पिछले काफ़ी महीनों से आर्थिक असंतुलन
का सामना कर रही पाकिस्तान सरकार आज शुक्रवार को नेशनल असेंबली में अपना वार्षिक
बजट पेश करने जा रही है.
पाकिस्तान में आम तौर पर सरकारें अपने
कार्यकाल के अंतिम दौर में करों में कटौती करके लोगों को राहत देने की कोशिश करती
हैं. लेकिन इस बार हालात अलग हैं.
इस बार के बजट पर पाकिस्तान के आम
आदमी की निगाहें हैं क्योंकि ये बजट उनके आने वाले दिनों की रूपरेखा तय करेगा.
इस बार पाकिस्तान में लोगों की नज़र कराधान
पर होगी. लोग ये जानना चाहेंगे कि किस वर्ग पर कितना टैक्स लगाया जाएगा.
अर्थशास्त्री डॉ साजिद अमीन मानते हैं कि ‘ऐसा लगता है कि पहले से लागू टैक्स की दर को बढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन देखना यह है कि किस वर्ग पर कितना टैक्स लगाया जा रहा है और किस वर्ग को रियायतें मिल रही हैं.‘
वह कहते हैं कि अगर सरकार इस बार भी उन उद्योग धंधों को ही टैक्स की छूट देती है जिन्हें वह पिछले सत्तर सालों से देती आ रही है तो इससे आम आदमी को कोई फायदा नहीं होगा.
इसके साथ ही डॉ अमीन बताते हैं कि आयकर के मामले में सरकार को यह देखना चाहिए कि वह उच्च आय वाले लोगों पर अधिक आयकर लागू करे और कम आय वाले लोगों पर इसका बोझ कम करे और उन्हें छूट दे.
अगर सैलरी और पेंशन पाने वाले सरकारी कर्मचारियों की बात करें तो उनकी तनख़्वाह बढ़ाए जाने की स्थिति में उन्हें किसी तरह का फ़ायदा होता नहीं दिख रहा है.
पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को समझने वालों का मानना है कि इस समय महंगाई इतनी ज़्यादा है कि पेंशन और सैलरी बढ़ाए जाने पर भी उन्हें ज़्यादा राहत नहीं मिलेगी.
डॉ अमीन कहते हैं, “सरकार इस बजट में ख़ास तौर पर अपने ख़र्चे नहीं बढ़ाना चाहेगी. हालाँकि, इसे अधिक से अधिक गरीब लोगों को सोशल सिक्योरिटी के नेटवर्क में लाने का प्रयास करना चाहिए, यानी अधिक लोगों को ग़रीबी रेखा से नीचे गिरने से बचाना चाहिए.”
वे कहते हैं, “अगर सरकार सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में वृद्धि करती है, तो एक आम आदमी के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि उसे ध्यान में रखा जाता है या नहीं. हर स्तर के कर्मचारियों के लिए एक समान वेतन वृद्धि फायदेमंद नहीं होगी.'
डॉ अमीन मानते हैं कि ‘यह बेहतर होगा कि ग्रेड 11 और उससे नीचे के कर्मचारियों के लिए वृद्धि की दर अधिक हो और ग्रेड 18 से ऊपर के कर्मचारियों के लिए कम हो.’