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ग्रीस नाव हादसा: पाकिस्तान में 19 जून को राष्ट्रीय शोक, शरीफ़ ने कहा- दोषियों को देंगे कड़ी सज़ा

पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने दक्षिणी ग्रीस के पास नाव डूबने की घटना में पाकिस्तानी नागरिकों की मौत पर दुख जाहिर किया है.

लाइव कवरेज

अभिनव गोयल and स्नेहा

  1. मिल्खा सिंह की दूसरी पुण्यतिथि: ऐसे मिला था 'फ्लाइंग सिख' का खिताब

    भारतीय खेल जगत में इतिहास रचने वाले मिल्खा सिंह का निधन 18 जून 2021 को चंडीगढ़ के पीजीआई में हुआ था. आज उनकी दूसरी पुण्यतिथि है.

    1960 में मिल्खा सिंह के पास पाकिस्तान से न्योता आया कि वह भारत-पाकिस्तान एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लें.

    टोक्यो एशियन गेम्स में उन्होंने वहां के सर्वश्रेष्ठ धावक अब्दुल ख़ालिक को फ़ोटो फ़िनिश में 200 मीटर की दौड़ में हराया था.

    पाकिस्तानी चाहते थे कि अब दोनों का मुक़ाबला पाकिस्तान की ज़मीन पर हो. मिल्खा ने पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया क्योंकि विभाजन के समय की कई कड़वी यादें उनके ज़हन में थीं जब उनकी आंखों के सामने उनके पिता को क़त्ल कर दिया गया था.

    मगर नेहरू के कहने पर मिल्खा पाकिस्तान गए. लाहौर के स्टेडियम में जैसे ही स्टार्टर ने पिस्टल दागी, मिल्खा ने दौड़ना शुरू किया. दर्शक चिल्लाने लगे-पाकिस्तान ज़िंदाबाद..अब्दुल ख़ालिक ज़िंदाबाद..ख़ालिक, मिल्खा से आगे थे लेकिन 100 मीटर पूरा होने से पहले मिल्खा ने उन्हें पकड़ लिया था.

    इसके बाद ख़ालिक धीमे पड़ते गए. मिल्खा ने जब टेप को छुआ तो वह ख़ालिक से करीब दस ग़ज़ आगे थे और उनका समय था 20.7 सेकेंड. ये तब के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी थी. जब दौड़ ख़त्म हुई तो ख़ालिक मैदान पर ही लेटकर रोने लगे.

    मिल्खा उनके पास गए. उनकी पीठ थपथपाई और बोले, ''हार-जीत तो खेल का हिस्सा है. इसे दिल से नहीं लगाना चाहिए.''

    दौड़ के बाद मिल्खा ने विक्ट्री लैप लगाया. मिल्खा को पदक देते समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति फ़ील्ड-मार्शल अय्यूब खां ने कहा, ''मिल्खा आज तुम दौड़े नहीं, उड़े हो. मैं तुम्हें फ़्लाइंग सिख का ख़िताब देता हूं.''

    • मिल्खा ने जीता था राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण
  2. अमेरिका के विदेश मंत्री चीन पहुंचे, एजेंडे में क्या?

    अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन रविवार को चीन पहुंचे हैं. पांच साल में अमेरिका के किसी विदेश मंत्री की यह पहली यात्रा है.

    इससे पहले वे इसी साल फरवरी महीने में चीन की यात्रा करने वाले थे, लेकिन कथित चीनी जासूसी गुब्बारों के कारण हुए तनाव की वजह ये यात्रा स्थगित हो गई थी.

    वे चीन के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात को लेकर फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

    शुक्रवार को शी जिनपिंग ने माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स से मुलाक़ात की थी.

    इस यात्रा के एजेंडे में सबसे ऊपर दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारना, व्यापार को आसान करना और यूक्रेन युद्ध में रूस को जाने वाले चीनी हथियारों को रोकना शामिल हो सकता है.

