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शोएब अख़्तर ने वकील के नोट के हवाले से लिखा, ''कोर्ट ने 'रावलपिंडी एक्सप्रेस' की शूटिंग या रिलीज़ पर रोक लगाई है. साथ ही इस फ़िल्म के किसी हिस्से के मीडिया, सोशल मीडिया या सिनेमाहॉल में दिखाए जाने पर भी तब तक रोक है, जब तक अंतिम फ़ैसला नहीं आ जाता है.''
शोएब अख़्तर के शेयर किए नोट में ये दावा किया गया है कि फ़िल्म के निर्देशक, प्रोड्यूसर की ओर से लगातार धमकी दी जा रही थी और फ़िल्म की शूटिंग भी जारी थी. ऐसे में शोएब अख़्तर ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
इस नोट में ये चेतावनी दी गई है कि फ़िल्म विवादित मसला है और अगर कहीं शूटिंग हुई तो पुलिस कोर्ट के आदेश के साथ छापेमारी करेगी.
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इमेज कैप्शन, शोएब अख़्तर की बायोपिक का टीज़र
जब शोएब ने बायोपिक से पहली बार बनाई थी दूरी
जनवरी 2023 में शोएब अख़्तर ने अपनी बायोपिक से पहली बार दूरी बनाने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी.
शोएब अख़्तर ने ट्वीट कर कहा था, ''बहुत निराशा के साथ आपको ये बताना है कि कई महीनों तक सोचने के बाद मैंने ये फ़ैसला किया है कि मैं रावलपिंडी एक्सप्रेस से अलग हो रहा हूं. मैं फ़िल्म के निर्माताओं के साथ हुए अपने समझौते को भई ख़त्म कर रहा हूं. निश्चित तौर पर ये एक ड्रीम प्रोजेक्ट था. मैंने इसे बचाए रखने की बहुत कोशिश की लेकिन दुर्भाग्य से चीज़ें अच्छी नहीं हो पाईं.''
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तब भी शोएब अख़्तर ने ये चेतावनी दी थी, ''मेरे अलग होने के बाद भी अगर फिल्म की शूटिंग जारी रही तो मैं क़ानूनी कार्यवाही की जाएगी.''
फ़िल्मों की जानी-मानी वेबसाइट आईएमडीबी के मुताबिक़, रावलपिंडी एक्सप्रेस के डायरेक्टर फराज़ क़ैसर, शोएब अहमद ख़ान और हसन ज़ाहिद हैं. फ़िल्म को 16 नवंबर 2023 को रिलीज़ होना था.
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क्या मार्वेल सिनेमैटिक यूनिवर्स ख़त्म होने जा रहा है?
वीडियो कैप्शन, क्या मार्वेल सिनेमैटिक यूनिवर्स ख़त्म होने जा रहा है?
दुनिया को दुष्टों और विलेन से बचाने वाला ऐंटमैन, जो जैसा चाहे अपना आकार बदल सकता है, अब ख़तरे में है.
ऐंटमैन ही नहीं बल्कि उसके दूसरे कई सुपरहीरो साथी भी ख़तरे में हैं और हम उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकते.
क्योंकि इस बार उन पर यह हमला हो रहा है फ़िल्म समीक्षकों और उनके फ़ैन्स की तरफ़ से.
तो इस हफ़्ते दुनिया-जहान के इस अंक में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या मार्वेल सिनेमैटिक यूनिवर्स की दुनिया ख़त्म होने जा रही है?
'क्या बिहार में महाराष्ट्र जैसा हाल होगा?' बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने इस पर क्या कहा?
इमेज स्रोत, TWITTER/@SMCHOUOfficial
इमेज कैप्शन, बिहार में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी
महाराष्ट्र में
जब अजित पवार एकनाथ शिंदे सरकार में जा मिले तो ऐसा सियासी फेरबदल दूसरे राज्यों
में भी होने की चर्चाएं शुरू हो गईं.
इन चर्चाओं को
शुरू करने वालों में बिहार से बीजेपी सांसद और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार
मोदी भी रहे.
सुशील कुमार
मोदी ने कहा था, ''बिहार में भी महाराष्ट्र-जैसी स्थिति बन सकती
है, इसे भांप कर नीतीश कुमार ने विधायकों से अलग-अलग बात करना शुरू कर
दिया है.जेडीयू के विधायक-सांसद न राहुल गांधी को स्वीकार करेंगे, न तेजस्वी यादव
को. जेडीयू में भगदड़ की आशंका है.''
