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पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के अख़बार से बातचीत में सुरक्षा के क्षेत्र में नज़दीकी सहयोग पर दिया ज़ोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वो भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को 'अगले लेवल' पर ले जाना चाहते हैं.

लाइव कवरेज

दीपक मंडल and स्नेहा

  1. 2000 रुपये के नोट को लेकर आरबीआई गवर्नर ने दी ये जानकारी

    भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि 2000 रुपये के नोट लीगल टेंडर (वैध) हैं और 30 सितंबर के बाद इन्हें लेकर फ़ैसला किया जाएगा.

    आरबीआई के गवर्नर दास ने कहा, “ नोट बदलने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है. कल से ये प्रक्रिया शुरू होगी. (नोट बदलने के दौरान) जो दिक्कतें आती हैं, हम उन सबका ध्यान रखेंगे. बैंक को इसे लेकर दिशानिर्देश दे दिए गए हैं.”

    उन्होंने कहा कि देश और विदेश में रहने वाले सभी लोगों की दिक्कतों के लिए ‘आरबीआई संवेदनशील’ है और नोट बदलने की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करेगा.

    आरबीआई गवर्नर ने कहा,“जो विदेश में रह रहे हैं या जो बुजुर्ग अपने बच्चों के पास विदेश में गए हैं, मैं उन सब को भरोसा देता हूं, जो कठिनाई आपके सामने आएंगी हम उनके लिए संवेदनशील रहेंगे.”

    आरबीआई ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर 2000 रुपये के नोट को वापस लेने के फ़ैसले की जानकारी दी थी.

    शुक्रवार को जारी अपने बयान में आरबीआई ने कहा है कि ये नोट वैध रहेंगे और 30 सितंबर 2023 तक इन्हें बैंकों में जमा कराया जा सकता है.

    आरबीआई गवर्नर ने शक्तिकांत दास ने सोमवार को मीडिया को बताया कि 2000 रुपये के नोट को लाने का मक़सद पूरा हो चुका है.

    उन्होंने कहा, “जब 1000 और 500 रुपये के नोट वापस लिए गए थे तब जल्दी के साथ उतने मूल्य की भरपाई के मक़सद से 2000 रुपये का नोट जारी किया गया था. अब ये मक़सद पूरा हो चुका है. अब दूसरे मूल्य के पर्याप्त नोट सर्कुलेशन में हैं.”

    आरबीआई गवर्नर ने क्या कहा

    • हमारे पास पर्याप्त से ज़्यादा नोट हैं.आरबीआई के पास भी और बैंकों के करेंसी चेस्ट में भी.
    • नोट बदलने के लिए चार महीने का समय दिया गया है. जब भी आपके पास समय हो तब नोट बदलिए
    • नोट बदलने के लिए 30 सिंतबर तक का समय दिया गया है.
    • उम्मीद है कि 30 सितंबर तक ज्यादातर नोट वापस आ जाएंगे
    • 30 सितंबर के करीब आगे को लेकर फ़ैसला किया जाएगा
    • समय इसलिए दिया गया है कि लोग पूरी प्रक्रिया को गंभीरता से लें
  2. आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की हार पर नवीन उल हक़ ने ली विराट कोहली पर चुटकी

    आईपीएल में गुजरात टाइटंस के हाथों रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की हार के बाद लखनऊ जायंट्स के तेज गेंदबाज नवीन उल हक़ ने सोशल मीडिया पर आरसीबी टीम पर इशारों में तंज किया है.

    इस पोस्ट से ऐसा लगता है कि 1 मई को हुए मैच में नवीन उल हक और विराट कोहली की तनातनी की गर्माहट कम नहीं हुई है.

    नवीन उल हक़ ने एक अफ्रीकन एंकर का हंसता हुआ वीडियो शेयर किया है. माना जा रहा है कि इस वीडियो के जरिये आरसीबी बैंगलोर की हार पर चुटकी ली है.

    ट्विटर पर कई लोगों ने इस वीडियो को शेयर किया है. इसमें एक अफ्रीकन एंकर ठहाका लगाता दिख रहा है.

    आईपीएल के आख़िरी लीग मैच में गुजरात टाइटंस ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को छह विकेट से हरा कर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया है.

    बारिश की वजह से देर से शुरू हुए इस मैच में हार्दिक पंड्या ने टॉस जीत कर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया. विराट कोहली के शतक की बदौलत रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने 20 ओवरों में पांच विकेट पर 197 रन बनाए.

