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विनेश, साक्षी और बजरंग ने कहा- सड़क की जगह कोर्ट में जारी रहेगी लड़ाई

तीनों पहलवानों ने सोशल मीडिया पर बताया कि सरकार ने उनसे जो वादे किए हैं उनके पूरे होने का उन्हें इंतज़ार है.

लाइव कवरेज

अभिनव गोयल

  1. मिस्र की अल-हाकिम मस्जिद पहुंचे मोदी, जानिए क्यों अहम है ये मस्जिद

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मिस्र दौरे के दौरान काहिरा में मौजूद एक हज़ार साल पुरानी अल-हाकिम मस्जिद का दौरा किया है.

    मिस्र में मौजूद 11वीं सदी के इस मस्जिद की मरम्मत का काम भारत में रहने वाले दाउदी वोहरा समुदाय के लोगों की मदद से पूरा हुआ है.

    इसकी मरम्मत का काम तीन महीने पहले ही पूरा हुआ है.

    मिस्र के अपने दो दिन के दौरे के दूसरे दिन मोदी 1012 में बनी इस मस्जिद को देखने पहुंचे और इसकी दीवारों और दरवाज़ों पर बनी नक्काशी को देखा.

    अल हाकिम मस्जिद

    ये मस्जिद काहिरा में मौजूद चौथी सबसे पुरानी मस्जिद है.

    ये शहर की दूसरी मस्जिद है जिसे फातिमियों ने बनाया है.

    भारत में बसे दाउदी वोहरा समुदाय की विरासत दरअसल फातिमी इमामों से जुड़ी है.

    ये समुदाय फातिमी इस्माइल तैय्यबी विचारधारा में विश्वास करता है.

    इस मस्जिद का नाम 16वीं सदी के फातिमी खलिफ़ा अल-हाकिमी बि-अम्र अल्लाह पर रखा गया है.

    इस मस्जिद को दाउदी वोहरा समुदाय के लोग धार्मिक और सांस्कृतिक तौर पर बेहद अहम मानते हैं.

    माना जाता है कि इस समुदाय के लोग सबसे पहले मिस्र से यमन गए थे और फिर 11वीं सदी में भारत आकर बस गए थे.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार 1970 के बाद से इस समुदाय ने मस्जिद क मरम्मत का काम शुरू किया और मौजूदा दौर में इसकी रखरखाव का काम यही समुदाय करता है.

    13,560 वर्ग मीटर इलाक़े में बनी ये मस्जिद के बीच में 5,000 वर्ग मीटर का सेहन है.

  2. एक रील ने बदल दी इस पाकिस्तानी गायक की ज़िंदगी

    आज का दौर सोशल मीडिया का है. एक ओर जहां बहुत से लोग इसे समय की बर्बादी मानते हैं वहीं एक तबक़ा इसे एक ऐसे प्लेटफ़ॉर्म के रूप में देखता है जहां उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौक़ा मिलता है.

    ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिसमें सोशल मीडिया ने लोगों को स्टार बना दिया. पाकिस्तान के 30 वर्षीय ग़ज़ल गायक जीशान अली अपनी रील्स के माध्यम से ऑनलाइन काफी लोकप्रिय हो गए हैं.

    बीबीसी संवाददाता अली काज़मी ने उनसे उनकी लोकप्रियता और गायकी पर बात की.

  3. उन्नाव में पत्रकार को मारी गोली, कुछ दिन पहले बताया था जान का खतरा

    उत्तर प्रदेश के उन्नाव में पत्रकार मन्नू अवस्थी को शनिवार देर रात गोली मारने की घटना सामने आई है.

    गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया था.

    उन्नाव के एएसपी शशि शेखर सिंह ने बताया, "मन्नू अवस्थी नाम के पत्रकार को गोली मारने की सूचना प्राप्त हुई है. मौके पर 32 बोर के खोखा कारतूस और एक जिंदा कारतूस मिला है. मन्नू की स्कूटी भी लॉक हालत में मिली है."

    स्थानीय पत्रकारों ने उन्नाव के एएसपी से सवाल किया कि पत्रकार मन्नू अवस्थी ने घटना से पहले अपनी जान का खतरा बताया था.

    सवाल के जवाब में एएसपी ने कहा कि पत्रकार को सुरक्षा मुहैया करवाई गई थी.

    पत्रकारों ने जब सवाल किया कि क्या घटना के वक्त सुरक्षाकर्मी उनके साथ मौजूद थे, उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मी की बात अलग है और सुरक्षा की बात अलग है.

  4. COVER STORY: टाइटन पनडुब्बी हादसे के बाद उठ रहे हैं कई सवाल

    टाइटैनिक जहाज़ का मलबा देखने के लिए टाइटन पनडुब्बी पर सवार होकर जाने वाले सभी पांच लोगों की मौत हो चुकी है.

