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उन्होंने कहा, ''हर साल 2 करोड़ रोज़गार का झूठा वादा करने वालों ने नौकरियां बढ़ाने की जगह 2 लाख से ज़्यादा खत्म कर दीं!''
राहुल गांधी ने कहा, "इसके ऊपर इन संस्थानों में कॉन्ट्रैक्ट भर्तियां लगभग दोगुनी कर दीं. क्या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी बढ़ाना आरक्षण का संवैधानिक अधिकार छीनने का तरीका नहीं है? क्या ये आखिर में इन कंपनियों के निजीकरण की साज़िश है? उन्होंने सरकार से पूछा है कि अगर यह वाकई 'अमृतकाल' है तो नौकरियां इस तरह गायब क्यों हो रही हैं?"
COVER STORY: रूस के 25 हज़ार लड़ाकों की मौत: बीबीसी पड़ताल
वीडियो कैप्शन, COVER STORY: रूस के 25 हज़ार लड़ाकों की मौत: बीबीसी पड़ताल
पिछले साल फ़रवरी में यूक्रेन पर रूस के बड़े पैमाने पर हमले के बाद कभी रूस तो कभी यूक्रेन का पलड़ा भारी नज़र आया.
पश्चिमी देशों से मिले सैन्य साज़-ओ-सामान और हथियारों की मदद से यूक्रेन ने रूस को कड़ी चुनौती दी.
इस दौरान दोनों पक्षों को काफ़ी नुक़सान भी हुआ.
रूस पर आरोप लगे कि वो जंग में मारे गए अपने सैनिकों की सही संख्या पर पर्दा डाल रहा है. लेकिन बीबीसी की एक पड़ताल से ये साफ़ हो गया है कि इस जंग में अब तक रूस के पच्चीस हज़ार से ज़्यादा सैनिक मारे गए हैं. कवर स्टोरी में आज इसी की बात.
कश्मीर, पाकिस्तान और चीन के सवाल पर क्या बोले पूर्व रॉ चीफ दुलत
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भारतीय गुप्तचर संस्था रॉ के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कश्मीर के मौजूदा हालात से लेकर चीन और पाकिस्तान पर बात की है.
उन्होंने कहा कि भारत के दो बड़े पड़ोसी हैं, जिसमें चीन ज्यादा बड़ा है और उसे डील करना पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा मुश्किल भी है.
दुलत ने कहा कि पाकिस्तान इस वक्त अपने मुश्किल दौर से गुजर रहा है. इसलिए यह समय पाकिस्तान से बात करने के लिए अच्छा है.
ब्लॉग: क्या दो जासूसों की किताब में भारत-पाकिस्तान के राज़ खुले?
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उन्होंने कहा, "चीन का महत्व हर दिन बढ़ रहा है, वह बड़ी ताकत बनता जा रहा है, जो अमेरिका को परेशान करेगा. संभवतः, चीन आज अमेरिकी की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हैं."
केंद्र सरकार जम्मू और कश्मीर की स्थिति को कैसे संभाल रही है?
इस सवाल पर दुलत ने कहा, "कश्मीर में लोग आज भी वाजपेयी (अटल बिहारी) को याद करते हैं. उनके बाद मनमोहन सिंह ने पूरी कोशिश की. मुझे यकीन है कि पीएम मोदी अपने तरीके से अपना काम कर रहे हैं."
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उन्होंने कहा, "उनके लिए (कश्मीर में) जितनी जल्दी चुनी हुई सरकार हो, उतना अच्छा है, क्योंकि यह दिल्ली (केंद्र) के लिए बफर का काम करती है. मुझे लगता है कि मुफ्ती (मुख्यमंत्री के रूप में मुफ्ती मोहम्मद सईद) को हटाकर कांग्रेस ने एक बड़ी गलती की है."
गुजरात में क्रिकेट मैच के लिए पाकिस्तान टीम को बुलाने के सवाल पर पूर्व रॉ चीफ ने कहा, "मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा है, पाकिस्तान को आना चाहिए. एक एससीओ शिखर सम्मेलन भी है, मुझे लगता है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को जरूर आना चाहिए. मुझे यकीन है वे आएंगे."
उत्तर कोरिया में कैसी है लोगों की ज़िंदगी, देखिए यह रिपोर्ट
वीडियो कैप्शन, जान जोख़िम में डालकर उत्तर कोरिया में रह रहे लोगों ने बीबीसी को सुनाई अपनी आपबीती.
उत्तर कोरिया की आबादी सिर्फ़ दो करोड़ 60 लाख है. लेकिन ये कभी भी अपने लोगों के लिए पर्याप्त फसल नहीं उगा सका.
उत्तर कोरिया में रह रहे तीन लोगों ने अपनी जान को जोख़िम में डालकर बीबीसी को बताया है कि वहां फ़िलहाल क्या हो रहा है.
हमलोग महीनों से ख़ूफ़िया तौर पर उनके सपंर्क में थे, दक्षिण कोरिया के एक संगठन Daily NK की मदद से. सुरक्षा के कारण इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में हम उन लोगों की पहचान छुपा रहे हैं.
उनकी दास्तान सुनाने के लिए हमने एनिमेशन्स का सहारा लिया है. सोल से बीबीसी संवददाता जीन मैकेंज़ी की रिपोर्ट दिखाने से पहले आपको बताना ज़रूरी है कि इस रिपोर्ट में कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं.