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस की टीम के ओपनर शुभमन गिल ने भी इस टूर्नामेंट का अपना दूसरा शतक जड़ा और अंत तक आउट हुए बग़ैर टीम को जीत दिला दी.

    तीन सीजन के बाद ये पहली बार है जब रॉयल चैलेंजर्स टॉप फोर में जगह नहीं बना पाया है.

    शुभमन गिल ने अपना शतक केवल 50 गेंदों पर पूरा किया और (52 गेंदों पर) 104 रन बना कर अंत तक आउट नहीं हुए. अपनी पारी में शुभमन ने आठ छक्के और पांच चौके लगाए.

    शुभमन गिल की इस धुआंधार पारी ने कोहली की टीम के प्लेऑफ में पहुंचने का सपना तोड़ दिया. शुभमन गिल की पारी से मैदान में सबसे ज्यादा निराश विराट कोहली दिखे.

  3. यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा- बख़मूत पर रूसी कब्जा नहीं, वागनर ग्रुप का दावा ग़लत

    यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदोमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि बख़मूत पर रूस के कब्जे का दावा बिल्कुल गलत है.

    रूस की ओर से यूक्रेन में लड़ रही प्राइवेट आर्मी वागनर ने दावा किया था कि उसने यूक्रेनी शहर बख़मूत पर कब्जा कर लिया है.

    जापान में जी-7 देशों के सम्मेलन के आखिरी दिन ज़ेलेंस्की ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बख़मूत में चल रही लड़ाई का ब्योरा देने से तो इनकार कर दिया लेकिन कहा कि आज की तारीख में रूस का बख़मूत पर कब्जा नहीं है.

    रूस की प्राइवेट आर्मी वागनर का कहना है कि उसने यूक्रेनी शहर बख़मूत पर कब्जा कर लिया है. राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने उनकी इस कथित जीत पर उन्हें बधाई भी दी है, लेकिन यूक्रेन ने इन दावों का जोरदार खंडन किया है.

    शनिवार को यूक्रेन के उप रक्षा मंत्री ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा था कि वागनर के दावों में कोई दम नहीं है लेकिन उन्होंने माना कि शहर में हालात काफी चिंताजनक है.

    बख़मूत में पिछले साल अगस्त से ही भीषण लड़ाई चल रही है. इसे यूक्रेन-रूस जंग की सबसे खूनी लड़ाई कहा जा रहा है.

    बख़मूत में यूक्रेनी सेना, रूसी सेना और प्राइवेट आर्मी वागनर का कड़ा मुकाबला कर रही है.

    इस वजह से लड़ाई इतने लंबे समय तक खिंचती आ रही है.

    रूसी प्राइवेट आर्मी वागनर के संस्थापक येवेगेनी प्रिगोज़िन ने सोशल मीडिया पर अपने कुछ लड़ाकों के साथ खींची गई तस्वीरों को शेयर करते हुए दावा किया था बख़मूत पर उनका कब्जा हो गया है.

    वागनर ग्रुप बख़मूत शहर पर हमले का नेतृत्व कर रहा है. उन्हें रूसी फाइटर प्लेन की मदद मिल रही है.

    इस लड़ाई में रूस के सैनिक बड़ी तादाद में मारे गए और इसे उसके लिए अच्छा रणनीतिक कदम नहीं माना जा रहा है.

  4. 2000 के नोटों को वापस लेने के फ़ैसले पर अरविंद पनगढ़िया ने क्या कहा?

    नीति आयोग के वाइस चेयरमैन रहे अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि 2000 के नोटों को वापस लेने के फैसले का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.

    उन्होंने कहा कि देश में इस वक्त जितना कैश सर्कुलेशन में है उनमें 2000 के नोटों का हिस्सा सिर्फ 10 से 11 फीसदी ही है.

    'इंडियन एक्सप्रेस' के 'आइडिया एक्सचेंज' कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 2000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला अप्रत्याशित नहीं है. जब इसे शुरू किया गया था तो उसका मकसद नोटबंदी की वजह से इकोनॉमी में कम हुए कैश सर्कुलेशन की भरपाई जल्द से जल्द करना था. 500 रुपये के नोटों की छपाई में काफी वक्त लग जाता है. इसलिए इकोनॉमी को री-मोनेटाइजेशन करने के लिए 2000 रुपये के नोटों को लाना जरूरी था.

