद ख़ास और कमाल का पल रहता है जब चांसलर रहते हुए 11 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर दिवाली पर दीया जलाया था. जैसे बापू के पीछे हनुमान हैं. मुझे गर्व है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की मेरी मेज़ पर भी गणेश जी हैं.''

    हिंदू धर्म को लेकर ऋषि सुनक पहले भी बोलते रहे हैं. वो ब्रिटेन के पहले हिंदू प्रधानमंत्री हैं.

    ऋषि सुनक के हिंदू धर्म से होने पर भारत में अकसर सोशल मीडिया पर चर्चा देखी जाती रही है.

  4. स्वतंत्रता दिवस पर अमेरिका में भगवा झंडे लहराए गए, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने क्या कहा?

    ट्विटर

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    15 अगस्त को भारत ने अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया. भारत से बाहर रह रहे भारतीयों ने भी इस मौक़े पर अपनी-अपनी तरह से आज़ादी का जश्न मनाया.

    अमेरिका में भी कुछ लोगों ने सड़क पर निकलकर तिरंगा लहराकर अपनी ख़ुशी का इज़हार किया.

    मगर इस दौरान कुछ लोग ऐसे भी रहे जो भगवा झंडे लहराते हुए सड़कों पर दिखे.

    अब इस मौक़े का वीडियो शेयर करते हुए इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने आपत्ति दर्ज की है.

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    इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने ट्वीट कर कहा, ''एडिसन, न्यू जर्सी में भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर हुई परेड में बजरंग दल के झंडों का दिखाया जाना परेशान करने वाला है. ये ऐसा ही है जैसा केकेके के झंडों को दिखाया जाना.''

    केकेके यानी कु क्लेक्स क्लेन अमेरिका में गृह युद्ध के ख़त्म होने के बाद बनाया गया एक अति राष्ट्रवादी संगठन था. ये संगठन वाइट सुप्रीमेसी की बात करता था और इसके अपनाए तरीके हिंसक थे.

    इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने लिखा- ''ऐसी हरकतें न सिर्फ़ परेड की महत्वता को बर्बाद करती हैं बल्कि समुदाय के बीच विभाजन और असहिष्णुता को भी बढ़ावा देती है. ये ऐसे संगठन का जश्न मनाना हुआ जो भारत में अल्पसंख्यकों ख़ासकर मुसलमानों और ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा की कई घटनाओं में शामिल रहा है.''

    इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने एडिसन पुलिस और मेयर से इस मामले में जवाब मांगा है और एक्शल लेने की मांग की है.

    बीते साल 2022 में न्यू जर्सी में एक परेड के दौरान बुलडोज़र सड़कों पर दौड़ाया गया था. इस बुलडोज़र पर पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लगी हुई थी.

    तब न्यूयॉर्क टाइम्स समेत अमेरिकी मीडिया ने इस वाकये को कवर किया था.

  5. स्टार फ़ुटबॉलर नेमार सऊदी अरब के फ़ुटबॉल क्लब में शामिल, कितने रुपये में हुई डील?

    अल हिलाल

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    ब्राज़ील के स्टार फ़ुटबॉलर नेमार सऊदी अरब के फ़ुटबॉल क्लब अल-हिलाल में शामिल हो गए हैं.

    15 अगस्त को अल-हिलाब क्लब की ओर से इस बारे में आधिकारिक घोषणा की गई है.

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    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, नेमार ने अल-हिलाल के साथ दो साल का समझौता किया है.

    इससे पहले बीते छह साल से नेमार पेरिस सेंट-जर्मेन क्लब में थे और अब इस क्लब का दामन छोड़कर नेमार ने अल-हिलाल का हाथ पकड़ा है.

    रॉयटर्स लिखता है कि ये डील कितने रुपये में हुई है, इसके बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं है मगर ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि डील 90 मिलियन यूरो यानी लगभग 800 करोड़ रुपये में हुई है.

    एक फ्रेंच अखबार लिखता है कि दो साल के लिए हुई इस डील से नेमार को कुल 160 मिलियन यूरो यानी एक हज़ार करोड़ से ज़्यादा रुपये मिल सकते हैं.

    अल-हिलाल की ओर से एक वीडियो शेयर किया गया है.

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    इस वीडियो में नेमार कहते हैं- मैं सऊदी अरब में हूं, मैं हिलाली हूं.

    मंगलवार को समझौता करने के बाद नेमार कहते हैं, ''मैंने यूरोप में बहुत कुछ हासिल किया और बेहद ख़ास वक़्त वहां गुज़ारा लेकिन मैं हमेशा एक ग्लोबल खिलाड़ी होना चाहता था. ख़ुद को नई चुनौतियों और मौक़ों पर परखना चाहता हूं.''

    नेमार बोले, ''मैं खेल का नया इतिहास लिखना चाहता हूं. मुझे गोल मारना और खेलना बहुत पसंद है. सऊदी अरब और अल-हिलाल के साथ ऐसा रहकर भी मैं ऐसा ही करता रहूंगा.''

    नेमार ने जिस अल-हिलाल के साथ डील की है, उस क्लब ने पहले क्रिस्टियानो रोनाल्डो को ये ऑफर दिया था पर तब रोनाल्डो ने ये ऑफर ठुकरा दिया था.

    बाद में जनवरी 2023 में क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अल-नस्र के साथ साल 2025 तक के लिए डील की.

    अल-नस्र क्लब इसके लिए रोनाल्डो को हर साल करीब 177 मिलियन पाउंड यानी करीब 1773 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा.

  6. स्वतंत्रता दिवस: बुर्ज ख़लीफ़ा पर पाकिस्तान का झंडा दिखाया गया था या नहीं?

