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ग्रीस में आग से निपटने के लिए गया विमान दुर्घटनाग्रस्त
ग्रीस में आग की घटनाओं से निपटने और आग बुझाने के लिए गया एयर फोर्स का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
लाइव कवरेज
विकास त्रिवेदी and स्नेहा
रेल टिकट बुक नहीं कर पा रहे हैं? IRCTC ने बताई वजह
अगर आप रेल टिकट बुक नहीं कर पा रहे हैं तो आप अकेले नहीं हैं.
मंगलवार सुबह आईआरसीटीसी ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि टिकट बुक करने में दिक़्क़तें तकनीकी वजहों से हो रही हैं.
रेलवे ने बताया, ''तकनीकी वजहों से टिकट बुक नहीं हो पा रही है. हमारी तकनीकी टीम इस समस्या को दूर करने के लिए काम कर रही है. जैसे ही समस्या दूर होगी, इस बारे में बताया जाएगा.''
मक्का में सऊदी अरब ने भाई-बहन को दी मौत की सज़ा, अपराध क्या था?
सऊदी अरब सरकार ने बताया है कि सोमवार को मक्का में देश के दो लोगों को मौत की सज़ा दी गई है.
ये सज़ा भाई-बहन को दी गई है. दोनों को अपने मां-पिता और भाई-बहनों की हत्या मामले में दोषी पाया गया था.
अल-अरबिया की ख़बर के मुताबिक़, अब्दुल्ला अजीज़ बिन फाहेद बिन गज़ाया अल हरेथी और उनकी बहन ओहूद ने अपने मां और दो भाइयों के खाने में नींद की गोली मिला दी थी.
इसके बाद दोनों भाई-बहन ने अपनी मां और एक भाई को सोते हुए में ही गोली मार दी. अगले दिन दूसरे भाई को भी गोली मार दी गई.
सऊदी सरकार ने बताया है कि अपराध के बाद दोनों मिलकर शवों को एक जगह ले गए, फिर वहां अपने पिता को बुलाकर उन्हें भी गोली मारी.
सऊदी ने बताया कि इन भाई-बहन ने पूरे घर को आग लगा दी ताकि ये कहा जा सके कि गैस लीक के कारण आग लगी और ये सब लोग मारे गए.
सऊदी सरकार ने कहा है कि सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं और ऐसे अपराध करने वालों को सज़ा ज़रूर मिलेगी.
दो दिन में मणिपुर में घुसे म्यांमार के 718 नागरिक, मणिपुर सरकार ने असम राइफल्स से मांगा जवाब
दो दिनों के अंदर म्यांमार के 718 नागरिकों के मणिपुर पहुँचने के मामले में मणिपुर सरकार ने असम राइफल्स से सोमवार को रिपोर्ट मांगी है.
मणिपुर सरकार ने कहा कि 22 और 23 जुलाई को बिना ज़रूरी दस्तावेज़ों के 718 नागरिकों को भारत आने दिया गया.
असम राइफल्स से ये भी पूछा गया कि ऐसे वक़्त में जब दो महीनों से मणिपुर में हिंसा हो रही है, तब कैसे आपकी निगरानी के बावजूद दो दिनों में म्यांमार के इतने नागरिक भारत पहुंचे.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक़, राज्य सरकार ने इस बात पर चिंता जताई है कि म्यांमार से भारत आए नागरिक हथियार लेकर आए हैं या नहीं, इस बारे में पता लगाने का भी कोई रास्ता नहीं है.
असम राइफल्स ने ये जानकारी दी थी कि म्यांमार के 718 नागरिक मणिपुर में घुसे हैं. म्यांमार से आने वाले लोगों में 209 पुरुष, 208 महिलाएं और 301 बच्चे शामिल हैं.
मणिपुर सरकार ने म्यांमार से आए लोगों की तस्वीरें और बायोमैट्रिक जानकारी जुटाने के लिए कहा है.
मणिपुर में ढाई महीनों से हिंसा जारी है. बीते दिनों भी हिंसा की ख़बरें सामने आई हैं. इस संघर्ष में 150 से ज्यादा लोगों की अब तक मौत हो चुकी है.
सांसद मनोज तिवारी ने सांसदों के लिए कहा- इन बेशर्मों को कौन समझाए, मैं इन...
मणिपुर के मुद्दे पर सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं.
विपक्षी दलों की मांग है कि पीएम मोदी मणिपुर के मुद्दे पर संसद के अंदर बोलें और इस मुद्दे पर चर्चा हो.
सत्तारूढ़ बीजेपी का कहना है, ''सरकार बहस के लिए तैयार है. मगर अगर मणिपुर की बात होगी तो राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल की भी बात होगी.''
इस मुद्दे पर मॉनसून सत्र के शुरू होने के बाद से ही हंगामा हो रहा है. माना जा रहा है कि ये हंगामा मंगलवार सुबह भी जारी रहेगा.