    उन्होंने कहा, '' 2000 रुपये के नोटों को सिस्टम में बरकरार रखने की काफी कम वजह है. सरकार चाहती है कि लोग ज्यादा से ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन करे''

    'यूरोपियन यूनियन से एफटीए सबसे अहम'

    अरविंद पनगढ़िया ने यूरोपीय यूनियन से भारत के एफटीए का समर्थन किया है. अगर भारत अपने टैरिफ बैरियर को घटा दे तो अर्थव्यवस्था को काफी फायदा मिलेगा. भारत ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब से एफटीए करने जा रहा है लेकिन यूरोपीय यूनियन के साथ इसका एफटीए काफी अहम है.

    उन्होंने कहा, ''हमें ये समझना होगा कि यूरोपीय यूनियन 27 देशों का समूह है. उन्होंने कहा कि एफटीओ दोतरफा रास्ता है. अगर हम बड़े बाजार तक पहुंच चाहिए तो हमें भी कुछ छूट देनी होगी. जब हमने 1991 में आर्थिक उदारीकरण शुरू किया और 2007 में टैरिफ हटाए थे तो ये अपने हित में उठाए गए कदम थे.''

    एशियाई बाजारों पर ध्यान दे भारत

    पनगढ़िया ने कहा कि तेल के छोड़ कर रूस से भारत का कारोबार ज्यादा बड़ा नहीं है. उन्होंने कहा,''निजी तौर पर मैं समझता हूं कि हमें एशिया पर काफी ध्यान देना चाहिए. यहां काफी ज्यादा आबादी है. अगर हम यहां होंगे तो रोजगार के हिसाब से काफी फायदा होगा. चीन कपड़ा जैसे भारी श्रमिक भागीदारी वाले सेक्टर में इसका फायदा उठा रहा है.''

    ''चीन की तरह हम भी यहां काफी रोजगार पैदा कर सकते हैं. यहां पांच से छह अरब की आबादी है. अगर आप एक जोड़ी शर्ट और पैंट भी निर्यात करेंगे तो ये 10 से 12 अरब जोड़ी तक पहुंच जाएगा. किसी को इसका फायदा तो लेना ही होगा.''

    भारत की ओर से नेट ज़ीरो का लक्ष्य 2070 तक हासिल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर यूरोप और अमेरिका इसे 2050 तक हासिल कर सकते हैं तो भारत भी इसे 2070 तक हासिल कर सकता है.

  5. इसराइली मंत्री ने फिर किया अल-अक़्सा मस्जिद का दौरा, सऊदी अरब हुआ नाराज़

    इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर के यरुशलम स्थित अल अक़्सा मस्जिद दौरे के बाद विवाद फिर भड़क गया है.

    इसराइली मंत्री रविवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अल अक्सा मस्जिद परिसर पहुंचे थे. इससे तीन दिन पहले ही इसराइली मंत्री ने यरुशलम में हजारों यहूदी समर्थकों के साथ जुलूस निकाला था.

    ये जुलूस ऐसे वक़्त निकाला गया जब गज़ा पट्टी में संघर्ष विराम को एक सप्ताह से ज्यादा नहीं हुआ है.

    इस साल जनवरी में भी इसराइली मंत्री ने यरुशलम का दौरा किया था.

    मंत्री ने अल अक्सा मस्ज़िद का दौरा करने के बाद टेलीग्राम पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ''यरुशलम हमारी आत्मा है. हमास की धमकी हमें रोक नहीं पाएगी. मैं आज टेंपल माउंट तक चला आया.'' हमास ने गवीर के इस दौरे का विरोध किया है.

    इसके जवाब में हमास ने लिखा, ''इसराइल अपने मंत्री और यहां जबरदस्ती बसे झुंडों की इस बर्बर घुसपैठ का ज़िम्मेदार होगा.''

    सऊदी अरब और जॉर्डन का विरोध

    सऊदी अरब और जॉर्डन ने इसराइली मंत्री के इस क़दम का विरोध किया है.

    सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, ''इसराइल का ये क़दम अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों को तोड़ने वाला है''.

    सऊदी अरब को कहना है कि ये दुनिया भर के मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काने वाला कदम है. उसने यरुशलम में लगातार हिंसा के लिए इसराइल को दोषी ठहराया है.

    जॉर्डन ने भी इसे भड़काने वाला कदम बताया है. उसने कहा है कि इसराइल के ये कदम खतरनाक है. इसे किसी भी हालत मंजूर नहीं किया जा सकता.