    बुर्ज ख़लीफ़ा

    इमेज स्रोत, ANI

    दुबई की मशहूर बुर्ज ख़लीफ़ा बिल्डिंग पर भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर मंगलवार की शाम को भारतीय तिरंगा दिखाया गया.

    इस बिल्डिंग पर रात के अंधेरे में रौशनी की मदद से देशों के झंडे, फ़िल्मों का प्रचार भी दिखाया जाता रहा है. शाहरुख़ ख़ान समेत भारत की मशहूर हस्तियों के जन्मदिन या ख़ास मौक़ों पर भी इस बिल्डिंग पर रौशनी के ज़रिए शुभकामनाएं दी जाती रही हैं.

    14 अगस्त को एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी शेयर हो रहा था.

    इस वीडियो में एक महिला 13-14 अगस्त की रात को 12 बजे बुर्ज ख़लीफ़ा के सामने खड़ी होकर कहती हैं- ''12 बजकर एक मिनट हो गया है. अभी तक पाकिस्तान का झंडा बुर्ज ख़लीफ़ा पर दिखाया नहीं गया है. ये औकात रह गई है हमारी. पाकिस्तानी आवाम नारेबाज़ी कर रही है पर पाकिस्तान का झंडा नहीं लहराया गया है. प्रैंक (मज़ाक) हो गया. तुम लोगों की सरकार तुम लोगों के साथ यही कर रही है.''

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    ये वीडियो भारत में खूब शेयर हुआ और लोगों ने पाकिस्तान के हालात पर तंज़ भी कसे.

    मगर बुर्ज ख़लीफ़ा के ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज पर 14 अगस्त को एक वीडियो शेयर किया गया. इस वीडियो में बुर्ज ख़लीफ़ा में पाकिस्तान का झंडा देखा जा सकता है.

    मगर कुछ लोगों ने इस पर भी सवाल उठाया कि ये वीडियो पुराना है क्या?

    ये सवाल इसलिए भी पूछा गया क्योंकि बुर्ज ख़लीफ़ा में पाकिस्तान का जो झंडा दिखाया गया, उस पर 76वां स्वतंत्रता दिवस लिखा हुआ था जबकि पाकिस्तान अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है.

    एक यूज़र ने सवाल पूछा कि ये पुराना वीडियो पोस्ट किया गया है या वाक़ई बुर्ज ख़लीफ़ा पर पाकिस्तान का झंडा दिखाया गया?

    बुर्ज ख़लीफ़ा

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    इमेज कैप्शन, बुर्ज ख़लीफ़ा के ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज पर 14 अगस्त को पाकिस्तानी झंडा दिखाए जाने का वीडियो शेयर किया था

    इस सवाल का जवाब देते हुए बुर्ज ख़लीफ़ा के ऑफिशियल पेज से जवाब दिया गया- प्लीज़ नोट कीजिए कि कल (14 अगस्त) को शाम 7 बजकर 50 मिनट पर पाकिस्तान का झंडा दिखाया गया था.

    हमने 2022 का भी बुर्ज ख़लीफ़ा का पाकिस्तान झंडे वाला शेयर किया वीडियो देखा. 2023 और 2022 के वीडियो में फ़र्क़ देखा जा सकता है.

    बुर्ज ख़लीफ़ा बिल्डिंग में रौशनी के ज़रिए आप भी किसी को शुभकामना दे सकते हैं या किसी चीज़ का प्रचार कर सकते हैं.

    कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, रात 8 से 10 के बीच में तीन मिनट के प्रचार के लिए लगभग 80 लाख रुपये ख़र्च करने होते हैं.

    अगर ये प्रचार वीकेंड यानी शनिवार, रविवार को होता है तो ये कीमत और बढ़ जाएगी.

  7. 20 साल बाद मणिपुर में 15 अगस्त को दिखाई गई हिंदी फ़िल्म

    विकी कौशल

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    हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में मंगलवार यानी 15 अगस्त को 20 साल बाद कोई हिंदी फ़िल्म दिखाई गई है.

    15 अगस्त को मणिपुर के चूराचांदपुर में एक ओपन थियेटर में पाकिस्तान पर भारत के सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी फ़िल्म उरी को दिखाया गया है.

    इस फ़िल्म में विक्की कौशल मुख्य भूमिका में थे.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, फ़िल्म प्रदर्शन के दौरान रेंगकाई (लमका) में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

    इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग हमर स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी एचएसए ने आयोजित की थी.

    सितंबर 2000 में रिवॉल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ) ने हिंदी फ़िल्मों पर प्रतिबंध लगाया था.

    कुकी समुदाय से जुड़े एक संगठन के प्रवक्ता गिंज़ा वुआलज़ोंग ने कहा, ''दो दशक से शहर में फ़िल्मों पर रोक लगाई हुई थी. मैतेई लोगों ने हिंदी फ़िल्मों पर बैन लगाया था. आज फ़िल्म दिखाकर अपने भारत के लिए अपने प्यार का इज़हार किया है."

    एचएसए ने कहा कि मणिपुर में आख़िरी हिंदी फ़िल्म साल 2018 में 'कुछ कुछ होता है' रिलीज़ हुई थी.

    अधिकारियों का कहना है कि साल 2000 में जब ये प्रतिबंध का एलान हुआ तब बागियों ने छह से आठ हज़ार हिंदी वीडियो-ऑडियो कैसेट जलाई थीं. इन कैसेट्स को पूरे राज्य से इकट्ठा किया गया था.

  8. नमस्कार

    आपका दिन शुभ हो.

    ये लाइव पेज 24 घंटे के लिए उपलब्ध रहेगा.

    15 अगस्त के लाइव अपडेट्स पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.