मणिपुर हिंसाः बीजेपी दफ्तर को बनाया निशाना, किया आग के हवाले
....में
Author, दिलीप कुमार शर्मा
पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज स्रोत, DILIP KUMAR SHARMA
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई हिंसा को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन राज्य में गोलीबारी, तोड़फोड़ और आगजनी लगातार जारी है.
पिछले दो दिन से प्रदर्शनकारियों ने सत्ताधारी बीजेपी को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
शनिवार को भीड़ ने ओकराम चू-थेक केथेल स्थित बीजेपी कार्यालय के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की गई और कुछ संपत्तियों में आग लगा दी.
इमेज स्रोत, DILIP KUMAR SHARMA
रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने कई आंसू गैस के गोले दागे और ब्रह्मपुर भेग्यबती लीकाई में मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष टी सत्यव्रत के आवास के पास लोगों की भीड़ को तितर-बितर किया.
इससे पहले भीड़ ने मणिपुर प्रदेश बीजेपी की अध्यक्ष शारदा देवी के घर पर हमले की कोशिश की.
इससे पहले गुरुवार को भीड़ ने केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री आरके रंजन सिंह के इंफाल के कोंगबा में स्थित घर को आग के हवाले कर दिया था.
इमेज स्रोत, DILIP KUMAR SHARMA
एक अन्य भीड़ ने सिंगजामेई इलाके में बीजेपी कार्यालय का घेराव किया, जबकि एक अन्य समूह ने इरेंगबाम पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश की.
इस बीच भारतीय सेना ने इंफाल घाटी के हिंसा प्रभावित क्षेत्र में फ्लैग मार्च शुरू किया है.
विरोध प्रदर्शन
राज्य में कर्फ्यू होने के बावजूद शनिवार शाम राजधानी इंफाल समेत कई इलाकों में नार्को-आतंकवाद, कुकी उग्रवादियों और मणिपुर में बसने वाले अवैध अप्रवासियों द्वारा कथित रूप से किए जा रहे बाहरी आक्रमण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया.
इमेज स्रोत, ANI
कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटेग्रिटी नामक मैतेई समूह ने हाथों में मशाल लेकर विरोध प्रदर्शन किया और महिलाओं ने अलग-अलग जगहों पर हजारों की संख्या में मानव श्रृंखला बनाई.
विरोध करने जमा हुए लोग 'मणिपुर ज़िंदाबाद', 'एनआरसी लागू करें', 'एसओओ पैक्ट को निरस्त करें', 'हम बाहरी आक्रमण की निंदा करते हैं,' 'मणिपुर की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखें' जैसे नारे लगा रहे थे.
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इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कोंगबा में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मीरा पैबी नेता थौनाओजम किरण देवी ने केंद्रीय सुरक्षाबलों की बड़ी कंपनियों की तैनाती के बावजूद मणिपुर में हिंसा को नियंत्रित करने में विफल रहने पर केंद्र और राज्य सरकार के प्रति निराशा व्यक्त की.
उन्होंने नियंत्रण से बाहर हो रही हिंसा पर चिंता जताते हुए विशेष रूप से तराई क्षेत्रों और घाटी के जिलों की परिधि में रक्तपात और संपत्तियों के विनाश को रोकने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल और गंभीर हस्तक्षेप की मांग की.
इमेज स्रोत, ANI
मणिपुर में मीरा पैबी चार दशकों से चला आ रहा महिलाओं का एक सामाजिक आंदोलन है जहां महिलाएं हाथ में जलती हुई मशालें लेकर मानवाधिकारों के उल्लंघन से लेकर सामाजिक बुराईयों के खिलाफ सड़कों पर मार्च करती है.
पीएम की चुप्पी पर उठाए सवाल
इस बीच मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओकराम इबोबी सिंह ने शनिवार को मणिपुर में जारी हिंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए.
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नई दिल्ली में दस-दलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात करने का इंतजार कर रहे इबोबी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मणिपुर 3 मई से जल रहा है और लगभग 20 हजार लोग राहत शिविरों में हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने अभी तक मणिपुर के संबंध में कुछ भी बात नहीं की है.
कांग्रेस नेता ने पूछा, “मणिपुर भारत का हिस्सा है या नहीं? अगर ऐसा है तो भारत के प्रधानमंत्री ने इसके बारे में क्यों नहीं बोला?”
इमेज स्रोत, ANI
जबकि सत्ताधारी पार्टी के कार्यालयों और घरों को निशाना बनाने की कई कोशिशों के बावजूद बीजेपी ने कहा कि पार्टी ने चुप रहने की नीति अपनाई है.
मणिपुर बीजेपी के प्रवक्ता एलांगबाम जॉनसन ने इंफाल में मीडिया से कहा, "हम चुप इसलिए है क्योंकि यह राज्य में कुछ निहित समूहों द्वारा बनाया गया एक प्रकार का कृत्रिम संघर्ष है और पार्टी इस जाल में नहीं पड़ना चाहती है."