इस बयान के बाद
अब बिहार में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने टिप्पणी की है.
सम्राट चौधरी ने
कहा, ''बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार अप्रसांगिक हो चुके हैं. नीतीश जो
आज माननीय सांसद और विधायक याद आ रहे हैं.''
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सम्राट चौधरी बोले, ''बीजेपी का स्पष्ट है कि हम नीतीश कुमार जी और लालू प्रसाद यादव जी को मिलकर 2024-25 में हराएंगे. उनकी पार्टी से कोई हमारा लेना देना नहीं है. न जोड़ने की इच्छा है न तोड़ने की इच्छा है. पूरी तरह बीजेपी का इनसे विरोध है. 2024-2025 में इनके ख़िलाफ़ लड़ने का काम करेंगे.''
PUBG खेलते हुए नोएडा के लड़के से मिली पाकिस्तानी महिला, बच्चों समेत भारत आई
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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर
पाकिस्तान की एक
महिला को अवैध तरीक़े से ग्रेटर नोएडा में रहने के मामले में हिरासत में लिया गया
है.
पुलिस का कहना
है कि ये महिला पिछले महीने से अपने चार बच्चों के साथ ग्रेटर नोएडा में एक स्थानीय व्यक्ति के
साथ रह रही थी.
पुलिस ने इस
मामले में कथित तौर पर किराए की जगह मुहैया कराने वाले व्यक्ति को भी हिरासत में
लिया है.
अधिकारियों का
कहना है कि ये महिला ऑनलाइन गेम पबजी खेलते वक़्त इस युवक से मिली थी.
ग्रेटर नोएडा के
डीसीपी साद मिया ख़ान ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, ''पाकिस्तानी
महिला और स्थानीय व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है. महिला के साथ के चार बच्चे
भी पुलिस हिरासत में हैं.''
एक पुलिस
अधिकारी ने बताया कि महिला की उम्र 20 के क़रीब है और पबजी खेलते हुए नोएडा
के व्यक्ति से उनकी दोस्ती हुई थी.
ख़ान ने कहा, ''पाकिस्तानी
महिला और व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है. जब पूछताछ पूरी हो जाएगी, तब आगे की
जानकारी साझा की जा सकेगी.''
स्थानीय पुलिस
के मुताबिक़, ये महिला कथित तौर पर नेपाल के रास्ते भारत में घुसी थी और यूपी से
बस के ज़रिए ग्रेटर नोएडा तक पहुंची थी.
ब्रेकिंग न्यूज़, अमेरिका के फिलाडेलफिया में गोलीबारी, चार लोगों की मौत
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अमेरिका के फिलाडेलफिया में
गोलीबारी की घटना में चार लोगों की मौत हो गई है. पुलिस ने इस बारे में जानकारी दी है.
समाचार एजेंसी
रॉयटर्स के स्थानीय मीडिया और पुलिस के हवाले से बताया है कि इस गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई है और चार अन्य लोग घायल हैं.
गोलीबारी में आठ लोगों को गोली लगी है. हमले में दो बच्चे भी घायल हुए हैं.
सीएनएन के
मुताबिक़, इस मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है और हथियार को
बरामद कर लिया गया है.
इस गोलीबारी में
घायल दो बच्चों को अस्पताल ले जाया गया है.
फिलाडेलफिया का
एक अखबार लिखता है कि संदिग्ध ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी हुई थी और उसके पास राइफल
और हैंडगन थी.
पुलिस को घायल
कई अलग जगहों पर मिले हैं. ये गोलीबारी स्थानीय समयानुसार रात 8.30 बजे हुई है.
बीबीसी न्यूज़
ने फिलाडेलफिया पुलिस से जब इस बारे में और ज़्यादा जानकारी जानने की कोशिश की तो
कोई जवाब नहीं दिया गया.
पुलिस अभी भी कई
हमलावरों की तलाश कर रही है.
शाह फ़ैसल बोले- अनुच्छेद 370 मेरे लिए अब अतीत की बात
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साल 2019
में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को ख़ास दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 से
जुड़े प्रावधानों को हटाया था.