    खोज में लगे अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे विनाशकारी विस्फोट क़रार दिया है. लेकिन इस हादसे के बाद अब इसकी सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

    सवाल उठाने वालों में सिर्फ़ परिवार के लोग शामिल नहीं हैं, टाइटैनिक फ़िल्म बना चुके निर्देशक जेम्स कैमरन से लेकर कई सुरक्षा विशेषज्ञ भी इस कंपनी पर उंगली उठा रहे हैं.

    लेकिन पनडुब्बी बनाने वाली कंपनी के सह-संस्थापक इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं. कवर स्टोरी में आज बात इसी की.

  5. इतना ताक़तवर कैसे बना 'रसोइया' कि कमज़ोर नज़र आने लगे राष्ट्रपति पुतिन

    वागनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोज़िन ने शनिवार को दावा किया कि उन्होंने रूसी शहर रोस्तोव को अपने नियंत्रण में ले लिया है, लेकिन रात होते-होते उन्होंने मॉस्को की तरफ कूच करने के अपने फैसले को वापस ले लिया.

    प्रिगोज़िन के इस 'बगावती' कदम ने राष्ट्रपति पुतिन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. रूसी के सहयोगी देश बेलारूस के राष्ट्रपति के बीच बचाव करने के बाद प्रिगोज़िन समझौते के लिए तैयार हुए. हालांकि समझौता क्या हुआ इसे लेकर कुछ साफ नहीं है.

    इस सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह कि कभी राष्ट्रपति पुतिन के लिए रसोइये का काम करने वाले प्रिगोज़िन इतने शक्तिशाली कैसे बन गए कि उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया.

    येवगेनी प्रिगोज़िन की यात्रा

    वे व्लादिमीर पुतिन के गृहनगर सेंट पीटर्सबर्ग से हैं. उन्हें साल 1979 में पहली बार चोरी के आरोप में ढाई साल की सजा सुनाई गई थी. उस समय उनकी उम्र महज 18 साल थी.

    दो साल बाद प्रिगोज़िन को डकैती और चोरी के आरोप में 13 साल की सजा मिली, जिसमें से 9 साल उन्होंने जेल में बिताए.

    जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में हॉट डॉग बेचने का काम शुरू किया. बिजनेस अच्छा चला तो कुछ ही सालों में उन्होंने शहर में महंगे रेस्तरां खोल दिए.

    पुतिन के कैसे करीब आए?

    यही वो समय था जब वो सेंट पीटर्सबर्ग और फिर रूस के ताकतवर लोगों के संपर्क में आए.

    प्रिगोज़िन ने एक नाव को रेस्तरां की तरह बनाया हुआ था, जिसका नाम उन्होंने न्यू आइलैंड रखा था. यह रेस्तरां नेवा नदी में किसी नाव की तरह चलता था. व्लादिमीर पुतिन को यह रेस्तरां इतना पसंद था कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद भी यहां जाना नहीं छोड़ा.

    पुतिन अपने विदेशी मेहमानों को भी कई बार इस रेस्तरां पर ले जाते थे. माना जाता है कि यहीं पर उनकी मुलाकात और दोस्ती येवगेनी प्रिगोज़िन से हुई.

    प्रिगोज़िन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब पुतिन, जापानी प्रधानमंत्री योशिरो मोरी के साथ रेस्तरां में आए थे तो उनकी मुलाकात हुई थी. यह साल 2000 का समय था.

    तीन साल बाद राष्ट्रपति पुतिन ने अपना जन्मदिन न्यू आइलैंड पर ही मनाया. कुछ सालों के बाद प्रिगोज़िन की कंपनी कॉनकॉर्ड को क्रेमलिन में भोजन आपूर्ति का ठेका मिला और उसके बाद उन्हें पुतिन का शेफ बुलाया जाने लगा.

    इसके बाद उन्होंने सैन्य और सरकारी स्कूलों में भी खानपान से संबंधी सरकारी ठेके हासिल किए.

    वागनर ग्रुप की शुरुआत

    साल 2014 में पहली बार वागनर ग्रुप के बारे में जानकारी सामने आई और पता लगा कि यह पूर्वी डोनबास क्षेत्र में यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना की मदद कर रहा है.

    वागनर ने साल 2022 में बताया था कि उन्होंने इस ग्रुप की स्थापना 2014 में की थी. अमेरिका, यूरोपीय संघ और यूके ने ग्रुप पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन इसे रूस में काम करने की अनुमति है.

    जानकारों का कहना है कि इस वक्त वागनर ग्रुप में 50 हजार लड़ाके शामिल हैं जो रूस की तरफ से यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे हैं और युद्ध से पहले कई अपराधियों को जेल से निकालकर इस ग्रुप में भर्ती किया गया था.

