असम में विपक्षी दल ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक अमीनुल इस्लाम ने सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के 'मियां' बयान की आलोचना की है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी असम में समुदायों को बांटने की राजनीति कर रही है और उससे राजनीतिक तौर पर फायदा उठाना चाहती है.
उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत बीजेपी का साथ नहीं दे रहा है इसलिए वे दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.
अमीनुल इस्लाम ने असम के सीएम के बयान को भड़काऊ बताते हुए कहा कि वे एक संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए.
हिमंता बिस्वा सरमा ने क्या कहा था
शुक्रवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में ख़ासकर गुवाहाटी में सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए ''मियां मुसलमान'' व्यापारियों को जिम्मेदार ठहराया था.
सब्जियों की आसमान छूती कीमतों के बारे में पत्रकारों के पूछे सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, "इस समय जिन लोगों ने सब्जियों की इतनी ज्यादा कीमत बढ़ाई है, वो कौन लोग हैं. मियां व्यापारी हैं, जो ज्यादा कीमत पर सब्जियां बेच रहे हैं."
असम में बंगाली मूल के मुसलमानों के लिए अक्सर 'मियां' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. यहां बंगाली मूल के मुसलमानों की एक बड़ी आबादी सब्जियों और मछली का व्यापार करती है.
इससे पहले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा था कि असम 'मियां' समुदाय के बिना अधूरा है.
अजमल के इस बयान पर मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि ऐसी टिप्पणी देकर अजमल ने तथ्यात्मक रूप से असमिया समुदाय का अपमान किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा, "मियां व्यापारी गुवाहाटी में असमिया लोगों से सब्जियों की ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं जबकि गांव में सब्जियों की कीमत कम है. अगर असमिया व्यापारी आज सब्जियां बेचते तो वह कभी अपने असमिया लोगों से ज्यादा कीमत नहीं वसूलते."
मुख्यमंत्री ने असम के युवाओं को आगे आने और इन कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया था.
उन्होंने भरोसा दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से फ्लाईओवर के नीचे के बाज़ार को खाली करवा देंगे, जिससे असमिया लड़कों को रोजगार का अवसर मिल सके. फिलहाल गुवाहाटी के फ्लाईओवरों के नीचे ज़्यादातर सब्जियां और फल बेचने वाले लोग मियां समुदाय के मुसलमान हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, "हम सभी ने देखा है कि कैसे गुवाहाटी शहर में ईद के दौरान बसों की हलचल कम हो जाती है. भीड़ कम दिखाई देती है. क्योंकि अधिकांश बस और कैब चालक मियां समुदाय से हैं.''