इस बीच सोमवार को बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के एक बयान की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है.
मनोज तिवारी ने एक निजी चैनल के रिपोर्टर से कहा, ''हम तो मणिपुर पर चर्चा चाहते हैं. ये भाग रहे हैं लेकिन हम चाहते हैं कि मणिपुर के साथ राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ की चर्चा हो. जहां कहीं भी बलात्कार हुए हैं. राजस्थान में इनके मंत्री कह रहे हैं कि ये मर्दों का प्रदेश है, बलात्कार कर सकते हैं. ये मणिपुर की बात कर रहे हैं.''
मार्च 2022 में राजस्थान में मंत्री शांति धारीवाल का विधानसभा में दिया एक बयान चर्चा में रहा था.
धारीवाल ने कहा था, ''रेप के मामले में हम नंबर एक पर हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है. रेप के मामले में नंबर एक पर क्यों हैं? कहीं न कहीं गलती है. वैसे भी राजस्थान तो मर्दों का प्रदेश रहा है. रेप के साथ मर्डर के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है और राजस्थान 11वें नंबर पर है.''
धारीवाल के इसी डेढ़ साल पुराने बयान का ज़िक्र मनोज तिवारी कर रहे थे.
मनोज तिवारी ने कहा, ''मणिपुर में जो घटना हुई, हम उसके भी विरोध में हैं. ये कहते हैं कि राजस्थान में मर्द हैं इसलिए बलात्कार करेंगे. इन बेशर्मों को कौन समझाए. हम तो चर्चा चाहते हैं. चल रही है अंदर चर्चा. ये आएं. इन नामर्दों को मैं चुनौती देता हूं कि आओ. कैसे कह सकते हो कि राजस्थान मर्दों का प्रदेश है. राहुल, सोनिया और प्रियंका कहां हैं. कहीं भी बेटियों का अपमान हो रहा है तो आइए चर्चा करते हैं.''
इस बयान की सोशल मीडिया पर चर्चा है. कुछ लोग मनोज तिवारी के बयान पर आपत्ति जता रहे हैं और कह रहे हैं कि ये एक सांसद की भाषा है?
वहीं कुछ लोग#IStandWithManojTiwari के साथ लिख रहे हैं कि मनोज तिवारी ने कुछ गलत नहीं कहा है.
असदउद्दीन ओवैसी और कुमार विश्वास 'मज़हब और मुल्क' पर आमने-सामने क्यों आए?
एआईएमआईएम सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने दो दिन पहले ख़ुफ़िया एजेंसियों में शीर्ष पदों पर मुसलमान अधिकारियों के ना होने की रिपोर्ट को शेयर करते हुए सवाल उठाए थे.
ओवैसी ने ट्वीट किया था, ''दशकों बाद पहली बार इंटेलिजेंस ब्यूरो के शीर्ष नेतृत्व में कोई भी मुस्लिम ऑफिसर नहीं होगा. ये उस संदेह की झलक है, जिससे बीजेपी मुसलमानों को देखती है. आईबी और रॉ विशिष्ट बहुसंख्यकवादी संस्थान बन गए हैं. आप लगातार मुसलमानों से उनकी वफ़ादारी का सबूत मांगते हैं लेकिन कभी उन्हें अपने बराबर नागरिक के तौर पर स्वीकार नहीं करते.''
ओवैसी का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा.
इस ट्वीट पर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने भी प्रतिक्रिया दी.
कुमार विश्वास ने लिखा, ''वक़ील साहब आपकी हर बात सर-आँखों पर. बस ज़रा इतनी सी ज़हमत करें कि ये दो बहुत ज़रूरी बात आप भी एक-बार खुलेआम बोल भर दें. बोलिए - अगर इस्लाम और भारत में एक को चुनने का मौक़ा होगा तो मैं इस्लाम छोड़कर भारत चुनूँगा. अगर क़ुरान शरीफ़ और संविधान में एक को चुनने का मौक़ा होगा तो मैं संविधान चुनूँगा.''
कुमार विश्वास ने ओवैसी से कहा- आपके वीडियो बयान के सदियों से इंतज़ार में एक भारतीय-सनातनी.
इस ट्वीट के आने के बाद ओवैसी ने ट्विटर पर फिर इस मुद्दे पर लिखा.
ओवैसी ने ट्वीट किया, ''भारत के जासूसी और इंटेलिजेंस एजेंसियों में मुस्लिम अफ़सरों की कमी वाले मेरे ट्वीट पर लोगों ने बहुत सारे सवाल उठाए. मुसलमानों से पूछा जाता है कि मज़हब और मुल्क के बीच में किसे चुना जाएगा. पता नहीं कितने लोग देश की सुरक्षा का सौदा करते हुए पकडे़ जाते हैं. आईएसआई महिलाओं के फेक अकाउंट बना कर इन्हें फंसा लेती हैं. धर्म की बात तो दूर, क्या कोई इन्हें पूछेगा कि ये अपने हवस और देश के बीच किसे चुनते हैं?''