    साल 2022 में वागनर ग्रुप ने सेंट पीटर्सबर्ग में अपना मुख्यालय भी खोला था और कई शहरों में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर लोगों से भर्ती होने की अपील भी की थी.

    पुतिन के साथ रिश्तों में तनाव

    फरवरी, 2022 में जैसे ही रूस ने यूक्रेन पर हमला किया वैसे ही प्रिगोज़िन की प्राइवेट आर्मी की सेवाओं की मांग बढ़ गई.

    जुलाई 2022 में रूस के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की वागनर समूह उनके लिए पूर्वी यूक्रेन में लड़ रहा है.

    यूक्रेन के बखमुत पर रूस के कब्जा करने में वागनर ग्रुप का बड़ा हाथ है, लेकिन जल्द ही रूसी सेना के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण होने शुरू हो गए.

    उन्होंने कई बार रूस के रक्षा अधिकारियों की आलोचना की और आरोप लगाए कि उन्हें युद्ध के मैदान में गोला बारूद नहीं दिया जा रहा है.

    इसके बाद उन्होंने रूस के रक्षा मंत्री तक पर देशद्रोह के आरोप लगाए और आखिर में शनिवार के दिन यानी 24 जून को यूक्रेन की सीमा पार कर रूस के शहर रोस्तोव पर नियंत्रण करने का दावा किया.

  6. ईरान-तुर्की सीमा पर अपहरण और फ़िरौती की मजबूरी

    बीबीसी की एक पड़ताल में ये सामने आया है कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाने वाले लोगों को ईरान और तुर्की की सीमा पर अग़वा किया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.

    अग़वा किए गए लोगों के घरवालों को वीडियो भेजकर उन्हें छोड़ने के लिए फ़िरौती की रक़म मांगी जा रही है.

    बीबीसी संवाददाता सोरन क़ुर्बानी ने भी 12 साल पहले ईरान से यूके आने के लिए कुछ ऐसी ही राह चुनी थी.

    उन्होंने महीनों मेहनत कर इन गिरोहों के शिकार लोगों को खोजा और उनकी कहानियां दुनिया के सामने लेकर आए.

  7. रूस में वागनर ग्रुप के बॉस के प्लान के बारे में अमेरिका को पहले से ख़बर थी: रिपोर्ट

    अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के अधिकारियों को प्राइवेट मिलिट्री कंपनी वागनर के बॉस येवगेनी प्रिगोज़िन के प्लान के बारे में बुधवार से ही पता था.

    अख़बार ने लिखा है कि यूएस नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के पास इस बात के सबूत थे कि येवगेनी प्रिगोज़िन रूस के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के ख़िलाफ़ मिलिट्री कार्रवाई के लिए तैयारी कर रहे थे.

    हालांकि अख़बार ने ये नहीं लिखा है कि अमेरिकी अधिकारियों को येवगेनी प्रिगोज़िन की योजना में आख़िर कब पता चला था लेकिन बुधवार को इंटेलीजेंस विभाग के अधिकारियों ने बाइडन प्रशासन और पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) के प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर ब्रीफिंग की थी.

    गुरुवार को जब और सबूत मिले तो इंटेलीजेंस विभाग के अधिकारियों ने कांग्रेस के कुछ सदस्यों को इस घटनाक्रम की जानकारी दी.

    अख़बार ने ये भी लिखा है कि इंटेलीजेंस सर्विस को येवगेनी प्रिगोज़िन के मिलिट्री प्लान के नतीजों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी लेकिन वे इस बात को लेकर चिंतित जरूर थे कि रूस के परमाणु हथियारों के जखीरे पर इस सब का क्या असर होगा.

    अख़बार ने पिछले साल अक्टूबर में राष्ट्रपति जो बाइडन के दिए उस बयान का भी जिक्र किया है कि अगर राष्ट्रपति पुतिन अलग-थलग पड़े तो इसके खतरनाक नतीजे हो सकते हैं.

  8. ग्रीस में डूबी नाव में पाकिस्तानियों की पहचान का काम जारी

    पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उसने अपने 200 से ज़्यादा नागरिकों की पहचान कर ली है जो कुछ दिनों पहले ग्रीस में डूबी नाव पर सवार थे.

    पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफ़आईए) ने कहा कि उसने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पीड़ित परिवारों से संपर्क किया है. एजेंसी ने रिश्तेदारों से डीएनए सैंपल लिए हैं.

    उन्हें उम्मीद है कि इससे पीड़ितों की पहचान करने में मदद मिलेगी.

    बीबीसी संवाददाता उमर नांगियाना ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के कोटली ज़िले का दौरा किया और वहां से ये रिपोर्ट भेजी है.

