कांग्रेस
अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्ष के 31 सांसदों ने मणिपुर के मुद्दे पर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बुधवार को मुलाकात की.
इसके बाद
खड़गे ने मीडिया से बात की.
खड़गे ने कहा, ''आज 'इंडिया' गठबंधन के 31 सदस्य
राष्ट्रपति जी से मिले और मणिपुर में घट रही घटनाओं के बारे में बताया. मणिपुर गए 'इंडिया' गठबंधन के सदस्यों ने जो देखा, उस बारे में राष्ट्रपति जी को बताया है.''
29, 30 जुलाई को विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के 21 सदस्य मणिपुर
के दौरे पर गए थे.
खड़गे ने कहा, ''मणिपुर
में ख़ासकर महिलाओं के साथ जो अत्याचार हुआ, स्त्रियों को निर्वस्त्र करके परेड करवाई गई, 500 से ज़्यादा घर जलाए गए, हमारे 200 से ज़्यादा लोग मर चुके हैं और 500 से
ज़्यादा घायल हुए हैं. 60 हज़ार लोगों को विस्थापित किया गया है, इन लोगों के पास खाने, पानी की समस्या
है. इन लोगों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वो नहीं मिल रही हैं. हम राष्ट्रपति का
ध्यान खींचने के लिए मिले हैं. हमने ज्ञापन दिया है, उस पर राष्ट्रपति ने कहा है कि वो
ज्ञापन पर विचार करेंगी.''
मॉनसून सत्र
शुरू होने के बाद से ही लोकसभा और राज्यसभा में मणिपुर के मुद्दे पर हंगामा हो रहा
है. संसद की कार्यवाही में लगातार गतिरोध बना हुआ है.
खड़गे ने संसद
में मणिपुर का मुद्दा उठाए जाने पर कहा, ''हम भारत की जनता को चर्चा करके मणिपुर के बारे में बताना चाहते हैं.
राज्यसभा में कम से कम रोज़ 65 लोग 267 रूल के तहत नोटिस देते हैं पर उसको
सरकार खारिज करती है, बोलने नहीं देती है. जब राज्यसभा में हम थक गए तो अविश्वास प्रस्ताव
पेश किया गया.''
ख़बरों में कहा जा रहा है कि विपक्ष के पेश किए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में आठ-नौ अगस्त को बहस की जाएगी और 10 अगस्त को पीएम मोदी बहस पर जवाब देंगे.
खड़गे ने कहा, ''इस अविश्वास प्रस्ताव पर आज चर्चा होनी थी. लेकिन ये आख़िर में रखकर ये भी उन्होंने तय कर लिया है कि आठ और नौ... दो दिन इसकी बहस चले. फिर एक दिन रिप्लाई दें और सदन स्थगित हो जाए. मकसद ये है कि चीज़ों पर बात ना की जाए. समय नहीं देना सरकार का मकसद है, आख़िरी में रिप्लाई देकर चले जाएंगे.''
संसद का मॉनसून सत्र 11 अगस्त को ख़त्म हो रहा है.
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे बोले, ''हम चाहते थे कि जल्द से जल्द उसको (मणिपुर) चर्चा में लाना चाहते थे ताकि हम जवाब भी दे सकें. हमारे पास जो जानकारियां हैं वो साझा कर पाएं. वो भी मौक़ा हमको मिलने वाला नहीं है.''
संसद की कार्यवाही के दौरान ख़ुद के साथ पक्षपात का आरोप लगाते हुए खड़गे ने कहा, ''अब राज्यसभा में भी हमको बोलने नहीं दे रहे हैं. यहां तक कि मेरे उठते ही माइक ऑफ कर देते हैं. इससे यही ज़ाहिर होता है कि ये लोग लोकतंत्र के तहत नहीं चलना चाहते हैं.''