बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता हुआ साफ़
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बिहार से

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बिहार सरकार ने हाल ही में अपने क़ानून में एक बदलाव किया है. इससे बिहार के जेलों में क़ैद 27 बंदियों की रिहाई का रास्ता साफ़ हो गया है.
बिहार सरकार ने इस बदलाव को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है. क़ानून में इसी बदलाव का फ़ायदा बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन को भी मिल रहा है.

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आनंद मोहन पर भीड़ के साथ मिलकर गोपालगंज के ज़िलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या का आरोप था.
यह हत्या 5 दिसंबर साल 1994 को हुई थी. साल 1994 में आनंद मोहन बिहार पीपुल्स पार्टी के प्रमुख हुआ करते थे.
आनंद मोहन इसी हत्या में दोषी करार दिए गए हैं और सहरसा जेल में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं. हालांकि फ़िलहाल वो अपने बेटे की शादी के मौक़े पर पेरोल पर बाहर हैं.
आनंद मोहन ख़ुद शिवहर से सांसद रहे हैं. उनकी पत्नी लवली आनंद भी सांसद रही हैं, जबकि उनके बेटे चेतन आनंद फ़िलहाल शिवहर से आरजेडी के विधायक हैं.
शिवहर से पूर्व सांसद आनंद मोहन को 2007 में अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश आरएस राय ने धारा 302 और 109 के तहत मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी.
हालांकि बाद में पटना हाई कोर्ट ने दिसंबर 2008 में आनंद मोहन की मृत्यु की सज़ा को बदल कर आजीवन कारावास कर दिया था जिसके बाद उन्होंने इसके खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

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आनंद मोहन की रिहाई की कोशिश पर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती समेत लोगों ने आपत्ति जताई थी.
मायावती ने इस मामले पर ट्वीट कर कहा था कि आनंद मोहन ने एक दलित अधिकारी की हत्या की की थी और उनकी रिहाई से जनता में ग़लत संदेश जाएगा.
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आनंद मोहन बिहार में राजपूत समुदाय के बड़े नेता माने जाते रहे हैं. इस लिहाज़ से यह भी आरोप लग रहा है कि राजपूत वोट बैंक को अपनी ओर लाने के लिए नीतीश सरकार आनंद मोहन को रिहा कराने की कोशिश में लगी है.
कुछ ही महीने पहले नीतीश कुमार भी अपनी एक सभा में यह संकेत दे चुके थे कि उनकी सरकार आनंद मोहन की रिहाई की कोशिश में लगी हुई है और इसके लिए काम कर रही है.

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