  9. पीएम मोदी से सवाल करने वाली महिला पत्रकार की ट्रोलिंग पर सामने आया दक्षिण एशियाई पत्रकार संघ

    सोशल मीडिया पर उत्पीड़न का सामना कर रहीं 'द वाल स्ट्रीट जर्नल' की पत्रकार सबरीना सिद्दीक़ी का दक्षिण एशियाई पत्रकार संघ ने समर्थन किया है.

    संघ ने ट्वीट करते हुए लिखा, "हम अपनी सहयोगी सबरीना सिद्दीक़ी के प्रति अपना समर्थन जाहिर करना चाहते हैं जो कई दक्षिण एशियाई और महिला पत्रकारों की तरह, केवल अपना काम करने के लिए उत्पीड़न का सामना कर रही हैं. प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र की पहचान है और पीएम मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करते हैं."

    पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान सबरीना ने उनसे भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकार, लोकतंत्र और प्रेस पर कथित हमले से जुड़ा सवाल किया था.

    सवाल करने के बाद से सबरीना को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है. उन्हें पाकिस्तानी बताया जा रहा है.

    बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी सबरीना के सवाल को दुर्भावना से प्रेरित सवाल बताया था.

    वहीं इंडियन अमेरिकन्स नाम के ट्विटर हैंडल ने सबरीना को पाकिस्तानी इस्लामिस्ट बताया था और कहा था कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घात लगाकर पीएम मोदी पर हमला किया है.

    उनका आरोप था कि सबरीना ने पाकिस्तान में महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर आज तक एक शब्द भी नहीं बोला है. वे सिर्फ भारत हमला करती हैं और नफरत पाकिस्तानियों के डीएनए में है.

    शनिवार को खुद सबरीना ने ट्रोल करने वालों को जवाब दिया था.

    उन्होंने लिखा था, "उन्होंने लिखा कि कुछ लोग मेरी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि को मुद्दा बना रहे हैं, ऐसे में मैं पूरी तस्वीर साफ़ करना सही समझती हूं. कई बार पहचान जैसी दिखती है, उससे कहीं अधिक जटिल होती है."

    'द वाल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक सबरीना सिद्दीक़ी वाशिंगटन डी.सी. में उनके लिए व्हाइट हाउस रिपोर्टर हैं, जहां वे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को कवर करती हैं.

    2019 में 'द वाल स्ट्रीट जर्नल' में शामिल होने से पहले उन्होंने गार्जियन अखबार के लिए व्हाइट हाउस और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव को कवर किया था.

    सिद्दीक़ी, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं और फिलहाल अपने पति के साथ अमेरिका के वाशिंगटन में रहती हैं.

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी से क्या पूछा गया?

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिका के प्रतिष्ठित अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की पत्रकार सबरीना सिद्दीक़ी ने पीएम मोदी से सवाल पूछा.

    सिद्दीक़ी ने पीएम मोदी से पूछा, “आप और आपकी सरकार आपके देश में मुसलमानों समेत दूसरे समुदायों के अधिकारों को बेहतर बनाने और अभिव्यक्ति की आज़ादी को सुनिश्चित करने के लिए कौन से क़दम उठाने के लिए तैयार हैं.”

    पीएम मोदी का जवाब

    इस पर पीएम मोदी ने कहा, “मुझे आश्चर्य हो रहा है कि आप कह रहे हैं कि लोग कहते हैं...लोग कहते हैं नहीं, भारत एक लोकतंत्र है. और जैसा राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के डीएनए में लोकतंत्र है.''

    मोदी ने कहा, ''लोकतंत्र हमारी स्पिरिट है. लोकतंत्र हमारी रगों में है. लोकतंत्र को हम जीते हैं. और हमारे पूर्वजों ने उसे शब्दों में ढाला है, संविधान के रूप में. हमारी सरकार लोकतंत्र के मूलभूत मूल्यों को आधार बनाकर बने हुए संविधान के आधार पर चलती है. हमारा संविधान और हमारी सरकार...और हमने सिद्ध किया है कि लोकतंत्र कैन डिलिवर.''

    ''और जब मैं डिलीवर शब्द का प्रयोग करता हूं तो जाति, पंथ, धर्म या लैंगिक स्तर पर किसी भी भेदभाव की वहां जगह नहीं होती है. और जब लोकतंत्र की बात करते हैं तो अगर मानवीय मूल्य नहीं हैं, मानवता नहीं है, मानवाधिकार नहीं हैं, फिर तो वो डेमोक्रेसी है ही नहीं.

    और इसलिए जब आप डेमोक्रेसी कहते हैं, जब उसे स्वीकार करते हैं, और जब हम डेमोक्रेसी को लेकर जीते हैं, तब भेदभाव का कोई सवाल ही नहीं उठता. और इसलिए भारत सबका साथ, सबका विकास, और सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलभूत सिद्धांतों को लेकर हम चलते हैं.

