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सारस से मिलने कानपुर पहुँचे अखिलेश यादव और आरिफ़, पत्रकारों से क्या कहा?

अमेठी के आरिफ़ के पास एक साल से रह रहे सारस को वन विभाग ने पहले रायबरेली के समसपुर पक्षी विहार में रखा था.

लाइव कवरेज

विकास त्रिवेदी, रजनीश कुमार and चंदन शर्मा

  1. ब्रेकिंग न्यूज़, उमेश पाल अपहरण केस में अतीक़ अहमद दोषी क़रार

    उमेश पाल अपहरण केस में प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अतीक़ अहमद को दोषी क़रार दिया है.

    कोर्ट का ये फ़ैसला 2006 में उमेश पाल के अपहरण किए जाने के मामले में आया है.

    कुछ दिन पहले ही उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी.

    उमेश पाल बसपा विधायक राजू पाल की हत्या केस के प्रमुख गवाह थे. इस हत्या का आरोप अतीक़ अहमद पर था.

    साथ ही उमेश के अपहरण का आरोप भी अतीक़ अहमद और उनके सहयोगियों पर था.

    अतीक़ को जब कोर्ट में पेशी के लिए लाया जा रहा था, तब के कुछ वीडियो में लोग अतीक के लिए फ़ांसी देने के नारे लगाते सुनाई दे रहे हैं.

    सुप्रीम कोर्ट से भी अतीक़ को मिला था झटका

    सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व सांसद और गैंगस्टर अतीक़ अहमद की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में सुरक्षा की मांग की थी.

    मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अतीक़ अहमद की याचिका को ख़ारिज कर दिया.

    यह फ़ैसला जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच ने दिया है.

    अतीक़ अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कहा था कि उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में उनकी जान को ख़तरा है.

    उमेश पाल हत्या केस में अतीक़ अहमद को उत्तर प्रदेश लाया गया है.

    अतीक़ अहमद ने अपनी याचिका में मांग की थी कि सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश पुलिस को उनकी जान की सुरक्षा को लेकर कोई आदेश दे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य की मशीनरी उनका ध्यान रखेगी.

    अतीक़ अहमद पाँच बार उत्तर प्रदेश से विधायक और एक बार सांसद रहे हैं. अतीक़ अहमद ने अपनी याचिका में कहा था कि यूपी पुलिस को अहमदाबाद में ही आकर पूछताछ करनी चाहिए.

    2005 में हुई हत्या की एक घटना के मुख्य गवाह उमेश पाल की 24 फ़रवरी, 2023 को दिन दहाड़े हत्या कर दी गई थी. हत्यारे घटना को अंजाम देने के बाद मौक़े से भागने में कामयाब हो गए थे. प्रयागराज पुलिस का कहना था कि सीसीटीवी फ़ुटेज खंगालने के बाद उन्होंने पूर्व सांसद और बाहुबली अतीक़ अहमद के बेटे असद, 'बमबाज़' गुड्डू मुस्लिम, ग़ुलाम और अरबाज़ की पहचान की थी.

    पुलिस के अनुसार, सदाक़त ख़ान नाम के एक व्यक्ति की बतौर साज़िशकर्ता पहचान की गई है. पुलिस का कहना था कि उन्होंने एक अभियुक्त अरबाज़ को प्रयागराज में एक मुठभेड़ के दौरान पकड़ा था, लेकिन गोली के घाव से सोमवार को अरबाज़ की मौत हो गई.

  2. जामिया हिंसा मामले में शरजील इमाम को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं

    सुचित्रा मोहंती

    जामिया हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को आंशिक रूप से पलट दिया है.

    ट्रायल कोर्ट ने शरजील इमाम, सफ़ूरा ज़रगर और आसिफ़ इक़बाल को आरोप मुक्त किया था.

    दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसले को इन लोगों के लिए झटका माना जा रहा है.

    दिल्ली हाई कोर्ट ने शरजील इमाम, सफ़ूरा ज़रगर और अन्य के ख़िलाफ़ कई अन्य आपराधिक मामलों में आरोप तय किए हैं. इनमें ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से इकट्ठा होने और दंगा भड़काने के आरोप भी शामिल हैं.

