शिवसेना के उद्धव बाला साहेब ठाकरे गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सवाल उठाया है कि आईपीसी की जगह पर लाए जा रहे नए क़ानून 'भारतीय न्याय संहिता' में राजद्रोह के अपराध से संबंधित प्रावधान किसके लिए बदले जा रहे हैं.
उन्होंने डीआरडीओ जासूसी कांड का जिक्र करते हुए आरोप लगाया, "आपने पुणे स्थित वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर के खिलाफ देशद्रोह का कानून नहीं लगाया, जिन्होंने पाकिस्तान को रक्षा रहस्य बेचे और आरएसएस के कट्टर कार्यकर्ता हैं. क्या आप उनको बचाने के लिए ही देशद्रोह का कानून हटाया?"
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, "क़ानून को आपने रद्द किया. ठीक है... अच्छी बात है, इस देश में कोई देशद्रोही नहीं है. जिसके ऊपर देशद्रोह का क़ानून लगाया जाना चाहिए था, आपने लगाया नहीं. पुणे में डॉक्टर प्रदीप कुरुलकर जिन्होंने पाकिस्तान को यहां से बैठकर हमारे डिफेंस सीक्रेट बेचे हैं."
उन्होंने कहा, "जो आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के हार्डकोर कार्यकर्ता हैं. उनके ऊपर तो आपने देशद्रोह का क़ानून नहीं लगाया था. उनको बचाने के लिए आपने ये क़ानून निकाला है. ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके ऊपर ये क़ानून लगाया जाना चाहिए. देशद्रोह का क़ानून हमने निकाल दिया तो ये हमने किसी की सहूलियत के लिए निकाला है क्या?"
प्रस्तावित क़ानून के सेक्शन 150 के तहत राजद्रोह की जगह एक नया अपराध जोड़ा गया है. इसके तहत भारत से अलग होने, पृथकतावादी भावना रखने या भारत की एकता एवं संप्रभुता को ख़तरा पहुँचाने को अपराध बताया गया है.
इसके लिए उम्र कैद या सात वर्ष की सज़ा के प्रावधान का प्रस्ताव है. मौजूदा राजद्रोह क़ानून में उम्र कैद या तीन साल की सज़ा का प्रावधान है.
डीआरडीओ जासूसी कांड में गिरफ़्तार वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़ी महिला को ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़े गोपनीय दस्तावेज दिखाने का वादा करने का आरोप है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुरुलकर से मुलाकात के दौरान इस महिला ने अपना नाम ज़ारा दासगुप्ता बताया था.
डीआरडीओ के आरएंडडी इस्टेब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) के प्रमुख कुरुलकर को जासूसी और पाकिस्तान इंटेलीजेंस ऑपरेटिव से बात करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
उन पर जासूसी का शक है. समझा जाता है कि कुरुलकर हनी ट्रैप में फंसे थे.
एटीएस के मुताबिक़, पाकिस्तानी जासूस ने उनसे व्हॉट्सऐप पर संपर्क करने के बाद उन्हें कई अश्लील मैसेज भेजे थे.
उसने उनसे वॉयस और वीडियो कॉल के जरिये 10 जून 2022 से लेकर 24 फरवरी 2023 तक कई बार बात की थी.
एटीएस का कहना है कि ज़ारा कुरुलकर से डीआरडीओ की कुछ परियोजनाओं से जुड़ी गुप्त जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही थी.
एटीएस ने जो चार्जशीट दाखिल की है उसके मुताबिक़ दोनों के बीच 19 अक्टूबर 2022 से लेकर 28 अक्टूबर 2022 तक ब्रह्मोस मिसाइल के बारे में बात हुई थी.
कुरुलकर ने कहा था कि उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल के सभी वर्जन के बारे में 186 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है. उन्होंने कहा था कि वो वॉट्सऐप या मेल पर इनकी कॉपी नहीं भेज सकते क्योंकि ये काफी गोपनीय दस्तावेज हैं. कुरुलकर ने कहा था जब ज़ारा भारत आएगी तो वो उन्हें ये दिखा सकते हैं.