"इसलिए हम बोलने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं. सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ-साथ विपक्ष का भी दबाव है कि पार्टी चुप क्यों है. जनता भी निश्चित तौर पर पार्टी का रुख जानना चाहेगी, लेकिन हमने चुप रहने का तरीका अपनाया है."
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मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई हिंसा में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है.
राज्य में हजारों मकानों को जला देने से करीब 50 हजार लोग विस्थापित हुए है.
केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों के बाद भी प्रदेश में लगातार हिंसा जारी है जबकि मणिपुर में सेना और अर्द्ध सैनिक बलों के करीब 40 हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.
एक ऐसे बेटे की कहानी जिसने मां की याद में बनवाया 'ताजमहल'
वीडियो कैप्शन, एक ऐसे बेटे की कहानी जिसने मां की याद में बनवाया 'ताजमहल'
मां के प्यार से बढ़कर कोई चीज़ नहीं होती.
चेन्नई के बिज़नेसमैन, अमरुद्दीन ने अपनी मां जैलानी भीवी की याद में एक ऐसा स्मारक बनाया है जो ताजमहल के जैसा दिखता है.
अमरुद्दीन ने तमिलनाडु के तिरुवरुर ज़िले में स्थित अपने गांव अमैयाप्पन में इसे बनाया है.
आदिपुरुष पर विवाद के बीच फिल्म ने दूसरे दिन की इतनी कमाई
इमेज स्रोत, ANI
आदिपुरुष फिल्म को लेकर चल रहे विवाद के बीच फिल्म के निर्माताओं ने दूसरे दिन के कलेक्शन के बारे में जानकारी दी है.
उन्होंने बताया है कि दूसरे दिन आदिपुरुष को 100 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है.
फिल्म ने रिलीज के पहले दिन 140 करोड़ की कमाई की थी.
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दो दिनों के भीतर फिल्म ने 240 करोड़ रुपये कलेक्शन किया है. फिल्म के कलेक्शन के ये आंकड़े दुनिया भर से हुई कमाई के हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, प्रोडक्शन कंपनी टी-सिरीज ने बताया कि आदिपुरुष हिंदी में बनी किसी फ़िल्म के मुकाबले देश भर में पहले दिन सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म' बन गई है.
इस फ़िल्म में प्रभास ने राघव, कृति सेनन ने जानकी और सैफ़ अली ख़ान ने लंकेश की भूमिका निभाई है.
हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषा में फिल्म को 6 हजार से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज किया गया है.
ऐसा बताया जा रहा है कि इस फ़िल्म को बनाने में 500 करोड़ रुपये का खर्चा आया है.
प्रभास, कृति सेनन और सैफ़ अली ख़ान की फ़िल्म 'आदिपुरुष' पर समीक्षकों की राय
वीडियो कैप्शन, प्रभास, कृति सेनन और सैफ़ अली ख़ान की फ़िल्म 'आदिपुरुष' पर समीक्षकों की राय
प्रभास, कृति सेनन और सैफ़ अली ख़ान की फ़िल्म आदिपुरुष आज रिलीज़ हो गई है.
मेगा-बजट की इस फ़िल्म का लोगों को बेसब्री से इंतज़ार था.
देखिए, फ़िल्म समीक्षकों ने इस फ़िल्म को कितने स्टार दिए हैं.
बिपरजोय तूफान ने पाकिस्तान सरहद से सटे जिलों की मुश्किलें कैसी बढ़ाईं
....में
Author, मोहर सिंह मीणा
पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
इमेज स्रोत, MOHAR SINGH MEENA
राजस्थान में बिपरजोय तूफ़ान के चलते पाकिस्तान सरहद से सटे बाड़मेर ज़िले में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं.
तूफ़ान के चलते जालौर, जोधपुर, सिरोही समेत कई ज़िलों में जलभराव हो गया है.
बीते तीन दिन से हो रही बारिश के बाद शनिवार देर रात से जोरदार बारिश दर्ज की गई है.
इमेज स्रोत, MOHAR SINGH MEENA
बाड़मेर और जालौर के कई इलाकों में चार फीट तक पानी भर गया है.
बाज़ार और घर भी पानी में डूबे हुए नजर आ रहे हैं, जिसके चलते गांवों के बीच संपर्क टूट गया है.
प्रभावित ज़िलों में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं.
इमेज स्रोत, CHANDAN SINGH BHATI
इमेज कैप्शन, नानारी बांध, सिवाना, बाड़मेर
जलभराव वाले इलाक़े से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है.
तूफ़ान के चलते स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं, सैकड़ों गांवों में बिजली बंद है.
तूफ़ान से निपटने के लिए ज़रूरी विभागों के कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं.
इमेज स्रोत, MOHAR SINGH MEENA
बिपरजोय के कारण राजस्थान भर में बदल छाए हुए हैं.
हालांकि, पूर्वी राजस्थान में अभी इसका असर देखने को नहीं मिला है.
मौसम विभाग जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बीबीसी से कहा है, "तूफ़ान से हवाएं पचास किलोमीटर तक की स्पीड से चली हैं, अब नुकसान पहुंचाने वाली स्पीड की हवा नहीं होगी."
इमेज स्रोत, MOHAR SINGH MEENA
"बाड़मेर, जालौर, सिरोही समेत आसपास के ज़िलों में तेज़ बारिश हो रही है, दो दिन में बाड़मेर और जालौर में कई जगह 300 से 400 एमएम बारिश तक दर्ज की गई है."