    हालांकि शरजील को कई मामलों में आरोपमुक्त भी किया है. दिल्ली पुलिस ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. ट्रायल कोर्ट ने 2019 में जामिया हिंसा मामले में शरजील इमाम और अन्य को बरी कर दिया था.

    इस मामले में सफ़ूरा ज़रगर के वकील रितेश दुबे ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फ़ैसले को पलटते हुए शरजील इमाम, सफ़ूरा ज़रगर और आसिफ़ इक़बाल तन्हा पर नई धाराएं (पहले से लगी धाराओं में से कुछ धाराएं बदलकर) लगाई जाएंगी. हम फ़ैसले की कॉपी का इंतज़ार कर रहे हैं, इसे पढ़ कर ही पता चलेगा कि नई धाराएं कौन सी होंगी.”

    जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने 23 मार्च को सुनवाई के बाद फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. दिसंबर, 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया में दिल्ली पुलिस और नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में प्रदर्शन करने वालों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.

  3. ईपीएफ़ओ का अहम फ़ैसला, कर्मचारियों को होगा फ़ायदा

    ईपीएफ़ओ यानी द एम्पलॉयीज़ प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइज़ेशन ने 2022-23 के लिए एम्पलॉयीज़ प्रोविडेंट फंड की ब्याज दर 8.15 फ़ीसदी तय की है.

    केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट कर कहा है, ''ईपीएफ़ओ ने 2022-23 के लिए पीएफ़ की ब्याज दर 8.15 फ़ीसदी करने की सिफ़ारिश की है. मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि ईपीएफ़ओ की ब्याज दर किसी भी निवेश से ज़्यादा है.''

    ईपीएफ़ओ के तहत क़रीब सात करोड़ वेतनभोगी कर्मचारी हैं. ईपीएफ़ओ रिटायरमेंट फंड का प्रबंधन देखता है.

    मार्च 2022 में ईपीएफ़ओ ने 8.10 फ़ीसदी ब्याज दर करने का फ़ैसला किया था. यह ब्याज दर पिछले तीन दशकों में सबसे कम थी. ईपीएफ़ओ के इस फ़ैसले से लाखों कर्मचारियों को निराशा हाथ लगी थी.

    भारत में सभी के लिए पेंशन की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में पीएफ़ सामाजिक सुरक्षा के लिए नौकरी जाने या रिटायरमेंट के बाद काफ़ी अहमियत रखता है.

    एम्पलॉयी प्रोविडेंट फंड्स एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1952 के तहत पीएफ़ एक अनिवार्य व्यवस्था है.

    ईपीएफ़ओ नियम के अनुसार, कर्मचारियों की बेसिक सैलरी के कम से कम 12 फ़ीसदी हिस्सा पीएफ़ में जाता है और ऐम्पलॉयर भी अपनी तरफ़ से 12 फ़ीसदी जमा करता है.

    कोविड महामारी में जब लोगों की नौकरियां गई थीं तो शुरुआती तीन महीने में तक़रीबन 80 लाख लोगों ने पीएफ़ में जमा पैसे निकाल कर महीनों तक गुज़ारा किया था.

  4. पुराने बयान पर श्रीनिवास बी वी और स्मृति इरानी आमने-सामने, जानिए पूरा मामला

    कांग्रेस युवा मोर्चा के अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी के एक बयान पर विवाद हो रहा है.

    सोशल मीडिया पर बीजेपी समर्थक श्रीनिवास का एक वीडियो क्लिप शेयर कर रहे हैं और श्रीनिवास पर स्मृति इरानी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा रहे हैं.

    अब उस बयान पर श्रीनिवास का स्पष्टीकरण आया है और साथ ही स्मृति इरानी की भी प्रतिक्रिया आई है.

    श्रीनिवास का पक्ष

    श्रीनिवास ने अपने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है.