    बुधवार को ब्लिंकन के साथ चीन के विदेश मंत्री चिन गैंग की फोन पर बात हुई थी. बातचीत में चीन के विदेश मंत्री ने कथित तौर उनसे कहा, "यह बहुत साफ है कि संबंधों में हाल के दिनों में जो गिरावट है उसके लिए किसे दोष देना है."

    चिन गैंग ने कथित तौर पर कहा, "अमेरिका को चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करना चाहिए और प्रतिस्पर्धा के नाम पर चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों को कमज़ोर करना बंद करना चाहिए."

  3. देश के बंटवारे पर बोले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, कांग्रेस का पलटवार

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर बयान दिया है.

    शनिवार को दिल्ली में नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेमोरियल में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर नेताजी ज़िंदा होते तो भारत का बंटवारा कभी नहीं होता.

    उन्होंने कहा, "अगर सुभाष चंद्र बोस होते तो भारत का बंटवारा नहीं होता. जिन्ना ने कहा था कि मैं केवल एक नेता को स्वीकार कर सकता हूं और वह सुभाष चंद्र बोस हैं."

    डोभाल ने कहा, "नेताजी के दिमाग में ये विचार आया कि मैं अंग्रेजों से लड़ूंगा, मैं आज़ादी के लिए भीख नहीं मांगूंगा. ये मेरा अधिकार है और मैं इसे हासिल करके रहूंगा."

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि वे उन्हें रुद्रांशु मुखर्जी की किताब पैरेलल लाइव्स भेज रहे हैं. उन्हें कम से कम कुछ वास्तविक इतिहास जान लेना चाहिए.

    जयराम रमेश ने ट्वीट कर लिखा कि यूं तो अजीत डोभाल ज्यादा नहीं बोलते हैं लेकिन अब वे उस ग्रुप का हिस्सा बन गए हैं जो इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं.

    उन्होंने लिखा-

    1. क्या नेताजी ने गांधी को चुनौती दी थी?-हां, उन्होंने ऐसा किया था.

    2. क्या नेताजी वामपंथी थे?- हां वे थे.

    3. क्या नेताजी धर्मनिरपेक्ष थे?- हां

    4. क्या तब विभाजन नहीं होता अगर नेताजी जीवित होते?- कौन कह सकता है क्योंकि 1940 तक नेताजी फॉरवर्ड ब्लॉक बना चुके थे. इस पर आपकी राय हो सकती है लेकिन यह एक विरोधाभासी सवाल है.

    जयराम रमेश ने कहा, "एक बात अजीत डोभाल ने नहीं बताई. नेताजी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के कड़े विरोध के बावजूद बंगाल के विभाजन का समर्थन करने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे."

  4. कर्नाटक में पाठ्यपुस्तकों से सावरकर को हटाए जाने पर बोले नितिन गडकरी

    केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक में स्कूली पाठ्यपुस्तकों को संशोधित करने के प्रस्ताव की आलोचना की है.

    शनिवार को वीडी सावरकर पर पुस्तक विमोचन समारोह में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि डॉ हेडगेवार और वीर सावरकर से जुड़े अध्यायों को स्कूल के पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है. इससे ज्यादा पीड़ादायक कुछ नहीं है.”

    कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को राज्य के स्कूलों में कक्षा 6 से 10 के लिए सामाजिक विज्ञान और कन्नड़ पाठ्यपुस्तकों के संशोधन को मंज़ूरी दी थी, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक केबी हेडगेवार और हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर सहित अन्य अध्यायों को हटा दिया गया है.

    राज्य के शिक्षा मंत्री मधु बंगरप्पा ने संशोधन के बाद कहा था, “सिलेबस से केशव बलिराम हेडगेवार को हटा दिया है. पिछली सरकार ने बीते साल जो भी बदलाव किए थे, हमने उसे बदल दिया है और बीते साल के पहले वाले साल में जो भी सिलेबस था, उसे फिर से लागू कर दिया गया है."

    चुनाव से पहले कांग्रेस ने घोषणा की थी कि राज्य में सरकार बनने के बाद वह पाठ्यपुस्तकों को संशोधित करेगी.

  5. नमस्कार!

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    ये लाइव पेज 24 घंटे उपलब्ध रहेगा. 17 जून के अपडेट्स के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.