निदेशक शर्मा ने बताया है, "साल भर में इतनी बारिश नहीं होती है, जितनी बारिश कुछ दिनों में दर्ज की गई है."
"तूफान जालौर से पाली और अजमेर की ओर आगे बढ़ रहा है. रविवार से अजमेर, जयपुर, कोटा संभाग में बारिश होगी."
इमेज स्रोत, MOHAR SINGH MEENA
"बाड़मेर में अभी तेज़ बारिश है लेकिन अगले दिनों में वहां बारिश कम होती जाएगी."
बाड़मेर कलेक्टर अरुण पुरोहित ने बीबीसी से फ़ोन पर बताया है, "सिवाना में एनडीआरएफ तैनात है. बॉर्डर इलाक़े चोहट्टन, धोरीमन्ना, बकासर में शुक्रवार से बारिश थी, कल दोपहर से यहां बंद हो गई है."
"बीती रात से बालोतरा, सिवाना, समदड़ी और जोधपुर से लगते हुए इलाक़े में तेज़ बारिश हो रही है."
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"ढाई सौ एमएम बारिश तक दर्ज की गई है. फिलहाल तक कोई जनहानि नहीं हुई है. हमने करंट से नुकसान न हो इसलिए बिजली बंद करवाई है."
जालोर कलेक्टर निशांत जैन ने बीबीसी से कहा है, "कुछ इलाकों में बारिश रुक गई. बीती रात से कुछ जगह बारिश हो रही है. जलभराव वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाया गया है."
मौसम विभाग ने रविवार के लिए बाड़मेर, पाली, सिरोही, जोधपुर, नागौर में आगामी चार घंटे में तेज़ बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है.
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यहां पचास किलोमीटर की स्पीड से हवा की संभावना ज़ाहिर की गई है.
जबकि, अन्य ज़िलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है.
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी कर निचले स्थानों पर जलभराव, कच्चे मकानों, दीवारों, पेड़ आदि को नुकसान होने का अंदेशा जताया है.
जूनागढ़: दरगाह के सामने पिटाई का वीडियो वायरल, पुलिस ने क्या बताया
मन की बात में पीएम मोदी ने याद किया इंदिरा गांधी का दौर, इमरजेंसी पर क्या बोले?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 102वें एपिसोड में देश में लगी इमरजेंसी का जिक्र करते हुए उसे भारत के इतिहास का काला दौर बताया है.
उन्होंने कहा, "भारत लोकतंत्र की जननी है. मदर ऑफ डेमोक्रेसी है. हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों को सर्वोपरि मानते हैं. अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं. इसलिए हम 25 जून को कभी भुला नहीं सकते. ये वही दिन है जब हमारे देश पर इमरजेंसी थोपी गई थी. ये भारत के इतिहास का काला दौर था. लाखों लोगों ने पूरी ताकत से इमरजेंसी का विरोध किया था."
"लोकतंत्र के समर्थकों पर उस दौरान इतना अत्याचार किया गया, इतनी यातनाएं दी गईं, कि आज भी मन सिहर उठता है. इन अत्याचारों पर, पुलिस और प्रशासन द्वारा दी गई सजाओं पर बहुत सारी पुस्तकें लिखी गई हैं. मुझे भी संघर्ष में गुजरात धाम से एक किताब लिखने का उस वक्त मौका मिला था."
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"कुछ दिन पहले ही इमरजेंसी पर लिखी एक और किताब मेरे सामने आई, जिसका शीर्षक है टॉर्चर ऑफ पॉलिटिकल प्रिजनर इन इंडिया. इमरजेंसी के दौरान छपी इस पुस्तक में वर्णन किया गया है कि कैसे उस समय की सरकार लोकतंत्र के रखवालों से क्रूरतम व्यवहार कर रही थी. इस किताब में ढेर सारी केस स्टडी हैं. बहुत सारे चित्र हैं."
"मैं चाहूंगा कि आज जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों का भी जरूर अवलोकन करें. इससे आज की युवा पीढ़ी को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में और ज्यादा आसानी होगी."
25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक भारत में इमरजेंसी लगाई गई थी.
तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की थी.
#Emergency: जब इंदिरा गांधी ने दिया भारत को शॉक ट्रीटमेंट
वर्ल्ड सिकल सेल डे: एनीमिया से जुड़ी ये बातें जानते हैं आप
आदिपुरुष में बदले जाएंगे डायलॉग, मनोज मुंतशिर शुक्ला ने बताई वजह
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फ़िल्म 'आदिपुरुष' में डायलॉग लिखने वाले मनोज मुंतशिर का कहना है कि लोगों की नाराजगी को देखते हुए फिल्म में कुछ डायलॉग बदले जाएंगे.
सोशल मीडिया पर लोग इस फ़िल्म के डायलॉग की आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि फ़िल्म के डायलॉग में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वो ठीक नहीं है.
मनोज मुंतशिर का कहना है कि लोगों की नाराजगी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.