    भारत में सरकार की ओर से मिलने वाले लाभ सभी को उपलब्ध हैं, जो भी उनके हक़दार हैं, वो उन सभी को मिलते हैं. इसलिए भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों में कोई भेदभाव नहीं है. न धर्म के आधार पर, न जाति के आधार पर, न उम्र के आधार पर, और न भूभाग के आधार पर.”

  10. यूपी: नक़ल रोकने के लिए लाया गया नया ‘क़ानून’ पुराने से कितना अलग

  11. इमरजेंसी की बरसी पर संघ के मुखपत्र 'पाञ्चजन्य' ने इंदिरा गांधी की तुलना हिटलर से की

    इमरजेंसी की बरसी पर आरएसएस की विचारधारा से प्रेरित पत्रिका पाञ्चजन्य ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तुलना जर्मनी के तानाशाह हिटलर से की है.

    पत्रिका ने अपने नए अंक के कवर पेज पर हिटलर और इंदिरा गांधी की तस्वीर लगाई है और इसे 'हिटलर गांधी' का नाम दिया है.

    पाञ्चजन्य ने अपने कवर पेज पर लिखा है, "दो तानाशाह, एक जैसी इबारत. हिटलर के जघन्य अपराधों को नकारने अथवा भुलाने पर यूरोप में कई जगह कानूनी पाबंदी है. यह उनके लिए अस्तित्व रक्षा का प्रश्न है. यही स्थिति भारत में इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल की है, जिसे भुलाना लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए खतरनाक हो सकता है. आइए, याद करें 25 जून 1975 की काली रात से शुरू हुई वह दास्तान..."

    पाञ्चजन्य के अलावा पीएम मोदी समेत बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इमरजेंसी को याद कर कांग्रेस पर निशाना साधा है.

    पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, "मैं उन सभी साहसी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया और हमारी लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने के लिए काम किया. #DarkDaysOfEmergency हमारे इतिहास में एक कभी न भुलाए जाने वाला समय है, जो हमारे उन संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है जिन पर हमें गर्व है."

    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने लिखा, "25 जून 1975 को एक परिवार ने अपने तानाशाही प्रवृत्ति के कारण देश के महान लोकतंत्र की हत्या कर आपातकाल जैसा कलंक थोपा था. जिसकी निर्दयता ने सैकड़ों वर्षों के विदेशी शासन के अत्याचार को भी पीछे छोड़ दिया. ऐसे कठिन समय में असीम यातनाएं सहकर लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले सभी राष्ट्र भक्तों को नमन करता हूँ."

    पार्टी ने एक करीब सात मिनट का वीडियो भी जारी किया है जिसे इमरजेंसी के ऊपर बनाया गया है.

    25 जून 1975 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी, जिसके बाद तमाम विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था और मीडिया पर पाबंदी लगा दी गई थी.

    इमरजेंसी के अगले दिन सिर्फ हिंदुस्तान टाइम्स और स्टेट्समैन ही छप पाए थे क्योंकि उनके प्रिंटिंग प्रेस बहादुर शाह ज़फ़र मार्ग पर नहीं थे.

    ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि सरकार ने बहादुर शाह ज़फ़र मार्ग पर मौजूद संस्थानों की बिजली काट दी थी.

    इमरजेंसी से कुछ दिन पहले यानी 12 जून को ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी थी.

    • #Emergency: जब इंदिरा गांधी ने दिया भारत को शॉक ट्रीटमेंट
  12. पाकिस्तान में खेली जाती है कुछ ख़ास किस्म की कबड्डी, जिसमें चलते हैं थप्पड़

    आपने कबड्डी के मैच तो खूब देखे होंगे लेकिन यहां हम आपको ‘थप्पड़ कबड्डी’ का मैच दिखा रहे हैं.

    इसमें सामने वाले खिलाड़ी को थप्पड़ मारकर गिराना होता है.

    ये थप्पड़ कबड्डी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेली जाती है.

  13. बिहार: वैशाली में फ़ैक्ट्री से अमोनिया गैस का रिसाव, दर्जनों बीमार और एक की मौत

      • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
      • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बिहार से

    बिहार के वैशाली ज़िले में दूध की एक फ़ैक्ट्री में अमोनिया गैस के रिसाव होने से दर्जनों लोग इसकी चपेट में आ गए.

    यह घटना राज डेयरी नाम की फ़ैक्ट्री में शनिवार रात क़रीब 9:45 पर हुई.

    वैशाली के ज़िलाधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि फ़ैक्ट्री के तीन में से एक वाल्व से गैस लीक हुई थी, इसकी चपेट में आए सभी लोगों को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है, उन्हें फ़र्स्ट एड की सलाह गई है.