कुछ दिन पहले कुमार विश्वास ने एक मीडिया संस्थान को दिए इंटरव्यू में ख़ुद से जुड़ा एक किस्सा सुनाया था, ''अगर कोई मुझसे कहे कि गीता और संविधान में किसे चुनना है तो एक सेकेंड के 100वें हिस्से को व्यर्थ किए बगैर में कहूंगा कि मैं संविधान चुनूंगा. भगवान ना करे कि मेरे पास चुनाव आए कि सनातनी होने और भारतीय होने में किसे चुनना है तो मैं एक सेकेंड व्यर्थ किए बगैर कहूंगा कि मैं भारतीय होना चुनूंगा.''
संसद के बाहर रातभर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ चला धरना, वजह...
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को राज्यसभा से सोमवार को पूरे मॉनसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के सदन में इस बात को उठाने के बाद उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने ध्वनिमत से संजय सिंह को निलंबित किया था.
इस निलंबन का आम आदमी पार्टी, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने विरोध किया.
इन सांसदों ने संसद परिसर के बाहर रात भर अपना प्रदर्शन जारी रखा. ये प्रदर्शन मंगलवार सुबह तक जारी है.
संजय सिंह ने ट्वीट किया- ''हर रात की सुबह होती है. संसद का परिसर. बापू की प्रतिमा. मणिपुर को न्याय दो.''
संजय सिंह ने ट्विटर पर लिखा, ''कारगिल का योद्धा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछ रहा है. मैंने तो देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर किया मगर मेरी पत्नी के साथ ऐसी दरिंदगी क्यों हुई? जरा सी भी संवेदना है तो उठो, जागो और मोदी सरकार से सवाल पूछो.''
समाचार एजेंसी एएनआई पर राज्यसभा सांसदों के धरने का एक वीडियो शेयर किया गया है.
वीडियो में सांसद मणिपुर के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी करते नज़र आ रहे हैं.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने ट्वीट किया, ''रात के 10.30 हो रहे हैं हम सांसद साथी संसद भवन के अंदर गॉंधी जी की प्रतिमा के नीचे बैठे गा रहे हैं.''
''मेरी साँसो पे पहरा भला किसलिए
रूह पर ज़ख़्म गहरा भला किसलिए
मेरे लोगों के घर, जान और माल का
मोल कुछ भी न ठहरा भला किसलिए
सर पटकने गली किसकी जाएँ,सुनो
मैं मणिपुर हूँ मेरी सदायें सुनो''
ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे शुरू होने से सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने तक की कहानी, 10 बातें
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे से जुड़े मामले में सोमवार का दिन काफी हलचल भरा रहा.
ये हलचल सोमवार सुबह सात बजे से पहले ही शुरू हो गई थी और सुप्रीम कोर्ट के सर्वे पर फ़िलहाल रोक लगाने के आदेश तक जारी रही.
आइए आपको बताते हैं कि ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सोमवार के दिन सुबह से शाम तक क्या कुछ हुआ, 10 बातें:
- सोमवार सुबह सात बजे के क़रीब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारी ज्ञानवापी मस्जिद पहुंचे.
- एएसआई की टीम में क़रीब 30 सदस्य थे.
- सर्वे के लिए अंदर जाने वालों में हिंदू पक्ष के वकील भी शामिल थे.
- मस्जिद परिसर में जाने से पहले हिंदू पक्ष के वकीलों ने कहा- जिस लड़ाई को हम लंबे अरसे से लड़ रहे थे, आज वो निर्णायक रूप में आने वाला है.
- मस्जिद की ज़िम्मेदारी संभालने वाली कमेटी सर्वे में शामिल नहीं हुई. कमेटी ने कहा- मामला सुप्रीम कोर्ट में है, ऐसे में सर्वे नहीं होना चाहिए. फिर भी सर्वे हो रहा है, इसलिए हम सर्वे का बहिष्कार करते हैं.
- शुरुआती दो घंटों में सर्वे के दौरान ईंटों की नाप ली गई, मिट्टी के सैंपल लिए गए, फीता लेकर मस्जिद परिसर को मापा गया, कैमरे से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी हुई
- सुबह 11 बजे के क़रीब मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा-''वाराणसी के जिला न्यायालय का आदेश 26 जुलाई शाम पांच बजे तक अमल में नहीं आएगा और इस बीच पक्षकार इलाहाबाद हाई कोर्ट में में वाराणसी जिला न्यायालय के आदेश को चुनौती दे सकते हैं."
- सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को भी रिकॉर्ड में लिया कि एएसआई किसी तरह की कोई खुदाई नहीं कर रही है.
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वाराणसी के ज़िलाधिकारी ए राजलिंगम मीडिया से बोले- कोर्ट के आदेश का अनुपालन होगा.
नमस्कार
आपका दिन शुभ हो.
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