तब से लेकर बीते
कुछ वक़्त तक कश्मीर के नेताओं, आम लोगों,वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से कई
याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं.
इन याचिकाओं पर
साल 2020 के बाद सुनवाई नहीं हो पाई थी.
अब तीन जुलाई को
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए नई संवैधानिक
पीठ का गठन किया है.
इस पीठ में चीफ़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस
सूर्यकांत शामिल हैं.
याचिकाओं पर
सुनवाई 11 जुलाई से शुरू होगी.
370 से जुड़ी याचिका कश्मीर के चर्चित आईएएस
अधिकारी रहे शाह फैसल ने भी दायर की थी. लेकिन साल 2018 में आईएएस पद से इस्तीफ़ा देने वाले
शाह फैसल ने जब 2022 में फिर से प्रशासनिक सेवाएं जॉइन की तो अपनी
याचिका वापस लेने की ख़बरें भी आई थीं.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, सितंबर 2022 में शाह फ़ैसल ने 370 को चुनौती देती याचिका से अपना नाम वापस लेने की अर्जी दी थी.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट से जो नोटिफिकेशन जारी हुआ है, उसमें शाह फ़ैसल का नाम लिखा हुआ है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने शाह फ़ैसल के हवाले से लिखा है कि वो इस याचिका को काफ़ी वक़्त पहले वापस ले लिया था.
अब जब सुप्रीम
कोर्ट ने संवैधानिक पीठ बनाई है, तब शाह फै़सल की पहली प्रतिक्रिया
सामने आई है.
शाह फ़ैसल ने
ट्वीट किया है, ''मेरी तरह कई कश्मीरियों के लिए 370 अब
अतीत की बात है. झेलम और गंगा अच्छे के लिए हिंद महासागर में मिल गई हैं. अब यहां
से पीछे नहीं मुड़ना. अब सिर्फ़ आगे बढ़ना है.'
शाह फ़ैसल ने डल
झील के पास जी-20 के कश्मीर में स्वागत करते पोस्टर की तस्वीर भी साझा की है.
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महंगाई, बेरोज़गारी पर बात करना फ़ैशन बन गया है- फडणवीस
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इमेज कैप्शन, देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र में
सत्ता के बदलते रूप के बीच उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का एक इंटरव्यू जारी हुआ है.
समाचार एजेंसीएएनआई को दिया ये इंटरव्यू 29 जून को रिकॉर्ड हुआ था.
इस इंटरव्यू में
देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ''बेरोज़गारी और महंगाई पर बोलना फैशन बन गया है.
ये सही है कि कोरोना और अंतरराष्ट्रीय संकट के दौर में कुछ वक़्त के लिए महंगाई
बढ़ी थी. लेकिन ये फिर सामान्य हो गई थी. पीएम नरेंद्र मोदी महंगाई पर काबू पाने
का जो मॉडल है वो पूरी दुनिया में काम कर रहा है.''
फडणवीस बोले, ''इकलौता
हमारा देश है जो कोविड के बाद महंगाई पर काबू पा सका है. हम ये नहीं कह रहे कि हर
चीज़ सस्ती हो गई है. लेकिन जब पूरी दुनिया महंगाई से परेशान है तब भारत इससे
अच्छे से निपट सका है.''
बेरोज़गारी पर
बात करते हुए फडणवीस ने कहा, ''हमने कहा था कि हम 75 हज़ार
नौकरियां देंगे. ऐसा लगता है कि हमने एक लाख से ज़्यादा नौकरी दे सकते हैं. हमने
पहले ही पांच से छह हज़ार नौकरियां दे दी हैं.18 हज़ार नौकरियां देने की प्रक्रिया जारी है. हम ऐसा करेंगे.''
इसी इंटरव्यू में जब देवेंद्र फडणवीस से पूछा जाता है कि क्या वो अजित पवार के साथ अभी भी संपर्क में हैं और क्या ये संभव है कि अजित पवार अलग होकर फिर साथ आएं?