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उन्होंने ट्वीट कर लिखा, "रामकथा से पहला पाठ जो कोई सीख सकता है, वो है हर भावना का सम्मान करना. सही या ग़लत, समय के अनुसार बदल जाता है, भावना रह जाती है. आदिपुरुष में 4 हजार से भी ज़्यादा पंक्तियों के संवाद मैंने लिखे, 5 पंक्तियों पर कुछ भावनाएं आहत हुईं."
"उन सैकड़ों पंक्तियों में जहां श्री राम का यशगान किया, मां सीता के सतीत्व का वर्णन किया, उनके लिए प्रशंसा भी मिलनी थी, जो पता नहीं क्यों मिली नहीं."
"मेरे ही भाइयों ने मेरे लिए सोशल मीडिया पर अशोभनीय शब्द लिखे. वही मेरे अपने, जिनकी पूज्य माताओं के लिए मैंने टीवी पर अनेकों बार कविताएं पढ़ीं, उन्होंने मेरी ही मां को अभद्र शब्दों से संबोधित किया."
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"मैं सोचता रहा, मतभेद तो हो सकता है, लेकिन मेरे भाइयों में अचानक इतनी कड़वाहट कहां से आ गई कि वो श्री राम का दर्शन भूल गए जो हर मां को अपनी मां मानते थे.शबरी के चरणों में ऐसे बैठे, जैसे कौशल्या के चरणों में बैठे हों."
"हो सकता है, 3 घंटे की फ़िल्म में मैंने 3 मिनट कुछ आपकी कल्पना से अलग लिख दिया हो, लेकिन आपने मेरे मस्तक पर सनातन-द्रोही लिखने में इतनी जल्दबाज़ी क्यों की, मैं जान नहीं पाया. क्या आपने ‘जय श्री राम’ गीत नहीं सुना, ‘शिवोहम’ नहीं सुना, ‘राम सिया राम’ नहीं सुना?"
"आदिपुरुष में सनातन की ये स्तुतियां भी तो मेरी ही लेखनी से जन्मी हैं. ‘तेरी मिट्टी’ और ‘देश मेरे ’भी तो मैंने ही लिखा है. मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है, आप मेरे अपने थे, हैं और रहेंगे. हम एक दूसरे के विरुद्ध खड़े हो गए तो सनातन हार जाएगा."
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"हमने आदिपुरुष सनातन सेवा के लिए बनाई है, जो आप भारी संख्या में देख रहे हैं और मुझे विश्वास है आगे भी देखेंगे."
"ये पोस्ट क्यों?- क्योंकि मेरे लिए आपकी भावना से बढ़कर और कुछ नहीं है. मैं अपने संवादों के पक्ष में अनगिनत तर्क दे सकता हूं, लेकिन इस से आपकी पीड़ा कम नहीं होगी. मैंने और फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक ने निर्णय लिया है, कि वो कुछ संवाद जो आपको आहत कर रहे हैं, हम उन्हें संशोधित करेंगे, और इसी सप्ताह वो फ़िल्म में शामिल किए जाएंगे. श्री राम आप सब पर कृपा करें!"
शुक्रवार को रिलीज हुई आदिपुरुष ने पहले दिन ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 140 करोड़ की कमाई की है.
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इस फ़िल्म में प्रभास ने राघव, कृति सेनन ने जानकी और सैफ़ अली ख़ान ने लंकेश की भूमिका निभाई है. हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषा में फिल्म को 6 हजार से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज किया गया है.
आदिपुरुष के वो डायलॉग जिन पर हो रहा है विवाद
पौराणिक कथा पर आधारित इस फ़िल्म में प्रभास और कृति सेनन ने राघव और जानकी का किरदार निभाया है. वहीं, सैफ़ अली खान और देवदत्त नाग रावण और बजरंगबली के क़िरदार में नज़र आए हैं.
लंका दहन से पहले इंद्रजीत (वत्सल सेठ) बजरंगबली (देवदत्त नाग) की पूंछ में आग लगाने से पहले कहते हैं -"जली ना अब और जलेगी. .... बेचारा जिसकी जलती है वही जनता है." बजरंगबली - "कपड़ा तेरे बाप का! तेल तेरे बाप का! जलेगी भी तेरे बाप की."
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बजरंगबली जब सीता से मिलने अशोक वाटिका जाते हैं, वहाँ उन्हें लंका का एक राक्षसी सैनिक बजरंगबली से कहता है - "तेरी बुआ का बगीचा है क्या जो हवा खाने चला आया."
लंका दहन के बाद जब बजरंगबली राम सेना के पास पहुँचते हैं तो लंका में हुए दहन की व्याख्या में कहते हैं- "लंका में बोलकर आया हूँ कि जो हमारी बहनों को हाथ लगाएंगे, उनकी लंका लगा देंगे."
विभीषण (सिद्धार्थ कार्णिक) जब रावण को समझाने जाते हैं, तब कहते है - "भैया आप अपने काल के लिए कालीन बिछा रहे हैं..."
लक्ष्मण को मूर्छित करने के बाद इंद्रजीत कहते हैं - "मेरे एक सपोले ने तुम्हारे शेषनाग को लंबा कर दिया अभी तो पूरा पिटारा भरा पड़ा है."
रावण विभीषण से कहता है - "अयोध्या में तो वो रहता नहीं. रहता तो वो जंगल में है. और जंगल का राजा शेर होता है. तो वो कहां का राजा है रे..."