    क्या है विवाद?

    अल-अक्सा मस्जिद इस्लामी दुनिया की तीसरी सबसे पवित्र जगह है. इसका प्रशासन जॉर्डन के हाथ में हैं. गैर मुस्लिमों को यहां प्रवेश की इजाजत है लेकिन वे यहां प्रार्थना नहीं कर सकते.

    यह परिसर यहूदियों के लिए भी सबसे पवित्र जगह है. वो पश्चिमी दीवार के नीचे प्रार्थना करते हैं. ये विवाद 100 साल पुराना है.

    यहूदियों के लिए 'टेंपल माउंट' और मुसलमानों के लिए 'अल-हराम अल शरीफ़' के नाम से मशहूर पावन स्थल में 'अल-अक़्सा मस्जिद' और 'डोम ऑफ़ द रॉक' शामिल है.

    'डोम ऑफ़ द रॉक' को यहूदी धर्म में सबसे पवित्र स्थल का दर्जा दिया गया है. पैग़ंबर मोहम्मद से जुड़े होने के कारण 'डोम ऑफ़ द रॉक' को मुसलमान भी पावन स्थल मानते हैं.

    इस धार्मिक स्थल पर ग़ैर-मुसलमानों की प्रार्थना पर पाबंदी लगी हुई है. इस परिसर का प्रबंधन जॉर्डन के वक्फ़ द्वारा किया गया जाता है, जबकि सुरक्षा इंतज़ामों पर इसराइल का नियंत्रण है.

  6. श्रीनगर में जी-20 की एक बैठक में चीन के अलावा और कौन देश नहीं आएगा?

    जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जी-20 के टूरिजम वर्किंग ग्रुप की बैठक आज (सोमवार) से शुरू हो रही है.

    22 से 24 मई तक चलने वाली इस बैठक में पहले दो वर्किंग ग्रुप की बैठकों की तुलना में ज्यादा विदेशी प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है.

    जी-20 के चीफ सह-समन्वयक हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने कहा कि बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ये ज़रूरी है कि जी-20 देशों के अलावा अंतरराष्ट्रीय संगठनों का भी सहयोग मिले.

    अब तक इसे लेकर इन संगठनों का रुख़ काफ़ी अच्छा रहा है. वर्किंग ग्रुप की इस बैठक में 60 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. हालांकि जी-20 के सभी देश इसमें हिस्सा नहीं ले रहे हैं. सदस्य देशों में सबसे बड़ा प्रतिनिधि मंडल सिंगापुर का है.

    चीन इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगा. 'द हिंदू' के मुताबिक़ 19 मई तक सऊदी अरब और तुर्की ने भी इसके लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराए थे.

    तुर्की ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध किया था. तुर्की के मौजूदा राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत विरोधी बयान दिया था.

    हालांकि तुर्की ने शुरू में कश्मीर में पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया था. लेकिन इधर हाल में उसने कश्मीर को लेकर अपना रुख नरम ही रखा है.

    चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने चीन के इसमें शामिल नहीं होने का ऐलान किया था. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था, ''चीन विवादित क्षेत्र पर किसी भी प्रकार की जी-20 बैठक का पूरी तरह से विरोध करता है. हम ऐसी बैठकों में हिस्सा नहीं लेंगे.'' चीन ने कहा था कि वो कश्मीर में यथास्थिति बदलने के ख़िलाफ़ है.

    इससे पहले पाकिस्तान ने भी श्रीनगर में जी-20 के वर्किंग ग्रुप की बैठक आयोजित करने का विरोध करते हुए कहा था कि ये विवादित क्षेत्र है. भारत यहां ये बैठक कैसे कर सकता है.

    चीन और पाकिस्तान दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए लंबे समय से चल रहे कश्मीर विवाद मुद्दे को उठाया था.

    पाकिस्तान के बचाव में चीन ने कहा था, 'भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद काफ़ी समय से अटका हुआ है और किसी भी एकतरफ़ा कार्रवाई से बचते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार हल किया जाना चाहिए.'

    इस बयान के बाद भारत ने कहा था कि वह अपने क्षेत्र में बैठकें करने के लिए स्वतंत्र है. कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. पड़ोसी देश के साथ सामान्य संबंधों के लिए उसकी सीमा पर अमन-चैन जरूरी है.

  7. नमस्कार! आपका दिन शुभ हो.

    ये लाइव पेज 24 घंटे के लिए उपलब्ध रहेगा.

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