इस पर फडणवीस कहते हैं, ''देखिए ताल्लुकात तो हैं हमारे. इसमें कुछ छिपा हुआ नहीं है. अजित पवार क्या, हमारे तो सबके साथ ताल्लुकात हैं. महाराष्ट्र में हम दक्षिण भारत की तरह एक-दूसरे की जान के दुश्मन नहीं हैं. एनसीपी के मालिक शरद पवार जी हैं. उनके बिना ये पार्टी नहीं हिल सकती. वो अपना मन बना चुके हैं. देश में जो कई दलों की खिचड़ी पक रही है, वो उसमें योगदान देना चाहते हैं. ऐसे में शरद पवार की पार्टी के साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता. हमारी सरकार अच्छे से चल रही है. पर हां कोई सामने से आए तो हमारे दरवाज़े खुले हुए हैं.''
सैन फ्रांसिस्को: भारत के वाणिज्यिक दूतावास पर हमला, अमेरिका बोला- ये अपराध है
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इमेज कैप्शन, सैन फ्रांसिस्को में भारत का वाणिज्य दूतावास (फाइल फोटो)
अमेरिका के सैन
फ्रांसिस्को में भारत के वाणिज्यिक दूतावास पर कथित खालिस्तान समर्थकों के हमला करने
की ख़बर है.
इस हमले की
अमेरिका ने कड़ी निंदा की है.
एक स्थानीय चैनल
दिया टीवी के साझा किए वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग दूतावास को आग लगा
रहे हैं. दिया टीवी ने लिखा है कि ये वीडियो खालिस्तान समर्थकों ने रिलीज़ किया
है.
इस वीडियो में
खालिस्तान समर्थन के हैशटैग इस्तेमाल हुए हैं. बीबीसी स्वतंत्र तौर पर इस वीडियो
की पुष्टि नहीं कर सका है.
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ये घटना रात डेढ़ से ढाई बजे की है. हालांकि अग्निश्मन विभाग की ओर से आग को जल्दी बुझा दिया गया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस घटना से ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ है और किसी स्टाफ को चोट नहीं लगी है.
इस घटना के बाद अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''भारत के वाणिज्यिक दूतावास पर हुए हमले की अमेरिका कड़ी निंदा करता है.विदेश के डिप्लोमैट्स के साथ तोड़फोड़ और हिंसा अमेरिका में अपराध है.''
इससे पहले मार्च में भी इसी वाणिज्यिक दूतावास पर खालिस्तान समर्थकों के एक संगठन ने हमला किया था. इस हमले की भारत सरकार ने कड़ी निंदा की थी और ये मांग की थी कि जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए.
ये घटना लंदन के उस वाकये के बाद हुई थी, जब भारतीय हाई कमिशन के बाहर लगे तिरंगे को खालिस्तान समर्थकों के एक झुंड ने उतार दिया था.
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दिल्ली: उप-राज्यपाल ने केजरीवाल सरकार को फिर दिया झटका
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दिल्ली में उप-राज्यपाल और केजरीवाल सरकार के बीच अधिकारों की लड़ाई पर फिर बहस तेज़ हो सकती है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, दिल्ली के
उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने आम आदमी पार्टी की सरकार के साथ काम कर रहे क़रीब 400
स्पेशलिस्ट की सेवाएं ख़त्म कर दी हैं.
ये स्पेशलिस्ट
केजरीवाल सरकार के कई विभागों में काम करते थे.
उप-राज्यपाल के
दफ़्तर की ओर से सोमवार को बयान जारी कर बताया गया, ''ये लोग सही जगह से आवश्यक मंज़ूरी मिले
बिना काम कर रहे थे और ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी.''
बयान में ये भी
कहा गया है कि नियुक्ति करते वक़्त एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों को लेकर तय
नियमों का भी पालन नहीं किया गया.
इस मामले में
ख़बर लिखे जाने तक केजरीवाल सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
उप-राज्यपाल के दफ़्तर की ओर से बताया गया, '' क़रीब 400 लोगों की दिल्ली सरकार ने फेलो, एसोसिएट फेलो, सलाहकार, स्पेशलिस्ट, सीनियर रिसर्च ऑफिसर, कंसलटेंट के पद पर नियुक्ति की थी. वीके सक्सेना ने सर्विस विभाग के उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है, जिसमें इन लोगों की सेवाएं ख़त्म करने की बात कही गई है.''
नमस्कार.
आपका दिन शुभ हो.
ये लाइव पेज 24 घंटे के लिए उपलब्ध रहेगा.
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