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उत्तरकाशी: शिकायतकर्ता ने कहा, सामान्य अपराध को ‘लव जिहाद’ का मामला बना दिया गया - प्रेस रिव्यू
एक्ट्रेस अमीषा पटेल ने रांची कोर्ट में किया सरेंडर, क्या है पूरा मामला
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बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल ने चेक बाउंस के एक मामले में शनिवार को रांची की एक अदालत में सरेंडर किया.
सीनियर डिविजन जज डीएन शुक्ला ने इसके बाद उन्हें जमानत दे दी और अगली सुनवाई के वक़्त निजी तौर पर हाजिर रहने का हुक्म दिया.
इस केस की सुनवाई की अगली तारीख 21 जून को तय की गई है.
ये मामला साल 2018 का है.
झारखंड के एक फिल्म प्रोड्यूसर अजय कुमार सिंह ने अमीषा पटेल के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी और चेक बाउंस का केस दर्ज कराया था.
शिकायतकर्ता के वकील विजय लक्ष्मी श्रीवास्तव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "इससे पहले कोर्ट ने उन्हें कई बार पेश होने के लिए समन जारी किया था लेकिन वो अदालत में हाजिर नहीं हुईं. इसके बाद अदालत ने उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर दिया."
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वादी का दावा है कि उन्होंने अमीषा पटेल के खाते में 2.5 करोड़ रुपये जमा किए थे. ये पैसे अमीषा पटेल को 'देसी मैजिक' नाम की एक फिल्म के लिए दिए गए थे.
शिकायत में ये दावा किया गया है कि अमीषा पटेल ने फिल्म में काम नहीं किया और वादी को 2.5 करोड़ रुपये का चेक वापस भेज दिया. ये चेक बैंक में बाउंस कर गया.
झारखंड की अदालत के समन के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त, 2022 में अमीषा पटेल के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी और विश्वास भंग के आरोपों को लेकर चलाई जा रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.
लेकिन शीर्ष अदालत ने ये भी कहा था कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के सेक्शन 138 (चेक बाउंस के मामलों के लिए संबंधित प्रावधान) के तहत क़ानूनी प्रक्रिया चलाई जा सकती है.
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों को लेकर हर बार बवाल क्यों होता है?
धरने की परमिशन को लेकर बबीता फोगाट और साक्षी मलिक के बीच छिड़ी बहस
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कुश्ती खिलाड़ी साक्षी मलिक और पहलवान सत्यव्रत कादियान ने भाजपा नेता तीरथ राणा और अंतरराष्ट्रीय पहलवान बबीता फोगाट पर निशाना साधा है.
शनिवार को साक्षी मलिक ने पति सत्यव्रत कादियान के साथ करीब दस मिनट लंबा वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर जारी किया था.
आज उसी वीडियो को रिट्वीट करते हुए साक्षी ने एक बार फिर कहा कि अपने स्वार्थ के लिए तीरथ राणा और बबीता फोगाट, पहलवानों का इस्तेमाल करना चाह रहे थे और जब हमारे ऊपर विपदा पड़ी तो वे सरकार की गोद में जाकर बैठ गए.
साक्षी ने कहा कि वीडियो में उन्होंने दोनों का नाम लेकर तंज़ कसा था, जिसे लोग समझ नहीं पाए. यही वजह है कि उन्होंने आज फिर से दोनों का नाम लिखकर निशाना साधा है.
वीडियो में साक्षी ने कहा था कि हम पर आरोप लगे कि ये आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने हमें इसके लिए उकसाया है. लेकिन जब हम जनवरी में पहली बार जंतर-मंतर पर पहुंचे थे तो प्रोटेस्ट की अनुमति जंतर मंतर थाने से बीजेपी के ही दो नेताओं तीरथ राणा और बबीता फोगाट ने ली थी. जिसका सबूत भी हमारे पास है तो कैसे हो सकता है कि आंदोलन कांग्रेस ने करवाया.
वीडियो जारी कर कहा गया कि पहलवानों की लड़ाई सरकार के ख़िलाफ़ नहीं है बल्कि डब्लूएफ़आई के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के कृत्यों के ख़िलाफ़ है.
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बबीता फोगाट का पलटवार
साक्षी के आरोपों पर पहलवान बबीता फोगाट ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने जब वीडियो देखा तो बहुत दुख हुआ.
बबीता ने लिखा, "एक कहावत है कि ज़िंदगी भर के लिये आपके माथे पर कलंक की निशानी पड़ जाए. बात ऐसी ना कहो दोस्त की कह के फिर छिपानी पड़ जाए."
"मुझे कल बड़ा दुख भी हुआ और हंसी भी आई जब मैं अपनी छोटी बहन और उनके पतिदेव का वीडियो देख रही थी. सबसे पहले तो मैं ये स्पष्ट कर दूं की जो अनुमति का काग़ज़ छोटी बहन दिखा रही थी उस पर कहीं भी मेरे हस्ताक्षर या मेरी सहमति का कोई प्रमाण नहीं है और ना ही दूर-दूर तक इससे मेरा कोई लेना देना है."