    इसी दौरान फ़ैक्ट्री में काम करने वाले एक मज़दूर के रिश्तेदार की मौत भी हो गई है.

    वैशाली के सिविल सर्जन डॉ श्याम नंदन प्रसाद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि क़रीब 35 से 40 लोग गैस की चपेट में आने से हॉस्पिटल पहुंचे थे. इनमें से एक की मौत हो गई है.

    हालांकि वैशाली के ज़िलाधिकारी का कहना है कि मौत किस वजह से हुई है इसकी जानकारी पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चल पाएगी.

    गैस के रिसाव के बाद लोगों को सांस लेने में तकलीफ़ होने लगी और उसके बाद घबराहट में लोग हॉस्पिटल की तरफ भागने लगे थे.

    इस गैस की गंध फ़ैक्ट्री से क़रीब चार किलोमीटर दूर तक महसूस की गई थी.

    हालांकि सिविल सर्जन का कहना है कि ज़्यादा दूरी पर केवल गंध आ सकती है, इसका लोगों पर असर नहीं होता है.

  14. मिस्र की ऐतिहासिक मस्जिद जाएंगे पीएम मोदी, इससे पहले किन मस्जिदों में जा चुके हैं?

    अमेरिका की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर मिस्र में हैं.

    आज यानी दूसरे दिन पीएम मोदी मिस्र की ऐतिहासिक अल-हाकिम मस्जिद का दौरा करेंगे.

    विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 जून को अल-हाकिम मस्जिद का दौरा करेंगे, जिसे 11वीं शताब्दी में बनाया गया था और दाऊदी बोहरा समुदाय ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था.

    मस्जिद को ऐतिहासिक काहिरा के हिस्से के रूप में 1979 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया था.

    ऐसा पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी किसी विदेश दौरे के बीच मस्जिद जा रहे हैं. इससे पहले मोदी ओमान से लेकर संयुक्त अरब अमीरात के दौरों पर मस्जिद में जा चुके हैं.

    मोदी विदेश में कब-कब मस्जिद गए?

    शेख ज़ायद मस्जिद: अगस्त 2015 में मोदी संयुक्त अरब अमीरात के दो दिवसीय दौरे पर गए थे. इस यात्रा के पहले दिन मोदी ऐतहासिक शेख ज़ायद मस्जिद भी गए थे.

    तब मोदी के साथ यूएई के तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मुबारक अल नाहयान भी मौजूद थे.

    सुल्तान कबूस मस्जिद: फ़रवरी 2018 में मोदी पश्चिमी एशिया के चार देशों जॉर्डन, फलस्तीन, यूएई और ओमान के दौरे पर गए थे. इस दौरान मोदी ओमान की राजधानी मस्कट में मौजूद सुल्तान कबूस मस्जिद भी गए थे.

    ये ओमान की सबसे बड़ी मस्जिद है, जिसे भारतीय बालू पत्थर से बनाया गया है.

    चूलिया मस्जिद: मई-जून 2018 में मोदी ने तीन देशों का दौरा किया था.

    ये देश हैं- इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर. सिंगापुर की यात्रा के दौरान मोदी पहले श्री मरियम्मां मंदिर पहुंचे थे और फिर चूलिया मस्जिद पहुंचे थे.

    इस मस्जिद का निर्माण चूलिया मुस्लिम समुदाय ने करवाया था जो तमिल मुसलमानों का एक समुदाय है.

    इस्तिकलाल मस्जिद:ये मस्जिद इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में मौजूद दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है.

    मई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मस्जिद में पहुंचे थे और उनके साथ इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति जोको विडोडो मौजूद थे.

    • पीएम मोदी मिस्र की जिस मस्जिद में जाएंगे उसका भारत से क्या कनेक्शन है?
  15. असम में बाढ़ का कहर, हज़ार से ज़्यादा गांव पानी में, 4 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित

      • Author, दिलीप कुमार शर्मा
      • पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए

    असम में लगातार हो रही बारिश के कारण आई बाढ़ से कई इलाकों में हालात बेहद ख़राब बने हुए हैं.

    असम राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के 24 जून की शाम को जारी की गई दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार इस समय राज्य के 15 ज़िलों के 1 हज़ार 118 गांव बाढ़ के पानी में डूबे हुए है.

    रिपोर्ट के मुताबिक इस साल यह प्रथम चरण की बाढ़ है जिसमें 4 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. अब तक बाढ़ के कारण कुल 3 लोगों की मौत हो चुकी है.

    असम सरकार ने बेघर हुए लोगों के लिए 101 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जबकि 119 राहत वितरण केंद्र खोले गए हैं.

    आपदा विभाग की एक जानकारी के अनुसार बाढ़ के कारण अपना घर-बार गंवा चुके 81 हज़ार 352 लोग इन राहत शिविरों में रह रहे हैं.