    इस वीडियो में श्रीनिवास कहते दिख रहे हैं, ''बीजेपी है तो बेरोज़गारी है. जो आम गऱीब लोग घर में कैसे जी रहे हैं, आप लोग सोचे हैं क्या? कभी नहीं सोचा है, इन लोगों ने. बीजेपी है तो महंगाई है. हर चीज़ में महंगाई. यही लोग 2014 में कहते थे. महंगाई को डायन बनाकर बैठा दिया करते थे. वो स्मृति इरानी थोड़ा गूंगी, बहरी हो गई हैं. मैं उनको कहना चाहता हूं, उसी डायन को...महंगाई डायन को डार्लिंग बनाकर बेडरूम में बैठाने का काम किया है.''

    इस वीडियो के साथ श्रीनिवास लिखते हैं, ''संघी नही सुधरेंगे. आधा अधूरा नहीं, पूरा बयान चलाओ. मैंने 2014 के पहले दिए जाने वाले आप लोगों के बयान को ही कोट किया है. जो ₹400 रुपए सिलिंडर वाली 'महंगाई' आप लोगों को 'डायन' नज़र आती थी, आज आप लोगों ने उसी 'डायन' महंगाई को ₹1100 LPG के रूप में 'डार्लिंग' बनाकर बैठाया हुआ है.''

    श्रीनिवास के बयान पर केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी की प्रतिक्रिया आई है.

    स्मृति इरानी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''मैं जानती हूं कि क्या कहा गया है. शब्द राहुल गांधी के हैं. संस्कार सोनिया गांधी के हैं. बस ज़बान युवा कांग्रेस की है. मैं ये इसलिए कह रही हूं कि ये पहले युवा कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं हैं जो अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं. जब तक सोनिया गांधी और राहुल गांधी हैं, तब तक कांग्रेस का वो नेता जो प्रमोशन चाहेगा, मुझ पर ऐसी टिप्पणियां करता रहेगा.''

    श्रीनिवास ने स्मृति इरानी के बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल पूछे हैं.

    श्रीनिवास ने बीजेपी सांसद के महिला सांसदों पर दिए बयान की ख़बरों को शेयर करते हुए लिखा- ये संस्कार और शब्द आपके हैं या पीएम मोदी के?

  5. राहुल गांधी की टिप्पणी पर सावरकर के पोते ने दी ये चुनौती

    विनायक दामोदर सावरकर पर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद थम नहीं रहा है.

    सांसदी जाने के बाद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने माफ़ी मांगने के सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी.

    राहुल गांधी ने कहा था, ''मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा क्योंकि मैं सावरकर नहीं हूं. गांधी हूं. गांधी माफ़ी नहीं मांगा करते.''

    इस बयान के चलते कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के बीच भी मतभेद नज़र आए थे.

    अब इस मामले में वीडी सावरकर के पोते रंजीत सावरकर का बयान आया है.

    रंजीत सावरकर ने कहा, ''राहुल गांधी कहते हैं कि वो माफ़ी नहीं मांगेंगे क्योंकि वो सावरकर नहीं हैं. मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि वो ये दस्तावेज़ दिखाएं कि सावरकर ने माफ़ी मांगी थी.''

    रंजीत सावरकर ने कहा, ''अपनी राजनीति को चमकाने के लिए देशभक्तों के नाम का इस्तेमाल करना ग़लत है. मामले में एक्शन लेना चाहिए.''

    सावरकर की माफ़ी?

    सावरकर को साल 1910 में नासिक के कलेक्टर की हत्या में संलिप्त होने के आरोप में लंदन में गिरफ़्तार किया गया था.

    सावरकर को सज़ा काटने के लिए अंडमान भेज दिया गया था. अंडमान के सेल्युलर जेल (काला पानी) में उनके काटे 9 साल 10 महीनों ने अंग्रेज़ों के प्रति सावरकर के विरोध को बढ़ाने के बजाय समाप्त कर दिया.

