अब बदलेंगे देश के तीनों अहम आपराधिक क़ानून, अमित शाह ने पेश किए विधेयक

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केंद्र सरकार ने देश के तीन सबसे अहम आपराधिक क़ानूनों की जगह तीन नए क़ानून बनाने के लिए तीन विधेयक संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में भारतीय न्याय संहिता विधेयक, भारतीय साक्ष्य विधेयक और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक पेश किया है.
ये तीनों विधेयक यदि क़ानून बनते हैं, तो क्रमश: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी 1860), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (आईईए 1872) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी 1973) की जगह ले लेंगे.
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इस दौरान उन्होंने कहा, "1860 से 2023 तक देश की आपराधिक न्याय प्रणाली अंग्रेज़ों द्वारा बनाए गए क़ानूनों के अनुसार काम करती रही है. ये तीनों क़ानून बदल जाएंगे, जिससे देश में आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़ा बदलाव हो जाएगा."
इस दौरान उन्होंने अहम एलान करते हुए कहा है कि इस क़ानून के ज़रिए 'राजद्रोह' जैसे क़ानून निरस्त किए जाएंगे.
अमित शाह के अनुसार, इस विधेयक के ज़रिए हमने सज़ा के अनुपात को 90 प्रतिशत के ऊपर ले जाने का लक्ष्य रखा है. इसलिए, हम एक अहम प्रावधान लाए हैं कि जिन धाराओं में 7 साल या उससे अधिक जेल की सज़ा का प्रावधान है, उन सभी मामलों में फॉरेंसिक टीम का अपराध स्थल पर जाना अनिवार्य होगा.