    इस साल बाढ़ के कारण सबसे ज़्यादा नुकसान बजाली, बारपेटा, कामरूप, दरंग और नलबाड़ी ज़िले में हुआ है.

    बजाली में बाढ़ के कारण 2 लाख 21 हज़ार से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए है और 70 हज़ार से अधिक बेघर हुए लोगों को अपने परिवार के साथ राहत शिविरों में रहने के लिए आना पड़ा है.

    राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ज़िला प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन, दवा और अन्य आवश्यक चीज़ें उपलब्ध करवा रहा है.

    बाढ़ प्रभावित सभी ज़िलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और एसडीआरएफ की टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. दरअसल लगातार हो रही बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी कई जगहों पर अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

    आपदा विभाग की इस बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार 8 हज़ार 469 हेक्टेयर से अधिक फसल भूमि बाढ़ के पानी में डूब गई है, जिसके चलते बड़ी मात्रा में कृषि उत्पादों को नुकसान हुआ है.

    चार ज़िलों में कम से कम 15 नदी तटबंधों को नुकसान पहुंचा है. जबकि 12 ज़िलों के 157 क्षेत्रों में अन्य बुनियादी ढांचों को नुकसान हुआ है.

    भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 'भारी बारिश' की भविष्यवाणी की है और रविवार तक 'येलो अलर्ट' जारी किया है.

  16. शहर छोड़ते वक़्त हवा में ताबड़तोड़ फ़ायरिंग करते नज़र आए वागनर ग्रुप के लड़ाके

    रूस के रोस्तोव शहर से वापस लौटते हुए वागनर ग्रुप के लड़ाके हवा में फ़ायरिंग करते हुए नज़र आए.

    सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को बीबीसी वेरीफाई ने प्रमाणित किया है.

    वीडियो में सड़कों पर खड़े लोग वागनर ग्रुप के लड़ाकों के लिए तालियां और नारे लगाते हुए दिख रहे हैं. स्थानीय लोग लौटते लड़ाकों की तस्वीरें भी खींच रहे हैं.

    शनिवार को वागनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोज़िन ने दावा किया था कि उनके 25 हज़ार लड़ाके यूक्रेन की सीमा पार कर रूस में दाख़िल हो गए हैं और उन्होंने सीमा से लगते रोस्तोव शहर को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

    कुछ देर बाद जो तस्वीरें सामने आईं, जिसमें प्रिगोज़िन रूस के दक्षिणी सैन्य मुख्यालय में बैठे हुए दिखाई दिए. उन्होंने तब कहा था कि जब तक रक्षा मंत्री उनसे मिलने नहीं आएंगे वे यहां से नहीं हिलेंगे और उनके लड़ाके मॉस्को की तरफ कूच करेंगे.

    'बग़ावत' का दावा करने के कुछ घंटों के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने देश को संबोधित किया और इस काम को पीठ में छूरा घोंपना बताया.

    दिन के दौरान वागनर के लड़ाके मॉस्को की तरफ़ एम4 हाइवे पर बढ़ते हुए दिखाई दिए, जिसमें वोरोनिश शहर पर नियंत्रण करना भी शामिल था.

    शाम करीब छह बजे वागनर चीफ़ ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि वे मॉस्को की तरफ कूच को रोकने के लिए सहमत हो गए हैं और अपने लड़ाकों को वापल बुला रहे हैं.

    रोसिया 24 न्यूज़ चैनल के अनुसार, बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्सेंडर लुकाशेंको ने येवगेनी प्रिगोज़िन के साथ बात की, जिसके बाद वे सहमत हुए.

    रूस के सरकारी मीडिया के मुताबिक़ अब वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन बेलारूस जाएंगे.

  17. सेना के जवानों पर मस्जिद में 'जय श्री राम' के नारे लगवाने का आरोप, महबूबा मुफ़्ती ने किया ट्वीट

    जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने भारतीय सेना के जवानों पर मस्जिद में घुसकर मुसलमानों से जबरन 'जय श्री राम' के नारे लगवाने का गंभीर आरोप लगाया है.

    शनिवार को उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "50 आरआर के जवानों के पुलवामा की एक मस्जिद में घुसकर मुसलमानों को 'जय श्री राम' का नारा लगाने के लिए मजबूर करने की खबर सुनकर स्तब्ध हूं. ऐसा तब हुआ जब अमित शाह यहां हैं और यात्रा से पहले ऐसा करना उकसावे की कार्रवाई है."

    उन्होंने इस मामले में जांच की मांग की है.

    इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक़, दक्षिण कश्मीर के पुलवामा ज़िले के जदूरा गांव के लोगों ने आरोप लगाया है कि सेना के जवान एक स्थानीय मस्जिद में घुस गए और शनिवार को सुबह की नमाज़ के दौरान लोगों को 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर किया.