"मैं पहले दिन से कहती रही हूं कि माननीय प्रधानमंत्री जी पर एवं देश की न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखिए, सत्य अवश्य सामने आएगा. एक महिला खिलाड़ी होने के नाते मैं सदैव देश के सभी खिलाड़ियों के साथ थी, साथ हूँ और सदैव साथ रहूंगी. परंतु मैं धरने -प्रदर्शन के शुरुआत से इस चीज के पक्ष मैं नहीं थीं. मैंने बार-बार सभी पहलवानों से ये कहा कि आप माननीय प्रधानमंत्री से या गृहमंत्री से मिलो, वहीं से समाधान होगा."
"आपको समाधान दीपेंद्र हुड्डा, कांग्रेस और प्रियंका गांधी और उनके साथ आ रहे उन लोगों के द्वारा दिख रहा था जो खउद बलात्कारी एवं अन्य मुकदमें के दोषी हैं लेकिन देश की जनता अब इन विपक्ष के चेहरों को पहचान चुकी है. अब देश के सामने आकर उन्हें उन सभी जवानों, किसानों और उन महिला पहलवानों की बातों का जवाब देना चाहिए जिनकी भावनाओं की आग में इन्होंने अपनी राजनीति की रोटी सेकने का काम किया."
"जो महिला खिलाड़ी धरने पर साथ बैठे थे उनके विचारों को सभी पूर्वाग्रहों के साथ ऐसी दिशा दी, जहां बस आपके राजनीतिक फायदे दिख रहे थे. आज जब आपका ये वीडियो सबके सामने है उससे अब देश की जनता को समझ में आ जाएगा की नए संसद भवन के उद्घाटन के पवित्र दिन आपका विरोध और राष्ट्र के लिए जीता हुआ मेडल गंगा में प्रवाहित करने की बात कितना देश को शर्मसार करने जैसा था."
"बहन हो सकता है आप बादाम के आटे की रोटी खाते हों लेकिन गेहूं की तो मैं ओर मेरे देश की जनता भी खाती ही है. सब समझते हैं. देश की जनता समझ चुकी है कि आप कांग्रेस के हाथ की कठपुतली बन चुकी हो. अब समय आ गया है कि आपको आपकी वास्तविक मंशा बता देनी चाहिए क्योंकि अब जनता आपसे सवाल पूछ रही है."
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वीडियो में साक्षी मलिक और सत्यव्रत कादियान ने ये बातें कहीं-
हम पर आरोप लगे कि ये आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने हमें इसके लिए उकसाया है. लेकिन जब हम जनवरी में पहली बार जंतर-मंतर पर पहुंचे थे तो प्रोटेस्ट की अनुमति जंतर मंतर थाने से बीजेपी के ही दो नेताओं तीरथ राणा और बबीता फ़ोगाट ने ली थी. जिसका सबूत भी हमारे पास है तो कैसे हो सकता है कि आंदोलन कांग्रेस ने करवाया.
जो 28 मई को महिला सम्मान महापंचायत का आह्वान किया गया था, वो हमने नहीं किया था. हमारे खाप चौधरियों ने वो आह्वान किया था. इस फ़ैसले के बाद हमें पता चला कि 28 मई को नई संसद का उद्घाटन भी है. फिर भी हमने बड़े-बुजुर्ग के आदेश का पालन किया. इसके परिणामस्वरूप हमारे साथ पुलिस ने बर्बर व्यवहार किया. उस घटना ने हमें अंदर से तोड़ दिया.
हमने देश के लिए इतने पदक जीते, इतना मान-सम्मान बढ़ाया लेकिन हमारा सम्मान सड़कों पर रौंद दिया गया.
इसके बाद हम सब ने मेडल को गंगा में बहाने का निर्णय लिया. वहां भी हम इस तंत्र के साजिश का शिकार हो गए.
हम हरिद्वार पहुंचे तो वहां तंत्र का एक आदमी बजरंग को एक तरफ़ ले गया और कहा-आप रुको, आपके बारे में ही बात चल रही है. और आपको न्याय भी मिल जाएगा. सात बजे तक बजरंग को रोके रखा और उसी समय बड़ी संख्या में तंत्र से जुड़े लोग वहां पहुंच जाते हैं और वहां व्यवस्था इस तरह की बन जाती है कि अगर हम मेडल बहाते तो वहां हिंसा भी हो जाती.
हम इस स्थिति में ही नहीं थे कि यह साजिश समझ पाते. हम आंदोलनकारी नहीं हैं, हमें इसका अनुभव नहीं है. हमने पूरी ज़िंदगी कुश्ती ही की है. इस तरह के जो माहौल पैदा होते हैं, वो हम समझ नहीं पाते.
इस घटना के बाद हमें बिल्कुल समझ नहीं आ रहा था कि कौन हमारे साथ है, कौन हमारे ख़िलाफ़ है? कौन इस तंत्र का हिस्सा है. हम दिमागी रूप से शून्य की स्थिति में पहुंच गए थे.
इस बीच कई लोग हमसे मिलते रहे, समझाते रहे. इसी बीच ये समझाया गया कि गृह मंत्री सर से आपको मिलना चाहिए क्योंकि समाधान वहीं से निकलेगा. हम वहां पर सिर्फ़ अपनी बात रखने गए थे.
इसके बाद पता चला कि कई खाप हमसे नाराज हैं. तो हम हाथ जोड़कर उनसे विनती करना चाहते हैं कि आप प्लीज अफ़वाहों पर ध्यान न दें. अगर अनजाने में हमसे गलती भी हुई हो तो माफ करें.