    सावरकर पर ख़ासा शोध करने वाले निरंजन तकले ने बीबीसी को बताया था, "मैं सावरकर की ज़िंदगी को कई भागों में देखता हूँ. उनकी ज़िंदगी का पहला हिस्सा रोमांटिक क्रांतिकारी का था, जिसमें उन्होंने 1857 की लड़ाई पर किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने बहुत अच्छे शब्दों में धर्मनिरपेक्षता की वकालत की थी."

    तकले ने कहा था, "गिरफ़्तार होने के बाद असलियत से उनका सामना हुआ. 11 जुलाई 1911 को सावरकर अंडमान पहुंचे और 29 अगस्त को उन्होंने अपना पहला माफ़ीनामा लिखा, वहाँ पहुंचने के डेढ़ महीने के अंदर. इसके बाद 9 सालों में उन्होंने 6 बार अंग्रेज़ों को माफ़ी पत्र दिए."

    इन्हीं माफ़ीनामों को लेकर सावरकर अकसर कांग्रेस समर्थक और बीजेपी के आलोचकों के बीच निशाने पर रहते हैं.

  6. चिदंबरम बोले- इसराइल के प्रदर्शनों को देखें भारतीय

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इसराइल में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए एक ट्वीट किया है.

    चिदंबरम ने लिखा है, "इसराइल में जो कुछ भी हो रहा है, उस पर सभी भारतीयों को ध्यान देना चाहिए. इसराइल के लोग अपने लोकतंत्र पर जारी हमलों से बेहद चिंतित हैं. अगर इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू की मर्ज़ी चली तो न्यायपालिका, सरकार के अधीन हो जाएगी. इसराइल के लोग अपने देश और लोकतंत्र पर मंडराते इस ख़तरे के ख़िलाफ़ जाग चुके हैं. "

    इसराइल में इन दिनों बिन्यामिन नेतन्याहू के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ये प्रदर्शन क़ानून में बदलाव लाने की सरकार की कोशिशों के विरोध में हो रहे हैं.

    इन प्रदर्शनों में हज़ारों लोग शामिल हो रहे हैं और क़ानून में प्रस्तावित बदलावों को रद्द किए जाने की मांग कर रहे हैं.

    इन प्रदर्शनों को देखते हुए इसराइल की सरकार ने फ़िलहाल ये बदलाव टाल दिए हैं.

    चिदंबरम समेत कांग्रेस नेता इन दिनों राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द किए जाने के मामले में सक्रिय हैं.

    कांग्रेस संसद से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही है.

    चिदंबरम ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में भी राहुल गांधी पर अपनी प्रतिक्रिया दी.

    चिदंबरम ने कहा, ''राहुल गांधी के मामले में ट्रायल कोर्ट में जिस तरह से तेज़ी दिखाई गई और बाद में राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की गई, इस तेज़ी को देखकर तो उसैन बोल्ट भी हैरत में पड़ जाएंगे.''

    धावक उसैन बोल्ट अपनी तेज़ रफ़्तार के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं.

  7. राहुल गांधी की संसद सदस्यता जाने पर अमेरिका क्या बोला?

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द होने के मामले में अमेरिका की प्रतिक्रिया आई है.

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता वेदांत पटेल ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बारे में बात की.

    वेदांत पटेल ने कहा, ''राहुल गांधी के अदालत में जारी इस मामले पर अमेरिका नज़र बनाए हुए है. क़ानून के शासन के प्रति सम्मान और न्यायिक स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला है.''

    प्रवक्ता पटेल ने कहा, ''अभिव्यक्ति की आज़ादी समेत लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर हम भारत सरकार के साथ हमारी प्रतिबद्धता साझा करते हैं.''

    पटेल ने राहुल गांधी के मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर ये जवाब दिए.

    पटेल ने कहा, ''हम लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों की रक्षा की अहमियत पर ज़ोर देते रहेंगे.''

    बीते दिनों राहुल गांधी को सूरत की एक अदालत ने मोदी सरनेम से जुड़े मानहानि केस में दो साल की सज़ा सुनाई थी.

    इस सज़ा के सुनाए जाने के अगले दिन लोकसभा से राहुल गांधी की सदस्यता रद्द किए जाने का नोटिस जारी हुआ था. इसके विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार जारी है.