    मामले पर अभी तक भारतीय सेना की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

  18. बालासोर की तरह बांकुड़ा में ट्रेन दुर्घटना, मालगाड़ी के 12 डिब्बे पटरी से उतरे

      • Author, प्रभाकर मणि तिवारी
      • पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

    पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा ज़िले में रविवार सुबह दो मालगाड़ियों की ज़बरदस्त टक्कर में कम से कम 12 डिब्बे पटरी से उतर गए.

    यह हादसा ओंदा रेलवे स्टेशन पर हुआ. इस ज़ोरदार टक्कर ने लोगों के मन में बीते महीने हुए कोरोमंडल हादसे की यादें ताज़ा कर दीं. रेलवे सूत्रों ने यहां इसकी जानकारी दी.

    रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ओंदा स्टेशन के लूप लाइन पर बांकुड़ा से विष्णुपुर की ओर जाने वाले एक मालगाड़ी खड़ी थी. इसी रूट पर पीछे से आने वाली दूसरी मालगाड़ी ने उसे ज़ोरदार टक्कर मार दी.

    यह टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि पीछे वाली ट्रेन का इंजन पहले वाली मालगाड़ी पर चढ़ गया. इससे 12 डिब्बे पटरी से उतर गए हैं.

    यह हादसा भी बीते महीने बालासोर के पास कोरोमंडल हादसे की तर्ज़ पर ही हुआ है. उसमें भी कोरोमंडल ने लूप लाइन पर खड़ी एक मालगाड़ी को तेज़ गति से टक्कर मारी थी. इसे वजह से कोरोमंडल का इंजन और कई डिब्बे मालगाड़ी पर चढ़ गए थे.

    टक्कर की ज़ोरदार आवाज़ से स्थानीय लोगों की नींद खुली और वो मौके पर पहुंचने लगे. उन लोगों ने ही मालगाड़ी के लोको पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाला. रेलवे सूत्रों ने बताया कि एक लोको पायलट को हल्की चोट आई है.

    इस हादसे के कारण बिजली का ओवरहेड तार टूट जाने की वजह से आद्रा-खड़गपुर सेक्शन में ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो गई है.

    मौके पर पहुंचे दक्षिण पूर्व रेलवे के डिवीजनल सेफ्टी ऑफिसर दिवाकर माझी ने पत्रकारों को बताया, "एक मालगाड़ी खड़ी थी. पीछे से आने वाली दूसरी मालगाड़ी ने उसमें टक्कर मार दी. आखिर यह हादसा कैसे हुआ, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा. शायद सिग्नल की गड़बड़ी रही होगा."

    उन्होंने बताया कि फिलहाल ट्रैक को क्लीयर करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही सामान्य हो सके.

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  19. दो दिवसीय दौरे पर मिस्र में पीएम मोदी, आज का क्या है एजेंडा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर मिस्र में हैं. रविवार, 25 जून को मिस्र में उनकी यात्रा का दूसरा दिन है.

    आज वे मिस्र के राष्ट्रपति अल सीसी से मुलाकात करेंगे और काहिरा की ऐतिहासिक मस्जिद अल-हाकिम भी जाएंगे.

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक पीएम मोदी आज मिस्र की कुछ प्रमुख हस्तियों के साथ भारतीय समुदाय के साथ भी बातचीत करेंगे.

    शनिवार को जब पीएम मोदी का वहां के पीएम मुस्तफ़ा मैडबौली ने राजधानी काहिरा के हवाई अड्डे पर स्वागत किया और बाद में उनके साथ बैठक भी की.

    इस दौरान पीएम मोदी को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया.

    पीएम मोदी के राजधानी काहिरा पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके स्वागत में एक युवती ने शोले फ़िल्म का गाना भी गाया.

    उन्होंने काहिरा में मिस्र के ग्रैंड मुफ्ती डॉ शॉकी इब्राहिम अब्देल करीम आलम से मुलाकात की. विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों के बीच भारत और मिस्र के बीच मज़बूत सांस्कृतिक और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा हुई.

    इसके बाद पीएम मोदी ने दो युवा योग प्रशिक्षकों से मुलाकात की, जिसमें रीम जाबक और नाडा एडेल शामिल हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची के मुताबिक पीएम मोदी ने योग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए उनकी सराहना की.

    उन्होंने बोहरा समुदाय के लोगों के साथ भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की.

    मोदी की बतौर प्रधानमंत्री ये मिस्र की पहली यात्रा है. 1997 के बाद ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली मिस्र यात्रा है.

  20. रूस के रोस्तोव शहर से पीछे हटे 'बग़ावत' करने वाले वागनर ग्रुप के लड़ाके, सामने आईं तस्वीरें