केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कर्नाटक में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, "हमने मुस्लिम रिजर्वेशन समाप्त किया. लिंगायतों, एससी, एसटी का रिजर्वेशन बढ़ाया. कांग्रेस पार्टी कहती है कि अगर हम सत्ता में आए तो मुस्लिम रिजर्वेशन को चार प्रतिशत की जगह छह प्रतिशत करेंगे."
अमित शाह ने कहा, "मैं डीके शिवकुमार से पूछना चाहता हूं कि आप मुस्लिम रिजर्वेशन लाओगे तो किसका कम करोगे. ये बताए बिना आप तुष्टीकरण की राजनीति कर रहे हैं."
उन्होंने वादा करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी न मुस्लिम रिजर्वेशन आने देगी और न लिंगायतों का रिजर्वेशन कम होने देगी.
कर्नाटक में चुनाव प्रचार आज शाम पांच बजे समाप्त हो जाएगा और 10 मई को वोट डाले जाएंगे. कर्नाटक के चुनावी नतीजे 13 मई को आएंगे.
कर्नाटक में बीजेपी सरकार ने विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले मुसलमानों को मिलने वाला 4 फ़ीसदी आरक्षण रद्द कर दिया और इसे कर्नाटक के लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों के बीच 2-2 फ़ीसदी बांट गया.
बीजेपी का कहना है धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ़ है, इसलिए ये आरक्षण हटाया गया.
मार्च में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने इस फ़ैसले के बाद कहा था, "संविधान में धार्मिक आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है. खुद डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि आरक्षण जाति के आधार पर तय होना चाहिए."
कर्नाटक में साल 1994 में मंडल कमीशन की सिफ़ारिशों के तहत मुसलमानों की कुछ जातियों को अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) की श्रेणी में एक उप-श्रेणी बनाकर शामिल किया गया था.
इसके तहत मुसलमानों को 'सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन' के आधार पर चार फ़ीसदी आरक्षण देने की बात की गई.
कर्नाटक सरकार ने साल 1986 में चिनप्पा रेड्डी आयोग बनाया था. इस आयोग को काम दिया गया कि वह राज्य में आरक्षण के लिए योग्य जातियों-समुदायों की लिस्ट तैयार करे.
इस आयोग की सलाह पर ही ओबीसी के 32 फ़ीसदी कोटे में से मुसलमानों को चार फ़ीसदी आरक्षण देने का फ़ैसला किया.
ओबीसी श्रेणी में ही वोक्कालिगा और लिंगायतों को 4 और 5 फ़ीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था. वोक्कालिगा और लिंगायत कर्नाटक में काफ़ी प्रभावशाली समुदाय हैं.
अब कर्नाटक में जो आरक्षण की बदली व्यवस्था है उसमें मुसलमानों को मिलने वाला 4 फ़ीसदी आरक्षण ख़त़्म हो गया है. हालांकि नौ मई तक सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बहाल रखी है.