    वहीं सोमवार शाम राहुल गांधी को अपना बंगला खाली किए जाने का नोटिस भी जारी हुआ है. ये बंगला राहुल गांधी को बतौर सांसद मिला था और इसे खाली किए जाने के लिए राहुल गांधी को एक महीने का वक़्त दिया गया है.

  8. 17 साल पुराना वो मामला, जिसमें आज अतीक़ अहमद पर आ सकता है फ़ैसला

    यूपी में बाहुबली नेता रहे अतीक़ अहमद कड़ी सुरक्षा के बीच साबरमती से प्रयागराज की नैनी जेल पहुंच चुके हैं.

    अतीक़ को आज यानी मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश किया जाएगा.

    माना जा रहा है कि उमेश पाल मामले में अदालत आज अपना फ़ैसला सुना सकती है.

    ये केस लगभग 17 साल पुराना है.

    2005 में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या की गई थी. इस केस के मुख्य गवाह उमेश पाल थे.

    2006 में उमेश पाल का अपहरण हुआ और आरोप अतीक़ अहमद और उनके साथियों पर लगा था.

    ये वही उमेश पाल थे, जिनकी हाल ही में दिनदहाड़े हत्या कर दी गई.

    अतीक़ अहमद और उनके साथियों पर आज इसी मामले में अदालत फ़ैसला सुनाएगी.

    1989 से अपना राजनीतिक सफ़र शुरू करने वाले अतीक़ अहमद बसपा, अपना दल और सपा में रह चुके हैं.

    विधायकी से अपना करियर शुरू करने वाले अतीक़ अहमद फूलपूर सीट से सांसद भी रह चुके हैं.

    जेल में रहने के दौरान भी अतीक़ चुनाव जीत चुके हैं. हालांकि 2014, 2019 में वो चुनाव नहीं जीत सके थे.

    अतीक अहमद के 2019 लोकसभा में दिए गए हलफ़नामे के मुताबिक़, उनके ख़िलाफ़ 100 से ज़्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या की कोशिश, किडनैपिंग, रंगदारी जैसे केस हैं.

  9. अमेरिका: स्कूल में हुई गोलीबारी में तीन बच्चों समेत छह लोगों की मौत

    अमेरिका के टेनेसी प्रांत के नैशविल में एक स्कूल में हुई गोलीबारी में तीन बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई है.

    गोलीबारी में मारे गए बच्चों की उम्र 9 साल है. गोलीबारी में मारे गए तीन व्यस्कों की उम्र 60-61 के क़रीब है.

    पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 28 साल की हमलावर ऑड्रे हेल की मौत हो गई है.

    गोलीबारी की घटना जिस स्कूल में हुई है, वो नैशविल का एक प्राइवेट स्कूल है जहां 11 साल की उम्र तक के बच्चे पढ़ते हैं.

    इस हमले के बाद एक बार फिर से अमेरिका में बंदूक रखे जाने के क़ानून में बदलाव को लेकर चली आ रही पुरानी बहस पर चर्चा छिड़ी है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बंदूक से जुड़ी हिंसा के मामलों में एक्शन लेने की बात कही है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस घटना पर दुख जताते हुए मार्च महीने के अंत तक राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाने का आदेश दिया है.

    स्कूल के पास रहने वाली एक महिला कैथी ने स्थानीय मीडिया को बताया, ''शुरुआती आठ या दस गोलियों की आवाज़ बहुत तेज़ थी. स्कूल हमारे घर से बस दो ब्लॉक दूर है. ये बहुत दुखद है और किसी के साथ भी हो सकता है.'

    नैशविल के पुलिस चीफ़ जॉन ड्रैक ने एनबीसी न्यूज़ को बताया, ''हमलावर के रास्ते में जो कोई भी आया, उसने उन पर गोलियां चलाईं.''

    पुलिस ने बताया है कि हमलावर ट्रांसजेंडर थीं.

  10. नमस्ते

    आपका दिन शुभ हो.

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