दोनों ही पहलवानों ने इस आंदोलन में साथ देने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा का शुक्रिया अदा किया.
उन्होंने आज़ाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर रावण का भी शुक्रिया अदा किया.
पहलवानों ने कहा कि पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उनका उत्साह बढ़ाया. इसके साथ ही महिला संगठनों और छात्रों ने भी इस लड़ाई में उनका साथ दिया.
पहलवानों ने कहा, "बीजेपी लीडर बबीता जी और तीरथ राणा ने पहलवानों को एकजुट करने का काम किया. इसके बाद इन्होंने ही सरकार के साथ मध्यस्थ बनकर सरकार से आश्वासन दिलवाया. लेकिन कमेटी का आश्वासन सिर्फ़ आश्वासन ही निकला. क्योंकि उसके बाद उस कमेटी का रिजल्ट नहीं निकला. जिसके बाद हमें तीन महीने बाद फिर जंतर-मंतर पर आना पड़ा."
जेईई एडवांस्ड का रिज़ल्ट जारी, जानिए किसने किया टॉप
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी ने रविवार को जेईई एडवांस्ड 2023 के नतीजे जारी कर दिए हैं.
हैदराबाद के विलला चिदविलास रेड्डी ने जेईई एडवांस्ड 2023 परीक्षा में टॉप किया है. उन्होंने 360 अंकों में 341 अंक हासिल किए हैं.
छात्र आधिकारिक वेबसाइट jeeadv.ac.in पर जाकर अपना रिज़ल्ट चेक कर सकते हैं.
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जेईई एडवांस्ड की परीक्षा 4 जून को आयोजित की गई थी. जेईई एडवांस के दोनों पेपरों में 1 लाख 80 हज़ार 372 छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 43 हज़ार 773 छात्रों ने क्वालीफाई किया है.
इस साल हैदराबाद ज़ोन से सबसे ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी और यहीं से सबसे ज्यादा छात्रों ने परीक्षा क्वालीफाई की है.
हैदराबाद - 10432 छात्र
दिल्ली - 9290 छात्र
बॉम्बे - 7957 छात्र
खड़गपुर - 4618 छात्र
कानपुर - 4582 छात्र
रुड़की - 4499 छात्र
गुवाहाटी - 2395 छात्र
आईआईटी गुवाहाटी ने जेईई एडवांस्ड 2023 परीक्षा की फाइनल आंसर शीट आधिकारिक वेबसाइट jeeadv.ac.in पर अपलोड की है.
सूडान की राजधानी ख़ार्तूम में हवाई हमला, 5 बच्चों समेत 17 की मौत
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सूडान की राजधानी ख़ार्तूम में हुए एक हवाई हमले में 17 नागरिकों की मौत हो गई है जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं.
यरमौक ज़िले में हुए इस हमले में 25 घर नष्ट हो गए हैं.
एक दिन पहले सेना के एक शीर्ष जनरल ने अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स के ख़िलाफ़ हमले तेज़ करने की धमकी दी थी.
जून की शुरुआत में, आरएसएफ ने यरमौक पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया था, जो राजधानी का एक क्षेत्र है जहां हथियार बनाने की फैक्ट्रियां हैं.
देश के अंदर पिछले दो महीने से सेना और आरएसएफ के बीच लड़ाई छिड़ी हुई है. इस लड़ाई में 1 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 20 लाख से ज़्यादा लोग सूडान के अंदर विस्थापित हुए हैं और करीब पांच लाख से ज़्यादा लोगों ने देश छोड़कर पड़ोसी देशों में पनाह ली है.
आरएसएफ के अनुसार, हालिया हमले में मायो, यरमौक और मंडेला क्षेत्रों में नागरिकों को निशाना बनाया गया. सेना ने फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
उत्तर प्रदेश के बलिया में गर्मी से तीन दिन में 54 लोगों की मौत
....में
Author, करुणा सिंधू
पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बलिया से
उत्तर प्रदेश के बलिया में भीषण गर्मी पड़ने से बीते तीन दिनों में 54 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 400 से ज़्यादा मरीज़ों को ज़िला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.
ये जानकारी बलिया ज़िला अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अध्यक्ष डॉ. एसके यादव ने दी है.
15 से 17 जून के बीच बुखार, सांस फूलने जैसी वजहों से मरीज़ तेज़ी से अस्पताल में भर्ती हुए हैं.
जानकारी के मुताबिक 15 जून को 23, 16 जून को 20 और 17 जून को 11 लोगों की मौत हुई है.
ज़िले में बढ़ती मौतों को देखते हुए आज़मगढ़ मण्डल के अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बी.पी. तिवारी ने डॉक्टरों की एक टीम को लखनऊ से बुलाया है.
उनका कहना है कि लखनऊ की टीम ही आकर मौतों की वजह का पता करेगी कि क्यों इतनी तेज़ी से लोगों की मौत हुई है.
वहीं ज़िला अस्पताल में आने वाले मरीज़ों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ी है. लोग अपने मरीज़ों को कंधे पर उठाकर इमरजेंसी तक ले जा रहे हैं, क्योंकि अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर की सुविधा नहीं है.